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dhul gandgi pollution bhowra ma humsa dhul urta rhata hai Bhowra ma dhul sa prashan damping kar na ka waja sa ya dhul nikalta hai

18 hrs ago
user_Vikash kumar
Vikash kumar
झरिया-कम-जोरापोखर-कम-सिंदरी, धनबाद, झारखंड•
18 hrs ago

dhul gandgi pollution bhowra ma humsa dhul urta rhata hai Bhowra ma dhul sa prashan damping kar na ka waja sa ya dhul nikalta hai

More news from झारखंड and nearby areas
  • देवलेश्वर धाम में सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ा आस्था का सैलाब जामताड़ा:जिले में सावन की तीसरी सोमवारी पर नाला प्रखंड के देवली स्थित प्रसिद्ध बाबा देवलेश्वर धाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बांग्ला श्रावण माह की अंतिम सोमवारी और हिंदी श्रावण माह की तीसरी सोमवारी के मौके पर अहले सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। लगातार हो रही बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। मंदिर परिसर में करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार लगी रही और पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव तथा बोल बम के जयकारों से गूंजता रहा। पौ फटते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई, जो दिन चढ़ने के साथ लगातार लंबी होती चली गई। महिला-पुरुष श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में कांवरिया भी बाबा देवलेश्वर के जलाभिषेक के लिए पहुंचे। कई कांवरिया महेशमुंडा स्थित अजय नदी से कांवर में जल लेकर पैदल देवलेश्वर धाम पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया। श्रद्धालुओं ने बाबा देवलेश्वर पर जल, दूध, बेलपत्र, फूल सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने पर शाष्टांग दंडवत करते हुए मंदिर पहुंचे। सुबह से लगातार हो रही बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था अडिग रही। बारिश में भी लोग कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और शिव के जयकारों से माहौल पूरी तरह शिवमय बना रहा। नाला क्षेत्र में बांग्ला पंचांग के अनुसार आयोजित होने वाले श्रावणी मेले को लेकर आसपास के क्षेत्रों में भी भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन और मंदिर कमेटी की ओर से सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस पदाधिकारी, जवान और चौकीदारों के साथ कमेटी के सदस्य लगातार तैनात रहे। कमेटी के सदस्यों ने भी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से जलाभिषेक कराने में सक्रिय भूमिका निभाई। देवलेश्वर धाम जिले के प्रमुख शिवालयों में शामिल है। श्रावणी मेले के दौरान हर वर्ष जामताड़ा के अलावा आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस बार सोमवारी पर भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र मेले जैसा नजर आया। देवलेश्वर धाम में महीनों तक चलने वाले अखंड हरिनाम संकीर्तन का भी आयोजन किया जा रहा है। इससे पूरे सावन मंदिर परिसर में धार्मिक और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। सोमवारी के दिन देर तक श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने और बाबा देवलेश्वर के दर्शन एवं जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा।
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    देवलेश्वर धाम में सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ा आस्था का सैलाब

जामताड़ा:जिले में सावन की तीसरी सोमवारी पर नाला प्रखंड के देवली स्थित प्रसिद्ध बाबा देवलेश्वर धाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बांग्ला श्रावण माह की अंतिम सोमवारी और हिंदी श्रावण माह की तीसरी सोमवारी के मौके पर अहले सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचने लगे। लगातार हो रही बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। मंदिर परिसर में करीब तीन किलोमीटर लंबी कतार लगी रही और पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव तथा बोल बम के जयकारों से गूंजता रहा।
