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आज चैती छठ पूजा का दुसरा और अखरी दिन सुबह का अर्ध अर्पित करते छठ पूजा व्रती। चैती छठ पूजा 2026 में 22 मार्च से 25 मार्च तक मनाया जा रहा है, जो चैत्र मास में सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक पवित्र चार दिवसीय महापर्व है। यह कठिन तप, स्वच्छता और नियम (नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य) के साथ सुख, आरोग्य और परिवार की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। 22 मार्च को शाम का अर्ध अर्पित किया गया और आज 25 मार्च को सुबह के अर्ध के साथ इस पर्व की समाप्ति होगी
Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
आज चैती छठ पूजा का दुसरा और अखरी दिन सुबह का अर्ध अर्पित करते छठ पूजा व्रती। चैती छठ पूजा 2026 में 22 मार्च से 25 मार्च तक मनाया जा रहा है, जो चैत्र मास में सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक पवित्र चार दिवसीय महापर्व है। यह कठिन तप, स्वच्छता और नियम (नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य) के साथ सुख, आरोग्य और परिवार की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। 22 मार्च को शाम का अर्ध अर्पित किया गया और आज 25 मार्च को सुबह के अर्ध के साथ इस पर्व की समाप्ति होगी
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- चैती छठ पूजा 2026 में 22 मार्च से 25 मार्च तक मनाया जा रहा है, जो चैत्र मास में सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक पवित्र चार दिवसीय महापर्व है। यह कठिन तप, स्वच्छता और नियम (नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य) के साथ सुख, आरोग्य और परिवार की खुशहाली के लिए मनाया जाता है। 22 मार्च को शाम का अर्ध अर्पित किया गया और आज 25 मार्च को सुबह के अर्ध के साथ इस पर्व की समाप्ति होगी1
- सिसई (गुमला)। प्रखंड क्षेत्र के सकरौली गांव में श्री संकट मोचन हनुमान मंंदिर का विधिवत् प्राण प्रतिष्ठा किया गया। इस उपलक्ष्य में 851 कलश के साथ भव्य रूप से कलश यात्रा निकाला गया। जिसमें हिन्दू जागरण के प्रदेश परावर्तन प्रमुख संजय वर्मा, विहिप बजरंग दल सिसई के प्रखंड अध्यक्ष पंकज साहु, संरक्षक मुकेश श्रीवास्तव डेविड, रोहित शर्मा, दामोदर सिंह, तेजमोहन साहु, मुकेश ताम्रकर,आशीष यादव, आनंद साहु सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। वहीं जिला परिषद सदस्य सिसई उतरी विजयलक्ष्मी कुमारी, उर्वशी देवी सहित हज़ारों की संख्या में श्रधालु महिला पुरुष व बच्चों ने इस कलश यात्रा में भाग लिया। सभी भक्तगण जय श्री राम, जय जय श्री राम, जय हनुमान के जयघोष लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे पुरा क्षेत्र जय श्री राम के जयघोष से गुंजायमान रहा। सकरौली परास नदी के तट पर पुरोहित द्वारा विधिवत् मंत्रोचारण के साथ जलभरनी का रस्म पुरा किया गया। तत्पश्चात् मंंदिर आकर जल से भरे कलश को पांच परिक्रमा कर स्थापित किया गया। एवं विधिवत् पूजा अर्चना कर श्री संकट मोचन हनुमान जी का प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराया गया। एवं सभी भक्तों के बीच गुड़ चना, शरबत तथा महाप्रसाद का वितरण किया गया। कीर्तन मंडली द्वारा संध्या 5 बजे से 12 घंटे का अखंड हरि कीर्तन प्रारंभ किया जा चुका है। कलश यात्रा को सफल बनाने में श्री संकट मोचन हनुमान मंंदिर समिति के अध्यक्ष जगरनाथ साहु, उपाध्यक्ष अमर साहु, संदीप साहु, विकास साहु, सचिव बजरंग साहु, सह सचिव कलिंद्र साहु, कोषाध्यक्ष कृष्णा कुमार साहु, संरक्षक प्रयाग साहु , महिपाल साहु, सहित सभी कार्यकर्ताओं का भरपूर योगदान रहा।4
- बसिया (गुमला): शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने और पाठकों को पुस्तकों से जोड़ने के उद्देश्य से बसिया के कोनबीर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस पुस्तकालय परिसर में एक भव्य पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अनुमंडल प्रशासन, बसिया और अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। *सांस्कृतिक प्रस्तुति ने मोहा मन* मेले का मुख्य आकर्षण सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले की जीवनी पर आधारित नाटक रहा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से उनके संघर्ष और शिक्षा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को जीवंत कर दिया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने खूब सराहा। कार्यक्रम में एसडीओ जयवंती देवगम, जिप सदस्य बसंती डूंगडूंग, एलआरडीसी शेखर कुमार ,बीडीओ सुप्रिया भगत सीओ नरेश कुमार मुंडा, कामडारा सीओ सुप्रिया एक्का, ब्रदर सुशील समेत अनेक गण्यमान्य व्यक्ति ओर छात्र छात्राएं उपस्थित रहे। *छात्र-छात्राओं में दिखा उत्साह* इस मेले में प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों से आए सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। बच्चों ने न केवल विभिन्न स्टालों पर सजी पुस्तकों का अवलोकन किया, बल्कि ज्ञान-विज्ञान और साहित्य से जुड़ी जानकारियों में भी रुचि दिखाई। स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सफल बनाया।2
- गुमला की पांच बेटियों ने समाज में प्रचलित परंपरा को तोड़कर एक नई मिसाल कायम की है। आमतौर पर अंतिम संस्कार की रस्मों को पुरुषों का अधिकार माना जाता है, लेकिन कौशल्या देवी की बेटियों ने यह साबित किया कि संस्कार निभाने के लिए जेंडर नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है। 76 वर्षीय कौशल्या देवी का निधन 23 मार्च को हुआ। उनके कोई पुत्र नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर समाज के प्रतिष्ठित पदों तक पहुँचाया। मां के निधन के बाद बेटियों ने तय किया कि वे स्वयं अंतिम संस्कार करेंगी. इसके बाद बड़ी बेटी नीलिमा नीलिमा ओहदार, विद्या ओहदार, ज्योति ओहदार, अर्चना ओहदार और कल्पना ओहदार ने मां के शव को कंधा दिया। वहीं बड़ी बेटी नीलिमा ओहदार ने मुखाग्नि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद रहे।1
- आगामी रामनवमी मेला आयोजन के पुर अरु में विवाद की संभावना पर प्रशासन अलर्ट आयोजित हुआ शांति समिति की बैठक1
- Post by AAM JANATA1
- हमारे यहां हर तरह के टैटू बनए एवं मिटाए जाते हैं और साथ ही चेहरे के दाग धब्बे उच्च तकनीक लेजर मशीन द्वारा हटाए जाते है1
- आज चैती छठ पूजा व्रत के दौरान राँची छठ घाट पर व्रती भगवान भास्कर की संध्या अर्ध अर्पित करते हुवे परिवार की खुशहाल जीवन की कामना करते हुए विभिन्न घाटों पर पूजा अर्चना करते हुए दिखाई दिए।1