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लोकतंत्र की हत्या या राजनीतिक प्रतिशोध? आधी रात को खुला विधानसभा सचिवालय, कांग्रेस का भारी हंगामा भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग और राजनीतिक विद्वेष की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है। ताजा मामला कांग्रेस विधायक श्री राजेंद्र भारती की सदस्यता को आनन-फानन में खत्म करने की कोशिशों से जुड़ा है। आधी रात को खुला सचिवालय: कांग्रेस का कड़ा विरोध कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के दबाव में विधानसभा सचिवालय को देर रात खोला गया ताकि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा सके। घटना की भनक लगते ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री पीसी शर्मा तत्काल सचिवालय पहुँचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों से इस असामान्य कार्रवाई पर सवाल किए, जिसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सका। मुख्य आरोप और घटनाक्रम: सत्ता का दुरुपयोग: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था (विधानसभा सचिवालय) ने भाजपा सरकार के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। अलोकतांत्रिक रवैया: सचिवालय को रात के समय खोलकर की जा रही कार्रवाई को कांग्रेस ने "लोकतंत्र को कुचलने वाला कृत्य" करार दिया है। अराजकता और गुंडागर्दी: जीतू पटवारी ने सरकार की इस हठधर्मिता को भाजपा की 'गुंडागर्दी' बताते हुए कहा कि प्रदेश में अराजकता का माहौल है। "पूरी ताकत से लड़ेंगे" – जीतू पटवारी मीडिया से बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा: "भाजपा राजनीतिक विद्वेष की भावना से काम कर रही है। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि की सदस्यता को खत्म करने के लिए जिस तरह से तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह अस्वीकार्य है। कांग्रेस इस तानाशाही का पूरी ताकत से मुकाबला करेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक लड़ेगी।" निष्कर्ष: इस घटना ने मध्य प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने और कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है। विधानसभा सचिवालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहे ये सवाल प्रदेश की संवैधानिक मर्यादा के लिए चिंता का विषय बन गए हैं

3 hrs ago
user_Deepak Vishawakarma
Deepak Vishawakarma
Photographer Panagar, Jabalpur•
3 hrs ago

लोकतंत्र की हत्या या राजनीतिक प्रतिशोध? आधी रात को खुला विधानसभा सचिवालय, कांग्रेस का भारी हंगामा भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग और राजनीतिक विद्वेष की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है। ताजा मामला कांग्रेस विधायक श्री राजेंद्र भारती की सदस्यता को आनन-फानन में खत्म करने की कोशिशों से जुड़ा है। आधी रात को खुला सचिवालय: कांग्रेस का कड़ा विरोध कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के दबाव में विधानसभा सचिवालय को देर रात खोला गया ताकि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा सके। घटना की भनक लगते ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री पीसी शर्मा तत्काल सचिवालय पहुँचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों से इस असामान्य कार्रवाई पर सवाल किए, जिसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सका। मुख्य आरोप और घटनाक्रम: सत्ता का दुरुपयोग: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था (विधानसभा सचिवालय) ने भाजपा सरकार के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। अलोकतांत्रिक रवैया: सचिवालय को रात के समय खोलकर की जा रही कार्रवाई को कांग्रेस ने "लोकतंत्र को कुचलने वाला कृत्य" करार दिया है। अराजकता और गुंडागर्दी: जीतू पटवारी ने सरकार की इस हठधर्मिता को भाजपा की 'गुंडागर्दी' बताते हुए कहा कि प्रदेश में अराजकता का माहौल है। "पूरी ताकत से लड़ेंगे" – जीतू पटवारी मीडिया से बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा: "भाजपा राजनीतिक विद्वेष की भावना से काम कर रही है। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि की सदस्यता को खत्म करने के लिए जिस तरह से तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह अस्वीकार्य है। कांग्रेस इस तानाशाही का पूरी ताकत से मुकाबला करेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक लड़ेगी।" निष्कर्ष: इस घटना ने मध्य प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने और कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है। विधानसभा सचिवालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहे ये सवाल प्रदेश की संवैधानिक मर्यादा के लिए चिंता का विषय बन गए हैं

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  • भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग और राजनीतिक विद्वेष की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है। ताजा मामला कांग्रेस विधायक श्री राजेंद्र भारती की सदस्यता को आनन-फानन में खत्म करने की कोशिशों से जुड़ा है। आधी रात को खुला सचिवालय: कांग्रेस का कड़ा विरोध कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के दबाव में विधानसभा सचिवालय को देर रात खोला गया ताकि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा सके। घटना की भनक लगते ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री पीसी शर्मा तत्काल सचिवालय पहुँचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों से इस असामान्य कार्रवाई पर सवाल किए, जिसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सका। मुख्य आरोप और घटनाक्रम: सत्ता का दुरुपयोग: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था (विधानसभा सचिवालय) ने भाजपा सरकार के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं। अलोकतांत्रिक रवैया: सचिवालय को रात के समय खोलकर की जा रही कार्रवाई को कांग्रेस ने "लोकतंत्र को कुचलने वाला कृत्य" करार दिया है। अराजकता और गुंडागर्दी: जीतू पटवारी ने सरकार की इस हठधर्मिता को भाजपा की 'गुंडागर्दी' बताते हुए कहा कि प्रदेश में अराजकता का माहौल है। "पूरी ताकत से लड़ेंगे" – जीतू पटवारी मीडिया से बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा: "भाजपा राजनीतिक विद्वेष की भावना से काम कर रही है। