शिवालय का चंचल प्रहरी: द्वार पर बैठा वानर आस्था का संगम लालकुआँ/भारत में मंदिरों का परिदृश्य केवल देवी-देवताओं और इंसानी भक्तों तक ही सीमित नहीं है; यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के सह-अस्तित्व का भी एक अत्यंत सुंदर आश्रय स्थल है। सुबह की शांति, ॐ नमः शिवाय का जाप और शिवलिंग पर गिरते जल की ध्वनि के बीच, यदि शिवालय के मुख्य द्वार पर कोई चंचल बंदर बैठा दिख जाए, तो वह दृश्य अपने आप में जीवंत और आध्यात्मिक हो जाता है। आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम अवंतिका मंदिर की सीढ़ियों या नक्काशीदार खंभों पर बैठा वानर शिवालय के वातावरण में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा भर देता है। एक ओर जहां भक्त गहरी आस्था और मौन के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं, वहीं दूसरी ओर वानर की मासूम चंचलता और चौकन्नी निगाहें एक अद्भुत विरोधाभास पैदा करती हैं। प्रतीक्षा और प्रसाद: ये बंदर अक्सर भक्तों के हाथों में प्रसाद (जैसे केले, चने या पेड़े) की आस में बैठे रहते हैं। उनकी निगाहें हर आने-जाने वाले पर होती हैं। भय और श्रद्धा: कई बार उनकी अचानक की गई हरकतों से भक्त डर जाते हैं, लेकिन अगले ही पल वे श्रद्धा भाव से उन्हें प्रसाद का एक हिस्सा भी अर्पण कर देते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण भारतीय जनमानस में वानरों का विशेष स्थान है। "वानर को भगवान शिव के रुद्रावतार, श्री हनुमान जी का ही स्वरूप माना जाता है।" इस मान्यता के कारण, शिवालय के द्वार पर वानर की उपस्थिति को शुभ और ईश्वरीय कृपा का संकेत माना जाता है। शिव, जिन्हें 'पशुपतिनाथ' (सभी जीवों के नाथ) कहा जाता है, के दरबार में किसी पशु का इस तरह निर्भय होकर बैठना इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर के घर में मनुष्य और जीव-जंतुओं के बीच कोई भेदभाव नहीं है। एक मनमोहक और दार्शनिक दृश्य अगर आप कभी रुककर शिवालय के द्वार पर बैठे उस बंदर को ध्यान से देखें, तो आपको उसमें जीवन के कई रंग नजर आएंगे: चंचलता: कभी वह मंदिर के कलश पर छलांग लगाता है, तो कभी सीढ़ियों पर बैठकर अपने बच्चों के साथ खेलता है। ध्यान: आरती के समय जब नगाड़े और घंटियां बजती हैं, तो कई बार ये बंदर भी एकदम शांत होकर किसी दर्शक की तरह उस ध्वनि को सुनते प्रतीत होते हैं। समानता का संदेश: वे हमें याद दिलाते हैं कि यह धरती और यह पवित्र स्थान जितना हमारा है, उतना ही उनका भी है। शिवालय के द्वार पर बैठा वानर केवल एक साधारण जानवर नहीं है; वह उस संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है जो सदियों से हमारे धर्म और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। वह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल एकांत में आंखें बंद करने में नहीं है, बल्कि अपने आस-पास मौजूद प्रकृति और उसके हर जीव के प्रति करुणा और प्रेम रखने में है। अगली बार जब आप किसी शिवालय जाएं और द्वार पर किसी वानर को देखें, तो मुस्कुराकर उसमें भी उसी ईश्वर का अंश देखिएगा, जिसकी तलाश में आप मंदिर की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं।
