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*बुनागाँव की छात्रा जानवी कौशिक का जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए चयन* कोंडागांव - प्रतिभा और कड़े संघर्ष के संगम से सफलता की नई इबारत लिखी जाती है।कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कोंडागांव जिला अंतर्गत ग्राम बुनागाँव की होनहार छात्रा जानवी कौशिक ने।जनपद प्राथमिक शाला बुनागाँव की कक्षा पांचवी की छात्रा जानवी का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय कोंडागांव के लिए हुआ है। *सफलता की परंपरा बना बुनागाँव स्कूल* यह उपलब्धि न केवल जानवी के परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।इस सफलता के पीछे शिक्षक सूरज नेताम और मोनिका साहू का विशेष योगदान है जिनके मार्गदर्शन में छात्र 4-5 माह तक कड़ी मेहनत और विशेष अध्ययन करते हैं।गौरतलब हो कि शाला में प्रतिवर्ष स्कूल सहित अवकाश के दिनों में शिक्षकों के द्वारा कोचिंग सह मार्गदर्शन दिए जा रहे हैं,फलस्वरूप हर वर्ष बच्चे प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शैक्षणिक संस्थानों चयनित हो रहे हैं।उनके मार्गदर्शन में अभी तक 45 से अधिक बच्चे नवोदय स्कूल, एकलव्य,आदर्श,बुनियादी विद्यालय,प्रयास सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर निःशुल्क उच्च आवासीय शैक्षणिक संस्थानों में चयनित होकर अपना भविष्य गढ़ रहे हैं।

4 hrs ago
user_ESHENDRA PATEL
ESHENDRA PATEL
पत्रकार कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
4 hrs ago

*बुनागाँव की छात्रा जानवी कौशिक का जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए चयन* कोंडागांव - प्रतिभा और कड़े संघर्ष के संगम से सफलता की नई इबारत लिखी जाती है।कुछ ऐसा ही कर दिखाया है कोंडागांव जिला अंतर्गत ग्राम बुनागाँव की होनहार छात्रा जानवी कौशिक ने।जनपद प्राथमिक शाला बुनागाँव की कक्षा पांचवी की छात्रा जानवी का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय कोंडागांव के लिए हुआ है। *सफलता की परंपरा बना बुनागाँव स्कूल* यह उपलब्धि न केवल जानवी के परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।इस सफलता के पीछे शिक्षक सूरज नेताम और मोनिका साहू का विशेष योगदान है जिनके मार्गदर्शन में छात्र 4-5 माह तक कड़ी मेहनत और विशेष अध्ययन करते हैं।गौरतलब हो कि शाला में प्रतिवर्ष स्कूल सहित अवकाश के दिनों में शिक्षकों के द्वारा कोचिंग सह मार्गदर्शन दिए जा रहे हैं,फलस्वरूप हर वर्ष बच्चे प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर उच्च शैक्षणिक संस्थानों चयनित हो रहे हैं।उनके मार्गदर्शन में अभी तक 45 से अधिक बच्चे नवोदय स्कूल, एकलव्य,आदर्श,बुनियादी विद्यालय,प्रयास सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर निःशुल्क उच्च आवासीय शैक्षणिक संस्थानों में चयनित होकर अपना भविष्य गढ़ रहे हैं।

More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
  • कोंडागांव बुनियागांव में हाथ बोर खनन के दौरान रेत धसकने से एक व्यक्ति की मौत। ये पूरा मामला कोंडागांव जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर में बस ग्राम बनियागांव का है। जहां पर ये हादसा हुआ।
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    कोंडागांव बुनियागांव में हाथ बोर खनन के दौरान रेत धसकने से एक व्यक्ति की मौत।
ये पूरा मामला कोंडागांव जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर में बस ग्राम बनियागांव का है। जहां पर ये हादसा हुआ।
    user_ESHENDRA PATEL
    ESHENDRA PATEL
    पत्रकार कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • बस्तर में जैसे तैसे 31 मार्च तक संपूर्ण नक्सली मुख्य धारा में लौटेंगे और इससे पहले ही पापा राव ने भी मुख्य धारा में लौट चुका है और अन्य साथियों के साथ
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    बस्तर में जैसे तैसे 31 मार्च तक संपूर्ण नक्सली मुख्य धारा में लौटेंगे और इससे पहले ही पापा राव ने भी मुख्य धारा में लौट चुका है और अन्य साथियों के साथ
    user_Kamlesh Kumar Kunjam
    Kamlesh Kumar Kunjam
    Photographer टोकापाल, बस्तर, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • बलरामपुर।आदिवासी विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना अंतर्गत संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों में सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इच्छुक एवं पात्र विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 17 अप्रैल 2026 रात्रि 12 बजे तक निर्धारित की गई है। आवेदन पत्र में त्रुटि सुधार के लिए 18 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 तक तथा जिला स्तर पर दस्तावेजों का परीक्षण 22 अप्रैल से 28 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा।विद्यार्थी 1 मई से 9 मई 2026 के बीच अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। प्रवेश हेतु परीक्षा का आयोजन 10 मई 2026 को किया जाएगा। बलरामपुर जिले के सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रयास आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग एवं अन्य परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।ऑनलाइन आवेदन एवं विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। साथ ही कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, बलरामपुर से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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    बलरामपुर।आदिवासी विकास विभाग द्वारा मुख्यमंत्री बाल भविष्य सुरक्षा योजना अंतर्गत संचालित प्रयास आवासीय विद्यालयों में सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9वीं में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इच्छुक एवं पात्र विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। जारी सूचना के अनुसार ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि 17 अप्रैल 2026 रात्रि 12 बजे तक निर्धारित की गई है। आवेदन पत्र में त्रुटि सुधार के लिए 18 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 तक तथा जिला स्तर पर दस्तावेजों का परीक्षण 22 अप्रैल से 28 अप्रैल 2026 तक किया जाएगा।विद्यार्थी 1 मई से 9 मई 2026 के बीच अपने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। प्रवेश हेतु परीक्षा का आयोजन 10 मई 2026 को किया जाएगा। बलरामपुर जिले के सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रयास आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे मेडिकल, इंजीनियरिंग एवं अन्य परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।ऑनलाइन आवेदन एवं विस्तृत जानकारी के लिए अभ्यर्थी विभागीय वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। साथ ही कार्यालय सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास, बलरामपुर से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
    user_Puran Dewangan
    Puran Dewangan
    Rajpur, Balrampur•
    4 hrs ago
  • बड़े केडर नक्सली पापाराव अपने 21साथियों के साथ मुख्यधारा में वापस लौट रहे हैं #नक्सली #माओवाद #बीजापुर #जगदलपुर #छत्तीसगढ़
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    बड़े केडर नक्सली पापाराव अपने 21साथियों के साथ मुख्यधारा में वापस लौट रहे हैं  #नक्सली #माओवाद #बीजापुर #जगदलपुर #छत्तीसगढ़
    user_सन्नू हेमला
    सन्नू हेमला
    Agricultural production बीजापुर, बीजापुर, छत्तीसगढ़•
    22 hrs ago
  • नमस्कार जय जोहार जय छत्तीसगढ़ आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुलिस और स्पेशल टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। 34 नग बिना तराशे हुए हीरे (रॉ डायमंड्स) के साथ एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। इन हीरों की अनुमानित कीमत 63 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है। आरोपी ग्राहक की तलाश में नहरगांव स्कूल के पास घूम रहा था, तभी पुलिस की नजर पड़ गई। घटना की विस्तृत जानकारी कुछ यूं है… गरियाबंद पुलिस और स्पेशल टीम की सतर्कता के कारण उड़ीसा के कालाहांडी जिले का निवासी बंशी शेट्टी (पिता डमरू शेट्टी, उम्र 50 वर्ष, निवासी भवानीपटम धोबीपारा, जिला कालाहांडी, उड़ीसा) को रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी के पास से 34 नग बिना तराशे हुए हीरे बरामद किए गए हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी नहरगांव स्कूल के पास ग्राहक ढूंढने के लिए घूम रहा था। टीम ने उसकी तलाशी ली तो भारी मात्रा में हीरे मिले। इन अनकट हीरों की बाजार मूल्य लगभग 63 लाख 50 हजार रुपये आंकी जा रही है। वर्तमान में आरोपी के खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। पुलिस आगे की जांच में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये हीरे कहां से आए हैं, इनका असली स्रोत क्या है और क्या कोई बड़ा गिरोह इस तस्करी में शामिल है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता और अवैध खनन-तस्करी पर सख्त रुख को दर्शाती है। ऐसे तस्करों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकी जा सके। द छत्तीसगढ़ हमेशा की तरह राज्य की महत्वपूर्ण खबरें आपके तक बिना किसी संशोधन के पहुंचाता रहेगा। दर्शकों, अगर आपके इलाके में कोई अवैध खनन, हीरे-मणियों की तस्करी या संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत गरियाबंद पुलिस या नजदीकी थाने में सूचना दें। आपकी एक सतर्कता राज्य की संपत्ति बचाने में मदद कर सकती है। हेल्पलाइन नंबर 112 पर भी कॉल करें। अधिक अपडेट्स के लिए द छत्तीसगढ़ चैनल को अभी सब्सक्राइब करें, लाइक और शेयर जरूर करें। नमस्कार… जय छत्तीसगढ़!
