Shuru
Apke Nagar Ki App…
रक्षाबंधन पर अनोखी पहल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ रक्षाबंधन पर अनोखी पहल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ रक्षाबंधन के अवसर पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व द्वारा ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ शुरू किया गया है। 27 से 29 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में बाघों और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प दिलाया जा रहा है।आज गुरुवार को पहले दिनदोपहर बाद 12 बजे पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल कामती के 450, बागड़ा के 275 छात्र-छात्राओं सहित ग्राम सारंगपुर में 50 गाइड, जिप्सी चालकों और पर्यटकों को बाघ रक्षा सूत्र बांधकर बाघों की सुरक्षा का संकल्प दिलाया गया।अभियान के तहत तीन दिनों में करीब 11 हजार ग्रामीणों, विद्यार्थियों और आमजन को जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है।
रीतेश साहू
रक्षाबंधन पर अनोखी पहल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ रक्षाबंधन पर अनोखी पहल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ रक्षाबंधन के अवसर पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व द्वारा ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ शुरू किया गया है। 27 से 29 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में बाघों और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प दिलाया जा रहा है।आज गुरुवार को पहले दिनदोपहर बाद 12 बजे पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल कामती के 450, बागड़ा के 275 छात्र-छात्राओं सहित ग्राम सारंगपुर में 50 गाइड, जिप्सी चालकों और पर्यटकों को बाघ रक्षा सूत्र बांधकर बाघों की सुरक्षा का संकल्प दिलाया गया।अभियान के तहत तीन दिनों में करीब 11 हजार ग्रामीणों, विद्यार्थियों और आमजन को जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है।
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- रक्षाबंधन पर अनोखी पहल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ रक्षाबंधन पर अनोखी पहल, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ रक्षाबंधन के अवसर पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व द्वारा ‘बाघ रक्षा सूत्र अभियान’ शुरू किया गया है। 27 से 29 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में बाघों और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प दिलाया जा रहा है।आज गुरुवार को पहले दिनदोपहर बाद 12 बजे पीएम श्री हायर सेकेंडरी स्कूल कामती के 450, बागड़ा के 275 छात्र-छात्राओं सहित ग्राम सारंगपुर में 50 गाइड, जिप्सी चालकों और पर्यटकों को बाघ रक्षा सूत्र बांधकर बाघों की सुरक्षा का संकल्प दिलाया गया।अभियान के तहत तीन दिनों में करीब 11 हजार ग्रामीणों, विद्यार्थियों और आमजन को जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है।1
- पितृ स्मृति को सेवा से जोड़ा,, जरूरतमंदों को भी कराए गए स्वादिष्ट भोजन- सोहागपुर (नर्मदापुरम) "मारूपुरा निवासी की अनुकरणीय पहल" रामप्रसाद वार्ड (मारूपुरा) निवासी श्री शैलेंद्र कपरिया जी ने मानवता की मिसाल पेश की है। आज उन्होंने अपने पूज्य पिताजी, वन विभाग में रेंजर के पद पर सेवाएं दे चुके स्वर्गीय श्री ओमप्रकाश जी कपरिया की गंगाजली पूजन एवं 13वीं के अवसर पर अपने निजी कार्यक्रम के साथ-साथ सामाजिक दायित्व का भी निर्वहन किया। इस अवसर पर उन्होंने राम रहीम रोटी बैंक, सोहागपुर में माँ नर्मदा के परिक्रमावासियों, बेघर, बेसहारा एवं जरूरतमंद लोगों के लिए प्रेमपूर्वक स्वादिष्ट भोजन भिजवाकर सच्चे अर्थों में पुण्य लाभ अर्जित किया। यह कार्य इस बात का प्रतीक है कि हमारे बुजुर्गों की सच्ची श्रद्धांजलि भूखे को भोजन कराने से बढ़कर कुछ नहीं। स्व. ओमप्रकाश जी कपरिया को भावभीनी श्रद्धांजलि एवं शैलेंद्र जी के इस पुनीत सेवा कार्य को हृदय से साधुवाद।🙏1