शिवालय का चंचल प्रहरी: द्वार पर बैठा वानर आस्था का संगम लालकुआँ/भारत में मंदिरों का परिदृश्य केवल देवी-देवताओं और इंसानी भक्तों तक ही सीमित नहीं है; यह प्रकृति और जीव-जंतुओं के सह-अस्तित्व का भी एक अत्यंत सुंदर आश्रय स्थल है। सुबह की शांति, ॐ नमः शिवाय का जाप और शिवलिंग पर गिरते जल की ध्वनि के बीच, यदि शिवालय के मुख्य द्वार पर कोई चंचल बंदर बैठा दिख जाए, तो वह दृश्य अपने आप में जीवंत और आध्यात्मिक हो जाता है। आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम अवंतिका मंदिर की सीढ़ियों या नक्काशीदार खंभों पर बैठा वानर शिवालय के वातावरण में एक विशेष प्रकार की ऊर्जा भर देता है। एक ओर जहां भक्त गहरी आस्था और मौन के साथ मंदिर में प्रवेश करते हैं, वहीं दूसरी ओर वानर की मासूम चंचलता और चौकन्नी निगाहें एक अद्भुत विरोधाभास पैदा करती हैं। प्रतीक्षा और प्रसाद: ये बंदर अक्सर भक्तों के हाथों में प्रसाद (जैसे केले, चने या पेड़े) की आस में बैठे रहते हैं। उनकी निगाहें हर आने-जाने वाले पर होती हैं। भय और श्रद्धा: कई बार उनकी अचानक की गई हरकतों से भक्त डर जाते हैं, लेकिन अगले ही पल वे श्रद्धा भाव से उन्हें प्रसाद का एक हिस्सा भी अर्पण कर देते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण भारतीय जनमानस में वानरों का विशेष स्थान है। "वानर को भगवान शिव के रुद्रावतार, श्री हनुमान जी का ही स्वरूप माना जाता है।" इस मान्यता के कारण, शिवालय के द्वार पर वानर की उपस्थिति को शुभ और ईश्वरीय कृपा का संकेत माना जाता है। शिव, जिन्हें 'पशुपतिनाथ' (सभी जीवों के नाथ) कहा जाता है, के दरबार में किसी पशु का इस तरह निर्भय होकर बैठना इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर के घर में मनुष्य और जीव-जंतुओं के बीच कोई भेदभाव नहीं है। एक मनमोहक और दार्शनिक दृश्य अगर आप कभी रुककर शिवालय के द्वार पर बैठे उस बंदर को ध्यान से देखें, तो आपको उसमें जीवन के कई रंग नजर आएंगे: चंचलता: कभी वह मंदिर के कलश पर छलांग लगाता है, तो कभी सीढ़ियों पर बैठकर अपने बच्चों के साथ खेलता है। ध्यान: आरती के समय जब नगाड़े और घंटियां बजती हैं, तो कई बार ये बंदर भी एकदम शांत होकर किसी दर्शक की तरह उस ध्वनि को सुनते प्रतीत होते हैं। समानता का संदेश: वे हमें याद दिलाते हैं कि यह धरती और यह पवित्र स्थान जितना हमारा है, उतना ही उनका भी है। शिवालय के द्वार पर बैठा वानर केवल एक साधारण जानवर नहीं है; वह उस संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है जो सदियों से हमारे धर्म और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। वह हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति केवल एकांत में आंखें बंद करने में नहीं है, बल्कि अपने आस-पास मौजूद प्रकृति और उसके हर जीव के प्रति करुणा और प्रेम रखने में है। अगली बार जब आप किसी शिवालय जाएं और द्वार पर किसी वानर को देखें, तो मुस्कुराकर उसमें भी उसी ईश्वर का अंश देखिएगा, जिसकी तलाश में आप मंदिर की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं।
- Post by Kanchan Kanchan1
- बिलासपुर में प्रशासन ने सोमवार तड़के बड़ी कार्रवाई करते हुए हाईवे चौड़ीकरण की जद में आ रहीं दोनों दरगाहों को बुलडोजरों से जमींदोज करवा दिया। इस दौरान हाईवे को दोनों तरफ से बंद रखा गया और भारी फोर्स तैनात रही। देर रात में हुईं तैयारियों के बाद अचानक किए गए इन दोनों ध्वस्तीकरणों का आम नागरिकों को तब पता चला, जब वह सोकर उठे। रामपुर के बिलासपुर में देर रात करीब तीन बजे नगरीय हाईवे पर ब्लॉक कार्यालय के सामने स्थित हजरत सादिक शाह मियां की दरगाह के सामने दो जेसीबी व खाली डंपर लाकर खड़े किए