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    नमस्कार जय जोहार जय छत्तीसगढ़ आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़ 
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में पुलिस और स्पेशल टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। 34 नग बिना तराशे हुए हीरे (रॉ डायमंड्स) के साथ एक अंतरराज्यीय तस्कर को गिरफ्तार किया गया है। इन हीरों की अनुमानित कीमत 63 लाख 50 हजार रुपये बताई जा रही है। आरोपी ग्राहक की तलाश में नहरगांव स्कूल के पास घूम रहा था, तभी पुलिस की नजर पड़ गई।
घटना की विस्तृत जानकारी कुछ यूं है…
गरियाबंद पुलिस और स्पेशल टीम की सतर्कता के कारण उड़ीसा के कालाहांडी जिले का निवासी बंशी शेट्टी (पिता डमरू शेट्टी, उम्र 50 वर्ष, निवासी भवानीपटम धोबीपारा, जिला कालाहांडी, उड़ीसा) को रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी के पास से 34 नग बिना तराशे हुए हीरे बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार आरोपी नहरगांव स्कूल के पास ग्राहक ढूंढने के लिए घूम रहा था। टीम ने उसकी तलाशी ली तो भारी मात्रा में हीरे मिले। इन अनकट हीरों की बाजार मूल्य लगभग 63 लाख 50 हजार रुपये आंकी जा रही है।
वर्तमान में आरोपी के खिलाफ माइनिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी गई है। पुलिस आगे की जांच में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये हीरे कहां से आए हैं, इनका असली स्रोत क्या है और क्या कोई बड़ा गिरोह इस तस्करी में शामिल है।
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ पुलिस की सतर्कता और अवैध खनन-तस्करी पर सख्त रुख को दर्शाती है। ऐसे तस्करों के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकी जा सके।
द छत्तीसगढ़ हमेशा की तरह राज्य की महत्वपूर्ण खबरें आपके तक बिना किसी संशोधन के पहुंचाता रहेगा।
दर्शकों, अगर आपके इलाके में कोई अवैध खनन, हीरे-मणियों की तस्करी या संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तुरंत गरियाबंद पुलिस या नजदीकी थाने में सूचना दें। आपकी एक सतर्कता राज्य की संपत्ति बचाने में मदद कर सकती है। हेल्पलाइन नंबर 112 पर भी कॉल करें।
अधिक अपडेट्स के लिए द छत्तीसगढ़ चैनल को अभी सब्सक्राइब करें, लाइक और शेयर जरूर करें।
नमस्कार… जय छत्तीसगढ़!
    user_YOGESH KUAMR SAHU
    YOGESH KUAMR SAHU
    News Anchor बालोद, बालोद, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • "जस गीत केवल सुर और ताल नहीं, बल्कि भक्ति और श्रद्धा की सजीव अभिव्यक्ति है।" "जहाँ जस गीत गूंजता है, वहाँ माँ की कृपा स्वयं विराजती है।" "जस गीत की हर पंक्ति में आस्था का सागर और भक्ति का गहरापन छिपा होता है।" "जस गीत आत्मा को माँ के चरणों से जोड़ने का पवित्र माध्यम है।" "संगीत जब भक्ति से मिल जाए, तो जस गीत बनकर हृदय को दिव्यता से भर देता है।" "जस गीत केवल प्रस्तुति नहीं, यह माँ के प्रति समर्पण की अनुभूति है।" "भक्ति की सच्ची पहचान है—दिल से गाया गया जस गीत।" "जस गीत में शब्द नहीं, भाव बोलते हैं और माँ तक पहुँचते हैं।"
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    "जस गीत केवल सुर और ताल नहीं, बल्कि भक्ति और श्रद्धा की सजीव अभिव्यक्ति है।"
"जहाँ जस गीत गूंजता है, वहाँ माँ की कृपा स्वयं विराजती है।"
"जस गीत की हर पंक्ति में आस्था का सागर और भक्ति का गहरापन छिपा होता है।"
"जस गीत आत्मा को माँ के चरणों से जोड़ने का पवित्र माध्यम है।"
"संगीत जब भक्ति से मिल जाए, तो जस गीत बनकर हृदय को दिव्यता से भर देता है।"
"जस गीत केवल प्रस्तुति नहीं, यह माँ के प्रति समर्पण की अनुभूति है।"
"भक्ति की सच्ची पहचान है—दिल से गाया गया जस गीत।"
"जस गीत में शब्द नहीं, भाव बोलते हैं और माँ तक पहुँचते हैं।"
    user_User8642
    User8642
    पत्रकार मोहला, मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • कोंडागांव विधायक ने 10 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन कोंडागांव, 24 मार्च 2026/ बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेंडी ने मंगलवार को कोंडागांव में आयोजित भूमिपूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में 10 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। विधायक ने 05 निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया, जिसमें 50 सीटर पोस्ट मैट्रिक अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास भवन, 33/11 के.