- बढ़ती महंगाई भ्रष्टाचार और सरकार की जन नीतियों के विरोध में कांग्रेसियों ने पुतला दहन कर धरना दिया बढ़ती महंगाई भ्रष्टाचार और सरकार की जन नीतियों के विरोध में कांग्रेसियों ने मंगलवारा चौराहे पर पुतला दहन कर धरना दिया1
- पिपरिया तहसील परिसर में पांचवीं बार नेट केबल चोरी, सभी शासकीय कार्यालयों का कामकाज ठप पिपरिया - गुरुवार सुबह तहसील परिसर में स्थित तहसील कार्यालय, एसडीएम कार्यालय, न्यायालय परिसर, जनपद पंचायत, लोक सेवा केंद्र, रजिस्ट्रार कार्यालय और आंगनवाड़ी केंद्र सहित कई सरकारी कार्यालयों की नेट सप्लाई अचानक ठप हो गई, जांच में पता चला कि परिसर में बिछाई गई इंटरनेट केबल अज्ञात चोर काटकर ले गए हैं3
- गाड़ी विभाग में लगी है तो हिसाब भी विभाग का होगा! प्राइवेट बोलेरो पर ‘मध्य प्रदेश शासन’, रात में ड्राइवर के हाथों दौड़ती गाड़ी ने खोली जल संसाधन विभाग की वाहन व्यवस्था की पोल! रितिक जैन पत्रकार बाड़ी, रायसेन। जल संसाधन विभाग बाड़ी की वाहन व्यवस्था को लेकर अब सवाल और भी गंभीर हो गए हैं। मामला बोलेरो वाहन क्रमांक MP 04 TB 2393 का है। वाहन निजी स्वामित्व का है, लेकिन वह सरकारी अनुबंध के तहत जल संसाधन/सिंचाई विभाग में लगाया गया है। वाहन पर बड़े अक्षरों में “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हुआ है और 27 अगस्त की शाम करीब 7:30 बजे बाड़ी बस स्टैंड के आसपास इसे ड्राइवर द्वारा चलाते हुए देखा गया। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उस समय एसडीओ वाहन में मौजूद नहीं थीं। यानी सरकारी अनुबंध पर विभाग में लगा निजी वाहन अधिकारी की गैरमौजूदगी में ड्राइवर के हाथों सड़कों पर दौड़ रहा था। अब सवाल केवल इतना नहीं कि गाड़ी कहां गई। सवाल यह है कि सरकारी अनुबंध पर लगी निजी गाड़ी का उपयोग किस आदेश, किस काम और किस रिकॉर्ड के आधार पर किया जा रहा है? --- सरकारी अनुबंध है तो नियम और रिकॉर्ड भी होंगे यह बात स्पष्ट है कि निजी वाहन को सरकारी विभाग में अनुबंध के आधार पर लगाया जा सकता है। लेकिन जैसे ही कोई निजी वाहन सरकारी अनुबंध का हिस्सा बनता है, उसके उपयोग, चालक, ड्यूटी, भुगतान और निर्धारित शासकीय कार्य से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में MP 04 TB 2393 को लेकर विभाग को यह बताना होगा कि वाहन किस आदेश के तहत लगाया गया है, उसकी अनुबंध अवधि क्या है और वाहन के उपयोग की निर्धारित शर्तें क्या हैं। यदि विभाग वाहन का किराया सरकारी मद से चुका रहा है, तो फिर सरकारी पैसे से चलने वाली गाड़ी के हर किलोमीटर का हिसाब भी विभागीय रिकॉर्ड में होना चाहिए। --- रात साढ़े सात बजे बस स्टैंड पर गाड़ी—अधिकारी कहां थीं? 27 अगस्त की शाम करीब 7:30 बजे बाड़ी बस स्टैंड के आसपास वाहन की मौजूदगी ने मामले को नया मोड़ दे दिया। वाहन में एसडीओ मौजूद नहीं थीं। स्टीयरिंग ड्राइवर के हाथ में थी। अब सीधा सवाल है—अगर वाहन एसडीओ के उपयोग के लिए विभाग में अनुबंधित है, तो अधिकारी की गैरमौजूदगी में ड्राइवर वाहन लेकर किस काम से निकला था? क्या वह विभागीय ड्यूटी पर था? अगर हां, तो उस ड्यूटी का आदेश कहां है? क्या लॉगबुक में उस समय की यात्रा दर्ज है? कहां से कहां तक वाहन गया? किस अधिकारी के निर्देश पर गया? और उस यात्रा का शासकीय उद्देश्य क्या था? --- ड्राइवर का जवाब बना सबसे बड़ा सवाल जब वाहन के ड्राइवर से इस संबंध में सवाल किया गया तो उसका जवाब था— “वो तो हट गई है, ये भी निकालना है।” यहीं से मामले में सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है। अगर ड्राइवर का इशारा विभागीय अटैचमेंट या वाहन की स्थिति की ओर था, तो आखिर “हट गई” का मतलब क्या है? क्या वाहन विभागीय अनुबंध से हट चुका है? अगर नहीं हटा है तो ऐसी बात क्यों कही गई? और अगर हट चुका है तो फिर सरकारी अनुबंध के तहत लगी गाड़ी की स्थिति क्या