राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने डूंगरपुर जिले के दौरे के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार ने जनता के बीच अपना विश्वास पूरी तरह खो दिया है और अब डबल इंजन में केवल धुआं ही बचा है। अपने दौरे की शुरुआत में पायलट ने प्रसिद्ध बेणेश्वर धाम पहुंचकर श्री हरि मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, शिव मंदिर और ब्रह्मा मंदिर में दर्शन-पूजन कर खुशहाली की कामना की और बेणेश्वर पीठाधीश्वर महंत अच्युतानंद महाराज से आशीर्वाद लिया। इसके बाद साबला पहुंचने पर पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जहां सिसोदिया ने आसमान में ड्रोन उड़ाकर पुष्प वर्षा की और पायलट को पगड़ी पहनाकर व तलवार भेंट कर सम्मानित किया। साबला में आयोजित सभा में सचिन पायलट ने केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। इस दौरान वे सभा स्थल पर बैठी महिलाओं के पास पहुंचे और उनसे रोजगार गारंटी के भुगतान के बारे में जानकारी ली। महिलाओं ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है और जनता महंगाई की मार से त्रस्त है। महिलाओं ने बिजली-पानी की कटौती और गैस सिलेंडर की बढ़ती दरों पर गुस्सा जताते हुए कहा कि अब घरों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है और उन्हें जंगलों से लकड़ी लाकर खाना पकाना पड़ेगा। वहीं, मंदिर चढ़ावे को लेकर आरोप लगाया गया कि 'चंपत' मंदिर के चढ़ावे को चपत लगा गया और सरकार इस मामले में केवल लीपापोती करने में जुटी है। इसके बाद आसपुर सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि भाजपा के ढाई साल के शासन से जनता त्रस्त हो चुकी है और राज्य की चिकित्सा व शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पंचायत चुनाव कराने में आनाकानी कर रही है और यदि आज चुनाव करा दिए जाएं, तो कांग्रेस भारी बहुमत से सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नरेगा को पूरी तरह बंद करने की मंशा से सरकार अलग योजना लेकर आई है, जिससे गरीबों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। इस दौरान स्थानीय लोगों ने सोम कमला बांध का पानी सागवाड़ा न ले जाने की मांग उठाई, वहीं कई दावेदारों ने गाड़ियों में कार्यकर्ताओं को लाकर पायलट के सामने अपनी दावेदारी जताते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, रघुवीर सिंह मीणा, प्रेम कुमार पाटीदार और जिलाध्यक्ष गणेश घोघरा सहित कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने डूंगरपुर जिले के दौरे के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार ने जनता के बीच अपना विश्वास पूरी तरह खो दिया है और अब डबल इंजन में केवल धुआं ही बचा है। अपने दौरे की शुरुआत में पायलट ने प्रसिद्ध बेणेश्वर धाम पहुंचकर श्री हरि मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर, शिव मंदिर और ब्रह्मा मंदिर में दर्शन-पूजन कर खुशहाली की कामना की और बेणेश्वर पीठाधीश्वर महंत अच्युतानंद महाराज से आशीर्वाद लिया। इसके बाद साबला पहुंचने पर पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, जहां सिसोदिया ने आसमान में ड्रोन उड़ाकर पुष्प वर्षा की और पायलट को पगड़ी पहनाकर व तलवार भेंट कर सम्मानित किया। साबला में आयोजित सभा में सचिन पायलट ने केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। इस दौरान वे सभा स्थल पर बैठी महिलाओं के पास पहुंचे और उनसे रोजगार गारंटी के भुगतान के बारे में जानकारी ली। महिलाओं ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है और जनता महंगाई की मार से त्रस्त है। महिलाओं ने बिजली-पानी की कटौती और गैस सिलेंडर की बढ़ती दरों पर गुस्सा जताते हुए कहा कि अब घरों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है और उन्हें जंगलों से लकड़ी लाकर खाना पकाना पड़ेगा। वहीं, मंदिर चढ़ावे को लेकर आरोप लगाया गया कि 'चंपत' मंदिर के चढ़ावे को चपत लगा गया और सरकार इस मामले में केवल लीपापोती करने में जुटी है। इसके बाद आसपुर सर्किट हाउस में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पायलट ने कहा कि भाजपा के ढाई साल के शासन से जनता त्रस्त हो चुकी है और राज्य की चिकित्सा व शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पंचायत चुनाव कराने