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भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों का भारी खर्च आम आदमी की आर्थिक कमर तोड़ रहा है, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। खास तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायरॉइड जैसी जीवनभर चलने वाली बीमारियों की दवाओं का बोझ बहुत अधिक होता है। इसी समस्या को हल करने और हर नागरिक को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) शुरू की है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति पैसों की कमी के कारण दवाइयों से वंचित न रहे। जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती। दवा का असली असर उसके अंदर मौजूद केमिकल फॉर्मूला यानी 'सॉल्ट' पर निर्भर करता है, न कि किसी बड़े ब्रांड नाम पर। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च, डेवलपमेंट और भारी मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते, जिसके कारण वे दवाइयाँ काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा पाती हैं। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध सभी दवाइयाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं। इन दवाओं के प्रत्येक बैच का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कड़ा परीक्षण किया जाता है, जिससे उनकी शुद्धता और गुणवत्ता 100% सुनिश्चित होती है। यह योजना आम जनता के लिए बड़ी आर्थिक राहत लेकर आई है। उदाहरण के तौर पर, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन बाजार में 100-150 रुपये में मिलती है, जबकि जन औषधि केंद्र पर यह 15-25 रुपये में उपलब्ध है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली एटोरवास्टेटिन (10mg) ब्रांडेड रूप में 80-150 रुपये की आती है, वहीं जन औषधि में इसकी कीमत केवल 10-15 रुपये होती है। इसी प्रकार, गैस्ट्रिक के लिए पैंटोप्राजोल + डोमपेरिडोन (DSR) जो बाजार में 100-140 रुपये में मिलता है, जन औषधि में केवल 20-25 रुपये में उपलब्ध है। एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी दवाइयों में भी इसी तरह 50-90% तक की भारी बचत होती है। एक परिवार का मासिक मेडिकल बिल जो ब्रांडेड दवाओं पर 3000-5000 रुपये तक पहुँच सकता है, जन औषधि से मात्र 500-800 रुपये तक सीमित हो सकता है, जिससे हजारों रुपये की बचत होती है जिसका उपयोग शिक्षा या पोषण पर किया जा सकता है। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति साबित हो रही है, जो देश के कोने-कोने में आशा की किरण फैला रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और डॉक्टरों से पर्चे पर दवा का ब्रांड नाम लिखने के बजाय 'सॉल्ट का नाम' लिखने का आग्रह करना चाहिए। साथ ही, दवा खरीदते समय फार्मासिस्ट से जेनेरिक विकल्प की उपलब्धता के बारे में पूछना चाहिए। यह जागरूकता न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि देश को एक स्वस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर भी ले जाएगी, क्योंकि जन औषधि का वादा है – सस्ती दवा, अच्छी दवा।

1 hr ago
user_जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
Medical centre श्री माधोपुर, सीकर, राजस्थान•
1 hr ago

भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों का भारी खर्च आम आदमी की आर्थिक कमर तोड़ रहा है, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। खास तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायरॉइड जैसी जीवनभर चलने वाली बीमारियों की दवाओं का बोझ बहुत अधिक होता है। इसी समस्या को हल करने और हर नागरिक को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) शुरू की है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति पैसों की कमी के कारण दवाइयों से वंचित न रहे। जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती। दवा का असली असर उसके अंदर मौजूद केमिकल फॉर्मूला यानी 'सॉल्ट' पर निर्भर करता है, न कि किसी बड़े ब्रांड नाम पर। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च, डेवलपमेंट और भारी मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते, जिसके कारण वे दवाइयाँ काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा पाती हैं। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध सभी दवाइयाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं। इन दवाओं के प्रत्येक बैच का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कड़ा परीक्षण किया जाता है, जिससे उनकी शुद्धता और गुणवत्ता 100% सुनिश्चित होती है। यह योजना आम जनता के लिए बड़ी आर्थिक राहत लेकर आई है। उदाहरण के तौर पर, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन बाजार में 100-150 रुपये में मिलती है, जबकि जन औषधि केंद्र पर यह 15-25 रुपये में उपलब्ध है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली एटोरवास्टेटिन (10mg) ब्रांडेड रूप में 80-150 रुपये की आती है, वहीं जन औषधि में इसकी कीमत केवल 10-15 रुपये होती है। इसी प्रकार, गैस्ट्रिक के लिए पैंटोप्राजोल + डोमपेरिडोन (DSR) जो बाजार में 100-140 रुपये में मिलता है, जन औषधि में केवल 20-25 रुपये में उपलब्ध है। एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी दवाइयों में भी इसी तरह 50-90% तक की भारी बचत होती है। एक परिवार का मासिक मेडिकल बिल जो ब्रांडेड दवाओं पर 3000-5000 रुपये तक पहुँच सकता है, जन औषधि से मात्र 500-800 रुपये तक सीमित हो सकता है, जिससे हजारों रुपये की बचत होती है जिसका उपयोग शिक्षा या पोषण पर किया जा सकता है। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति साबित हो रही है, जो देश के कोने-कोने में आशा की किरण फैला रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और डॉक्टरों से पर्चे पर दवा का ब्रांड नाम लिखने के बजाय 'सॉल्ट का नाम' लिखने का आग्रह करना चाहिए। साथ ही, दवा खरीदते समय फार्मासिस्ट से जेनेरिक विकल्प की उपलब्धता के बारे में पूछना चाहिए। यह जागरूकता न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि देश को एक स्वस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर भी ले जाएगी, क्योंकि जन औषधि का वादा है – सस्ती दवा, अच्छी दवा।

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  • भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों का भारी खर्च आम आदमी की आर्थिक कमर तोड़ रहा है, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। खास तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायरॉइड जैसी जीवनभर चलने वाली बीमारियों की दवाओं का बोझ बहुत अधिक होता है। इसी समस्या को हल करने और हर नागरिक को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) शुरू की है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति पैसों की कमी के कारण दवाइयों से वंचित न रहे। जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती। दवा का असली असर उसके अंदर मौजूद केमिकल फॉर्मूला यानी 'सॉल्ट' पर निर्भर करता है, न कि किसी बड़े ब्रांड नाम पर। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च, डेवलपमेंट और भारी मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते, जिसके कारण वे दवाइयाँ काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा पाती हैं। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध सभी दवाइयाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं। इन दवाओं के प्रत्येक बैच का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कड़ा परीक्षण किया जाता है, जिससे उनकी शुद्धता और गुणवत्ता 100% सुनिश्चित होती है। यह योजना आम जनता के लिए बड़ी आर्थिक राहत लेकर आई है। उदाहरण के तौर पर, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन बाजार में 100-150 रुपये में मिलती है, जबकि जन औषधि केंद्र पर यह 15-25 रुपये में उपलब्ध है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली एटोरवास्टेटिन (10mg) ब्रांडेड रूप में 80-150 रुपये की आती है, वहीं जन औषधि में इसकी कीमत केवल 10-15 रुपये होती है। इसी प्रकार, गैस्ट्रिक के लिए पैंटोप्राजोल + डोमपेरिडोन (DSR) जो बाजार में 100-140 रुपये में मिलता है, जन औषधि में केवल 20-25 रुपये में उपलब्ध है। एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी दवाइयों में भी इसी तरह 50-90% तक की भारी बचत होती है। एक परिवार का मासिक मेडिकल बिल जो ब्रांडेड दवाओं पर 3000-5000 रुपये तक पहुँच सकता है, जन औषधि से मात्र 500-800 रुपये तक सीमित हो सकता है, जिससे हजारों रुपये की बचत होती है जिसका उपयोग शिक्षा या पोषण पर किया जा सकता है। प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति साबित हो रही है, जो देश के कोने-कोने में आशा की किरण फैला रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और डॉक्टरों से पर्चे पर दवा का ब्रांड नाम लिखने के बजाय 'सॉल्ट का नाम' लिखने का आग्रह करना चाहिए। साथ ही, दवा खरीदते समय फार्मासिस्ट से जेनेरिक विकल्प की उपलब्धता के बारे में पूछना चाहिए। यह जागरूकता न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि देश को एक स्वस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर भी ले जाएगी, क्योंकि जन औषधि का वादा है – सस्ती दवा, अच्छी दवा।
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    भारत में स्वास्थ्य सेवाओं और दवाइयों का भारी खर्च आम आदमी की आर्थिक कमर तोड़ रहा है, जिससे कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं। खास तौर पर डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और थायरॉइड जैसी जीवनभर चलने वाली बीमारियों की दवाओं का बोझ बहुत अधिक होता है। इसी समस्या को हल करने और हर नागरिक को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के लिए भारत सरकार ने 'प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना' (PMBJP) शुरू की है। इसका मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी गरीब या मध्यम वर्गीय व्यक्ति पैसों की कमी के कारण दवाइयों से वंचित न रहे।