है? सबसे बड़ा सवाल— अगर गाड़ी हट गई तो ‘मध्य प्रदेश शासन’ क्यों नहीं हटा? --- सरकारी पहचान लगी है तो जवाबदेही भी तय होगी वाहन निजी है, लेकिन उस पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हुआ है। सरकारी अनुबंध के तहत वाहन का उपयोग हो रहा है तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वाहन पर यह पहचान किस प्रावधान/अनुमति के तहत प्रदर्शित की जा रही है और अनुबंध समाप्त होने की स्थिति में इसे हटाने की जिम्मेदारी किसकी है। क्योंकि सड़क पर चलने वाला ऐसा वाहन आम नागरिक को सरकारी वाहन जैसा दिखाई देता है। इसलिए यह सिर्फ लिखावट का मामला नहीं है। यह सरकारी पहचान, विभागीय नियंत्रण और वाहन के अधिकृत उपयोग का सवाल है। --- अवैध गतिविधियों की आशंका पर भी जांच क्यों जरूरी? इस मामले में अभी किसी अवैध गतिविधि का प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए किसी व्यक्ति या वाहन पर अवैध काम का सीधा आरोप लगाना उचित नहीं होगा। लेकिन सवाल यह जरूर है कि सरकारी पहचान वाले अनुबंधित वाहन का उपयोग निर्धारित शासकीय कार्यों से बाहर तो नहीं हो रहा? यदि वाहन रात में अधिकारी की गैरमौजूदगी में घूम रहा है, तो विभागीय रिकॉर्ड से यह जांचना जरूरी है कि वह किस काम पर था। क्योंकि यदि वाहन सरकारी अनुबंध पर है और उसके किराये का भुगतान सरकारी धन से होता है, तो उसके उपयोग का उद्देश्य भी शासकीय कार्य से संबंधित और रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए। --- ईई के जवाब से भी नहीं थमा मामला जब इस मामले को लेकर जल संसाधन विभाग बाड़ी के कार्यपालन यंत्री (ईई) से बातचीत कर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि वे कार्यालय से जानकारी लेकर बताएंगे। अब यही जवाब कई सवाल छोड़ गया है। अगर वाहन विभाग के अनुबंध में है तो उसकी जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में होनी चाहिए। अनुबंध है तो उसकी प्रति सामने आए। ड्यूटी है तो आदेश सामने आए। यात्रा है तो लॉगबुक सामने आए। भुगतान है तो बिल सामने आए। मामला जितना सीधा है, जवाब भी उतना ही सीधा होना चाहिए। --- सरकारी खजाने से भुगतान, तो हर किलोमीटर का हिसाब अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी भुगतान का है। यदि MP 04 TB 2393 को जल संसाधन विभाग में अनुबंध के तहत लगाया गया है और उसके बदले सरकारी खजाने से प्रतिमाह भुगतान किया जा रहा है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि— वाहन का मासिक किराया कितना है? भुगतान किस मद से होता है? भुगतान किस अवधि से किया जा रहा है? वाहन की ड्यूटी किस अधिकारी के लिए निर्धारित है? प्रतिदिन कितने किलोमीटर चलने की अनुमति है? ईंधन का खर्च किसके जिम्मे है? लॉगबुक कौन प्रमाणित करता है? महीने के बिल का सत्यापन कौन करता है? वाहन के उपयोग की निगरानी कौन करता है? इन सवालों के जवाब आने के बाद ही पता चलेगा कि वाहन व्यवस्था वास्तव में कितनी पारदर्शी है। --- अब जांच सिर्फ गाड़ी की नहीं, पूरे रिकॉर्ड की होनी चाहिए मामले में केवल सड़क पर वाहन देखने से निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं होगा। वास्तविक जांच के लिए विभागीय दस्तावेज खंगालने होंगे। जांच के दायरे में होना चाहिए— 1. अनुबंध MP 04 TB 2393 किस निविदा/अनुबंध के तहत विभाग में लगा है? 2. अनुबंध अवधि वाहन की अनुबंध अवधि कब शुरू हुई और कब समाप्त होगी? 3. अधिकृत उपयोग वाहन किस अधिकारी अथवा कार्यालय के उपयोग के लिए निर्धारित है? 4. लॉगबुक 27 अगस्त की पूरी लॉगबुक और वाहन मूवमेंट रिकॉर्ड की जांच हो। 5. ड्राइवर ड्राइवर की नियुक्ति, अधिकृत ड्यूटी और उसे वाहन चलाने के निर्देश की जानकारी सामने आए। 6. भुगतान अब तक वाहन मालिक को सरकारी खजाने से कितना भुगतान किया गया? 7. वाहन की पहचान निजी वाहन पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखने की अनुमति किस आधार पर है? 