रीवा जिले की जवा तहसील के ग्राम बवंधर में शासकीय मार्ग से अतिक्रमण हटाने का एक मामला, जो पिछले सात वर्षों से लंबित है, अब नए विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन वास्तविक अतिक्रमणकर्ता पर कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता को ही नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहा है, जिससे राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में, जिला पंचायत सदस्य दीपक वर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान प्रभारी कलेक्टर के समक्ष इस शासकीय मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग रखी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी कलेक्टर ने तहसीलदार जवा को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बाद भी मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत, तहसीलदार जवा द्वारा अब राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत शिकायतकर्ता पक्ष के विरुद्ध ही नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने स्वयं अपने हिस्से का अतिक्रमण हटाकर मार्ग खुलवाने के लिए वर्षों तक कलेक्टर और कमिश्नर जैसे अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए, उसी को नोटिस देकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में कई बार हुए सीमांकन, नापजोख और न्यायालयीन आदेशों में शासकीय भूमि पर कब्जे की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, जिसमें अतिक्रमणकारी रामनरेश यादव का नाम सामने आया था। इसके बावजूद रामनरेश यादव के विरुद्ध न तो कोई प्रभावी कार्रवाई की गई है और न ही वर्तमान में कोई नोटिस जारी हुई है। प्रशासन की इस निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने राजस्व निरीक्षक और स्थानीय पटवारी की भूमिका पर भी आपत्ति जताई है। तहसील कार्यालय के सूत्रों से पता चला है कि हालिया प्रतिवेदन में यह उल्लेख किया गया है कि संबंधित अतिक्रमणकारी रामनरेश यादव द्वारा शासकीय मार्ग पर कोई कब्जा नहीं किया गया है, जबकि पूर्व में कई बेदखली आदेश जारी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि पहले के सीमांकन और आदेश सही थे, तो अब ऐसी विपरीत रिपोर्ट कैसे तैयार की जा रही है। ग्रामीण बृजलाल यादव ने बताया कि वर्ष 2019 से लेकर अब तक न्यायालय जवा, एसडीएम, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और अपर कलेक्टर स्तर से कई आदेश पारित हुए, फिर भी शासकीय मार्ग अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की लापरवाही और हीलाहवाली के कारण न्यायालयीन आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। ग्रामीण शिवाकांत कुशवाहा ने इस स्थिति को गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया है, वहीं दुर्गेश गुलशन यादव का कहना है कि अधिकारियों की निष्क्रियता से शासन-प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है और जनता का विश्वास कमजोर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर एवं कमिश्नर से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पूर्व में पारित बेदखली आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने और मनमानी तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही शासकीय मार्ग को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो वे जनआंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
रीवा जिले की जवा तहसील के ग्राम बवंधर में शासकीय मार्ग से अतिक्रमण हटाने का एक मामला, जो पिछले सात वर्षों से लंबित है, अब नए विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन वास्तविक अतिक्रमणकर्ता पर कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता को ही नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहा है, जिससे राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में, जिला पंचायत सदस्य दीपक वर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान प्रभारी कलेक्टर के समक्ष इस शासकीय मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग रखी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी कलेक्टर ने तहसीलदार जवा को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बाद भी
मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत, तहसीलदार जवा द्वारा अब राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत शिकायतकर्ता पक्ष के विरुद्ध ही नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने स्वयं अपने हिस्से का अतिक्रमण हटाकर मार्ग खुलवाने के लिए वर्षों तक कलेक्टर और कमिश्नर जैसे अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए, उसी को नोटिस देकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में कई बार हुए सीमांकन, नापजोख और न्यायालयीन आदेशों में शासकीय भूमि पर कब्जे की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, जिसमें अतिक्रमणकारी रामनरेश यादव का नाम सामने आया था। इसके बावजूद रामनरेश यादव के विरुद्ध न तो कोई प्रभावी कार्रवाई की गई है और न ही वर्तमान में कोई