में आनाकानी कर रही है और यदि आज चुनाव करा दिए जाएं, तो कांग्रेस भारी बहुमत से सरकार बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नरेगा को पूरी तरह बंद करने की मंशा से सरकार अलग योजना लेकर आई है, जिससे गरीबों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। इस दौरान स्थानीय लोगों ने सोम कमला बांध का पानी सागवाड़ा न ले जाने की मांग उठाई, वहीं कई दावेदारों ने गाड़ियों में कार्यकर्ताओं को लाकर पायलट के सामने अपनी दावेदारी जताते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। इस अवसर पर पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, रघुवीर सिंह मीणा, प्रेम कुमार पाटीदार और जिलाध्यक्ष गणेश घोघरा सहित कई वरिष्ठ नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
- राजस्थान शिक्षक संघ (एसटीएफआई) जिला कमेटी डूंगरपुर ने जिला अध्यक्ष मणीलाल मालीवाड़ के नेतृत्व में शिक्षकों के स्थानांतरण में व्याप्त अव्यवस्थाओं और अमानवीय दृष्टिकोण के विरोध में उग्र प्रदर्शन किया। आक्रोशित शिक्षकों ने इस दौरान शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर व मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर सभी अन्यायपूर्ण और बदले की भावना से किए गए तबादलों को तत्काल निरस्त करने की मांग की। शिक्षक नेताओं का आरोप है कि वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया ने प्रदेश के शैक्षिक वातावरण को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिससे सत्र की शुरुआत में ही नामांकन अभियान और विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमंत कुमार खराड़ी और जिला अध्यक्ष मणीलाल मालीवाड़ ने कहा कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के साथ-साथ असाध्य रोग से पीड़ित, विधवा और दिव्यांग शिक्षकों तक को दूर-दराज के क्षेत्रों में भेजकर मानवीय संवेदनाओं की पूरी तरह उपेक्षा की गई है। स्थिति यह बन गई है कि शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के बजाय अपने तबादले रुकवाने के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। जिला मंत्री धनराज खराड़ी और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य देवीलाल गौड ने सरकार से इन विसंगतिपूर्ण तबादलों को तुरंत रद्द करने और पूर्व वादे के अनुसार सभी संवर्गों के लिए एक पारदर्शी, न्यायसंगत व स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। वहीं, संघर्ष समिति के संयोजक जीवन लाल बरांडा और जिला उपाध्यक्ष नारायण लाल कोटेड ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने शीघ्र कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया तो शिक्षक संगठन प्रदेशभर में चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को और तेज करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और शिक्षा विभाग की होगी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांतिलाल खराड़ी, रामलाल भगोरा, सतीश अहारी, केशव कोटेड, मानशंकर खराड़ी, गोपाल पाटीदार, नारायण लाल डामोर सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।1
- राजस्थान के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में 'CSR-22 स्टाफ नर्स राजमेस भर्ती 2025' के तहत नवनियुक्त संविदा स्टाफ नर्स ग्रेड-2 (नर्सिंग ऑफिसर्स) ने चिकित्सा मंत्री को ज्ञापन सौंपकर वेटिंग सूची जारी होने से पहले अपने गृह जिलों में रिलोकेशन (समायोजन) करने की मांग की है। डूंगरपुर से सामने आई इस मांग में कर्मियों ने अपनी व्यावहारिक समस्याओं को प्रमुखता से उजागर किया है। नवनियुक्त नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है, जिससे युवाओं में भारी उत्साह है। हालांकि, इस भर्ती के तहत दूर-दराज के जिलों में पदस्थापन मिलने से कई व्यावहारिक कठिनाइयां खड़ी हो गई हैं। इस भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों को केवल लगभग ₹18,900 का मासिक मानदेय मिल रहा है। इस कम मानदेय और गृह जिले से अत्यधिक दूरी के कारण विशेष रूप से महिला कार्मिकों, विवाहित महिलाओं, एकल व विधवा महिलाओं तथा आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को भारी पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि वर्तमान में विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े पदों पर पहले बाहर कार्यरत संविदा स्टाफ नर्सों को उनके गृह जिले या नजदीकी मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए, और इसके बाद ही वेटिंग सूची जारी की जाए। नर्सिंग संगठनों का तर्क है कि इस प्रक्रिया को अपनाने से पूरी भर्ती पारदर्शी रहेगी और अनावश्यक कानूनी या सामाजिक विवादों से भी बचा जा सकेगा। सभी नवनियुक्त नर्सिंग ऑफिसर्स ने चिकित्सा मंत्री से इस संवेदनशील मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द राहत देने वाले दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है।2
