*चीड खेड़ा में पानी संकट पर प्रशासन हरकत में, अधिकारियों के पहुंचते ही शुरू हुई जल सप्लाई* भीलवाड़ा। जिले के चीड खेड़ा गांव में पानी की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश उस समय चरम पर पहुंच गया जब कई दिनों से पेयजल सप्लाई ठप पड़ी हुई थी। गांव में हालात ऐसे बन गए थे कि महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा था। मामला मीडिया में सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभाली। जानकारी के अनुसार गांव में लंबे समय से पानी की आपूर्ति बाधित थी, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा था, जिसके चलते गांव में रोष बढ़ता जा रहा था। मामले के तूल पकड़ने के बाद सरपंच पति रतनलाल गुर्जर, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी हिमांशु, जलदाय विभाग के अधिकारी जैन और अनुराग प्रजापत अपनी टीम के साथ अचानक गांव पहुंचे। अधिकारियों के पहुंचते ही ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। सूत्रों के अनुसार मौके पर अधिकारियों ने नल कर्मी रतनलाल को कड़ी फटकार लगाते हुए तुरंत पानी सप्लाई शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद नलों में पानी पहुंचते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हालांकि ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठाए और स्थायी समाधान की मांग की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि अब चीड खेड़ा में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल गांव में जल सप्लाई शुरू होने से स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन ग्रामीण प्रशासन के वादों के स्थायी रूप से लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्टर — प्रकाश चंद्र, भीलवाड़ा (चीड खेड़ा)
*चीड खेड़ा में पानी संकट पर प्रशासन हरकत में, अधिकारियों के पहुंचते ही शुरू हुई जल सप्लाई* भीलवाड़ा। जिले के चीड खेड़ा गांव में पानी की गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश उस समय चरम पर पहुंच गया जब कई दिनों से पेयजल सप्लाई ठप पड़ी हुई थी। गांव में हालात ऐसे बन गए थे कि महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा था। मामला मीडिया में सामने
आते ही प्रशासन हरकत में आया और अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्था संभाली। जानकारी के अनुसार गांव में लंबे समय से पानी की आपूर्ति बाधित थी, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा था, जिसके चलते गांव में रोष बढ़ता जा रहा था। मामले के तूल पकड़ने के बाद सरपंच पति रतनलाल गुर्जर, ग्राम
पंचायत विकास अधिकारी हिमांशु, जलदाय विभाग के अधिकारी जैन और अनुराग प्रजापत अपनी टीम के साथ अचानक गांव पहुंचे। अधिकारियों के पहुंचते ही ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया और अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। सूत्रों के अनुसार मौके पर अधिकारियों ने नल कर्मी रतनलाल को कड़ी फटकार लगाते हुए तुरंत पानी सप्लाई शुरू करने के निर्देश दिए। इसके बाद नलों में पानी पहुंचते ही ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हालांकि ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली
पर सवाल भी उठाए और स्थायी समाधान की मांग की। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि अब चीड खेड़ा में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। फिलहाल गांव में जल सप्लाई शुरू होने से स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन ग्रामीण प्रशासन के वादों के स्थायी रूप से लागू होने का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्टर — प्रकाश चंद्र, भीलवाड़ा (चीड खेड़ा)
- भीलवाड़ा शहर के पुराने बापू नगर क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां एक युवक ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवक का शव घर/कमरे में फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं और परिजनों से पूछताछ की जा रही है। युवक ने यह कदम क्यों उठाया, फिलहाल कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है। 👉 पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। 📍स्थान: पुराना बापू नगर, भीलवाड़ा 🕵️♂️ जांच: पुलिस द्वारा जारी1
- हाईवे पर गूंजा आस्था का बिगुल: गुरुवार की रात भजन संध्या में उमड़ा जनसैलाब, वीडियो बने आकर्षण का केंद्र भीलवाड़ा। भीलवाड़ा–अजमेर नेशनल हाईवे पर स्थित मांडल पुलिस चौकी के सामने प्रारंभ होने जा रही किसान कुल्फी की नई शाखा के उद्घाटन से दो दिन पूर्व गुरुवार को भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। गुरुदेव मोहननाथ जी के सानिध्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में रंग दिया। भजन सम्राट मुकेश सैनी ने अपनी दमदार और मधुर प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। भजनों की गूंज से हाईवे क्षेत्र देर रात तक जगमगाता रहा। आयोजन के कई खास पल वीडियो में कैद हुए, जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने रहे। किसान कुल्फी के ऑनर जमना लाल माली ने बताया कि नई शाखा के शुभारंभ से पूर्व ईश्वर की आराधना और संतों के आशीर्वाद के साथ इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि ग्राहकों को उत्तम गुणवत्ता और बेहतर सेवा प्रदान करना उनका उद्देश्य है। कार्यक्रम स्थल को आकर्षक रोशनी से सजाया गया था, जिससे माहौल और भी भव्य नजर आया। अंत में सभी श्रद्धालुओं एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया।2
