रातू में विश्व आदिवासी दिवस पर निकला विशाल जुलूस, संस्कृति और पहचान बचाने का लिया संकल्प, दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि विश्व आदिवासी दिवस पर रविवार को रातू की सड़कों पर आदिवासी एकता और सांस्कृतिक चेतना का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में सजे हजारों युवक-युवतियां ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते जुलूस में शामिल हुए। हाथों में पारंपरिक प्रतीक और चेहरे पर अपनी पहचान का गर्व लिए लोगों ने रातू के विभिन्न क्षेत्रों में पैदल मार्च किया। जुलूस में उमड़ी भीड़ ने पूरे क्षेत्र में आदिवासी एकता का संदेश दिया। दोपहर करीब दो बजे रातू किला मैदान से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। देखते ही देखते मैदान लोगों से भर गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ विशाल जुलूस निकला। युवक-युवतियां पारंपरिक नृत्य करते हुए तिलता चौक पहुंचे। यहां आयोजित सभा में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की मौजूदा चुनौतियों और अपनी पहचान बचाने को लेकर खुलकर आवाज उठाई। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी होना केवल एक पहचान नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली है। आज आधुनिकता की दौड़ में समाज अपनी मूल संस्कृति, रीति-रिवाज, भाषा, रहन-सहन और संस्कारों से दूर होता जा रहा है। यदि समय रहते नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से नहीं जोड़ा गया, तो आने वाली पीढ़ियों के सामने अपनी पहचान बचाए रखना बड़ी चुनौती होगी। सभा में आदिवासी रीति-रिवाज, संस्कृति और सामाजिक पहचान को बचाए रखने की सामूहिक शपथ ली गई। वक्ताओं ने समाज को शिक्षा, रोजगार और विकास से जोड़ने के साथ सामाजिक एकजुटता मजबूत करने पर भी जोर दिया। महापुरुषों की प्रतिमाओं पर चढ़ाए श्रद्धा के फूल कार्यक्रम के बाद विभिन्न स्थानों पर शहीदो को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद आदिवासी बाल विकास उच्च विद्यालय परिसर में बाबा कार्तिक उरांव, झखराटाड़ में भगवान बिरसा मुंडा, होचर में सरना रत्न वीरेंद्र भगत, बिरसा आश्रय स्कूल कमड़े में भगवान बिरसा मुंडा तथा दलादिली में सुभाष मुंडा की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस महज उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि अपनी जमीन, संस्कृति, पहचान और अधिकारों की रक्षा का संकल्प दिवस है। रातू की धरती से आदिवासी एकता की नई अलख जगाने का संकल्प लेते हुए कहा गया कि समाज को मजबूत और संगठित कर विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाया जाएगा। महापुरुषों के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जुलूस के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये थे। डीएसपी अजय आर्यन व थानेदार आदि कांत महतो ने संभाली। कार्यक्रम की सफलता में जिप अध्यक्ष निर्मला भगत, अमर उराँव,सामु टोप्पो, आदित्य तिर्की सोमनाथ उराँव,सुखदेव उराँव,कुशल उराँव,नारायम उराँव,जबरा उराँव,विमल उराँव,सुकरा उराँव,हुसे उराँव, सोनी कच्छप,विकास उराँव,सीता उराँव, मुकेश भगत के अलावा दर्जनो लोगो को सराहनीय योगदान रहा।
रातू में विश्व आदिवासी दिवस पर निकला विशाल जुलूस, संस्कृति और पहचान बचाने का लिया संकल्प, दिवंगतों को दी श्रद्धांजलि विश्व आदिवासी दिवस पर रविवार को रातू की सड़कों पर आदिवासी एकता और सांस्कृतिक चेतना का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में सजे हजारों युवक-युवतियां ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते जुलूस में शामिल हुए। हाथों में पारंपरिक प्रतीक और चेहरे पर अपनी पहचान का गर्व लिए लोगों ने रातू के विभिन्न क्षेत्रों में पैदल मार्च किया। जुलूस में उमड़ी भीड़ ने पूरे क्षेत्र में आदिवासी एकता का संदेश दिया। दोपहर करीब दो बजे रातू किला मैदान से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। देखते ही देखते मैदान लोगों से भर गया। इसके बाद ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ विशाल जुलूस निकला। युवक-युवतियां पारंपरिक नृत्य करते हुए तिलता चौक पहुंचे। यहां आयोजित सभा में वक्ताओं ने आदिवासी समाज की मौजूदा चुनौतियों और अपनी पहचान बचाने को लेकर खुलकर आवाज उठाई। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी होना केवल एक पहचान नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली है। आज आधुनिकता की दौड़ में समाज अपनी मूल संस्कृति, रीति-रिवाज, भाषा, रहन-सहन और संस्कारों से दूर होता जा रहा है। यदि समय रहते नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से नहीं जोड़ा गया, तो आने वाली पीढ़ियों के सामने अपनी पहचान बचाए रखना बड़ी चुनौती होगी। सभा में आदिवासी रीति-रिवाज, संस्कृति और सामाजिक पहचान को बचाए रखने की सामूहिक शपथ ली गई। वक्ताओं ने समाज को शिक्षा, रोजगार और विकास से जोड़ने के साथ सामाजिक एकजुटता मजबूत करने पर भी जोर दिया। महापुरुषों की प्रतिमाओं पर चढ़ाए श्रद्धा के फूल कार्यक्रम के बाद विभिन्न स्थानों पर शहीदो को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद आदिवासी बाल विकास उच्च विद्यालय परिसर में बाबा कार्तिक उरांव, झखराटाड़ में भगवान बिरसा मुंडा, होचर में सरना रत्न वीरेंद्र भगत, बिरसा आश्रय स्कूल कमड़े में भगवान बिरसा मुंडा तथा दलादिली में सुभाष मुंडा की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस महज उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि अपनी जमीन, संस्कृति, पहचान और अधिकारों की रक्षा का संकल्प दिवस है। रातू की धरती से आदिवासी एकता की नई अलख जगाने का संकल्प लेते हुए कहा गया कि समाज को मजबूत और संगठित कर विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाया जाएगा। महापुरुषों के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जुलूस के दौरान प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये थे। डीएसपी अजय आर्यन व थानेदार आदि कांत महतो ने संभाली। कार्यक्रम की सफलता में जिप अध्यक्ष निर्मला भगत, अमर उराँव,सामु टोप्पो, आदित्य तिर्की सोमनाथ उराँव,सुखदेव उराँव,कुशल उराँव,नारायम उराँव,जबरा उराँव,विमल उराँव,सुकरा उराँव,हुसे उराँव, सोनी कच्छप,विकास उराँव,सीता उराँव, मुकेश भगत के अलावा दर्जनो लोगो को सराहनीय योगदान रहा।
- तुरमुली के पुराने कांग्रेसी नेता के निधन पर विधायक सुरेश बैठा अंतिम संस्कार में पहुंचे, मिले परिजनो से।1
- JPSC-JSSC प्रोटेस्ट पर मंत्री दीपिका पांडेय का बड़ा बयान रांची: JPSC-JSSC छात्रों के आंदोलन को लेकर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करती है और उनकी जायज मांगों को लेकर गंभीर है। मंत्री ने कहा, “हम छात्रों के साथ हैं, प्रदर्शनकारियों पर लाठियां नहीं चलनी चाहिए।” उन्होंने आंदोलन के दौरान संयम बरतने और छात्रों की बात सुनने पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकलेगा। JPSC-JSSC प्रोटेस्ट पर मंत्री दीपिका पांडेय का बड़ा बयान रांची: JPSC-JSSC छात्रों के आंदोलन को लेकर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करती है और उनकी जायज मांगों को लेकर गंभीर है। मंत्री ने कहा, “हम छात्रों के साथ हैं, प्रदर्शनकारियों पर लाठियां नहीं चलनी चाहिए।” उन्होंने आंदोलन के दौरान संयम बरतने और छात्रों की बात सुनने पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच बातचीत के जरिए जल्द समाधान निकलेगा।1
- विधानसभा से बस कुछ ही दूरी पर अब देवेंद्र नाथ महतो पहुँच गए हैं। विधानसभा से बस कुछ ही दूरी पर अब देवेंद्र नाथ महतो पहुँच गए हैं।1