पौ फटते ही मंदिर में श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई, जो दिन चढ़ने के साथ लगातार लंबी होती चली गई। महिला-पुरुष श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में कांवरिया भी बाबा देवलेश्वर के जलाभिषेक के लिए पहुंचे। कई कांवरिया महेशमुंडा स्थित अजय नदी से कांवर में जल लेकर पैदल देवलेश्वर धाम पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
श्रद्धालुओं ने बाबा देवलेश्वर पर जल, दूध, बेलपत्र, फूल सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद मंदिर परिसर में स्थापित अन्य देवी-देवताओं की भी पूजा कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। कई श्रद्धालु मनोकामना पूर्ण होने पर शाष्टांग दंडवत करते हुए मंदिर पहुंचे।
सुबह से लगातार हो रही बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था अडिग रही। बारिश में भी लोग कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और शिव के जयकारों से माहौल पूरी तरह शिवमय बना रहा। नाला क्षेत्र में बांग्ला पंचांग के अनुसार आयोजित होने वाले श्रावणी मेले को लेकर आसपास के क्षेत्रों में भी भक्तिमय वातावरण बना रहा।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन और मंदिर कमेटी की ओर से सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस पदाधिकारी, जवान और चौकीदारों के साथ कमेटी के सदस्य लगातार तैनात रहे। कमेटी के सदस्यों ने भी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से जलाभिषेक कराने में सक्रिय भूमिका निभाई।
देवलेश्वर धाम जिले के प्रमुख शिवालयों में शामिल है। श्रावणी मेले के दौरान हर वर्ष जामताड़ा के अलावा आसपास के जिलों और दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस बार सोमवारी पर भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र मेले जैसा नजर आया।
देवलेश्वर धाम में महीनों तक चलने वाले अखंड हरिनाम संकीर्तन का भी आयोजन किया जा रहा है। इससे पूरे सावन मंदिर परिसर में धार्मिक और भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। सोमवारी के दिन देर तक श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने और बाबा देवलेश्वर के दर्शन एवं जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा।
    user_Suman Bhattacharjee
    Suman Bhattacharjee
    Local News Reporter जामताड़ा, जामताड़ा, झारखंड•
    15 hrs ago
  • डकाय दुबे बाबा का आज वार्षिक महोत्सव में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे उनके दरबार।
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    डकाय दुबे बाबा का आज वार्षिक महोत्सव में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे उनके दरबार।
    user_यूके न्यूज जामताड़ा,(झारखंड)
    यूके न्यूज जामताड़ा,(झारखंड)
    जामताड़ा, जामताड़ा, झारखंड•
    17 hrs ago
  • क्यों मनाते हैं हम मनसा पूजा, क्या है इस पारम्परिक पुजा पीछे का कहानी मनसा पूजा झारखंड, बंगाल, असम और बिहार में मानसून के मौसम में मनाई जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पारंपरिक लोक पूजा है। नागों की देवी माता मनसा (जो भगवान शिव की मानसी पुत्री और वासुकी नाग की बहन हैं) को समर्पित यह पर्व मुख्य रूप से सर्प-दंश से रक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि की समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है। ​मनसा पूजा मनाने के पीछे के धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक कारण ओर ​पौराणिक महत्व क्या हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनसा देवी सर्पों की देवी हैं। ऐसी मान्यता है कि मनसा पूजा करने से विषैले सांपों का भय समाप्त हो जाता है और वे परिवार के किसी भी सदस्य को हानि नहीं पहुँचाते। ​मनसा देवी को भगवान शिव की पुत्री और आस्तिक ऋषि की माता के रूप में पूजा जाता है। इन्हें महाज्ञान और तंत्र-मंत्र की देवी भी माना जाता है, जो अपने भक्तों की हर विपत्ति से रक्षा करती हैं। ​ मनसा पूजा मुख्य रूप से सावन और भाद्रपद महीने में नागपंचमी या उसके आसपास के दिनों में मनाई जाती है। यह समय मानसून का होता है, जब लगातार बारिश के कारण जमीन के अंदर पानी भर जाने से सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों और इंसानी बस्तियों की ओर आने लगते हैं। ऐतिहासिक रूप से इस पूजा का उद्देश्य प्रकृति के जीवों (विशेषकर सर्पों) के प्रति भय को श्रद्धा और संतुलन में बदलना था। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि मनुष्य को प्रकृति और उसके जीव-जंतुओं के साथ सामंजस्य बनाकर कैसे रहना चाहिए। मनसा पूजा अंधविश्वास या भय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीव-जंतुओं (सर्पों) और मानव जीवन के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाने वाला एक अनूठा लोक पर्व है। यह हमें सिखाता है कि कैसे प्राचीन समाजों ने डर को पूजा और सम्मान के माध्यम से एक सकारात्मक जीवन-दृष्टि में बदल दिया था।मनसा पूजा के पीछे की सबसे प्रसिद्ध और मुख्य पौराणिक कथा चंपकनगर के व्यापारी चन्दन (या चांद सादगर) और माता मनसा के बीच के संघर्ष और अंततः उनकी भक्ति की विजय पर आधारित है। यह कथा प्रसिद्ध बंगाली महाकाव्य 'मनसा मंगल' और 'पद्म पुराण' में विस्तार से मिलती है। ​ पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनसा देवी की उत्पत्ति भगवान शिव के मन से हुई थी, इसलिए उनका नाम 'मनसा' पड़ा। नागराज वासुकी उनके भाई और ऋषि आस्तिक उनके पुत्र थे। ​चांद सादगर का अड़ियल रवैया: चंपकनगर के एक अत्यंत शक्तिशाली और शिवजी के अनन्य भक्त व्यापारी थे—चांद सादगर। वे भगवान शिव के अलावा किसी अन्य देवी-देवता की पूजा नहीं करते थे। मनसा देवी चाहती थीं कि धरती पर उनकी पूजा का विस्तार हो और चांद सादगर उन्हें अपनी इष्ट देवी के रूप में स्वीकार करें, लेकिन चांद सादगर ने अपनी जिद के कारण मनसा देवी को पूजने से लगातार इनकार कर दिया। ​मनसा देवी का प्रकोप और पुत्रों की मृत्यु ​चांद सादगर के अहंकार और पूजा न करने से क्रोधित होकर मनसा देवी ने उनके जीवन में एक के बाद एक कई संकट खड़े किए। ​देवी के प्रकोप के कारण चांद सादगर के सातों पुत्रों की मृत्यु एक-एक करके विषैले सांपों के काटने से हो गई। यहाँ तक कि उनका पूरा व्यापार और वैभव भी नष्ट हो गया, लेकिन इसके बावजूद चांद सादगर ने हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प पर अडिग रहे। ​चांद सादगर के सबसे छोटे पुत्र लखाइ (लखिंदर) का विवाह बेहुला नाम की एक कन्या से हुआ। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि विवाह की रात ही लखाइ को सांप डस लेगा। ​इसे टालने के लिए चांद सादगर ने एक पूरी तरह से सुरक्षित लोहे का घर (लोहगढ़) बनवाया, जिसमें हवा का भी प्रवेश न हो सके। ​इसके बावजूद, मनसा देवी की माया से एक सूक्ष्म रूपी नाग (या एक छोटी सी दरार के जरिए) उस घर में प्रवेश कर गया और सोते हुए लखाइ को डस लिया, जिससे उसकी भी मृत्यु हो गई। उस समय की लोक प्रथा के अनुसार, सांप के काटे व्यक्ति को दफनाया या जलाया नहीं जाता था, बल्कि उसे एक बेड़े पर रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया जाता था। ​पति की मृत्यु से विचलित हुए बिना, सती बेहुला ने अपने मृत पति के शरीर के साथ एक बांस के बेड़े पर बैठकर पानी में लंबी और कठिन यात्रा शुरू की। महीनों तक बहते हुए वह बेड़ा देवी मनसा के लोक तक जा पहुँचा। बेहुला के इस अटूट प्रेम, पति-भक्ति और असाधारण साहस को देखकर माता मनसा पिघल गईं। ​मनसा देवी ने बेहुला के पति समेत उनके पति के सभी सातों भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया और चांद सादगर के नष्ट हुए वैभव को वापस लौटा दिया। ​अंततः, चांद सादगर को देवी की शक्ति का अहसास हुआ और उन्होंने अपने बाएं हाथ के अंगूठे से (या अपनी सीधी पूजा के बजाय उल्टे हाथ से) माता मनसा को पहला पुष्पांजलि अर्पित किया। ​इसी ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंग के बाद से धरती पर नागों की देवी मनसा की पूजा विधि-विधान से शुरू हुई, जो आज भी लोक-संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
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    क्यों मनाते हैं हम मनसा पूजा, क्या है इस पारम्परिक पुजा पीछे का कहानी 

मनसा पूजा झारखंड, बंगाल, असम और बिहार में मानसून के मौसम में मनाई जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पारंपरिक लोक पूजा है। नागों की देवी माता मनसा (जो भगवान शिव की मानसी पुत्री और वासुकी नाग की बहन हैं) को समर्पित यह पर्व मुख्य रूप से सर्प-दंश से रक्षा, स्वास्थ्य, और कृषि की समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है।
​मनसा पूजा मनाने के पीछे के धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक कारण ओर 
​पौराणिक महत्व क्या हैं. 
