सिवनी के केसलाई में सरकारी दस्तावेज और सीमांकन रिपोर्ट किसानों के पक्ष में होने के बावजूद आदिवासी किसानों की जमीन पर वन विभाग द्वारा कब्जा किए जाने के आरोपों से हड़कंप मचा हुआ है। किसानों के पास जमीन की रजिस्ट्री और पक्के रिकॉर्ड मौजूद हैं, लेकिन इसके बाद भी वन विभाग इस जमीन पर अपना दावा कर रहा है। ग्राउंड जीरो की पड़ताल में प्रशासनिक सिस्टम की कई परतें खुली हैं, जहां पीड़ित आदिवासी किसान "रजिस्ट्री हमारी, कब्जा किसका?" की पुकार लगाते हुए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके आदेश पर किसानों की जमीन पर पेड़ों की कटाई की गई और वहां वृक्षारोपण कर दिया गया। इस गंभीर भूमि विवाद के सामने आने के बाद अब वन विभाग और राजस्व विभाग आमने-सामने आ गए हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं। सरकारी दस्तावेजों बनाम विभागीय कार्रवाई के इस टकराव के बीच केसलाई भूमि विवाद में निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है। लोग सीधे सवाल उठा रहे हैं कि अगर रिकॉर्ड में किसान पूरी तरह सही हैं, तो वन विभाग की इस दमनकारी कार्रवाई के लिए दोषी कौन है और इन किसानों को न्याय कब मिलेगा।
सिवनी के केसलाई में सरकारी दस्तावेज और सीमांकन रिपोर्ट किसानों के पक्ष में होने के बावजूद आदिवासी किसानों की जमीन पर वन विभाग द्वारा कब्जा किए जाने के आरोपों से हड़कंप मचा हुआ है। किसानों के पास जमीन की रजिस्ट्री और पक्के रिकॉर्ड मौजूद हैं, लेकिन इसके बाद भी वन विभाग इस जमीन पर अपना दावा कर रहा है। ग्राउंड जीरो की पड़ताल में प्रशासनिक सिस्टम की कई परतें खुली हैं, जहां पीड़ित आदिवासी किसान "रजिस्ट्री हमारी, कब्जा किसका?" की पुकार लगाते हुए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके आदेश पर किसानों की जमीन पर पेड़ों की कटाई की गई और वहां वृक्षारोपण कर दिया गया। इस गंभीर भूमि विवाद के सामने आने के बाद अब वन विभाग और राजस्व विभाग आमने-सामने आ गए हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं। सरकारी दस्तावेजों बनाम विभागीय कार्रवाई के इस टकराव के बीच केसलाई भूमि विवाद में निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है। लोग सीधे सवाल उठा रहे हैं कि अगर रिकॉर्ड में किसान पूरी तरह सही हैं, तो वन विभाग की इस दमनकारी कार्रवाई के लिए दोषी कौन है और इन किसानों को न्याय कब मिलेगा।
- मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा छिंदवाड़ा जिले के अंतर्गत "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान चलाया जा रहा है। यह विशेष अभियान 15 दिनों की अवधि के लिए संचालित किया जा रहा है। इस अभियान को लेकर छिंदवाड़ा के कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने नागरिकों से विशेष अपील की है। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस अभियान से अधिक से अधिक संख्या में जुड़ें और नशे से दूर रहने के संबंध में जागरूकता फैलाएं, जिससे हमारा प्रदेश और हमारा शहर नशे से मुक्त रह सके।1
- छिंदवाड़ा के बिछुआ में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में बस स्टैंड पर एक विशाल आंदोलन का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्र व राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इस कार्यक्रम में विधायक सुजीत चौधरी, जिला उपाध्यक्ष इंद्रपाल पटेल, ब्लॉक पर्यवेक्षक रामकृष्ण माटे सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता, किसान और आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और आरएसएस पर तीखे हमले किए और क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर राज्यपाल के नाम एसडीएम चौरई प्रभात मिश्रा को एक ज्ञापन सौंपा। सभा को संबोधित करते हुए विधायक सुजीत चौधरी ने आरोप लगाया कि आरएसएस और हिंदू परिषद के लोगों ने भगवान राम मंदिर के चंदे की चोरी की है और इन्हें भाजपा नेताओं का खुला संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने क्षेत्र की दुर्दशा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि ट्रिपल इंजन सरकार दो किलोमीटर की सड़क तक नहीं बना पा रही है। उन्होंने नगर परिषद अध्यक्ष, सीएमओ और इंजीनियर पर कमीशनखोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां कमीशन मिलता है, वहां बिना निर्माण कार्य के ही ठेकेदार को राशि दे दी जाती है; ₹2.5 लाख के स्वागत द्वार को ₹8.5 लाख का दिखाया गया है। साथ ही भाजपा के 'छुटभैया' नेताओं पर अवैध जुआ, सट्टा, शराब