व्ही. नवीन उपकेन्द्र लोहरापारा, जल संसाधन उपसंभाग कोण्डागाँव कार्यालय भवन का निर्माण कार्य और हाई स्कूल भवन का निर्माण कार्य शामिल है। इसके अलावा जिले में निवासरत लोगों के स्वरोजगार एवं कौशल विकास हेतु सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम सहित स्थानीय जनप्रतिधिगण उपस्थित रहे। बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक सुश्री लता उसेंडी ने छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छात्रावास के निर्माण से उन विद्यार्थियों को बड़ी सुविधा मिलेगी, जिन्हें अब तक जगह की कमी के कारण प्रवेश नहीं मिल पाता था। इससे बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी और उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि लगभग 4 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से 33 केवी पावर स्टेशन का भूमिपूजन किया गया है तथा अन्य उपकेंद्रों के निर्माण से क्षेत्र में बिजली की समस्या दूर होगी। संसाधनों की उपलब्धता से विकास कार्य सुचारू रूप से संपन्न होता है। उन्होंने आज बहनों के कौशल विकास के लिए सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से महिलाओं का कौशल उन्नयन होगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। युवाओं को सीखने की प्रवृत्ति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने खाली समय का सदुपयोग करते हुए कुछ न कुछ नया अवश्य सीखना चाहिए, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में उनके कौशल का विकास हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति में इतना हुनर होना चाहिए कि यदि नौकरी न भी मिले, तो उसे कभी खाली बैठने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार होगा और समग्र विकास को गति मिलेगी। नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग के छात्राओं को छात्रावास के बन जाने से बेहतर सुविधाएं मिलेगी और अच्छे से पढ़ाई कर सकेंगे। साथ ही विद्युत व्यवस्था में भी सुधार होगा। इन कार्यों में आदिवासी विकास विभाग के 50 सीटर पोस्ट मैट्रिक अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास भवन कोण्डागाँव लागत राशि रू. 191.51 लाख, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित कोण्डागाँव के 33/11 के.व्ही. नवीन उपकेन्द्र लोहरापारा (कोण्डागाँव) का निर्माण कार्य लागत राशि रू. 490.99 लाख, जल संसाधन विभाग संभाग कोण्डागाँव के वि.ख. कोण्डागाँव में अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन उपसंभाग कोण्डागाँव कार्यालय भवन का निर्माण कार्य लागत राशि रू. 144.27 लाख, जिला कोण्डागाँव के वि.ख. कोण्डागाँव में अनुविभागीय अधिकारी लघु जल संसाधन सर्वे उपसंभाग कोण्डागाँव कार्यालय भवन का पुननिर्माण कार्य लागत राशि रू. 125.26 लाख और लोक निर्माण विभाग संभाग कोण्डागांव द्वारा कोण्डागाँव के वार्ड क्रमांक-03 में हाई स्कूल भवन का निर्माण कार्य लागत राशि रू. 75.23 लाख रुपए शामिल है। इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्री नंद लाल राठौर, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री जसकेतु उसेंडी, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, श्री मनोज जैन, श्री दीपेश अरोरा, श्री जितेन्द्र सुराना सहित पार्षदगण और अपर कलेक्टर श्री चित्रकांत चाली ठाकुर, एसडीएम श्री अजय उरांव, तहसीलदार श्री मनोज रावटे और सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग श्री कृपेन्द्र तिवारी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री आर एल धीवर ने कार्यक्रम के अंत में आभार व्यक्त किया।
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    कोंडागांव विधायक ने 10 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन
कोंडागांव, 24 मार्च 2026/ बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सुश्री लता उसेंडी ने मंगलवार को कोंडागांव में आयोजित भूमिपूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में 10 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। विधायक ने 05 निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया, जिसमें 50 सीटर पोस्ट मैट्रिक अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास भवन, 33/11 के.व्ही. नवीन उपकेन्द्र लोहरापारा, जल संसाधन उपसंभाग कोण्डागाँव कार्यालय भवन का निर्माण कार्य और हाई स्कूल भवन का निर्माण कार्य शामिल है। इसके अलावा जिले में निवासरत लोगों के स्वरोजगार एवं कौशल विकास हेतु सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का भी शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अनीता कोर्राम सहित स्थानीय जनप्रतिधिगण उपस्थित रहे। 
बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक सुश्री लता उसेंडी ने छात्राओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छात्रावास के निर्माण से उन विद्यार्थियों को बड़ी सुविधा मिलेगी, जिन्हें अब तक जगह की कमी के कारण प्रवेश नहीं मिल पाता था। इससे बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी और उनके भविष्य को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि लगभग 4 करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से 33 केवी पावर स्टेशन का भूमिपूजन किया गया है तथा अन्य उपकेंद्रों के निर्माण से क्षेत्र में बिजली की समस्या दूर होगी। संसाधनों की उपलब्धता से विकास कार्य सुचारू रूप से संपन्न होता है। उन्होंने आज बहनों के कौशल विकास के लिए सिलाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से महिलाओं का कौशल उन्नयन होगा और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। युवाओं को सीखने की प्रवृत्ति पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने खाली समय का सदुपयोग करते हुए कुछ न कुछ नया अवश्य सीखना चाहिए, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में उनके कौशल का विकास हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति में इतना हुनर होना चाहिए कि यदि नौकरी न भी मिले, तो उसे कभी खाली बैठने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन विकास कार्यों से क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार होगा और समग्र विकास को गति मिलेगी।
नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछड़ा वर्ग के छात्राओं को छात्रावास के बन जाने से बेहतर सुविधाएं मिलेगी और अच्छे से पढ़ाई कर सकेंगे। साथ ही विद्युत व्यवस्था में भी सुधार होगा। 
इन कार्यों में आदिवासी विकास विभाग के 50 सीटर पोस्ट मैट्रिक अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास भवन कोण्डागाँव लागत राशि रू. 191.51 लाख, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित कोण्डागाँव के 33/11 के.व्ही. नवीन उपकेन्द्र लोहरापारा (कोण्डागाँव) का निर्माण कार्य लागत राशि रू. 490.99 लाख, जल संसाधन विभाग संभाग कोण्डागाँव के वि.ख. कोण्डागाँव में अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन उपसंभाग कोण्डागाँव कार्यालय भवन का निर्माण कार्य लागत राशि रू. 144.27 लाख, जिला कोण्डागाँव के वि.ख. कोण्डागाँव में अनुविभागीय अधिकारी लघु जल संसाधन सर्वे उपसंभाग कोण्डागाँव कार्यालय भवन का पुननिर्माण कार्य लागत राशि रू. 125.26 लाख और लोक निर्माण विभाग संभाग कोण्डागांव द्वारा कोण्डागाँव के वार्ड क्रमांक-03 में हाई स्कूल भवन का निर्माण कार्य लागत राशि रू. 75.23 लाख रुपए शामिल है।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य श्री नंद लाल राठौर, नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री जसकेतु उसेंडी, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष श्री टोमेंद्र ठाकुर, श्री मनोज जैन, श्री दीपेश अरोरा, श्री जितेन्द्र सुराना सहित पार्षदगण और अपर कलेक्टर श्री चित्रकांत चाली ठाकुर, एसडीएम श्री अजय उरांव, तहसीलदार श्री मनोज रावटे और सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग श्री कृपेन्द्र तिवारी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री आर एल धीवर ने कार्यक्रम के अंत में आभार व्यक्त किया।
    user_ESHENDRA PATEL
    ESHENDRA PATEL
    पत्रकार कोंडागाँव, कोंडागांव, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी: 2200 साल पुरानी आस्था की अमर गाथा, जहां प्रेम, भक्ति और चमत्कार एक साथ बुनते हैं देवी का दरबार! छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पहाड़ी पर विराजमान यह शक्तिपीठ लाखों भक्तों की मनोकामना पूरी करता है – जानिए पूरी कथा, राजाओं की भक्ति से लेकर प्रेमियों के पुनर्जीवन तक नमस्कार दोस्तों, आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़ चैनल। मैं हूं आपके साथ योगेश कुमार साहू। आज हम लेकर आए हैं छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़ की पूरी कहानी। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि 2200 वर्ष पुरानी भक्ति, राजसी इतिहास और एक अनोखी प्रेम कथा का जीवंत साक्षी है। चैत्र नवरात्र 2026 में यहां लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं – 1000 सीढ़ियां चढ़कर, रोपवे से या पैदल – सब माँ के दर्शन के लिए। 7 दिनों में 10 लाख से ज्यादा भक्त आ चुके हैं, और मंदिर 8 हजार से ज्यादा ज्योति कलशों से जगमगा रहा है। प्रसाद योजना के तहत नए पर्यटक सुविधा केंद्र भी बन चुके हैं। लेकिन असली महिमा तो माँ की चमत्कारी कहानी में है। चलिए, विस्तार से जानते हैं। 