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि की सदस्यता को खत्म करने के लिए जिस तरह से तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह अस्वीकार्य है। कांग्रेस इस तानाशाही का पूरी ताकत से मुकाबला करेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक लड़ेगी।" निष्कर्ष: इस घटना ने मध्य प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने और कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है। विधानसभा सचिवालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहे ये सवाल प्रदेश की संवैधानिक मर्यादा के लिए चिंता का विषय बन गए हैं
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    भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। कांग्रेस ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग और राजनीतिक विद्वेष की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है। ताजा मामला कांग्रेस विधायक श्री राजेंद्र भारती की सदस्यता को आनन-फानन में खत्म करने की कोशिशों से जुड़ा है।
आधी रात को खुला सचिवालय: कांग्रेस का कड़ा विरोध
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के दबाव में विधानसभा सचिवालय को देर रात खोला गया ताकि विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा सके। घटना की भनक लगते ही वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री पीसी शर्मा तत्काल सचिवालय पहुँचे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी भी मौके पर पहुँचे। उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों से इस असामान्य कार्रवाई पर सवाल किए, जिसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिल सका।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम:
सत्ता का दुरुपयोग: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था (विधानसभा सचिवालय) ने भाजपा सरकार के आगे पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं।
अलोकतांत्रिक रवैया: सचिवालय को रात के समय खोलकर की जा रही कार्रवाई को कांग्रेस ने "लोकतंत्र को कुचलने वाला कृत्य" करार दिया है।
अराजकता और गुंडागर्दी: जीतू पटवारी ने सरकार की इस हठधर्मिता को भाजपा की 'गुंडागर्दी' बताते हुए कहा कि प्रदेश में अराजकता का माहौल है।
"पूरी ताकत से लड़ेंगे" – जीतू पटवारी
मीडिया से बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा:
"भाजपा राजनीतिक विद्वेष की भावना से काम कर रही है। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि की सदस्यता को खत्म करने के लिए जिस तरह से तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह अस्वीकार्य है। कांग्रेस इस तानाशाही का पूरी ताकत से मुकाबला करेगी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक लड़ेगी।"
निष्कर्ष: इस घटना ने मध्य प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। विपक्ष अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने और कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रहा है। विधानसभा सचिवालय की कार्यप्रणाली पर उठ रहे ये सवाल प्रदेश की संवैधानिक मर्यादा के लिए चिंता का विषय बन गए हैं
    user_Deepak Vishawakarma
    Deepak Vishawakarma
    Photographer Panagar, Jabalpur•
    3 hrs ago
  • जबलपुर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई रानी लक्ष्मीबाई वार्ड के गौर नदी क्षेत्र में करीब 1500 वर्गफीट में किए गए अतिक्रमण को हटाया गया… जांच में सामने आया कि जहां सिर्फ 450 वर्गफीट निजी जमीन थी, वहां उससे ज्यादा हिस्से पर निर्माण कर सार्वजनिक रास्ता बंद कर दिया गया था… ग्रामीणों की शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने सीमांकन किया… और अतिक्रमण साबित होने पर प्रशासन ने अवैध हिस्से को ढहा दिया… कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा… प्रशासन ने साफ कहा है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा… 👉 अब सवाल ये है… क्या सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ ऐसी सख्ती जरूरी है? 👇 अपनी राय जरूर दें
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    जबलपुर में प्रशासन की बड़ी कार्रवाई 
रानी लक्ष्मीबाई वार्ड के गौर नदी क्षेत्र में करीब 1500 वर्गफीट में किए गए अतिक्रमण को हटाया गया…
जांच में सामने आया कि जहां सिर्फ 450 वर्गफीट निजी जमीन थी, वहां उससे ज्यादा हिस्से पर निर्माण कर सार्वजनिक रास्ता बंद कर दिया गया था…
ग्रामीणों की शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने सीमांकन किया…
और अतिक्रमण साबित होने पर प्रशासन ने अवैध हिस्से को ढहा दिया…
कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा…
प्रशासन ने साफ कहा है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा…
👉 अब सवाल ये है…
क्या सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ ऐसी सख्ती जरूरी है?