गए। इसके बाद मुख्य चौराहे व केमरी तिराहे पर यातायात रोक दिया गया और फोर्स तैनात हो गई। तड़के चार बजे बुलडोजरों ने दरगाह को ध्वस्त कर दिया। सड़क पर फैले मलबे को डंपरों में भर दिया गया। इसके तुरंत बाद मुख्य चौराहे से लेकर अहरो तिराहे वाले हिस्से का यातायात रोका गया और विशारदनगर स्थित हजरत साहू शाह मियां की दरगाह पर बुलडोजर चलाया गया। यहां भी मलबे को डंपर में भरवाकर सड़क साफ करा दी गई। इस कार्रवाई के दौरान उप जिलाधिकारी अरुण कुमार, तहसीलदार शिवकुमार शर्मा,पुलिस क्षेत्राधिकारी हर्षिता सिंह, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राजीव गंगवार, नायब तहसीलदार अंकुर अंतल व कोतवाल जीत सिंह सहित राजस्व, पीडब्ल्यूडी व पुलिस के कई अधिकारी मौजूद रहे। निकट थानों की फोर्स भी तैनात की गई थी।हाल ही में राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने नगर के भीतर से गुजर रहे आंतरिक हाईवे के चौड़ीकरण के लिए शासन से करोड़ों का प्रस्ताव स्वीकृत कराया था।चौड़ीकरण के लिए सड़क की जद में आ रहे निर्माणों पर 'लाल निशान' लगाए गए थे। चिन्हित स्थानों को खाली कराने की कार्रवाई शुरू हो गई है।पीडब्ल्यूडी के एई राजीव गंगवार ने बताया कि चिन्हीकरण के अनुसार दोनों दरगाहों को हटाने का निर्णय लिया गया था।अन्य चिन्हित स्थानों के बारे में उनका कहना था कि जैसा निर्णय होगा, वैसी प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।उप जिलाधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि यह पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई है। प्रशासन शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग कर रहा है।1
- नैनीताल के समीपवर्ती गेठिया के जंगल रविवार को धधकने शुरू हो गए। आग पर देर रात तक काबू नहीं पाया जा सका था।4
- दिनांक *18/04/2026* को वादी मेजर अजय पाठक पुत्र पूरन चन्द्र पाठक निवासी म0न0-1087/L, वार्ड नं0-6, गीतांजली गली, शीशमहल काठगोदाम द्वारा वॉकवे मॉल के पास एक व्यक्ति को सेना की वर्दी पहने हुए संदिग्ध अवस्था में देखा गया। उक्त व्यक्ति स्वयं को आर्मी में “मेजर” बताते हुए अपना नाम मेजर अमन बता रहा था। मेजर अजय पाठक को उक्त व्यक्ति की वर्दी धारण करने की शैली एवं गतिविधियाँ संदिग्ध प्रतीत होने पर उन्होंने तत्काल क्षेत्र में मौजूद *पीसी-4 पुलिस टीम को सूचना* दी। सूचना प्राप्त होते ही पुलिस टीम द्वारा मौके पर पहुँचकर उक्त व्यक्ति से पूछताछ की गई, किन्तु वह अपने संबंध में कोई ठोस एवं सत्य जानकारी उपलब्ध नहीं करा सका। *पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही:-* *डॉ० मंजूनाथ टीसी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल* उक्त सूचना प्राप्त होने पर उक्त व्यक्ति के विरुद्ध तत्काल आवश्यक कार्यवाही किए जाने हेतु निर्देश दिए गए। उक्त निर्देशों के क्रम में *श्री मनोज कुमार कत्याल, पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी* के मार्गदर्शन एवं *श्री अमित कुमार सैनी, क्षेत्राधिकारी* हल्द्वानी के पर्यवेक्षण में संदिग्ध व्यक्ति को पूछताछ हेतु थाना काठगोदाम लाया गया। प्रथम दृष्टया *सेना की वर्दी का दुरुपयोग एवं संदिग्ध गतिविधियों* को दृष्टिगत रखते हुए, वादी मेजर अजय पाठक द्वारा दी गई लिखित तहरीर के आधार पर *श्री विमल मिश्रा, थानाध्यक्ष काठगोदाम* के द्वारा थाना काठगोदाम में *FIR NO-54/26 धारा 168 