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर बड़ी बम्लेश्वरी, नीचे छोटी बम्लेश्वरी और मंझली रणचंडी – तीनों स्वरूपों में माँ बगलामुखी (दुर्गा का रूप) जागृत हैं। प्राचीन नाम था कामाख्या नगरी या कामावती नगर। यहां की यात्रा हर भक्त को माँ के चरणों में ले जाती है। 2200 वर्ष पुरानी शुरुआत: राजा वीरसेन की संतानहीन पीड़ा और मंदिर की नींव करीब 2200 साल पहले, कामाख्या नगरी में राजा वीरसेन का शासन था। वे प्रजापालक थे, लेकिन संतान नहीं थी। पंडितों की सलाह पर उन्होंने शिवजी और माँ दुर्गा की एक साल तक कठोर तपस्या की। देवी-देवता प्रसन्न हुए, रानी को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ – नाम रखा मदनसेन। आभार में राजा ने पहाड़ी पर माँ बम्लेश्वरी (दुर्गा का शक्तिरूप) का मंदिर बनवाया। यहीं से शुरू हुई इस धाम की यात्रा। मदनसेन के बाद उनके पुत्र राजा कामसेन गद्दी पर आए। वे भी माँ बगलामुखी के परम भक्त थे। राजा कामसेन की तपस्या और माँ का पहाड़ी पर अवतरण कामसेन ने तपोबल से माँ बगलामुखी को इतना प्रसन्न किया कि विनती की – “माँ, पहाड़ी की चोटी पर विराजमान हो जाओ, ताकि प्रजा आसानी से दर्शन कर सके।” माँ प्रसन्न हुईं और बड़ी बम्लेश्वरी स्वरूप में प्रकट हो गईं। लेकिन जंगल और दुर्गम रास्ते से भक्तों को कष्ट होता देख राजा ने फिर प्रार्थना की – “माँ, नीचे भी विराजमान हो जाओ।” माँ ने उनकी भक्ति और प्रजा-कल्याण की भावना देखी, और पहाड़ से उतरकर छोटी बम्लेश्वरी व मंझली रणचंडी के रूप में जागृत हो गईं। आज भी तीनों माताएं भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं। अब आती है वो सबसे भावुक प्रेम कथा – माधवानल और कामकंदला की जुदाई और माँ का चमत्कार यह कथा मंदिर की सबसे प्रसिद्ध है। कामाख्या नगरी संगीत-नृत्य की नगरी थी। राजा कामसेन के दरबार में गायक माधवानल और नृतकी कामकंदला आए। दोनों पहली नजर में प्रेम में पड़ गए। एक बार नृत्य में ताल बिगड़ने पर माधवानल ने कारण बताया। राजा प्रसन्न होकर मोतियों की माला दी, लेकिन माधवानल ने उसे कामकंदला को सौंप दिया। राजा क्रोधित हुए और माधवानल को निकाल दिया। राजकुमार मदनादित्य भी कामकंदला पर मोहित था। उसने राजद्रोह का आरोप लगाकर कामकंदला को बंदी बना लिया। माधवानल मदद के लिए उज्जैन पहुंचे – राजा विक्रमादित्य के पास। विक्रमादित्य ने युद्ध किया, शिव-दुर्गा के हस्तक्षेप से संधि हुई। लेकिन विक्रमादित्य ने परीक्षा ली – झूठ बोला कि माधवानल मर गया। दुख से कामकंदला ने तालाब में कूदकर प्राण त्याग दिए। माधवानल को पता चला तो उसने भी जीवन समाप्त कर दिया। यहां हुआ चमत्कार! विक्रमादित्य ने माँ बगलामुखी को आह्वान किया। माँ प्रकट हुईं, दोनों प्रेमियों को जीवित किया और कहा – “सच्चा प्रेम कभी नहीं मरता। मैं यहां जागृत रूप में रहूंगी, सच्चे प्रेमियों और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करूंगी।” यही कारण है कि माँ बम्लेश्वरी को “प्रेमियों की देवी” भी कहा जाता है। यह कथा ‘माधवानल कामकंदला’ ग्रंथ में विस्तार से है। मंदिर का वर्णन और वर्तमान महिमा बड़ी बम्लेश्वरी 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर है – 1000+ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर भव्य, माँ की मूर्ति चमकदार। नीचे छोटी बम्लेश्वरी अक्षरधाम शैली में – 8 द्वार, 44 स्तंभ, 95 फीट ऊंचा। गर्भगृह सोने-चांदी से सजा। चारों ओर हरा-भरा जंगल, तालाब – प्रकृति का अद्भुत संगम। ट्रस्ट (1976 से) संचालित। रोपवे, धर्मशालाएं, भोजनालय सब उपलब्ध। नवरात्र में नारियल चढ़ाव, ज्योति कलश – मंदिर जगमगाता है। भक्त कहते हैं – “सच्चे दिल से मांगी मनोकामना पूरी होती है।” संतान, विवाह, नौकरी, स्वास्थ्य – सब मिलता है। कैसे पहुंचें? • रेल: डोंगरगढ़ जंक्शन (मुंबई-हावड़ा रूट) • सड़क: राजनांदगांव से 35 किमी, रायपुर से 106 किमी (NH-6) • हवाई: रायपुर एयरपोर्ट (72 किमी) दोस्तों, डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी सिर्फ धाम नहीं, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर हैं। यहां राजा वीरसेन की भक्ति, कामसेन की तपस्या और माधवानल-कामकंदला का प्रेम एक साथ सांस लेता है। जो एक बार आता है, बार-बार लौटना चाहता है। अगर आप भी माँ के दरबार में जाना चाहते हैं, तो बस मन में संकल्प लीजिए – माँ जरूर बुलाएंगी। जय माँ बम्लेश्वरी! जय छत्तीसगढ़! धन्यवाद देखने के लिए। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया तो लाइक, शेयर और सब्सक्राइब जरूर करें। बेल आइकन दबाकर नोटिफिकेशन ऑन रखें, ताकि छत्तीसगढ़ की हर खबर और कहानी सबसे पहले आप तक पहुंचे। नमस्कार, जय जोहार!