नोटिस जारी हुई है। प्रशासन की इस निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने राजस्व निरीक्षक और स्थानीय पटवारी की भूमिका पर भी आपत्ति जताई है। तहसील कार्यालय के सूत्रों से पता चला है कि हालिया प्रतिवेदन में यह उल्लेख किया गया है कि संबंधित अतिक्रमणकारी रामनरेश यादव द्वारा शासकीय मार्ग पर कोई कब्जा नहीं किया गया है, जबकि पूर्व में कई बेदखली आदेश जारी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि पहले के सीमांकन और आदेश सही थे, तो अब ऐसी विपरीत रिपोर्ट कैसे तैयार की जा रही है। ग्रामीण बृजलाल यादव ने बताया कि वर्ष 2019 से लेकर अब तक न्यायालय जवा, एसडीएम, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और अपर कलेक्टर स्तर से कई आदेश पारित हुए, फिर भी शासकीय मार्ग अतिक्रमण मुक्त नहीं हो
सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की लापरवाही और हीलाहवाली के कारण न्यायालयीन आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। ग्रामीण शिवाकांत कुशवाहा ने इस स्थिति को गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया है, वहीं दुर्गेश गुलशन यादव का कहना है कि अधिकारियों की निष्क्रियता से शासन-प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है और जनता का विश्वास कमजोर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर एवं कमिश्नर से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पूर्व में पारित बेदखली आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने और मनमानी तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही शासकीय मार्ग को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो वे जनआंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
- रीवा जिले की जवा तहसील के ग्राम बवंधर में शासकीय मार्ग से अतिक्रमण हटाने का एक मामला, जो पिछले सात वर्षों से लंबित है, अब नए विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन वास्तविक अतिक्रमणकर्ता पर कार्रवाई करने के बजाय शिकायतकर्ता को ही नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहा है, जिससे राजस्व अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में, जिला पंचायत सदस्य दीपक वर्मा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान प्रभारी कलेक्टर के समक्ष इस शासकीय मार्ग को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग रखी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी कलेक्टर ने तहसीलदार जवा को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हालांकि, कई दिन बीत जाने के बाद भी मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत, तहसीलदार जवा द्वारा अब राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत शिकायतकर्ता पक्ष के विरुद्ध ही नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने स्वयं अपने हिस्से का अतिक्रमण हटाकर मार्ग खुलवाने के लिए वर्षों तक कलेक्टर और कमिश्नर जैसे अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए, उसी को नोटिस देकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में कई बार हुए सीमांकन, नापजोख और न्यायालयीन आदेशों में शासकीय भूमि पर कब्जे की स्थिति स्पष्ट हो चुकी है, जिसमें अतिक्रमणकारी रामनरेश यादव का नाम सामने आया था। इसके बावजूद रामनरेश यादव के विरुद्ध न तो कोई प्रभावी कार्रवाई की गई है और न ही वर्तमान में कोई नोटिस जारी हुई है। प्रशासन की इस निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने राजस्व निरीक्षक और स्थानीय पटवारी की भूमिका पर भी आपत्ति जताई है। तहसील कार्यालय के सूत्रों से पता चला है कि हालिया प्रतिवेदन में यह उल्लेख किया गया है कि संबंधित अतिक्रमणकारी रामनरेश यादव द्वारा शासकीय मार्ग पर कोई कब्जा नहीं किया गया है, जबकि पूर्व में कई बेदखली आदेश जारी हो चुके हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि पहले के सीमांकन और आदेश सही थे, तो अब ऐसी विपरीत रिपोर्ट कैसे तैयार की जा रही है। ग्रामीण बृजलाल यादव ने बताया कि वर्ष 2019 से लेकर अब तक न्यायालय जवा, एसडीएम, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और अपर कलेक्टर स्तर से कई आदेश पारित हुए, फिर भी शासकीय मार्ग अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सका है। ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग की लापरवाही और हीलाहवाली के कारण न्यायालयीन आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। ग्रामीण शिवाकांत कुशवाहा ने इस स्थिति को गंभीर प्रशासनिक विफलता बताया है, वहीं दुर्गेश गुलशन यादव का कहना है कि अधिकारियों की निष्क्रियता से शासन-प्रशासन की छवि धूमिल हो रही है और जनता का विश्वास कमजोर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर एवं कमिश्नर से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पूर्व में पारित बेदखली आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने और मनमानी तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही शासकीय मार्ग को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो वे जनआंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।4
- युवा कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष एवं ग्राम पंचायत शितलहा के सरपंच अमित चक्रधर सिंह ने जवा को नगर परिषद का दर्जा देने की मांग उठाई है।1
- रीवा जिले की जवा तहसील के अंतर्गत आने वाले गढ़वा गांव में लोगों को सालों से वृद्धा पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताया गया है कि यहाँ के ग्रामीणों की वृद्धा पेंशन कई वर्षों से बंद पड़ी है, जिससे उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश सीमा पर स्थित गौरा टमस नदी में नहाने आए एक ही परिवार के दो बच्चों की डूबने से मौत हो गई। इस दुखद घटना की सूचना मिलते ही दोनों राज्यों की पुलिस मौके पर पहुंची। मृतक दोनों युवकों की पहचान भारत नगर के मिश्रा परिवार के सदस्यों के रूप में हुई है।1
- मध्य प्रदेश के सतना स्थित परसमनिया थाने से एक शर्मनाक वीडियो वायरल हुआ है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वीडियो में परसमनिया गढ़ी गोलीकांड की मुख्य आरोपी सुनीता सिंह को लॉकअप में बंद करने के बजाय कुर्सी पर बैठाकर कोल्डड्रिंक पिलाई जा रही है और उनकी आवभगत की जा रही है। इस वीआईपी खातिरदारी के चलते पुलिस घिर गई है और यह प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या गरीब जब आरोपी होता है, तो क्या कानून इसी तरह से काम करता है।1
- सतना रेलवे स्टेशन पर कथित तौर पर अवैध वेंडर खुलेआम एमआरपी (MRP) से अधिक कीमत पर पैक्ड सामग्री बेच रहे हैं। ये वेंडर बिना किसी यूनिफॉर्म और पहचान-पत्र (नेम स्लिप) के ही स्टेशन परिसर में यात्रियों से मनमाने दाम वसूलते नजर आ रहे हैं। यात्रियों से लगातार इस संबंध में शिकायतें मिल रही हैं। हालांकि, इन लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद भी जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई कार्रवाई होती दिखाई नहीं दे रही है। इससे गंभीर सवाल उठते हैं कि आखिर बिना ड्रेस और पहचान-पत्र के ये वेंडर स्टेशन परिसर में इतनी आसानी से कैसे घूम रहे हैं, और क्या रेलवे प्रशासन को यह सब दिखाई नहीं दे रहा है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी इसकी अनदेखी की जा रही है।1
- चित्रकूट जनपद के मानिकपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गढ़चपा में एक 85 वर्षीय बुजुर्ग, राम गरीब पुत्र स्वर्गीय महादेव, ने गांव के ही रज्जू पुत्र परसोत्तम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बुजुर्ग का आरोप है कि रविवार 14 जून 2026 को आरोपी रज्जू ने उन पर लाठी-डंडों से हमला किया और जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित राम गरीब के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब वे गोरह के जंगल में अपनी बकरियां चरा रहे थे और आरोपी रज्जू ने उन्हें एक सुनसान स्थान पर अकेला पाकर हमला किया। बुजुर्ग ने बताया कि हमलावर ने उनसे उनकी बकरियां और एक लाख रुपये की मांग की, साथ ही यह धमकी भी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इस घटना के बाद, पीड़ित राम गरीब ने अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश सरकार भले ही अपराध और दबंगई पर नियंत्रण के दावे करती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कुछ दबंग तत्व कमजोर और बुजुर्ग लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं। पीड़ित और उनके परिजनों ने पुलिस प्रशासन से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।1
- भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष जवा ने मोदी के सुशासन के 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक विशेष जनसंपर्क अभियान कार्यक्रम चलाया। इस कार्यक्रम के तहत, मंडल अध्यक्ष ने लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं का निराकरण किया।1