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनसा देवी सर्पों की देवी हैं। ऐसी मान्यता है कि मनसा पूजा करने से विषैले सांपों का भय समाप्त हो जाता है और वे परिवार के किसी भी सदस्य को हानि नहीं पहुँचाते।
​मनसा देवी को भगवान शिव की पुत्री और आस्तिक ऋषि की माता के रूप में पूजा जाता है। इन्हें महाज्ञान और तंत्र-मंत्र की देवी भी माना जाता है, जो अपने भक्तों की हर विपत्ति से रक्षा करती हैं।
​ मनसा पूजा मुख्य रूप से सावन और भाद्रपद महीने में नागपंचमी या उसके आसपास के दिनों में मनाई जाती है। यह समय मानसून का होता है, जब लगातार बारिश के कारण जमीन के अंदर पानी भर जाने से सांप अपने बिलों से बाहर निकलकर सुरक्षित स्थानों और इंसानी बस्तियों की ओर आने लगते हैं।
ऐतिहासिक रूप से इस पूजा का उद्देश्य प्रकृति के जीवों (विशेषकर सर्पों) के प्रति भय को श्रद्धा और संतुलन में बदलना था। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि मनुष्य को प्रकृति और उसके जीव-जंतुओं के साथ सामंजस्य बनाकर कैसे रहना चाहिए।
मनसा पूजा अंधविश्वास या भय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीव-जंतुओं (सर्पों) और मानव जीवन के बीच के नाजुक संतुलन को दर्शाने वाला एक अनूठा लोक पर्व है। यह हमें सिखाता है कि कैसे प्राचीन समाजों ने डर को पूजा और सम्मान के माध्यम से एक सकारात्मक जीवन-दृष्टि में बदल दिया था।मनसा पूजा के पीछे की सबसे प्रसिद्ध और मुख्य पौराणिक कथा चंपकनगर के व्यापारी चन्दन (या चांद सादगर) और माता मनसा के बीच के संघर्ष और अंततः उनकी भक्ति की विजय पर आधारित है। यह कथा प्रसिद्ध बंगाली महाकाव्य 'मनसा मंगल' और 'पद्म पुराण' में विस्तार से मिलती है।
​ पौराणिक कथाओं के अनुसार, मनसा देवी की उत्पत्ति भगवान शिव के मन से हुई थी, इसलिए उनका नाम 'मनसा' पड़ा। नागराज वासुकी उनके भाई और ऋषि आस्तिक उनके पुत्र थे।
​चांद सादगर का अड़ियल रवैया: चंपकनगर के एक अत्यंत शक्तिशाली और शिवजी के अनन्य भक्त व्यापारी थे—चांद सादगर। वे भगवान शिव के अलावा किसी अन्य देवी-देवता की पूजा नहीं करते थे। मनसा देवी चाहती थीं कि धरती पर उनकी पूजा का विस्तार हो और चांद सादगर उन्हें अपनी इष्ट देवी के रूप में स्वीकार करें, लेकिन चांद सादगर ने अपनी जिद के कारण मनसा देवी को पूजने से लगातार इनकार कर दिया।
​मनसा देवी का प्रकोप और पुत्रों की मृत्यु
​चांद सादगर के अहंकार और पूजा न करने से क्रोधित होकर मनसा देवी ने उनके जीवन में एक के बाद एक कई संकट खड़े किए।
​देवी के प्रकोप के कारण चांद सादगर के सातों पुत्रों की मृत्यु एक-एक करके विषैले सांपों के काटने से हो गई। यहाँ तक कि उनका पूरा व्यापार और वैभव भी नष्ट हो गया, लेकिन इसके बावजूद चांद सादगर ने हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प पर अडिग रहे।
​चांद सादगर के सबसे छोटे पुत्र लखाइ (लखिंदर) का विवाह बेहुला नाम की एक कन्या से हुआ। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि विवाह की रात ही लखाइ को सांप डस लेगा।
​इसे टालने के लिए चांद सादगर ने एक पूरी तरह से सुरक्षित लोहे का घर (लोहगढ़) बनवाया, जिसमें हवा का भी प्रवेश न हो सके।
​इसके बावजूद, मनसा देवी की माया से एक सूक्ष्म रूपी नाग (या एक छोटी सी दरार के जरिए) उस घर में प्रवेश कर गया और सोते हुए लखाइ को डस लिया, जिससे उसकी भी मृत्यु हो गई।
उस समय की लोक प्रथा के अनुसार, सांप के काटे व्यक्ति को दफनाया या जलाया नहीं जाता था, बल्कि उसे एक बेड़े पर रखकर नदी में प्रवाहित कर दिया जाता था।
​पति की मृत्यु से विचलित हुए बिना, सती बेहुला ने अपने मृत पति के शरीर के साथ एक बांस के बेड़े पर बैठकर पानी में लंबी और कठिन यात्रा शुरू की। महीनों तक बहते हुए वह बेड़ा देवी मनसा के लोक तक जा पहुँचा।