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    डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी: 2200 साल पुरानी आस्था की अमर गाथा, जहां प्रेम, भक्ति और चमत्कार एक साथ बुनते हैं देवी का दरबार!
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पहाड़ी पर विराजमान यह शक्तिपीठ लाखों भक्तों की मनोकामना पूरी करता है – जानिए पूरी कथा, राजाओं की भक्ति से लेकर प्रेमियों के पुनर्जीवन तक
नमस्कार दोस्तों,
आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़ चैनल।
मैं हूं आपके साथ योगेश कुमार साहू।
आज हम लेकर आए हैं छत्तीसगढ़ की सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़ की पूरी कहानी। यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि 2200 वर्ष पुरानी भक्ति, राजसी इतिहास और एक अनोखी प्रेम कथा का जीवंत साक्षी है। चैत्र नवरात्र 2026 में यहां लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं – 1000 सीढ़ियां चढ़कर, रोपवे से या पैदल – सब माँ के दर्शन के लिए। 7 दिनों में 10 लाख से ज्यादा भक्त आ चुके हैं, और मंदिर 8 हजार से ज्यादा ज्योति कलशों से जगमगा रहा है। प्रसाद योजना के तहत नए पर्यटक सुविधा केंद्र भी बन चुके हैं। लेकिन असली महिमा तो माँ की चमत्कारी कहानी में है। चलिए, विस्तार से जानते हैं।
1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर बड़ी बम्लेश्वरी, नीचे छोटी बम्लेश्वरी और मंझली रणचंडी – तीनों स्वरूपों में माँ बगलामुखी (दुर्गा का रूप) जागृत हैं। प्राचीन नाम था कामाख्या नगरी या कामावती नगर। यहां की यात्रा हर भक्त को माँ के चरणों में ले जाती है।
2200 वर्ष पुरानी शुरुआत: राजा वीरसेन की संतानहीन पीड़ा और मंदिर की नींव
करीब 2200 साल पहले, कामाख्या नगरी में राजा वीरसेन का शासन था। वे प्रजापालक थे, लेकिन संतान नहीं थी। पंडितों की सलाह पर उन्होंने शिवजी और माँ दुर्गा की एक साल तक कठोर तपस्या की। देवी-देवता प्रसन्न हुए, रानी को पुत्र रत्न प्राप्त हुआ – नाम रखा मदनसेन। आभार में राजा ने पहाड़ी पर माँ बम्लेश्वरी (दुर्गा का शक्तिरूप) का मंदिर बनवाया। यहीं से शुरू हुई इस धाम की यात्रा।
मदनसेन के बाद उनके पुत्र राजा कामसेन गद्दी पर आए। वे भी माँ बगलामुखी के परम भक्त थे।
राजा कामसेन की तपस्या और माँ का पहाड़ी पर अवतरण
कामसेन ने तपोबल से माँ बगलामुखी को इतना प्रसन्न किया कि विनती की – “माँ, पहाड़ी की चोटी पर विराजमान हो जाओ, ताकि प्रजा आसानी से दर्शन कर सके।” माँ प्रसन्न हुईं और बड़ी बम्लेश्वरी स्वरूप में प्रकट हो गईं। लेकिन जंगल और दुर्गम रास्ते से भक्तों को कष्ट होता देख राजा ने फिर प्रार्थना की – “माँ, नीचे भी विराजमान हो जाओ।” माँ ने उनकी भक्ति और प्रजा-कल्याण की भावना देखी, और पहाड़ से उतरकर छोटी बम्लेश्वरी व मंझली रणचंडी के रूप में जागृत हो गईं। आज भी तीनों माताएं भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं।
अब आती है वो सबसे भावुक प्रेम कथा – माधवानल और कामकंदला की जुदाई और माँ का चमत्कार
यह कथा मंदिर की सबसे प्रसिद्ध है। कामाख्या नगरी संगीत-नृत्य की नगरी थी। राजा कामसेन के दरबार में गायक माधवानल और नृतकी कामकंदला आए। दोनों पहली नजर में प्रेम में पड़ गए। एक बार नृत्य में ताल बिगड़ने पर माधवानल ने कारण बताया। राजा प्रसन्न होकर मोतियों की माला दी, लेकिन माधवानल ने उसे कामकंदला को सौंप दिया। राजा क्रोधित हुए और माधवानल को निकाल दिया।