जन औषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयाँ ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती होती हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता में कोई कमी नहीं होती। दवा का असली असर उसके अंदर मौजूद केमिकल फॉर्मूला यानी 'सॉल्ट' पर निर्भर करता है, न कि किसी बड़े ब्रांड नाम पर। जेनेरिक दवा बनाने वाली कंपनियों को रिसर्च, डेवलपमेंट और भारी मार्केटिंग पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं करने पड़ते, जिसके कारण वे दवाइयाँ काफी कम कीमत पर उपलब्ध करा पाती हैं। जन औषधि केंद्रों पर उपलब्ध सभी दवाइयाँ विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) द्वारा प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं। इन दवाओं के प्रत्येक बैच का NABL मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कड़ा परीक्षण किया जाता है, जिससे उनकी शुद्धता और गुणवत्ता 100% सुनिश्चित होती है।

यह योजना आम जनता के लिए बड़ी आर्थिक राहत लेकर आई है। उदाहरण के तौर पर, डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड + मेटफॉर्मिन बाजार में 100-150 रुपये में मिलती है, जबकि जन औषधि केंद्र पर यह 15-25 रुपये में उपलब्ध है। कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने वाली एटोरवास्टेटिन (10mg) ब्रांडेड रूप में 80-150 रुपये की आती है, वहीं जन औषधि में इसकी कीमत केवल 10-15 रुपये होती है। इसी प्रकार, गैस्ट्रिक के लिए पैंटोप्राजोल + डोमपेरिडोन (DSR) जो बाजार में 100-140 रुपये में मिलता है, जन औषधि में केवल 20-25 रुपये में उपलब्ध है। एंटीबायोटिक्स और विटामिन सप्लीमेंट्स जैसी दवाइयों में भी इसी तरह 50-90% तक की भारी बचत होती है। एक परिवार का मासिक मेडिकल बिल जो ब्रांडेड दवाओं पर 3000-5000 रुपये तक पहुँच सकता है, जन औषधि से मात्र 500-800 रुपये तक सीमित हो सकता है, जिससे हजारों रुपये की बचत होती है जिसका उपयोग शिक्षा या पोषण पर किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक मौन क्रांति साबित हो रही है, जो देश के कोने-कोने में आशा की किरण फैला रही है। लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है और डॉक्टरों से पर्चे पर दवा का ब्रांड नाम लिखने के बजाय 'सॉल्ट का नाम' लिखने का आग्रह करना चाहिए। साथ ही, दवा खरीदते समय फार्मासिस्ट से जेनेरिक विकल्प की उपलब्धता के बारे में पूछना चाहिए। यह जागरूकता न केवल पैसे बचाएगी, बल्कि देश को एक स्वस्थ और आर्थिक रूप से मजबूत भविष्य की ओर भी ले जाएगी, क्योंकि जन औषधि का वादा है – सस्ती दवा, अच्छी दवा।
    user_जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    Medical centre श्री माधोपुर, सीकर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • जयपुर जिले के शाहपुरा क्षेत्र में अपराध और चोरी की वारदातों पर लगाम कसने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। इसी क्रम में शाहपुरा पुलिस ने हाल ही में पकड़े गए शातिर चोरों को सीधे घटनास्थल पर ले जाकर उनकी पहचान (शिनाख्त) की कार्रवाई करवाई। इस दौरान पुलिस टीम ने आरोपियों की मौजूदगी में चोरी के पूरे घटनाक्रम का री-क्रिएशन किया, ताकि मामले के हर पहलू और सबूतों को मजबूती से जोड़ा जा सके। पुलिस