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- निघासन के बौधिया कला गांव में दर्जनों किसानों की फसल हाथियों ने रौंदी ग्रामीणों की गन्ने व केले की फसल रौंदी किसानों में रोष व्याप्त है।1
- लखीमपुर खीरी। तहसील सदर क्षेत्र में एक पेड़ पर फंसा बेबस पक्षी आखिरकार आज सुरक्षित बचा लिया गया। बताया जा रहा है कि कल से ही उसका पैर पेड़ में उलझी डोर में फंसा था और वह तड़पता रहा। स्थानीय लोगों की नजर जब उस पर पड़ी तो सूचना नगर पालिका परिषद लखीमपुर को दी गई। टीम मौके पर पहुंची और कड़ी मशक्कत के बाद पक्षी को सुरक्षित नीचे उतारा। जैसे ही पक्षी को आज़ादी मिली, वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर खुशी जताई। एक नन्हीं जान को फिर से उड़ान भरते देख माहौल भावुक हो उठा और हर चेहरे पर राहत और मुस्कान साफ झलक रही थी। 👉 यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि पतंग की डोर या प्लास्टिक कचरा खुले में छोड़ना पक्षियों के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता1
- सीतापुर से CM योगी आदित्यनाथ का बड़ा बयान। हमें बटना नहीं है एकजुट रहना है है2
- gram Mana Kheda mujra Kalvari Lakhimpur khiri Uttar Pradesh1
- पलिया क्षेत्र में हाथियों का आतंक चौखड़ा फार्म व बसन्तापुर में दर्जनों किसानों की उजाड़ी गेहूं की फसल पलियाकलां-खीरी। पलिया क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हो रही घटनाओं से किसानों में भय और आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पहले हाथियों ने गन्ने की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया, वहीं रखवाली करने पहुंचे किसानों पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। अब हाथियों ने गेहूं की खड़ी फसल को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बीती रात क्षेत्र के ग्राम चौखड़ा एवं बसन्तापुर के दर्जनों किसानों के खेतों में घुसकर हाथियों ने गेहूं की फसल रौंद डाली। एक ही रात में कई बीघा फसल नष्ट होने से किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित किसानों ने बताया कि लगातार हो रहे हमलों के बावजूद वन विभाग की ओर से हाथियों की रोकथाम के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं की जा रही है। कई बार सूचना देने के बाद भी मौके पर समय से टीम नहीं पहुंचती, जिससे नुकसान बढ़ता जा रहा है। किसानों ने वन विभाग से हाथियों की आवाजाही पर तत्काल रोक लगाने, रात्रि गश्त बढ़ाने तथा फसलों के हुए नुकसान का शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग की है। क्षेत्र में बढ़ते हाथियों के आतंक से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों ने जंगल किनारे लगाई बाड़ को तहस-नहस कर दिया। लोग रात के समय खेतों की रखवाली करने से भी कतरा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में फसल का अधिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।1
- U G C रेगुलेशन के समर्थन में निकला मार्च, विधानसभा कूच के दौरान झड़प लखनऊ में पुलिस और पल्लवी पटेल के बीच आज झड़प हो गई। पल्लवी U G C इक्विटी रेगुलेशन 2026 के समर्थन में सैकड़ों लोगो के साथ पैदल मार्च निकाल रही थी उनके साथ सैकड़ों महिलाएं इस मार्च में शामिल थी। महिलाओं के संघ it चौराहे सै निकली यहां से विधानसभा तक जाना था मार्च जब पुलिस बड़ी बड़ी भी आगे कारवाही चल रही1
- लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ के आजान चौकी के अंतर्गत का मामला है मार्तिका के पति रामकुमार ने अपनी पत्नी का हत्या का आरो अपने क्षेत्र की सभी वायरल विडियोज के लिए डाउनलोड करें शुरू ऐप (Shuru App) 👇🏻1
- CM Yogi Adityanath का बयान सनातन कमजोर होगा तो देश कमजोर होगा।2
- सवालों के घेरे में पलिया का भविष्य पलियाकलां-खीरी। पलिया नगर में रोडवेज बस अड्डे की वर्षों पुरानी मांग आज भी केवल खबरों और चर्चाओं तक सीमित रह गई है। लगातार समाचार प्रकाशित होने और जनसमस्याओं को उजागर किए जाने के बावजूद न तो जनप्रतिनिधि गंभीर नजर आ रहे हैं और न ही आमजन इस मुद्दे पर संगठित होकर आवाज उठा रहे हैं। जनता की इस चुप्पी से ऐसा प्रतीत होता है मानो पलिया को रोडवेज बस अड्डे की आवश्यकता ही नहीं है। स्थिति यह है कि नगर में रोडवेज की बसें तो संचालित हो रही हैं, लेकिन उनके ठहराव और यात्रियों की सुविधा के लिए कोई स्थायी बसड्डा नहीं है। सभी बसें पुलिस चौकी के आसपास सड़क किनारे खड़ी की जाती हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। खासकर सुबह और शाम के समय राहगीरों, स्कूली बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते जनता ने संगठित होकर रोडवेज बस अड्डे की मांग नहीं उठाई, तो भविष्य में पलिया से रोडवेज बसों का संचालन भी रेल सेवाओं की तरह ठप हो सकता है। जिस प्रकार पलिया में रेल लाइन होते हुए भी यात्री ट्रेनों का संचालन न के बराबर है, उसी तरह रोडवेज बसों का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है। विडंबना यह है कि जब ट्रेनों के संचालन की बात आती है, तो जनता एकजुट होकर आवाज बुलंद करती है, लेकिन रोडवेज बसड्डे जैसे बुनियादी मुद्दे पर उदासीनता साफ नजर आती है। यदि जनआंदोलन के रूप में यह मांग उठाई जाए, तो शासन-प्रशासन पर दबाव बनेगा और पलिया में रोडवेज बस अड्डे का निर्माण निश्चित रूप से संभव हो सकेगा। अब जरूरत इस बात की है कि नगरवासी राजनीति से ऊपर उठकर अपने हित में एकजुट हों और रोडवेज बस अड्डे की मांग को मजबूती से उठाएं। अन्यथा पलिया नगर रोडवेज सुविधा से वंचित होकर विकास की दौड़ में और पीछे छूट सकता है।1