और रेत बेचने तथा पुराने तालाबों को नया दिखाकर शासन को चपत लगाने के गंभीर आरोप लगाए। जिला उपाध्यक्ष इंद्रपाल पटेल और ब्लॉक अध्यक्ष पृथ्वीराज सिंह ठाकुर ने भी चंदा चोरी के पैसों से इमारतें और कारें खरीदने का आरोप लगाते हुए इसे राम भक्तों के साथ विश्वासघात बताया। आंदोलन के बाद सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय की ओर रुख किया और वहां स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर में हनुमान जी को ज्ञापन सौंपकर चंदा चोरों को दंड देने की कामना की। इसके बाद एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की। अन्य प्रमुख मांगों में वन्यजीवों से प्रभावित बिछुआ क्षेत्र में वर्ष 2019 से प्रस्तावित वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर की स्थापना, आदिवासी परिवारों को वन भूमि के पट्टे वितरित करना, वन्यजीवों के हमले में मृतकों के परिवारों को ₹25 लाख का मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना, किसानों को पर्याप्त खाद देना, क्षतिग्रस्त सड़कों का निर्माण और उप तहसील खमारपानी के जर्जर भवन निर्माण की तकनीकी जांच कराना शामिल है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इन जनहितैषी मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।2
- मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में कलेक्टर नेहा मीना और पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी के मार्गदर्शन में "नशे से दूरी है ज़रूरी 2.0" अभियान का आगाज किया गया है। इस जन-जागरूकता अभियान के तहत 30 जुलाई तक विभिन्न शिक्षण संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही, आयोजित होने वाले शपथ ग्रहण कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया जाएगा।1
- सिवनी के केसलाई में सरकारी दस्तावेज और सीमांकन रिपोर्ट किसानों के पक्ष में होने के बावजूद आदिवासी किसानों की जमीन पर वन विभाग द्वारा कब्जा किए जाने के आरोपों से हड़कंप मचा हुआ है। किसानों के पास जमीन की रजिस्ट्री और पक्के रिकॉर्ड मौजूद हैं, लेकिन इसके बाद भी वन विभाग इस जमीन पर अपना दावा कर रहा है। ग्राउंड जीरो की पड़ताल में प्रशासनिक सिस्टम की कई परतें खुली हैं, जहां पीड़ित आदिवासी किसान "रजिस्ट्री हमारी, कब्जा किसका?" की पुकार लगाते हुए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके आदेश पर किसानों की जमीन पर पेड़ों की कटाई की गई और वहां वृक्षारोपण कर दिया गया। इस गंभीर भूमि विवाद के सामने आने के बाद अब वन विभाग और राजस्व विभाग आमने-सामने आ गए हैं, जबकि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं। सरकारी दस्तावेजों बनाम विभागीय कार्रवाई के इस टकराव के बीच केसलाई भूमि विवाद में निष्पक्ष जांच की मांग लगातार तेज हो रही है। लोग सीधे सवाल उठा रहे हैं कि अगर रिकॉर्ड में किसान पूरी तरह सही हैं, तो वन विभाग की इस दमनकारी कार्रवाई के लिए दोषी कौन है और इन किसानों को न्याय कब मिलेगा।1
- सिवनी में 8 पुलिस अफसरों को प्रमोशन मिला है। इस अवसर पर एसपी ने खुद पदोन्नत हुए इन अधिकारियों के कंधों पर नए स्टार सजाए।1
- मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के ढूंढा सिवनी थाना क्षेत्र में एक युवक के साथ कथित तौर पर हुई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में पीड़ित युवक की पीठ और शरीर पर गंभीर चोटों के कई निशान दिखाई दे रहे हैं, जिसे देखकर लोग पूछ रहे हैं कि आखिर किसने यह कहर बरपाया है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घायल युवक भोमा का निवासी है और वह बरघाट रोड आईटीआई का छात्र बताया जा रहा है। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में लोगों के बीच भारी आक्रोश और चर्चा का माहौल बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने मामले को लेकर दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठाई है। हालांकि, समाचार माध्यम NN 81 इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और पूरे मामले की वास्तविक सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। इस बीच, NN 81 की जिला ब्यूरो टीम द्वारा मामले की जानकारी जुटाकर ढूंढा सिवनी पुलिस से संपर्क साधा गया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस इस वायरल वीडियो, घटना के समय, मारपीट की मुख्य वजह और पकड़े गए आरोपियों की भूमिका सहित सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने में जुटी हुई है।1