की प्रारंभिक जाँच और तकनीकी इनपुट के आधार पर, इस मामले में कुछ संवेदनशील कड़ियाँ सामने आ रही हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी कृषि वाणिज्यिक शाखा के आस-पास के क्षेत्रों या उससे जुड़े लेनदेन के विवरणों की गहन पड़ताल की जा रही है। इसके साथ ही, सरकारी या वाणिज्यिक स्तर पर किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या संदेहास्पद भूमिका की जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के इनपुट भी खंगाले जा रहे हैं। चोरों की निशानदेही पर पुलिस की विशेष टीम ने घटनास्थल से जुड़े कई डिजिटल और भौतिक साक्ष्य, जैसे सीसीटीवी फुटेज और रूट मैप, भी एकत्र किए हैं। पुलिस के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई का मुख्य आधार महत्वपूर्ण ऑडियो और वीडियो क्लिपिंग्स बनीं, जिनमें संदिग्धों की गतिविधि और बातचीत रिकॉर्ड थी। इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी कर उन्हें धर दबोचा। घटनास्थल पर शिनाख्त के दौरान आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए चोरी के तौर-तरीकों का पूरा खुलासा भी किया है। शाहपुरा पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए ऐसी सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द ही पुख्ता सबूतों के साथ कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, जिसका उद्देश्य चोरी किए गए माल की शत-प्रतिशत बरामदगी और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करना है।
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    जयपुर जिले के शाहपुरा क्षेत्र में अपराध और चोरी की वारदातों पर लगाम कसने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में है। इसी क्रम में शाहपुरा पुलिस ने हाल ही में पकड़े गए शातिर चोरों को सीधे घटनास्थल पर ले जाकर उनकी पहचान (शिनाख्त) की कार्रवाई करवाई। इस दौरान पुलिस टीम ने आरोपियों की मौजूदगी में चोरी के पूरे घटनाक्रम का री-क्रिएशन किया, ताकि मामले के हर पहलू और सबूतों को मजबूती से जोड़ा जा सके।

पुलिस की प्रारंभिक जाँच और तकनीकी इनपुट के आधार पर, इस मामले में कुछ संवेदनशील कड़ियाँ सामने आ रही हैं। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी कृषि वाणिज्यिक शाखा के आस-पास के क्षेत्रों या उससे जुड़े लेनदेन के विवरणों की गहन पड़ताल की जा रही है। इसके साथ ही, सरकारी या वाणिज्यिक स्तर पर किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या संदेहास्पद भूमिका की जांच के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के इनपुट भी खंगाले जा रहे हैं। चोरों की निशानदेही पर पुलिस की विशेष टीम ने घटनास्थल से जुड़े कई डिजिटल और भौतिक साक्ष्य, जैसे सीसीटीवी फुटेज और रूट मैप, भी एकत्र किए हैं।

पुलिस के अनुसार, इस पूरी कार्रवाई का मुख्य आधार महत्वपूर्ण ऑडियो और वीडियो क्लिपिंग्स बनीं, जिनमें संदिग्धों की गतिविधि और बातचीत रिकॉर्ड थी। इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों की मदद से पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी कर उन्हें धर दबोचा। घटनास्थल पर शिनाख्त के दौरान आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए चोरी के तौर-तरीकों का पूरा खुलासा भी किया है।