राजकुमार मदनादित्य भी कामकंदला पर मोहित था। उसने राजद्रोह का आरोप लगाकर कामकंदला को बंदी बना लिया। माधवानल मदद के लिए उज्जैन पहुंचे – राजा विक्रमादित्य के पास। विक्रमादित्य ने युद्ध किया, शिव-दुर्गा के हस्तक्षेप से संधि हुई। लेकिन विक्रमादित्य ने परीक्षा ली – झूठ बोला कि माधवानल मर गया। दुख से कामकंदला ने तालाब में कूदकर प्राण त्याग दिए। माधवानल को पता चला तो उसने भी जीवन समाप्त कर दिया।
यहां हुआ चमत्कार! विक्रमादित्य ने माँ बगलामुखी को आह्वान किया। माँ प्रकट हुईं, दोनों प्रेमियों को जीवित किया और कहा – “सच्चा प्रेम कभी नहीं मरता। मैं यहां जागृत रूप में रहूंगी, सच्चे प्रेमियों और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करूंगी।” यही कारण है कि माँ बम्लेश्वरी को “प्रेमियों की देवी” भी कहा जाता है। यह कथा ‘माधवानल कामकंदला’ ग्रंथ में विस्तार से है।
मंदिर का वर्णन और वर्तमान महिमा
बड़ी बम्लेश्वरी 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर है – 1000+ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर भव्य, माँ की मूर्ति चमकदार। नीचे छोटी बम्लेश्वरी अक्षरधाम शैली में – 8 द्वार, 44 स्तंभ, 95 फीट ऊंचा। गर्भगृह सोने-चांदी से सजा। चारों ओर हरा-भरा जंगल, तालाब – प्रकृति का अद्भुत संगम।
ट्रस्ट (1976 से) संचालित। रोपवे, धर्मशालाएं, भोजनालय सब उपलब्ध। नवरात्र में नारियल चढ़ाव, ज्योति कलश – मंदिर जगमगाता है। भक्त कहते हैं – “सच्चे दिल से मांगी मनोकामना पूरी होती है।” संतान, विवाह, नौकरी, स्वास्थ्य – सब मिलता है।
कैसे पहुंचें?
•  रेल: डोंगरगढ़ जंक्शन (मुंबई-हावड़ा रूट)
•  सड़क: राजनांदगांव से 35 किमी, रायपुर से 106 किमी (NH-6)
•  हवाई: रायपुर एयरपोर्ट (72 किमी)
दोस्तों, डोंगरगढ़ की माँ बम्लेश्वरी सिर्फ धाम नहीं, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर हैं। यहां राजा वीरसेन की भक्ति, कामसेन की तपस्या और माधवानल-कामकंदला का प्रेम एक साथ सांस लेता है। जो एक बार आता है, बार-बार लौटना चाहता है।
अगर आप भी माँ के दरबार में जाना चाहते हैं, तो बस मन में संकल्प लीजिए – माँ जरूर बुलाएंगी।
जय माँ बम्लेश्वरी! जय छत्तीसगढ़!
धन्यवाद देखने के लिए।
अगर आपको यह वीडियो पसंद आया तो लाइक, शेयर और सब्सक्राइब जरूर करें।
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नमस्कार, जय जोहार!
    user_YOGESH KUAMR SAHU
    YOGESH KUAMR SAHU
    News Anchor बालोद, बालोद, छत्तीसगढ़•
    12 hrs ago
  • हरीश राणा को आज़ मिली आजादी जी हाँ काल शाम को हरीश राणा ने दिल्ली एम्स हॉस्पिटल मे ली अपनी आख़िरी सांस मता पिता का अपने बेटे को दी आख़िरी विदाई....
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    हरीश राणा को आज़ मिली आजादी 
जी हाँ काल शाम को हरीश राणा ने दिल्ली एम्स हॉस्पिटल मे ली अपनी आख़िरी सांस मता पिता का अपने बेटे को दी आख़िरी विदाई....
    user_Dainik News🏪 Pradeep Singh
    Dainik News🏪 Pradeep Singh
    Voice of people दुर्ग, दुर्ग, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
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