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माल पुलिस के द्वारा नबीपनाह चौराहे पर चलाया गया विशेष वाहन चेकिंग अभियान किसने पटाका साइलेंसर चेक किए गए .. माल पुलिस ने नबीपनाह चौराहे पर शनिवार, 12 सितंबर 2026 को एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस अभियान के तहत गाड़ियों में लगे पटाखा साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न की जांच की गई। चेकिंग के दौरान एक बुलेट मोटरसाइकिल में पटाखा साइलेंसर लगा पाया गया। सब-इंस्पेक्टर हरिओम राणा, सब-इंस्पेक्टर दीपक, सिपाही आशीष और सिपाही दानिश ने तेजी दिखाते हुए तुरंत साइलेंसर को हटवाया। गाड़ी चालक को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। पुलिस ने बताया कि अगर अगली बार ऐसा करते पकड़ा गया, तो उस पर भारी चालान किया जाएगा। आसपास के लोगों ने माल पुलिस के इस अभियान की तारीफ की।
अभिषेक कुमार अवस्थी
माल पुलिस के द्वारा नबीपनाह चौराहे पर चलाया गया विशेष वाहन चेकिंग अभियान किसने पटाका साइलेंसर चेक किए गए .. माल पुलिस ने नबीपनाह चौराहे पर शनिवार, 12 सितंबर 2026 को एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस अभियान के तहत गाड़ियों में लगे पटाखा साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न की जांच की गई। चेकिंग के दौरान एक बुलेट मोटरसाइकिल में पटाखा साइलेंसर लगा पाया गया। सब-इंस्पेक्टर हरिओम राणा, सब-इंस्पेक्टर दीपक, सिपाही आशीष और सिपाही दानिश ने तेजी दिखाते हुए तुरंत साइलेंसर को हटवाया। गाड़ी चालक को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। पुलिस ने बताया कि अगर अगली बार ऐसा करते पकड़ा गया, तो उस पर भारी चालान किया जाएगा। आसपास के लोगों ने माल पुलिस के इस अभियान की तारीफ की।
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- # सुखेता नदी से निकले नाले में दिखा मगरमच्छ, ग्रामीणों में दहशत ### हुंसेपुर करमाया गांव के पास बड़ी पुलिया रोड पर नजर आया मगरमच्छ, ग्रामीणों ने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था की मांग की टोडरपुर/हरदोई।* टोडरपुर विकासखंड क्षेत्र के हुंसेपुर करमाया गांव में सुखेता नदी से निकले नाले के पास बड़ी पुलिया रोड पर मगरमच्छ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। मगरमच्छ नजर आने की सूचना गांव में फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। इसके बाद आसपास के ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। बताया गया कि कुछ ग्रामीणों की नजर पुलिया के पास मौजूद मगरमच्छ पर पड़ी। मगरमच्छ दिखाई देने के बाद लोग उस ओर जाने से बच रहे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि यदि मगरमच्छ नाले से निकलकर आबादी या आसपास के इलाके में पहुंच गया तो परेशानी बढ़ सकती है। ग्रामीणों के मुताबिक, इस रास्ते से लोग रोजाना विभिन्न कार्यों के लिए आवागमन करते हैं। कई बार छोटे बच्चे भी इसी मार्ग से आते-जाते हैं। ऐसे में मगरमच्छ की मौजूदगी से हादसे की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने बच्चों को विशेष रूप से मगरमच्छ के आसपास न जाने की हिदायत दी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और लोगों को सतर्क करने की मांग की है। साथ ही मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से पकड़कर उसके प्राकृतिक और सुरक्षित स्थान पर छोड़े जाने की व्यवस्थ1
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- भय मुक्त प्रदेश = उत्तर प्रदेश? या सिर्फ एक खोखला दावा। राजधानी लखनऊ में सरेशाम गोलीकांड, गोंडा में हत्या और कार्रवाई के लिए सरकार के ही मंत्री को धरने पर बैठना पड़ा—फिर सवाल उठता है कि आखिर उत्तर प्रदेश में कानून का राज किसके लिए है? उत्तर प्रदेश सरकार लगातार “भयमुक्त प्रदेश” का दावा करती है, लेकिन जमीन पर सामने आ रही घटनाएं इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। शुक्रवार शाम राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद थाना क्षेत्र में ढेंढेमऊ गांव के पास पेट्रोल पंप के सामने एक LIC एजेंट समरेंद्र कुमार को दो हथियारबंद बदमाशों ने गोली मार दी। हमलावर असलहा लहराते हुए फरार हो गए। पुलिस CCTV और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच की बात कह रही है। यह घटना उस राजधानी की है, जहां से पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था चलती है। और इससे ठीक पहले गोंडा में बर्तन कारोबारी विनोद कुमार साहनी पर हमला हुआ, जिनकी इलाज के दौरान लखनऊ के KGMU में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और लापरवाही के आरोप में पुलिसकर्मियों पर भी कार्रवाई की गई है। लेकिन इस मामले ने सरकार के लिए सबसे असहज सवाल तब खड़ा कर दिया, जब सत्तारूढ़ गठबंधन के ही मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद को विनोद साहनी के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर धरने पर बैठना पड़ा। सोचिए… अगर सरकार के मंत्री को ही न्याय और कार्रवाई के लिए धरना देना पड़े, तो आम आदमी किस दरवाजे पर जाए? यह सिर्फ एक हत्या या एक गोलीकांड का सवाल नहीं है। सवाल है कि पुलिस प्रशासन अपराध होने से पहले सक्रिय क्यों नहीं दिखता? सवाल है कि शिकायतों और विवादों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता? सवाल है कि जब घटना हो जाती है, तब कार्रवाई करने के बजाय पहले से रोकथाम की व्यवस्था क्यों नहीं दिखाई देती? गोंडा मामले में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होना इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक स्तर पर भी लापरवाही के आरोपों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार को सिर्फ अपराधियों की गिरफ्तारी गिनाने से आगे बढ़कर जनता को यह बताना होगा कि अपराध रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी और वह जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई गई? भयमुक्त प्रदेश का दावा विज्ञापन और भाषणों से नहीं, बल्कि उस आम नागरिक के भरोसे से साबित होगा जो शाम को घर से निकलते समय यह महसूस करे कि कानून उसके साथ खड़ा है। आज सवाल विपक्ष का नहीं है। आज सवाल जनता की सुरक्षा का है। उत्तर प्रदेश सरकार जवाब दे— अगर राजधानी लखनऊ में सरेशाम गोलियां चल रही हैं, गोंडा में हत्या हो रही है और कार्रवाई के लिए सरकार के ही मंत्री को धरने पर बैठना पड़ रहा है, तो फिर “भय मुक्त प्रदेश” का दावा आखिर किस आधार पर किया जा रहा है? जनता को नारा नहीं, सुरक्षित माहौल चाहिए। दावा नहीं, जवाबदेही चाहिए। और सबसे जरूरी—कानून का राज चाहिए।1
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