बेहुला के इस अटूट प्रेम, पति-भक्ति और असाधारण साहस को देखकर माता मनसा पिघल गईं।
​मनसा देवी ने बेहुला के पति समेत उनके पति के सभी सातों भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया और चांद सादगर के नष्ट हुए वैभव को वापस लौटा दिया।
​अंततः, चांद सादगर को देवी की शक्ति का अहसास हुआ और उन्होंने अपने बाएं हाथ के अंगूठे से (या अपनी सीधी पूजा के बजाय उल्टे हाथ से) माता मनसा को पहला पुष्पांजलि अर्पित किया।
​इसी ऐतिहासिक और पौराणिक प्रसंग के बाद से धरती पर नागों की देवी मनसा की पूजा विधि-विधान से शुरू हुई, जो आज भी लोक-संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
    user_प्रेम कुमार *पत्रकार*
    प्रेम कुमार *पत्रकार*
    Local News Reporter बाघमारा-कम-कटरास, धनबाद, झारखंड•
    14 hrs ago
  • गांडेय पंचायत अंतर्गत कल्याणपुर गांव स्थित खेल मैदान में एक दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबले के साथ हुआ समापन गांडेय पंचायत अंतर्गत कल्याणपुर गांव स्थित खेल मैदान में सोमवार सुबह आयोजित पंचायत स्तरीय एक दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबले के साथ सोमवार की शाम 6 बजे शानदार समापन हुआ। प्रतियोगिता में कुल आठ टीमों ने हिस्सा लिया।
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    गांडेय पंचायत अंतर्गत कल्याणपुर गांव स्थित खेल मैदान में एक दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबले के साथ हुआ समापन
गांडेय पंचायत अंतर्गत कल्याणपुर गांव स्थित खेल मैदान में सोमवार सुबह आयोजित पंचायत स्तरीय एक दिवसीय फुटबॉल टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबले के साथ सोमवार की शाम 6 बजे शानदार समापन हुआ। प्रतियोगिता में कुल आठ टीमों ने हिस्सा लिया।
    user_Shivani Seth
    Shivani Seth
    गंडे, गिरिडीह, झारखंड•
    6 hrs ago
  • खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में झामुमो की बैठक, आंदोलन की चेतावनी डुमरी/गिरिडीह । झामुमो के प्रधान कार्यालय, करियारी में पार्टी की प्रखंड कमिटी की बैठक सोमवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार महतो उर्फ राजू ने की। यह बैठक केंद्र सरकार द्वारा पारित _खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026_ के विरोध में आयोजित की गई थी। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिलाध्यक्ष संजय सिंह और केंद्रीय समिति सदस्य अखिलेश महतो उर्फ राजू उपस्थित रहे। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पारित विधेयक का जमकर विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार यह विधेयक वापस नहीं लेती है, तो उसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने यह भी कहा कि झारखंड से खनिज संपदा को बाहर जाने से रोका जाएगा।बैठक में जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार उर्फ पप्पू, जिला सचिव महाल सोरेन, प्रमुख उषा देवी, बरकत अली, उप प्रमुख उपेंद्र महतो, डेगलाल महतो, संध्या राज, विजय यादव, संजय मेहता, मिथलेश महतो, भोली महतो, अनिल रजक, शमसुद्दीन अंसारी, डेगनारायण महतो, खिरोधर यादव, अख्तर अंसारी, करामत हुसैन, गौरी शंकर प्रसाद, रीतलाल मंडल, संजय कुमार वर्मा, जलील अंसारी, टहलू साव, मोहम्मद खुर्शीद, कमलापति मंडल, मनीष रजक, सतीश मंडल, गुलाम सरवर आदि उपस्थित थे।
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    खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में झामुमो की बैठक, आंदोलन की चेतावनी
