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तलेन का गांधी चौक या गड्ढा चौक?नगर परिषद की मेहरबानी से सड़क पर बिछी गिट्टियां तलेन का 'गांधी चौक' या 'गड्ढा चौक'? नगर परिषद की मेहरबानी से सड़क पर बिछी 'गिट्टियों की बिसात'! तलेन= यहाँ की सड़क अब सड़क नहीं रही, बल्कि नगर परिषद की लापरवाही का जीता-जागता 'खंडहर' बन चुकी है। शहर के इस सबसे वीआईपी और व्यस्ततम इलाके में विकास का डामर तो कब का उड़ चुका है, अब बस पत्थरों और धूल का 'साम्राज्य' बाकी है। नगर परिषद टलेन के दावों की हवा गांधी चौक की धूल में साफ उड़ती देखी जा सकती है। डामर की जगह यहाँ गिट्टियां इस कदर बिखरी हैं कि दोपहिया वाहन चालक कब 'साष्टांग दंडवत' हो जाएं, पता ही नहीं चलता। नगर परिषद की चुप्पी जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। तलेन की जनता अब यह पूछ रही है कि क्या गांधी चौक की किस्मत में सिर्फ 'गिट्टियां और धूल' ही लिखी है?
Dharmendra Pushpad
तलेन का गांधी चौक या गड्ढा चौक?नगर परिषद की मेहरबानी से सड़क पर बिछी गिट्टियां तलेन का 'गांधी चौक' या 'गड्ढा चौक'? नगर परिषद की मेहरबानी से सड़क पर बिछी 'गिट्टियों की बिसात'! तलेन= यहाँ की सड़क अब सड़क नहीं रही, बल्कि नगर परिषद की लापरवाही का जीता-जागता 'खंडहर' बन चुकी है। शहर के इस सबसे वीआईपी और व्यस्ततम इलाके में विकास का डामर तो कब का उड़ चुका है, अब बस पत्थरों और धूल का 'साम्राज्य' बाकी है। नगर परिषद टलेन के दावों की हवा गांधी चौक की धूल में साफ उड़ती देखी जा सकती है। डामर की जगह यहाँ गिट्टियां इस कदर बिखरी हैं कि दोपहिया वाहन चालक कब 'साष्टांग दंडवत' हो जाएं, पता ही नहीं चलता। नगर परिषद की चुप्पी जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। तलेन की जनता अब यह पूछ रही है कि क्या गांधी चौक की किस्मत में सिर्फ 'गिट्टियां और धूल' ही लिखी है?
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- रंगपंचमी के अवसर पर जिले में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा 08 मार्च 2026 को ड्राय डे घोषित किया गया है। जारी आदेश के अनुसार मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 24(1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए 08 मार्च को जिले की सभी कम्पोजिट मदिरा दुकानें (FCL) तथा FL-9, CS-1B और भंडारण/वेयरहाउस से मदिरा का परिवहन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध शाम 5:00 बजे तक प्रभावी रहेगा। निर्धारित अवधि के दौरान जिले में शराब का क्रय-विक्रय एवं परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।8
- तलेन का 'गांधी चौक' या 'गड्ढा चौक'? नगर परिषद की मेहरबानी से सड़क पर बिछी 'गिट्टियों की बिसात'! तलेन= यहाँ की सड़क अब सड़क नहीं रही, बल्कि नगर परिषद की लापरवाही का जीता-जागता 'खंडहर' बन चुकी है। शहर के इस सबसे वीआईपी और व्यस्ततम इलाके में विकास का डामर तो कब का उड़ चुका है, अब बस पत्थरों और धूल का 'साम्राज्य' बाकी है। नगर परिषद टलेन के दावों की हवा गांधी चौक की धूल में साफ उड़ती देखी जा सकती है। डामर की जगह यहाँ गिट्टियां इस कदर बिखरी हैं कि दोपहिया वाहन चालक कब 'साष्टांग दंडवत' हो जाएं, पता ही नहीं चलता। नगर परिषद की चुप्पी जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। तलेन की जनता अब यह पूछ रही है कि क्या गांधी चौक की किस्मत में सिर्फ 'गिट्टियां और धूल' ही लिखी है?1
- Post by Banwari katariya1
- Post by Saif Ali journalist Journalist1
- Post by सत्य एक्सप्रेस न्यूज1
- sarangpur1