8. रात की ड्यूटी 27 अगस्त को शाम 7:30 बजे वाहन किस शासकीय कार्य पर था? 9. अधिकारी की मौजूदगी उस समय अधिकारी वाहन में क्यों मौजूद नहीं थीं और ड्राइवर किस निर्देश पर वाहन चला रहा था? 10. अनुबंध की शर्तें क्या वाहन का उपयोग केवल निर्धारित शासकीय कार्य के लिए किया जा सकता है और क्या उसके बाहर उपयोग की कोई अनुमति है? --- आरटीओ और विभागीय अधिकारियों के लिए भी सवाल मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग के स्तर पर भी वाहन के दस्तावेज और उसकी श्रेणी की स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। वहीं जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि अनुबंधित वाहन वास्तव में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही संचालित हो रहा है या नहीं। अगर सब कुछ नियमों के तहत है तो विभाग के पास जवाब देने के लिए पर्याप्त दस्तावेज होने चाहिए। लेकिन यदि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति में अंतर निकलता है तो फिर जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। --- “सरकारी” लिख देने से कोई वाहन सरकारी नहीं हो जाता—लेकिन सवाल जरूर पैदा होते हैं यहां एक महत्वपूर्ण बात भी साफ होना जरूरी है। किसी निजी वाहन का सरकारी विभाग के साथ अनुबंधित होना उसे स्वामित्व की दृष्टि से सरकारी वाहन नहीं बना देता। इसलिए “प्राइवेट नंबर” और “सरकारी अनुबंध” दोनों एक साथ होना संभव है। लेकिन जब उसी वाहन पर “मध्य प्रदेश शासन” लिखा हो, तब उसकी अनुमति और उपयोग की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है। यही इस खबर का मूल सवाल है। --- अब जवाबदेही तय करने का समय मामला किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का नहीं है। मामला है सरकारी अनुबंध पर चल रहे वाहन के उपयोग और सरकारी पहचान की पारदर्शिता का। वीडियो में वाहन दिखाई देता है। समय करीब 7:30 बजे शाम का है। वाहन ड्राइवर चला रहा है। एसडीओ वाहन में मौजूद नहीं थीं। ड्राइवर से पूछताछ हुई। उसका जवाब सामने आया— “वो तो हट गई है, ये भी निकालना है।” और विभाग के ईई ने कार्यालय से जानकारी लेकर जवाब देने की बात कही। अब इससे आगे की कहानी दस्तावेज बताएंगे। --- सबसे बड़ा सवाल फिर वही— “अगर गाड़ी विभाग से हट गई है तो ‘मध्य प्रदेश शासन’ क्यों नहीं हटा?” और अगर गाड़ी अभी भी सरकारी अनुबंध पर विभाग में लगी है तो— “27 अगस्त की शाम 7:30 बजे एसडीओ की गैरमौजूदगी में ड्राइवर उसे किस शासकीय काम से चला रहा था?” अब नजर जल संसाधन विभाग के आधिकारिक जवाब, अनुबंध की शर्तों, वाहन की लॉगबुक और भुगतान रिकॉर्ड पर है। क्योंकि सरकारी अनुबंध पर लगी प्राइवेट बोलेरो हो सकती है, लेकिन सरकारी पैसे और सरकारी पहचान से जुड़े वाहन का हिसाब भी उतना ही साफ होना चाहिए। बाड़ी में उठे ये सवाल अब केवल एक बोलेरो तक सीमित नहीं हैं—ये सवाल जल संसाधन विभाग की पूरी वाहन व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर हैं।3
- कलेक्टर की कलाई पर सजा बेटियों का स्नेह, इको फ्रेंडली राखी से दिया पर्यावरण बचाने का संदेश मिसरोद के नितिन साई चाइल्ड केयर स्कूल की छात्राओं ने खुद तैयार की राखियां, कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने मिठाई खिलाकर दिया आशीर्वाद नर्मदापुरम। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर नर्मदापुरम में भाई-बहन के स्नेह के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देखने को मिला। मिसरोद स्थित नितिन साई चाइल्ड केयर स्कूल की कक्षा 7वीं और 9वीं की छात्राओं ने कलेक्टर सोमेश मिश्रा से आत्मीय मुलाकात कर उन्हें अपने हाथों से तैयार की गई इको फ्रेंडली राखियां बांधीं। छात्राओं ने रक्षाबंधन के लिए विशेष रूप से पर्यावरण अनुकूल राखियां तैयार की थीं। अपनी रचनात्मकता और मेहनत से बनाई गई इन राखियों को कलेक्टर की कलाई पर बांधकर छात्राओं ने भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और