शाहपुरा पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए ऐसी सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को जल्द ही पुख्ता सबूतों के साथ कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा, जिसका उद्देश्य चोरी किए गए माल की शत-प्रतिशत बरामदगी और गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करना है।
    user_Breaking Live News
    Breaking Live News
    Shahpura, Jaipur•
    1 hr ago
  • देश की रक्षा में समर्पित वीर जवानों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलक्टर अपर्णा गुप्ता की अध्यक्षता में सैनिक समस्या सुनवाई कार्यक्रम के तहत एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जिला कलक्टर ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों से जुड़े लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा की, साथ ही संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्र सेवा में योगदान देने वाले सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी। बैठक में पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं की कृषि एवं आवासीय भूमि, आम रास्तों पर अतिक्रमण, सुरक्षा से जुड़े मामलों सहित विभिन्न प्रकरणों पर चर्चा की गई। जिला कलक्टर ने बहरोड़, नीमराना, बानसूर, नारायणपुर, मांढ़ण और कोटपूतली तहसीलों में सैनिक परिवारों से संबंधित भूमि विवादों और अवैध कब्जों के मामलों में संबंधित उपखण्ड अधिकारियों और तहसीलदारों को आवश्यक कार्यवाही करते हुए शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूर्व सैनिक परिवारों पर हमले, प्रताड़ना और झूठे मुकदमों से संबंधित शिकायतों पर पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर त्वरित कानूनी कार्यवाही करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, आमजन से जुड़े नामान्तरण (म्यूटेशन), आधार कार्ड संशोधन सहित अन्य नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रकरणों को भी समयबद्ध रूप से निस्तारित करने के लिए कहा गया। अमर शहीदों के सम्मान से जुड़े मामलों पर भी विशेष चर्चा हुई। जिला स्तर पर लंबित शहीद स्मारकों और सरकारी विद्यालयों तथा सार्वजनिक संस्थानों का नामकरण शहीद सैनिकों के नाम पर किए जाने वाले प्रकरणों की समीक्षा की गई। जिला कलक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित विभागों को इन प्रकरणों में प्राथमिकता से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने तहसील मुख्यालय बहरोड़ में सैनिकों की पर्याप्त संख्या को देखते हुए भव्य शहीद स्मारक के निर्माण के लिए भूमि चिह्नित करने तथा लंबित न्यायिक प्रकरणों के समाधान के लिए प्रभावी पैरवी करने के निर्देश भी दिए। सैनिक कल्याण कार्यालय के सामने खुले नाले और गंदे पानी के भराव की समस्या के समाधान के लिए नगर परिषद आयुक्त को आवश्यक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया गया। बैठक के दौरान, जिला कलक्टर ने सभी अधिकारियों को सैनिक कल्याण से संबंधित मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए प्रगति रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी विंग कमांडर ऋषिदेव यादव, मेंबर जिला सैनिक बोर्ड कर्नल अशोक यादव, एएसपी नाजिम अली, कोटपूतली एसडीएम योगेश सिंह देवल, एसडीएम नारायणपुर दिनेश शर्मा, नगर परिषद आयुक्त बहरोड़ नूर मोहम्मद, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के संयुक्त निदेशक जब्बार खान, नगर परिषद कोटपूतली सचिव अभिषेक सैनी सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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    देश की रक्षा में समर्पित वीर जवानों, पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला कलक्टर अपर्णा गुप्ता की अध्यक्षता में सैनिक समस्या सुनवाई कार्यक्रम के तहत एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जिला कलक्टर ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों से जुड़े लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा की, साथ ही संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर समस्याओं का त्वरित निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्र सेवा में योगदान देने वाले सैनिकों और उनके परिवारों की समस्याओं की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगी।

