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झारखंड के साहिबगंज जिले में स्थित उधवा, अपने प्राकृतिक सौंदर्य और उधवा झील पक्षी अभयारण्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र अपनी खूबसूरत झीलों और प्रवासी पक्षियों की मनमोहक चहचहाहट के लिए विशेष पहचान रखता है। उधवा के इसी अनुपम आकर्षण को समर्पित कुछ खास शायरी इस प्रस्तुति में शामिल है।
Lav Choudhary
झारखंड के साहिबगंज जिले में स्थित उधवा, अपने प्राकृतिक सौंदर्य और उधवा झील पक्षी अभयारण्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र अपनी खूबसूरत झीलों और प्रवासी पक्षियों की मनमोहक चहचहाहट के लिए विशेष पहचान रखता है। उधवा के इसी अनुपम आकर्षण को समर्पित कुछ खास शायरी इस प्रस्तुति में शामिल है।
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- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार से सीधे सवाल किया है। उन्होंने केंद्र से पूछा है कि वह पेट्रोल और डीजल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय डिटेंशन सेंटर पर बात क्यों करना चाहती है।1
- उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में पेट्रोल और डीजल की भीषण किल्लत के चलते आम जनता और किसानों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। वहां लोग घंटों तक कड़ी धूप में अपनी बारी का इंतजार करते हुए लंबी कतारों में खड़े हैं, जिसे देखकर लगता है कि यह कोई मेला नहीं बल्कि ईंधन के लिए परेशान लोगों की भीड़ है। पेट्रोल-डीजल की इस कमी ने लोगों का जीवन और भी कठिन बना दिया है। आरोप है कि इस सरकार में किसान पहले से ही परेशान थे, और अब नरेंद्र मोदी ने उन्हें डीजल के लिए लाइन में खड़ा कर दिया है।1
- सुबह की सिटी राइड का आनंद लेते हुए, एक व्यक्ति ने इस अनुभव को 'जीवन एक खूबसूरत यात्रा है' कहकर व्यक्त किया है।1
- भारत के “टूटे हुए” स्पोर्ट्स सिस्टम की एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है, जहाँ राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले एथलीटों को भी बुनियादी सम्मान से वंचित रखा गया। देव कुमार मीणा और कुलदीप कुमार ने देश के लिए एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया, जिसके बाद उन्हें अपना खेल उपकरण एक ई-रिक्शा में खुद ही ले जाना पड़ा। यह घटना भारतीय खेल व्यवस्था की विडंबना को उजागर करती है। आरोप है कि इस व्यवस्था के पास प्रचार (PR), भव्य आयोजनों और क्रिकेट की चमक-दमक पर खर्च करने के लिए तो अथाह धन है, लेकिन उन खिलाड़ियों को बुनियादी सम्मान और सुविधाएँ देने के लिए कोई परवाह नहीं, जो वास्तव में देश का नाम रोशन करते हैं। यह स्थिति बताती है कि कैसे प्राथमिकताएं गलत दिशा में हैं। वास्तव में, भारत में चैंपियन अक्सर अकेले ही इतिहास रचते हैं क्योंकि सिस्टम उन्हें तभी याद करता है या उनका समर्थन करता है, जब उसे पदकों की आवश्यकता होती है। यह तस्वीर देश के खेल तंत्र की गहरी कमियों और उसके एथलीटों के प्रति उदासीन रवैये को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।1
- झारखंड के गोड्डा जिले के ठाकुर गंगटी प्रखंड की दिग्घी पंचायत के घसिचक गांव में एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां अपने ही दो सगे बेटों ने बचपन में पालने-पोसने वाले मां-पिता को अपने साथ रखने से साफ इनकार कर दिया है। इस घटना के बाद, वे मां-पिता दर-दर भटकने को मजबूर हैं और उन्होंने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।1
- गुरुवार को आजमनगर प्रखंड क्षेत्र में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व बड़े ही धूमधाम, उत्साह और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। सुबह से ही मुस्लिम समाज के लोग नए कपड़े पहनकर अपने घरों, ईदगाहों और मस्जिदों की ओर जाते दिखे। सुबह 7 बजे से 9 बजे तक विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की गई, जिसके बाद लोगों ने एक-दूसरे के गले मिलकर 'ईद मुबारक' कहा और अमन-चैन तथा खुशहाली की दुआ मांगी। आजमनगर प्रखंड की विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में भारी भीड़ उमड़ी, कई जगहों पर तो लोगों ने मस्जिद और ईदगाह के बाहर भी नमाज अदा की। नमाज के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्सव का माहौल रहा, जिसमें बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी विशेष उत्साह के साथ एक-दूसरे को बधाई देते नजर आए। पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा, और थाना अध्यक्ष नीरज कुमार पुलिस बल के साथ ईदगाहों पर मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। इस्लाम धर्म में बकरीद का विशेष महत्व है। मान्यता के अनुसार, पैगम्बर हजरत इब्राहिम को अल्लाह ने अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का निश्चय किया था, लेकिन अल्लाह उनकी आस्था से प्रसन्न हुए और बेटे की जगह बकरे की कुर्बानी कबूल की। तभी से बकरीद पर कुर्बानी की यह परंपरा चली आ रही है।1
- उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन परीक्षाओं के आयोजन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहाँ परीक्षा केंद्रों की बदहाली पर चिंता जताई गई है। इन खस्ताहालत केंद्रों में परीक्षा आयोजित होने के तरीके को देखकर यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या इन्हीं कारणों से छात्रों को केवल डिग्रियां मिल पाती हैं, जबकि उनके पास अपेक्षित ज्ञान की कमी होती है।1
- देश के युवाओं और उनके भविष्य की वर्तमान स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जहाँ सीटों की कमी, छात्रों की भारी संख्या और हर जगह फैली अव्यवस्था ने हालात बद से बदतर कर दिए हैं। यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन परिस्थितियों में, हर परीक्षा केंद्र अब छात्रों के सपनों का केंद्र न होकर, बल्कि पूरे सिस्टम की घोर नाकामी का प्रतीक बन चुका है।1
- कल्याण में बकरीद की नमाज के दौरान एक गरमागरम स्थिति उत्पन्न हो गई। इस दौरान, हिंदू संगठनों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ भी किया गया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया।1