👇 अपनी राय जरूर दें
    user_सच तक पत्रिका NEWS
    सच तक पत्रिका NEWS
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • शादीशुदा महिला से बीच सड़क गैंगरेप की कोशिश, पीड़िता बोली- 3 लोगों ने पकड़ा, पुलिस ने लिया एक्शन
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    शादीशुदा महिला से बीच सड़क गैंगरेप की कोशिश, पीड़िता बोली- 3 लोगों ने पकड़ा, पुलिस ने लिया एक्शन
    user_Bbmm time news
    Bbmm time news
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे..
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    वीर हनुमाना अति बलवाना राम नाम रसियो रे..
    user_Sanjay Vishwakarma
    Sanjay Vishwakarma
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • l 👉 1500 वर्गफीट कब्जा मुक्त | रास्ता फिर से खुला 📍 जबलपुर (मध्यप्रदेश) जबलपुर के रानी लक्ष्मीबाई वार्ड स्थित गौर नदी क्षेत्र में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को ढहा दिया। करीब 1500 वर्गफीट में किए गए कब्जे को हटाया गया, जिससे बंद पड़ा रास्ता फिर से खुल गया। --- 📍 क्या है पूरा मामला ▪ सरकारी जमीन (खसरा नंबर 137) पर अतिक्रमण ▪ सिर्फ 450 वर्गफीट निजी जमीन थी ▪ 1500 वर्गफीट में अवैध निर्माण और विस्तार --- ⚠ क्यों हुई कार्रवाई ▪ ग्रामीणों ने रास्ता बंद होने की शिकायत की ▪ नदी तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद ▪ राजस्व विभाग की जांच में अतिक्रमण साबित --- 🚜 प्रशासन की कार्रवाई ▪ अवैध हिस्से पर बुलडोजर चलाया गया ▪ भारी पुलिस बल की मौजूदगी ▪ संयुक्त तहसीलदार और पटवारी टीम मौजूद --- 👤 जमीन से जुड़ी जानकारी ▪ जमीन मूल रूप से दुबे परिवार की थी ▪ वारिस के लापता होने का उठाया गया फायदा ▪ आस्था की आड़ में अवैध निर्माण --- ⚠ प्रशासन की चेतावनी ▪ सरकारी जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं ▪ दोबारा अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई होगी --- 🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा 📰 सच तक पत्रिका न्यूज़ --- 👉 ऐसी ही सटीक और तेज खबरों के लिए Follow करें @sachtakpatrikanews --- ⚠ बड़ा सवाल क्या सरकारी जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण पर अब सख्ती जरूरी है? 👇 अपनी राय जरूर दें
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👉 1500 वर्गफीट कब्जा मुक्त | रास्ता फिर से खुला
📍 जबलपुर (मध्यप्रदेश)
जबलपुर के रानी लक्ष्मीबाई वार्ड स्थित गौर नदी क्षेत्र में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीन पर किए गए अवैध निर्माण को ढहा दिया। करीब 1500 वर्गफीट में किए गए कब्जे को हटाया गया, जिससे बंद पड़ा रास्ता फिर से खुल गया।
---
📍 क्या है पूरा मामला
▪ सरकारी जमीन (खसरा नंबर 137) पर अतिक्रमण  
▪ सिर्फ 450 वर्गफीट निजी जमीन थी  
▪ 1500 वर्गफीट में अवैध निर्माण और विस्तार  
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⚠ क्यों हुई कार्रवाई
▪ ग्रामीणों ने रास्ता बंद होने की शिकायत की  
▪ नदी तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह बंद  
▪ राजस्व विभाग की जांच में अतिक्रमण साबित  
---
🚜 प्रशासन की कार्रवाई
▪ अवैध हिस्से पर बुलडोजर चलाया गया  
▪ भारी पुलिस बल की मौजूदगी  
▪ संयुक्त तहसीलदार और पटवारी टीम मौजूद  
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👤 जमीन से जुड़ी जानकारी
▪ जमीन मूल रूप से दुबे परिवार की थी  
▪ वारिस के लापता होने का उठाया गया फायदा  
▪ आस्था की आड़ में अवैध निर्माण  
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⚠ प्रशासन की चेतावनी
▪ सरकारी जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं  
▪ दोबारा अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई होगी  
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🎤 रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा  
📰 सच तक पत्रिका न्यूज़  
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👉 ऐसी ही सटीक और तेज खबरों के लिए Follow करें  
@sachtakpatrikanews  
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⚠ बड़ा सवाल  
क्या सरकारी जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण पर अब सख्ती जरूरी है?