- Post by Seraj Khan Pathan5
- Yashraj gaon bherunath Mandir bheruji4
- Post by Lucky sukhwal1
- श्री एकादशी के पावन पर्व पर श्री लक्ष्मीपति भगवान ठाकुर जी महाराज जी के दर्शन हरि ॐ ॐ नमो भगवते वासुयदेवाय हरि ॐ ॐ नमो भगवते वासुयदेवाय हरि ॐ ॐ नमो भगवते वासुयदेवाय हरि ॐ ॐ नमो भगवते वासुयदेवाय हरि ॐ ॐ नमो भगवते वासुयदेवाय1
- चित्तौड़गढ़ में आशा सहयोगिनियों का प्रदर्शन, स्थायीकरण सहित मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन। चित्तौड़गढ़। जिला कलक्टर कार्यालय के बाहर गुरुवार को उस समय लगभग आधे घंटे तक जाम की स्थिति बन गई, जब राजस्थान आशा सहयोगिनी यूनियन, चित्तौड़गढ़ के बैनर तले बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनी महिलाएं ज्ञापन देने पहुंचीं और मानव श्रृंखला बनाकर विरोध प्रदर्शन किया। जाम का कारण अतिरिक्त यातायात नहीं, बल्कि प्रदर्शन कर रही महिलाओं की भीड़ रही। प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने में चित्तौड़गढ़ कोतवाली पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कालिका पेट्रोलिंग को मौके पर बुलाया गया, लेकिन उसके समय पर नहीं पहुंचने तथा सैकड़ों महिलाओं को समझाने के लिए पर्याप्त महिला पुलिस बल की कमी खलती नजर आई। बाद में कोतवाली थाने से पहुंचे पुलिस उपनिरीक्षक पारस टेलर ने प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रतिनिधियों को अनुशासन बनाए रखने के निर्देश दिए। राजस्थान आशा सहयोगिनी यूनियन, चित्तौड़गढ़ के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं ने जिला कलक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि पिछले 20 वर्षों से आशा सहयोगिनी मानदेय वृद्धि, नियमित पद सृजन तथा स्थायीकरण की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। महिलाओं ने कहा कि हाल ही में प्रस्तुत केंद्रीय बजट में आशा वर्कर्स के लिए कोई घोषणा नहीं की गई, जिससे देशभर की लाखों आशा कार्यकर्ताओं में निराशा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भी उन्होंने जोखिम उठाकर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया, लेकिन आज तक उन्हें न तो मजदूर का दर्जा मिला है और न ही सरकारी कर्मचारी घोषित किया गया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि जब तक उन्हें स्थायी राज्य कर्मचारी घोषित नहीं किया जाता, तब तक न्यूनतम 26,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाए। साथ ही सेवानिवृत्ति पर 10,000 रुपये मासिक पेंशन, ऑनलाइन कार्य के लिए नया मोबाइल एवं डेटा सुविधा, आयुष्मान और आभा आईडी के लिए पृथक ऑपरेटर नियुक्ति, ड्यूटी का निश्चित समय और बैठने के लिए स्थान निर्धारित करने की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त चयनित कार्य के अतिरिक्त अन्य कार्य नहीं कराने, ऑनलाइन कार्य का अलग से प्रोत्साहन राशि इंसेंटिव के तौर पर देने तथा स्कूटम कार्य बंद करने की मांग भी रखी गई है। यूनियन पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांगों का शीघ्र समाधान कर आशा सहयोगिनियों को राहत प्रदान करने की अपील की है।1
- भीलवाड़ा/गंगापुर। गंगापुर थाना क्षेत्र के आमली गांव में जमीन विवाद को लेकर दर्ज करवाई गई शिकायत में अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। पीड़ित कैलाश चंद्र कुमार ने आरोप लगाया है कि सत्यनारायण वैष्णव द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी, जिसकी रिपोर्ट उन्होंने 9 फरवरी 2026 को गंगापुर पुलिस थाने में दर्ज करवाई थी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि धमकी से जुड़ा घटना का वीडियो सबूत भी उनके पास मौजूद है, जिसमें पूरी घटना कैद बताई जा रही है। बावजूद इसके पुलिस द्वारा अब तक आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पीड़ित परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। मामले की जांच की जिम्मेदारी कांस्टेबल विक्रम सिंह को सौंपी गई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि वे कई बार फोन के जरिए संपर्क करने का प्रयास कर चुके हैं, लेकिन न तो कोई स्पष्ट जवाब मिला और न ही जांच की प्रगति की जानकारी दी गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि धमकी के बाद से वे लगातार डर के साये में जी रहे हैं। परिवार ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए और कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। वहीं स्थानीय लोगों में भी इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को राहत दिला पाता है।2