बैठक में पूर्व सैनिकों और वीरांगनाओं की कृषि एवं आवासीय भूमि, आम रास्तों पर अतिक्रमण, सुरक्षा से जुड़े मामलों सहित विभिन्न प्रकरणों पर चर्चा की गई। जिला कलक्टर ने बहरोड़, नीमराना, बानसूर, नारायणपुर, मांढ़ण और कोटपूतली तहसीलों में सैनिक परिवारों से संबंधित भूमि विवादों और अवैध कब्जों के मामलों में संबंधित उपखण्ड अधिकारियों और तहसीलदारों को आवश्यक कार्यवाही करते हुए शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूर्व सैनिक परिवारों पर हमले, प्रताड़ना और झूठे मुकदमों से संबंधित शिकायतों पर पुलिस अधिकारियों को निष्पक्ष जांच कर त्वरित कानूनी कार्यवाही करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, आमजन से जुड़े नामान्तरण (म्यूटेशन), आधार कार्ड संशोधन सहित अन्य नागरिक सुविधाओं से संबंधित प्रकरणों को भी समयबद्ध रूप से निस्तारित करने के लिए कहा गया।

अमर शहीदों के सम्मान से जुड़े मामलों पर भी विशेष चर्चा हुई। जिला स्तर पर लंबित शहीद स्मारकों और सरकारी विद्यालयों तथा सार्वजनिक संस्थानों का नामकरण शहीद सैनिकों के नाम पर किए जाने वाले प्रकरणों की समीक्षा की गई। जिला कलक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित विभागों को इन प्रकरणों में प्राथमिकता से कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उन्होंने तहसील मुख्यालय बहरोड़ में सैनिकों की पर्याप्त संख्या को देखते हुए भव्य शहीद स्मारक के निर्माण के लिए भूमि चिह्नित करने तथा लंबित न्यायिक प्रकरणों के समाधान के लिए प्रभावी पैरवी करने के निर्देश भी दिए। सैनिक कल्याण कार्यालय के सामने खुले नाले और गंदे पानी के भराव की समस्या के समाधान के लिए नगर परिषद आयुक्त को आवश्यक कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया गया।

बैठक के दौरान, जिला कलक्टर ने सभी अधिकारियों को सैनिक कल्याण से संबंधित मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए प्रगति रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी विंग कमांडर ऋषिदेव यादव, मेंबर जिला सैनिक बोर्ड कर्नल अशोक यादव, एएसपी नाजिम अली, कोटपूतली एसडीएम योगेश सिंह देवल, एसडीएम नारायणपुर दिनेश शर्मा, नगर परिषद आयुक्त बहरोड़ नूर मोहम्मद, सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग के संयुक्त निदेशक जब्बार खान, नगर परिषद कोटपूतली सचिव अभिषेक सैनी सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
    user_Social Media Rajasthan-1
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    Pavta, Jaipur•
    1 hr ago
  • कोटपूतली-बहरोड़ के विराटनगर नगर पालिका के समस्त कर्मचारी पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जो आज 21वें दिन भी जारी रही। लंबे समय से मानदेय या सैलरी न मिलने के कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। आर्थिक तंगी से परेशान सफाईकर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों ने नगर पालिका प्रशासन और स्वायत्त शासन विभाग (DLB) के खिलाफ उग्र आक्रोश व्यक्त किया है। इस 21 दिवसीय हड़ताल के कारण कस्बे में व्यवस्थाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। लगातार तीन हफ्तों से सफाई न होने के चलते मुख्य बाजारों, चौराहों और रिहायशी वार्डों में गंदगी के ढेर लग गए हैं, जिससे शहर 'कचरा डिपो' में तब्दील हो गया है। नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिसके कारण मौसमी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके अलावा, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पट्टे जारी करने और अन्य आवश्यक राजस्व कार्यों सहित सभी प्रशासनिक कार्य भी पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वे अधिकारियों को बजट जारी करने के लिए पहले भी कई बार मौखिक और लिखित में चेतावनी दे चुके थे। कर्मचारियों के अनुसार, पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के कारण उनके बच्चों की स्कूल फीस, राशन का सामान और लोन की किस्तें (EMI) रुक गई हैं। उनका आरोप है कि अधिकारी सिर्फ बजट की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि धरातल पर कर्मचारियों का जीना दूभर हो चुका है। कर्मचारियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि जब तक उनके पूरे दो महीने का बकाया वेतन सीधे उनके बैंक खातों में नहीं आ जाता, तब तक 'झाड़ू डाउन हड़ताल' और विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं किया जाएगा।
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    कोटपूतली-बहरोड़ के विराटनगर नगर पालिका के समस्त कर्मचारी पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जो आज 21वें दिन भी जारी रही। लंबे समय से मानदेय या सैलरी न मिलने के कारण कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और उनके घरों में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। आर्थिक तंगी से परेशान सफाईकर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों ने नगर पालिका प्रशासन और स्वायत्त शासन विभाग (DLB) के खिलाफ उग्र आक्रोश व्यक्त किया है।