डुमरी/गिरिडीह । झामुमो के प्रधान कार्यालय, करियारी में पार्टी की प्रखंड कमिटी की बैठक सोमवार को हुई। बैठक की अध्यक्षता पार्टी के प्रखंड अध्यक्ष राजकुमार महतो उर्फ राजू ने की। यह बैठक केंद्र सरकार द्वारा पारित _खान एवं खनिज संशोधन विधेयक 2026_ के विरोध में आयोजित की गई थी। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में जिलाध्यक्ष संजय सिंह और केंद्रीय समिति सदस्य अखिलेश महतो उर्फ राजू उपस्थित रहे। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा पारित विधेयक का जमकर विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि केंद्र सरकार यह विधेयक वापस नहीं लेती है, तो उसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा। नेताओं ने यह भी कहा कि झारखंड से खनिज संपदा को बाहर जाने से रोका जाएगा।बैठक में जिला उपाध्यक्ष अजीत कुमार उर्फ पप्पू, जिला सचिव महाल सोरेन, प्रमुख उषा देवी, बरकत अली, उप प्रमुख उपेंद्र महतो, डेगलाल महतो, संध्या राज, विजय यादव, संजय मेहता, मिथलेश महतो, भोली महतो, अनिल रजक, शमसुद्दीन अंसारी, डेगनारायण महतो, खिरोधर यादव, अख्तर अंसारी, करामत हुसैन, गौरी शंकर प्रसाद, रीतलाल मंडल, संजय कुमार वर्मा, जलील अंसारी, टहलू साव, मोहम्मद खुर्शीद, कमलापति मंडल, मनीष रजक, सतीश मंडल, गुलाम सरवर आदि उपस्थित थे।
    user_Ajay Kumar Rajak
    Ajay Kumar Rajak
    Local News Reporter डुमरी, गिरिडीह, झारखंड•
    8 hrs ago
  • राष्ट्रीय जनता दल पार्टी के रानेश्वर प्रखंड अध्यक्ष पर हुए केस का आज है जजमेंट रानेश्वर दुमका
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    राष्ट्रीय जनता दल पार्टी के रानेश्वर प्रखंड अध्यक्ष पर हुए केस का आज है जजमेंट
रानेश्वर दुमका
    user_मो० साबिर अंसारी
    मो० साबिर अंसारी
    रानीश्वर, दुमका, झारखंड•
    12 hrs ago
  • अह वीडियो देवघर का है बिना हेलमेट के घूम रहे पुलिस वाला आम पब्लिक के लिए कानून बना है पुलिस प्रशासन के लिए नहीं आप लोग कमेंट राय बताए
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    अह वीडियो देवघर का है बिना हेलमेट के घूम रहे पुलिस वाला 
आम पब्लिक के लिए कानून बना है पुलिस प्रशासन के लिए नहीं 
आप लोग कमेंट राय बताए
    user_Jharkhand ka new khabar
    Jharkhand ka new khabar
    Voice of people सोना राय थरही, देवघर, झारखंड•
    14 hrs ago
  • कॉलेज के काम से निकले बिपुल घर वापस नहीं लौटे... BBM कॉलेज के पास दर्दनाक हादसा! #DhanbadNews #AccidentNews
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    कॉलेज के काम से निकले बिपुल घर वापस नहीं लौटे... BBM कॉलेज के पास दर्दनाक हादसा! 

#DhanbadNews #AccidentNews
    user_The KB Live
    The KB Live
    मसालिया, दुमका, झारखंड•
    15 hrs ago
  • दलाही चेक डैम का खौफनाक सच: क्या यह मस्ती है या मौत को बुलावा? #SafetyFirst #PublicAwareness #DalahiCheckDam दुमका जिला के मसलिया प्रखण्ड अंतर्गत दलाही चेकडैम में स्कूली बच्चे मजा कर रहे है।उन्हें अंदाजा तक नही कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
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    दलाही चेक डैम का खौफनाक सच: क्या यह मस्ती है या मौत को बुलावा? 

#SafetyFirst #PublicAwareness #DalahiCheckDam


दुमका जिला के मसलिया प्रखण्ड अंतर्गत दलाही चेकडैम में स्कूली बच्चे मजा कर रहे है।उन्हें अंदाजा तक नही कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
    user_The KB Live
    The KB Live
    मसालिया, दुमका, झारखंड•
    18 hrs ago
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