- तपती राह, पैरों में छाले… फिर भी नहीं रुका बोलबम का सफर... #deoghar #katoriya #babadhamvlog #babamandirdeoghar #jharkhandnews #katoriyapath #suiya #suiya_pahar_latest_video1
- सावन के पावन अवसर पर पहाड़ी मंदिर में SKDV मिशन झारखंड द्वारा प्रसाद वितरण रांची। सावन के पावन एवं शुभ अवसर पर श्रद्धालुओं की सेवा और धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए SKDV मिशन झारखंड की ओर से रांची के प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर में प्रसाद वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह सेवा कार्य सावन माह के दौरान प्रत्येक रविवार एवं सोमवार को किया जा रहा है और सावन के पूरे महीने तक जारी रहेगा। इस सेवा कार्य का संचालन SKDV मिशन झारखंड, जिला -रांची के प्रतिनिधि संतोष प्रसाद के सहयोग से किया जा रहा है। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित कर सेवा एवं सामाजिक समर्पण का संदेश दिया जा रहा है। सावन के दौरान पहाड़ी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में प्रसाद वितरण के माध्यम से श्रद्धालुओं की सेवा करने का यह प्रयास विशेष महत्व रखता है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में SKDV मिशन झारखंड के सभी राज्य प्रतिनिधि, जिला प्रतिनिधि, प्रखंड प्रतिनिधि एवं ग्रामीण प्रतिनिधि सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं। मिशन से जुड़े सभी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मिलकर सेवा कार्य को व्यवस्थित रूप से संचालित कर रहे हैं। SKDV मिशन झारखंड का उद्देश्य धार्मिक एवं सामाजिक सेवा के माध्यम से समाज में सहयोग, सेवा और मानवता की भावना को मजबूत करना है। सावन माह के दौरान आयोजित यह प्रसाद वितरण कार्यक्रम इसी सेवा भावना का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। मिशन की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे सावन के इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में सेवा कार्य से जुड़ें तथा आपसी सहयोग और सद्भावना के साथ धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों में सहभागिता करें।1
- तबीयत नाजुक, लेकिन हौसला बुलंद! देवेंद्र नाथ महतो स्ट्रेचर पर पहुंचे विधानसभा मार्च, समर्थकों का भारी हुजूम, पुलिस से तीखी नोकझोंक रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के विधानसभा मार्च के दौरान उस वक्त माहौल बेहद गर्म हो गया, जब लगातार भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो गंभीर रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद एम्बुलेंस और स्ट्रेचर के सहारे आंदोलन में शामिल होने पहुंचे। उनकी एक झलक पाने और समर्थन देने के लिए बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक मौके पर जुट गए। जैसे ही मार्च जगन्नाथपुर मंदिर के पास पुलिस बैरिकेडिंग तक पहुंचा, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद छात्र और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। पूरे इलाके में जोरदार नारेबाजी गूंजती रही और कुछ समय तक अफरा-तफरी जैसा माहौल बना रहा। छात्र अपनी मांगों को लेकर डटे रहे, जबकि पुलिस सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही। कमजोर शारीरिक स्थिति के बावजूद देवेंद्र नाथ महतो स्ट्रेचर से ही आंदोलन का नेतृत्व करते दिखाई दिए। उनका यह दृश्य वहां मौजूद छात्रों और समर्थकों के लिए भावुक पल बन गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से जल्द निर्णय लेने की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा। विधानसभा मार्च के दौरान सुरक्षा के मद्देनज़र बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी रही।1