- प्रतापगढ़ जिले के धरियावद कस्बे में बुधवार को दिगम्बर जैन मुनि परम पूज्य वात्सल्य निधि आचार्य कल्प 108 श्री पुण्य सागरजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस पावन अवसर पर सकल जैन समाज सहित सर्वसमाज के धर्मप्रेमी लोगों ने आचार्य मुनि का बड़े ही उत्साह के साथ स्वागत-सत्कार किया। जुलूस के दौरान घोड़े, बैंड-बाजे और भक्तिमय भजनों की धुन पर झूमते-नाचते श्रद्धालुओं ने पलक पांवड़े बिछाकर मुनि श्री की अगवानी की। नगर में जगह-जगह भव्य तोरण द्वार और आकर्षक साज-सज्जा की गई थी। विभिन्न मार्गों से होता हुआ यह भव्य जुलूस दिगंबर जैन मंदिर पहुंचा, जहां जैन समाज द्वारा महाराज की भव्य अगवानी की गई। आचार्य श्री के सानिध्य में नगर की महावीर वाटिका में भक्तिभाव के साथ चतुर्थ मास का प्रारंभ हुआ, जिसमें मेवाड़, वागड़ और मालवा से बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु सम्मिलित हुए। इस दौरान महावीर वाटिका में आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन किए गए और मंगल गीत गाए गए, जहां हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। चतुर्थ मास के अंतर्गत यहां प्रतिदिन सुबह और शाम को विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं महाराज के मंगल प्रवचन आयोजित किए जाएंगे। भव्य आयोजन के दौरान कानून व सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सीआई हजारीलाल मीणा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर मुस्तैद रहे।1
- राजस्थान के डूंगरपुर जिले के चिखली ब्लॉक में विभिन्न आदिवासी संगठनों और समाज के प्रतिनिधियों ने पृथक भील प्रदेश की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम चिखली तहसीलदार अविनाश कुमार को ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में भीली संस्कृति, परंपराओं व भीली बोली के संरक्षण तथा संवैधानिक पहचान के आधार पर एक अलग भील प्रदेश के निर्माण की मांग उठाई गई है। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने भील समाज की समृद्ध संस्कृति, भाषा और परंपराओं को सहेजने के लिए तुरंत आवश्यक कदम उठाने तथा मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई किए जाने का पुरजोर आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा (BPMM), भील प्रदेश विद्यार्थी मोर्चा (BPVM), भील प्रदेश महिला मोर्चा, भील प्रदेश युवा मोर्चा के पदाधिकारियों के साथ ही विभिन्न ग्राम पंचायतों के वीसीसी (VCC) सदस्य, भारत आदिवासी पार्टी के कार्यकर्ता और आदिवासी परिवारों के अनेक प्रतिनिधि भारी संख्या में एकजुट होकर उपस्थित रहे। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्ष रमेश बामणिया, मंडल अध्यक्ष राजमल खराड़ी, संभाग सदस्य देवीलाल मकवना, जिला परिषद सदस्य अशोक रोत, भचड़िया ग्राम पंचायत प्रशासक देवेंद्र डामोर, मंडल अध्यक्ष दिनेश ताबियाड़, दिनेश डामोर (गंदेरी), रमेश डामोर (पंचकुंडी), विमल प्रकाश डामोर, चेतन डामोर, रमेश डामोर, अम्बाड़ा ग्राम पंचायत प्रशासक नवीन डामोर, लालशंकर, दिनेश कुमार, दिनेश खाट, खातुराम, हाजा भाई, शरण मंडल अध्यक्ष प्रभु डामोर, कैलाश डिंडोर, पीयूष, राजेंद्र, गजेंद्र डिंडोर और सुमित्रा सहित विभिन्न ब्लॉकों के वीसीसी सदस्य एवं भारत आदिवासी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।1
- राजस्थान के चौरासी विधानसभा क्षेत्र से विधायक अनिल कटारा ने भील प्रदेश संदेश यात्रा को लेकर एक जरूरी और महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है।1
- डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत निठाउवा में बुधवार को राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने शिरकत कर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना और मौके पर ही उनका त्वरित समाधान किया। इसके साथ ही शिविर के माध्यम से आम लोगों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर लाभ उठाया। शिविर के प्रभारी और नायब तहसीलदार भूमल चौहान ने इस कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रशासन को गांव की चौपाल तक पहुंचाकर आमजन की समस्याओं का तुरंत निवारण करना है। उन्होंने बताया कि इस शिविर के जरिए राजस्व विभाग से जुड़े नामांतरण, सीमाज्ञान, रिकॉर्ड शुद्धिकरण और भूमि संबंधी मामलों के निस्तारण को प्राथमिकता देकर त्वरित रूप से पूरा किया जा रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चौरासी विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रत्याशी कारीलाल ननोमा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की मंशा को सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसी भी ग्रामीण को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर न काटने पड़ें, इसीलिए एक ही जगह पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही भाजपा जिला महामंत्री ईश्वर लबाना ने इसे सरकार की कल्याणकारी सोच का परिणाम बताया और ग्रामीणों से शिविर में सक्रिय भागीदारी करके अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। इस अवसर पर मंडल महामंत्री रत्न सिंह चौहान, मंडल उपाध्यक्ष महिपाल सिंह राठौड़, सरपंच सूर्या देवी डामोर, पंचायत समिति सदस्य प्रताप सिंह डामोर, पूर्व सरपंच लक्ष्मण सिंह, रमेश, निवर्तमान नगर मंत्री पुष्पेंद्र डामोर, बूथ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह डामोर, विशाल लबाना, केसर सिंह डामोर, मुलचंद लबाना, श्यामलाल डामोर और प्रवीण डामोर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। शिविर में पहुंचे अधिकारियों ने पात्र हितग्राहियों के आवेदन स्वीकार कर कई महत्वपूर्ण मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया।1
- भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के संस्थापक और राजस्थान के बांसवाड़ा-डूंगरपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजकुमार रोत ने जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र के आदिवासी अधिकार सम्मेलन में भारत के मूल निवासियों के अधिकारों को लेकर बेहद प्रभावशाली भाषण दिया है। वैश्विक मंच से देश के करोड़ों आदिवासियों का प्रतिनिधित्व करते हुए सांसद रोत ने भारत सरकार के उस पुराने और पारंपरिक दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें कहा जाता रहा है कि भारत में कोई विशिष्ट 'इंडिजिनस' (आदिवासी) समुदाय नहीं है। उन्होंने पुरजोर शब्दों में स्पष्ट किया कि भारत की अनुसूचित जनजातियां ही यहाँ की मूल निवासी हैं। 13 से 17 जुलाई तक चले इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में सांसद राजकुमार रोत ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 14 करोड़ आदिवासी आबादी निवास करती है, जो कुल 705 अलग-अलग आदिवासी समूहों में विभाजित है और जिन्हें संविधान के तहत 'अनुसूचित जनजाति' (ST) का दर्जा प्राप्त है। ऐतिहासिक और नस्लीय रूप से प्रोटो-ऑस्ट्रेलॉयड, नेग्रिटो, द्रविड़ और मंगोलॉयड मूल से जुड़े इन समूहों को उन्होंने भारत के मूल स्वदेशी समुदाय होने का सबसे बड़ा प्रमाण बताया। अपने इस तर्क को कानूनी मजबूती देने के लिए सांसद रोत ने साल 2011 के प्रसिद्ध 'कैलाश बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू के ऐतिहासिक फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने माना था कि अनुसूचित जनजातियां ही इस देश के मूल निवासियों की वंशज हैं। संबोधन के समापन पर बेहद भावुक और गर्वित नजर आए राजकुमार रोत ने गर्व के साथ बताया कि वह स्वयं भील आदिवासी समुदाय से आते हैं, जो राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्र का सबसे बड़ा आदिवासी समूह है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक मंच पर भील समाज और देश के करोड़ों शोषित आदिवासी भाई-बहनों का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए एक परम सम्मान की बात है। उन्होंने अपनी बात को पारंपरिक संबोधन 'जोहार' के साथ समाप्त किया।1