इस 21 दिवसीय हड़ताल के कारण कस्बे में व्यवस्थाएं बुरी तरह चरमरा गई हैं। लगातार तीन हफ्तों से सफाई न होने के चलते मुख्य बाजारों, चौराहों और रिहायशी वार्डों में गंदगी के ढेर लग गए हैं, जिससे शहर 'कचरा डिपो' में तब्दील हो गया है। नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं और गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिसके कारण मौसमी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके अलावा, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पट्टे जारी करने और अन्य आवश्यक राजस्व कार्यों सहित सभी प्रशासनिक कार्य भी पूरी तरह बंद पड़े हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि वे अधिकारियों को बजट जारी करने के लिए पहले भी कई बार मौखिक और लिखित में चेतावनी दे चुके थे। कर्मचारियों के अनुसार, पिछले दो महीनों से वेतन न मिलने के कारण उनके बच्चों की स्कूल फीस, राशन का सामान और लोन की किस्तें (EMI) रुक गई हैं। उनका आरोप है कि अधिकारी सिर्फ बजट की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं, जबकि धरातल पर कर्मचारियों का जीना दूभर हो चुका है। कर्मचारियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि जब तक उनके पूरे दो महीने का बकाया वेतन सीधे उनके बैंक खातों में नहीं आ जाता, तब तक 'झाड़ू डाउन हड़ताल' और विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं किया जाएगा।
    user_Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    Raj.JANTA SEVA-84 NEWS
    रिपोर्टर Viratnagar, Jaipur•
    2 hrs ago
  • पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि उन्होंने दशकों तक जोधपुर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। गहलोत ने दावा किया कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना से लेकर पाइपलाइन, पंपिंग स्टेशन और जल आपूर्ति योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने सैकड़ों दौरे किए। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार आपात स्थिति में उन्हें ट्रेन से पानी मंगाने जैसी व्यवस्थाएं भी करनी पड़ी थीं। गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान में जोधपुर में गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है, लेकिन सरकार समाधान खोजने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता को नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति उपलब्ध कराने में विफल रही है। इसके साथ ही, गहलोत ने बताया कि उनकी सरकार ने जल परियोजनाओं के तीसरे चरण के लिए हजारों करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी, मगर सत्ता परिवर्तन के बाद कई कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
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    पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि उन्होंने दशकों तक जोधपुर की पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं।

गहलोत ने दावा किया कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना से लेकर पाइपलाइन, पंपिंग स्टेशन और जल आपूर्ति योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए उन्होंने सैकड़ों दौरे किए। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार आपात स्थिति में उन्हें ट्रेन से पानी मंगाने जैसी व्यवस्थाएं भी करनी पड़ी थीं।

गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान में जोधपुर में गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है, लेकिन सरकार समाधान खोजने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता को नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति उपलब्ध कराने में विफल रही है। इसके साथ ही, गहलोत ने बताया कि उनकी सरकार ने जल परियोजनाओं के तीसरे चरण के लिए हजारों करोड़ रुपये की स्वीकृति दी थी, मगर सत्ता परिवर्तन के बाद कई कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
    user_Sunita sharma
    Sunita sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ लगातार कई जिलों से चिंताजनक घटनाएँ सामने आ रही हैं। प्रदेश के कोटा में प्रसूताओं की मौत की खबरें हैं, वहीं टोंक में नवजात शिशुओं की मृत्यु के मामले सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त, बीकानेर में महिलाओं में किडनी फेल होने की घटनाएँ भी दर्ज की गई हैं। अब इसी कड़ी में जोधपुर से भी इसी तरह की परेशान करने वाली खबरें आ रही हैं। स्वास्थ्य प्रणाली की इस कथित विफलता और चिकित्सा लापरवाही के बीच, यह सवाल गहरा रहा है कि प्रदेश की सरकार इन गंभीर स्वास्थ्य संकटों के समाधान के लिए आखिर क्या कर रही है और क्यों इन घटनाओं पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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    राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहाँ लगातार कई जिलों से चिंताजनक घटनाएँ सामने आ रही हैं। प्रदेश के कोटा में प्रसूताओं की मौत की खबरें हैं, वहीं टोंक में नवजात शिशुओं की मृत्यु के मामले सामने आए हैं। इसके अतिरिक्त, बीकानेर में महिलाओं में किडनी फेल होने की घटनाएँ भी दर्ज की गई हैं।

अब इसी कड़ी में जोधपुर से भी इसी तरह की परेशान करने वाली खबरें आ रही हैं। स्वास्थ्य प्रणाली की इस कथित विफलता और चिकित्सा लापरवाही के बीच, यह सवाल गहरा रहा है कि प्रदेश की सरकार इन गंभीर स्वास्थ्य संकटों के समाधान के लिए आखिर क्या कर रही है और क्यों इन घटनाओं पर प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
    user_Pawan sharma
    Pawan sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र लोगों को महंगी दवाओं से मुक्ति दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है, जहाँ दवा का 'साल्ट' और 'असर' बिल्कुल ब्रांडेड दवाइयों जैसा ही होने के बावजूद, ग्राहकों को काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है। इन केंद्रों पर रक्तचाप, शुगर और हृदय रोग सहित सभी तरह की बीमारियों के लिए WHO-GMP प्रमाणित जेनेरिक दवाएं 50% से 90% तक सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं। यह पहल 'स्वास्थ्य भी, बचत भी' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य लोगों के मेडिकल बिल को आधा करना है। फार्मासिस्ट दीपक शर्मा के अनुसार, पीएम जनऔषधि केंद्र ब्रांडेड जैसी गुणवत्ता वाली दवाएं अत्यधिक किफायती दरों पर प्रदान करते हैं। ग्राहकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी जनऔषधि केंद्र पर आकर उत्तम दवाइयों का लाभ उठाएं और अपने स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बचत करें।
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    प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र लोगों को महंगी दवाओं से मुक्ति दिलाने का अवसर प्रदान कर रहा है, जहाँ दवा का 'साल्ट' और 'असर' बिल्कुल ब्रांडेड दवाइयों जैसा ही होने के बावजूद, ग्राहकों को काफी कम कीमत चुकानी पड़ती है। इन केंद्रों पर रक्तचाप, शुगर और हृदय रोग सहित सभी तरह की बीमारियों के लिए WHO-GMP प्रमाणित जेनेरिक दवाएं 50% से 90% तक सस्ते दामों पर उपलब्ध हैं।

यह पहल 'स्वास्थ्य भी, बचत भी' के सिद्धांत पर आधारित है, जिसका उद्देश्य लोगों के मेडिकल बिल को आधा करना है। फार्मासिस्ट दीपक शर्मा के अनुसार, पीएम जनऔषधि केंद्र ब्रांडेड जैसी गुणवत्ता वाली दवाएं अत्यधिक किफायती दरों पर प्रदान करते हैं। ग्राहकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी जनऔषधि केंद्र पर आकर उत्तम दवाइयों का लाभ उठाएं और अपने स्वास्थ्य खर्च में बड़ी बचत करें।
    user_जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    जन औषधि केन्द्र अजीतगढ़
    Medical centre Sri Madhopur, Sikar•
    5 hrs ago
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