👇 अपनी राय जरूर दें
    user_Deepak Vishwakarma
    Deepak Vishwakarma
    Journalist जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • शासकीय हाई स्कूल बगासपुर में देर रात चोरों ने बोला धाबा स्कूल का ताला तोड़कर ले गए जरूरी सामान प्राप्त जानकारी अनुसार हाई स्कूल से एक कंप्यूटर का पूरा सेट ,प्रिंटर ,इंडक्शन, साउंड बॉक्स चोरी करके ले गए हैं। चोरों के हौसले बुलंद लगातार कर रहे धड़ल्ले से चोरी अभी कुछ दिन पहले बगासपुर पंचायत में भी कैमरे की निगरानी में चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया था आज पुनः यह घटना हुई है। पुलिस प्रशासन से अनुरोध है कि इन चोरों के गिरोह को जल्द से जल्द पकड़ कर उचित सजा दी जाए।
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    शासकीय हाई स्कूल बगासपुर में देर रात चोरों ने बोला धाबा स्कूल का ताला तोड़कर ले गए जरूरी सामान
प्राप्त जानकारी अनुसार हाई स्कूल से एक कंप्यूटर का पूरा सेट ,प्रिंटर ,इंडक्शन, साउंड बॉक्स चोरी करके ले गए हैं।
चोरों के हौसले बुलंद लगातार कर रहे धड़ल्ले से चोरी अभी कुछ दिन पहले बगासपुर पंचायत में भी कैमरे की निगरानी में चोरों ने  चोरी की घटना को अंजाम दिया था आज पुनः यह घटना हुई है।
पुलिस प्रशासन से अनुरोध है कि इन चोरों के गिरोह को जल्द से जल्द पकड़ कर उचित सजा दी जाए।
    user_Shrikant Dubay पत्रकार
    Shrikant Dubay पत्रकार
    TV News Anchor Gotegaon, Narsinghpur•
    14 hrs ago
  • गोटेगांव में हनुमान जयंती पर बड़ी धूमधाम पूर्वक निकली शोभायात्रा
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    गोटेगांव में हनुमान जयंती पर बड़ी धूमधाम पूर्वक निकली शोभायात्रा
    user_DEEPAK SAHU
    DEEPAK SAHU
    रिपोर्टर गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज उस समय हड़कंप मच गया जब CM हेल्पलाइन (1076) में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। अल्प वेतन और कठिन कार्य परिस्थितियों के खिलाफ आवाज उठा रही इन महिलाओं का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और जबरन प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश की। क्या हैं मुख्य मांगें? प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि वे दिन-रात जनता की समस्याओं को सुनती हैं, लेकिन उनकी खुद की सुध लेने वाला कोई नहीं है। उनकी दो प्रमुख मांगें हैं: न्यूनतम वेतन में वृद्धि: वर्तमान सैलरी को बढ़ाकर कम से कम 15,000 रुपये किया जाए। कार्य समय में राहत: ड्यूटी के दौरान कम से कम 50 मिनट का ब्रेक दिया जाए, ताकि वे मानसिक और शारीरिक थकान से उबर सकें। पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दृश्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब महिलाएं शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रही थीं, तब पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने के लिए बल प्रयोग किया। वीडियो में महिला कर्मियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की देखी जा सकती है। "हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं। क्या 15 हजार रुपये की मांग करना अपराध है? हमें अपराधियों की तरह घसीटा जा रहा है।" - एक प्रदर्शनकारी महिला कर्मी जमीनी हकीकत और चुनौतियां यह घटना उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों की बदहाली को उजागर करती है। महंगाई का बोझ: आज के समय में 8-10 हजार रुपये में घर चलाना लगभग नामुमकिन है। काम का दबाव: हेल्पलाइन पर कॉल का भारी दबाव रहता है, जिसमें बिना पर्याप्त ब्रेक के काम करना मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। सुरक्षा का अभाव: महिला सशक्तिकरण की बातें करने वाली व्यवस्था में जब महिलाएं अपने हक के लिए सड़क पर आती हैं, तो उन्हें सुरक्षा के बजाय सख्ती का सामना करना पड़ता है। निष्कर्ष मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जो प्रदेश की जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण का दावा करती है, आज उसके अपने ही 'स्तंभ' (कर्मचारी) संकट में हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार इन महिलाओं की जायज मांगों पर संवेदनशीलता दिखाती है या फिर इस आवाज को पुलिस के दम पर दबा दिया जाएगा। यह महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की हताशा है जो न्यूनतम वेतन पर सिस्टम को चलाने में अपना योगदान दे रहे हैं।
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    लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज उस समय हड़कंप मच गया जब CM हेल्पलाइन (1076) में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। अल्प वेतन और कठिन कार्य परिस्थितियों के खिलाफ आवाज उठा रही इन महिलाओं का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और जबरन प्रदर्शन खत्म कराने की कोशिश की।
क्या हैं मुख्य मांगें?
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि वे दिन-रात जनता की समस्याओं को सुनती हैं, लेकिन उनकी खुद की सुध लेने वाला कोई नहीं है। उनकी दो प्रमुख मांगें हैं:
न्यूनतम वेतन में वृद्धि: वर्तमान सैलरी को बढ़ाकर कम से कम 15,000 रुपये किया जाए।
कार्य समय में राहत: ड्यूटी के दौरान कम से कम 50 मिनट का ब्रेक दिया जाए, ताकि वे मानसिक और शारीरिक थकान से उबर सकें।
पुलिसिया कार्रवाई पर उठे सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दृश्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब महिलाएं शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रही थीं, तब पुलिस ने उन्हें वहां से हटाने के लिए बल प्रयोग किया। वीडियो में महिला कर्मियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प और धक्का-मुक्की देखी जा सकती है।
"हम सिर्फ अपना हक मांग रहे हैं। क्या 15 हजार रुपये की मांग करना अपराध है? हमें अपराधियों की तरह घसीटा जा रहा है।" - एक प्रदर्शनकारी महिला कर्मी
जमीनी हकीकत और चुनौतियां
यह घटना उत्तर प्रदेश में आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे कर्मचारियों की बदहाली को उजागर करती है।
महंगाई का बोझ: आज के समय में 8-10 हजार रुपये में घर चलाना लगभग नामुमकिन है।
काम का दबाव: हेल्पलाइन पर कॉल का भारी दबाव रहता है, जिसमें बिना पर्याप्त ब्रेक के काम करना मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।
सुरक्षा का अभाव: महिला सशक्तिकरण की बातें करने वाली व्यवस्था में जब महिलाएं अपने हक के लिए सड़क पर आती हैं, तो उन्हें सुरक्षा के बजाय सख्ती का सामना करना पड़ता है।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जो प्रदेश की जनता की समस्याओं के त्वरित निस्तारण का दावा करती है, आज उसके अपने ही 'स्तंभ' (कर्मचारी) संकट में हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार इन महिलाओं की जायज मांगों पर संवेदनशीलता दिखाती है या फिर इस आवाज को पुलिस के दम पर दबा दिया जाएगा।
यह महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की हताशा है जो न्यूनतम वेतन पर सिस्टम को चलाने में अपना योगदान दे रहे हैं।
    user_Deepak Vishawakarma
    Deepak Vishawakarma
    Photographer Panagar, Jabalpur•
    13 hrs ago
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