- डूंगरपुर की ग्राम पंचायत निठाउवा में ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें पात्र ग्रामीणों को आवासीय पट्टे वितरित किए गए। शिविर में विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत ग्रामीणों को लाभान्वित करने के साथ ही उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया। विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं और उन पर आवश्यक कार्रवाई की। इस शिविर में तहसीलदार, विकास अधिकारी और नायब तहसीलदार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देकर पात्र लोगों को समय पर लाभ दिलाने का भरोसा दिलाया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से प्रशासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। शिविर में चौरासी विधानसभा के विधायक प्रत्याशी कारीलाल ननोमा, भाजपा जिला महामंत्री ईश्वर लबाना, मंडल महामंत्री रत्नसिंह चौहान, मंडल उपाध्यक्ष महिपाल सिंह राठौड़, सरपंच सूर्या देवी डामोर, पंचायत समिति सदस्य प्रताप सिंह डामोर, पूर्व सरपंच लक्ष्मण सिंह, रमेश जी, निवर्तमान नगर मंत्री पुष्पेंद्र डामोर, बूथ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह डामोर, विशाल लबाना, केसर सिंह डामोर, मूलचंद लबाना, श्यामलाल डामोर, प्रवीण डामोर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।4
- सीमलवाड़ा में भील प्रदेश मुक्ति मोर्चा (बीपीएमएम) ने अलग 'भीलप्रदेश राज्य' के गठन सहित आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों, जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और भाषा संरक्षण को लेकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के नाम 42 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा है। यह ज्ञापन सीमलवाड़ा उपखंड कार्यालय में रीडर अनिल रोत के माध्यम से प्रेषित किया गया। संगठन का कहना है कि आजादी के बाद भील सांस्कृतिक क्षेत्र चार राज्यों में विभाजित हो गया, जिससे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान, विकास और संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए हैं। इसी को लेकर संविधान के अनुच्छेद-3 के तहत राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल सीमावर्ती क्षेत्रों तथा केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली को मिलाकर अलग भीलप्रदेश राज्य के गठन की मांग की गई है। ज्ञापन में आदिवासी क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय समुदाय के अधिकारों को प्रभावी बनाने और अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान की पांचवीं अनुसूची और अनुच्छेद-244 की मूल भावना के अनुरूप प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है। इसके साथ ही, मोर्चा ने 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने, जेलों में बंद आदिवासी कैदियों के मामलों की समीक्षा कर राहत देने, आदिवासी धर्म के लिए पृथक धर्म कॉलम कोड पुनः लागू करने और भीली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग उठाई है। जल परियोजनाओं को लेकर 'नर्मदा-पावागढ़ भीलप्रदेश पेयजल परियोजना' को राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने और जयसमंद, माही एवं जाखम बांध के पानी का प्राथमिक उपयोग स्थानीय आदिवासियों के लिए सुनिश्चित करने की बात कही गई है। इसके अलावा, अरावली, विंध्याचल, सातपुड़ा और सह्याद्री पर्वतमालाओं में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण करने, आदिवासियों के लिए भूमि बैंक बनाने, भूमिहीन परिवारों को भूमि उपलब्ध कराने, पुलिस एवं प्रशासन में स्थानीय आदिवासियों को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने, भील रेजिमेंट के गठन और अनुसूचित क्षेत्रों में शराबबंदी लागू करने की मांग की गई है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे, बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाओं में भूमि गंवाने वाले परिवारों के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने तथा बेणेश्वर, पावागढ़, अंबाजी और देवमोगरा जैसे आस्था स्थलों को बाहरी अतिक्रमण से बचाने के लिए विशेष नीति बनाने की भी मांग की गई है। इस दौरान कमलेश डेंडोर, शांतिलाल रोत, रणछोड़ कोटेड सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।3