- भोपाल में तेज रफ्तार कार फेंसिंग तोड़ते हुए खदान में गिरी: 24 साल के युवक की मौत, दो दोस्त घायल; टर्न पर मुड़ नहीं सकी कार भोपाल | 1 घंटे पहले 0:54 शेयर भोपाल के अयोध्या नगर अरेड़ी में स्थित कंचन खदान में एक तेज रफ्तार कार फेंसिंग का तार और खंबे को तोड़ते हुए पानी में जा गिरी। हादसे में कार चालक की मौत हो गई। जबकि दो युवक घायल हो गए। अयोध्या नगर पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। वहीं पानी में डूबी कार को क्रेन की मदद से बाहर निकाला लिया गया। हादसा शनिवार की शाम करीब 5:30 बजे का है। रविवार को गांधी मेडिकल कॉलेज कीमोरचुरी में बॉडी का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। अनियंत्रित कार फेंसिंग तोड़कर खदान में गिरी अयोध्या नगर थाने के प्रभारी महेश लिल्लारे ने बताया कि 24 वर्षीय रोहित माली पिता संतोष माली की तेज रफ्तार कार से शनिवार की शाम अरेड़ी क्रेशर बस्ती कंचन खदान के करीब से गुजर रहा था। तभी उसकी कार अनियंत्रित होने के बाद खदान की फेंसिंग और खंबे को तोड़ती हुई पानी में जा गिरी। स्थानीय लोगों ने तत्काल मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस और नगर निगम की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर युवक को पानी से बाहर निकाला। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इसके बाद नगर निगम की क्रेन की मदद से कार को भी पानी से बाहर निकला गया1
- पचोर उदनखेडी में 7 मार्च 2026 को 7 किसानों की फसल हुई जलकर खाक 4 महीने की कड़ी मेहनत से उगाई गेहूं की फसल एक पल में ही जल गई आसपास के किसान एवं ग्रामीण जन पहुंचकर लगी आग पर काबू किया जिसमें एक फास्ट ब्लैडर दो पानी के टैंकर दो स्प्रे पंप चार हार्वेस्टर से गेहूं कांटे गए और दो टैक्टर की मदद से खेत के आसपास जमीन की मिट्टी कि हकाई की गई जलती हुई अग्नि की लपेट से बिना डरे सभी के सहयोग से आग पर काबू किया गया इन किसानों की जली फसल नंदलाल नागर पिता बापू लाल नागर दुर्गाबाई पति नंदलाल नागर कमल नागर पिता नंदलाल नागर जितेश नागर पिता नंदलाल नगर लक्ष्मी नारायण ड्राइवर पिता चुन्नीलाल नागर कमल राजपूत पिता घीसालाल जाति राजपूत इन किसानों की फसल पूरी जलकर नष्ट हो गई लगभग 40 से 50 बीघा के गेहूं की फसल मेहनत जलकर खाक और खेत में लगे कैसी यंत्र सिंचाई के लिए मिनी स्पिनर नोजल सहित पाइप छड़ी केवल बंगले में रखा हुआ कीमती सामान सब कुछ जलकर समाप्त हो गया मौके पर पुलिस प्रशासन सो नंबर 100 अलका पटवारी दीपक शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचकर जिन किसानों की फसल जली उनके रब्बा क्रमांक एक्टर लिखकर मौके पर पंचनामा बनाया गया जिसमें विद्युत मंडल की लापरवाही से हुआ है किसानों का नुकसान विद्युत मंडल के द्वारा लगातार चार दिनों से बार-बार तुम लाइट का इंटरप्रेट करते हुए जिसका कोई नाम नहीं कभी दिन में कभी रात को कभी दिन में दिनांक 6 ,3,26 को ऑपरेटर से बात की गई लाइट का समय शाम को या सुबह किया जाए लेकिन ऑपरेटर द्वारा बताया गया आगे से राजगढ़ से ई साहब का आदेश है कि दिन में 10:00 बजे से और 3:00 बजे तक चलाया जाए विद्युत विभाग सिर्फ मैसेज व्हाट्सएप से पूरी जानकारी चल रही है आग लगने का कारण राजगढ़ विद्युत विभाग के ई साब को बताया गया लाइट कब आती है कब जाती है इसका कोई निश्चित कोई समय नहीं कृषि पंप लाइट अगर 10 से 3 में नहीं देते तो आज लगभग 15 लाखों रुपए से अधिक का नुकसान नहीं होता जिस खेत में विद्युत लाइट द्वारा आग लगी उसी खेत में एक ही पल पोल (खंबे) से 11 की लाइट 3 दिशाओं में जा रही जबकि ऐसा कोई आदेश में नहीं है यह पूरी विद्युत मंडल के लापरवाही जहां पर गेहूं की फसल जली वहां बड़े मॉल के नाम से जाना जाता है उसके बाद हनुमान मंदिर टिकरिया तरफ विद्युत लाइट से फसल में आग लगी थी लेकिन मौजूद किसान द्वारा बुझाई गई किसानों द्वारा बताया गया की पूरी आग का कारण विद्युत मंडल के कर्मचारी है नहीं सुपरवाइजर सुनता है ना ही उनसे ऊपर बैठे हुए अधिकारी से लेकर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि भी सुनने को तैयार नहीं ऐसे में सिर्फ किसानों का ही नुकसान होता है करोड़ों रुपए का नुकसान होते-होते बज गया।1