अपनत्व के पर्व को उत्साह के साथ मनाया। राखियों के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। कलेक्टर ने मिठाई खिलाकर दिया स्नेह छात्राओं से राखी बंधवाने के बाद कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने भी बच्चों के साथ सहजता और आत्मीयता से संवाद किया। उन्होंने छात्राओं को मिठाई खिलाई और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए स्नेहाशीष प्रदान किया। कलेक्टर ने छात्राओं द्वारा स्वयं तैयार की गई इको फ्रेंडली राखियों की सराहना करते हुए कहा कि त्योहारों को पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ मनाना सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि बच्चों की ऐसी रचनात्मक पहल समाज को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने और पर्यावरण हितैषी परंपराओं को अपनाने की प्रेरणा देती है। यादगार बना रक्षाबंधन का पल कलेक्टर से मुलाकात और राखी बांधने के बाद छात्राएं काफी उत्साहित नजर आईं। इस आत्मीय मुलाकात की यादों को संजोने के लिए छात्राओं ने कलेक्टर के साथ सामूहिक फोटो भी खिंचवाया। रक्षाबंधन के इस अवसर पर छात्राओं की पहल ने स्नेह के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और पर्व को एक सकारात्मक सामाजिक संदेश से जोड़ दिया।1
- सेमरी हरचंद में छात्राओं ने अधिकारियों को बांधी राखी, मनाया रक्षाबंधन सेमरी हरचंद में छात्राओं ने अधिकारियों को बांधी राखी, मनाया रक्षाबंधन सोहागपुर। रक्षा बंधन पर्व के अवसर पर ग्राम सेमरी हरचंद स्थित कस्तूरबा बालिका छात्रावास एवं शासकीय कन्या हायर सेकंडरी स्कूल में गुरुवार दोपहर 1 बजे के लगभग रक्षाबन्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया।एसडीएम डॉ. बबीता राठौर, बीआरसी राकेश रघुवंशी एवं प्राचार्य संतोष ठाकुर सहित स्टाफ ने छात्राओं से राखी बंधवाई। एसडीएम डॉ. बबीता राठौर ने छात्राओं को मिठाई एवं उपहार भेंट कर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने छात्राओं से पढ़ाई, भोजन, छात्रावास की सुविधाओं और समस्याओं की जानकारी ली तथा मेहनत और लगन से पढ़ाई कर अपने माता-पिता व शिक्षकों का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। बीआरसी राकेश रघुवंशी ने कक्षा 10वीं और 12वीं की छात्राओं से परीक्षा की बेहतर तैयारी करने की अपील करते हुए कम से कम एक छात्रा के मेरिट सूची में स्थान बनाने का लक्ष्य रखने को कहा। कार्यक्रम में छात्राओं और अधिकारियों के बीच आत्मीयता का माहौल रहा। अंत में प्राचार्य संतोष ठाकुर ने आभार व्यक्त किया।1
- एमपी के इटारसी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के बाद एक ही परिवार की तीन मासूम बहनों की मौत हो गई। यह परिवार मूल रूप से रायपुर (छत्तीसगढ़) का रहने वाला है। इंदौर में दो बच्चियों की मौत के बाद परिजन उनके शव लेकर रायपुर जा रहे थे। तभी रास्ते में तीसरी बेटी आशिष्का की भी हालत अचानक बिगड़ गई। उसे तुरंत इटारसी के सरकारी अस्पताल लाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। एक साथ तीन मासूमों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। #Itarsi #Raipur #Indore #MPNews #BreakingNews #Tragedy #FoodPoisoning #MadhyaPradesh एमपी के इटारसी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ संदिग्ध फूड पॉइजनिंग के बाद एक ही परिवार की तीन मासूम बहनों की मौत हो गई। यह परिवार मूल रूप से रायपुर (छत्तीसगढ़) का रहने वाला है। इंदौर में दो बच्चियों की मौत के बाद परिजन उनके शव लेकर रायपुर जा रहे थे। तभी रास्ते में तीसरी बेटी आशिष्का की भी हालत अचानक बिगड़ गई। उसे तुरंत इटारसी के सरकारी अस्पताल लाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। एक साथ तीन मासूमों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। #Itarsi #Raipur #Indore #MPNews #BreakingNews #Tragedy #FoodPoisoning #MadhyaPradesh1