BNS* के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कराया गया। *पूछताछ का विवरण:-* पूछताछ के दौरान उक्त व्यक्ति ने अपना नाम अमन उर्फ अमन रोमसन पुत्र क्रिस्टोफर मसीह निवासी नौषर नसर, खटीमा, जनपद ऊधमसिंहनगर, उम्र 24 वर्ष बताया। वर्तमान में वह *सुचेतना समाज सेवा केन्द्र, निर्मला कान्वेंट स्कूल के पास, थाना काठगोदाम* क्षेत्र में कार्यरत है। पूछताछ में यह भी प्रकाश में आया कि उसे सेना के प्रति अत्यधिक आकर्षण है तथा सेना में भर्ती होने की तीव्र इच्छा थी, किन्तु भर्ती में असफल होने के कारण उसने सेना की वर्दी धारण की। प्रकरण में अग्रिम आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जा रही है। उक्त व्यक्ति से आर्मी *इंटेलिजेंस यूनिट एवं सी0एम0पी0* द्वारा भी पूछताछ की जा रही है। *पुलिस टीम:-* उ0नि0 केदार सिंह राणा का0 चालक दीपक कुंवर1
- विडियो देखें- बांदा (उत्तर प्रदेश) यह मामला बांदा जिले के बड़ोखर खुर्द ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय बजरंग पुरवा का है। पुलिस ने भाजपा के सेक्टर प्रभारी सतानंद (सत्यानंद यादव) और उनके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपी सतानंद पर आरोप है कि उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को शराब के नशे में स्कूल परिसर में घुसकर शिक्षकों के साथ गाली-गलौज और मारपीट की। जब शिक्षकों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने स्कूल की पत्रावली (रिकॉर्ड) भी फाड़ दी। इस मारपीट में शिक्षक विवेक दीक्षित को गंभीर चोटें आईं और उनके हाथ में फ्रैक्चर हो गया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और शिक्षक संगठनों के भारी विरोध के बाद, शहर कोतवाली पुलिस ने प्रधानाचार्य बृजेंद्र कुमार सिंह की तहरीर पर मामला दर्ज किया है। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भाजपा नेताओं की चुप्पी और आरोपी द्वारा गिरफ्तारी से बचने की कोशिशों की खबरें भी चर्चा में हैं। शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे स्कूल बंद कर आंदोलन करेंगे।1
- बिग ब्रेकिंग............ पीलीभीत।पूरनपुर में दिनदहाड़े मकान पर कब्जे की कोशिश, कानून व्यवस्था पर उठे सवाल—खुलेआम दबंगई से दहशत में लोग। सरेआम कब्जे के प्रयास का सीसीटीवी फुटैज सोशल मीडिया पर वायरल।1
- अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर रविवार को भगवान परशुराम की भव्य शोभायात्रा बड़े ही धूमधाम और उत्साह के साथ निकाली गई। शोभायात्रा में ब्राह्मण समाज के लोगों की भारी भागीदारी रही, जिससे पूरे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा का शुभारंभ शहर के त्रिलोकी नाथ मंदिर से हुआ, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद भगवान परशुराम की झांकी को रवाना किया गया। यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः मंदिर परिसर में संपन्न हुई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान ब्राह्मण समाज के लोगों ने भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाने और समाज में एकता, धर्म और संस्कृति को बनाए रखने का संदेश दिया। शोभायात्रा में शामिल लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला और जयकारों से पूरा नगर गूंज उठा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।1
- रविवार को खूबसूरत शुक्र ग्रह और चंद्रमा एक दूसरे के करीब पहुंच गए। यह नजारा बेहद खूबसूरत था।4