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मेवात (नूंह) क्षेत्र में शादियों के दौरान दूल्हे को लाखों रुपये के नोटों की माला पहनाने का एक बहुत बड़ा पारंपरिक चलन है। यह प्रथा समाज में एक तरह का दिखावा है, जहाँ दूल्हे को ₹10 लाख से लेकर ₹25 लाख तक के नोटों की माला पहनाई जाती है। ये मालाएं अक्सर ₹500 के नए नोटों से बनाई जाती हैं, और इनकी कीमत आमतौर पर ₹5 लाख से लेकर ₹25 लाख तक हो सकती है।
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मेवात (नूंह) क्षेत्र में शादियों के दौरान दूल्हे को लाखों रुपये के नोटों की माला पहनाने का एक बहुत बड़ा पारंपरिक चलन है। यह प्रथा समाज में एक तरह का दिखावा है, जहाँ दूल्हे को ₹10 लाख से लेकर ₹25 लाख तक के नोटों की माला पहनाई जाती है। ये मालाएं अक्सर ₹500 के नए नोटों से बनाई जाती हैं, और इनकी कीमत आमतौर पर ₹5 लाख से लेकर ₹25 लाख तक हो सकती है।
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- मेवात (नूंह) क्षेत्र में शादियों के दौरान दूल्हे को लाखों रुपये के नोटों की माला पहनाने का एक बहुत बड़ा पारंपरिक चलन है। यह प्रथा समाज में एक तरह का दिखावा है, जहाँ दूल्हे को ₹10 लाख से लेकर ₹25 लाख तक के नोटों की माला पहनाई जाती है। ये मालाएं अक्सर ₹500 के नए नोटों से बनाई जाती हैं, और इनकी कीमत आमतौर पर ₹5 लाख से लेकर ₹25 लाख तक हो सकती है।1
- राजस्थान के अलवर स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में बाघिन एसटी-19 के शावकों की मनमोहक अटखेलियाँ कैमरे में कैद की गई हैं। पानी की ठंडी लहरों में मस्ती करते शावकों का यह खूबसूरत दृश्य वन्यजीव प्रेमियों का दिल जीत रहा है। भीषण गर्मी के बीच इन शावकों को पानी में खेलता देख पर्यटक और स्थानीय लोग बेहद उत्साहित नज़र आए। सरिस्का में बाघों की बढ़ती संख्या और उनके इस स्वाभाविक व्यवहार को दर्शाती ये तस्वीरें वन्यजीव संरक्षण की सफलता की कहानी भी बयां कर रही हैं।1
- राजस्थान के कोटपुतली बहरोड़ जिले की बानसूर तहसील के चीपड़ी गांव, पोस्ट हरसौरा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चल रहे सड़क निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, लगभग 11 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। विशेष रूप से, ठेकेदार के माध्यम से किए जा रहे पीसीसी (PCC) कार्य में गुणवत्ताहीन सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है। जब इस संबंध में ठेकेदार के कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि "यह ऐसे ही चलेगा और हम इसी तरीके से काम करेंगे।" इस जवाब से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है, जिन्होंने इस मामले में समाधान और हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।4
- अलवर में स्थित 'सिलीसेढ़ लेक पैलेस' अरावली की पहाड़ियों के मध्य एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थल है। यह अलवर शहर से लगभग 13-14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सरिस्का टाइगर रिजर्व के मार्ग में पड़ता है।1
- श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित व्हीलचेयर क्रिकेट प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व कर जीत दर्ज करने वाले अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी जुबेर खान का खैरथल पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। जिले के किशनगढ़ बास क्षेत्र के बखथला गांव निवासी जुबेर खान की इस उपलब्धि पर खैरथल शहर में जश्न का माहौल बन गया। रेलवे स्टेशन पर उतरते ही उनके समर्थकों ने 'जुबेर भाई जिंदाबाद' और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और डीजे व वाहनों के काफिले के साथ जुलूस निकाला। यह जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए नई अनाज मंडी में स्थित जिला बचाओ धरना स्थल पर पहुँचा। धरना स्थल पर विधायक दीपचंद खैरिया ने जुबेर खान का साफा व माला पहनाकर भव्य स्वागत किया और खुशी में लड्डू बांटे गए। इस अवसर पर किशनगढ़ बास पंचायत समिति के प्रधान बद्रीप्रसाद सुमन, राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अजीत यादव, पीसीसी सदस्य गिरीश डाटा, व्यापार समिति अध्यक्ष सर्वेश गुप्ता, दीपक चौधरी, वीर सिंह ढिल्लों, महेंद्र जांगिड़, सूरत सिंह खैरिया सहित कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। जुबेर खान का चयन भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में ऑलराउंडर के रूप में हुआ था, जहां उन्होंने 26 से 28 मई तक श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित इंटरनेशनल व्हीलचेयर क्रिकेट 3T-20 सीरीज में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय व्हीलचेयर क्रिकेट टीम में राजस्थान से कुल चार खिलाड़ियों का चयन हुआ था, जिनमें से दो अलवर जिले से थे। लायन व्हीलचेयर क्रिकेट एसोसिएशन (इंडिया) द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, उनका चयन उत्कृष्ट प्रदर्शन, बेहतरीन खेल कौशल और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में दिखाई गई प्रतिभा के आधार पर किया गया था। चयनित खिलाड़ियों को 25 मई को चेन्नई एयरपोर्ट पर बुलाया गया था, जहाँ से टीम श्रीलंका के लिए रवाना हुई। जुबेर खान इससे पहले दिव्यांग व्हीलचेयर क्रिकेट फाउंडेशन (राजस्थान) की टीम के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं और ऑलराउंडर के रूप में शानदार प्रदर्शन करते हुए कई मैच जिता चुके हैं। जुबेर खान ने बताया कि उन्हें बचपन से ही क्रिकेट का शौक था, लेकिन दिव्यांग होने के कारण गांव के बच्चे उन्हें खेलने नहीं देते थे, जिससे उन्हें काफी अफसोस होता था। भारत और पाकिस्तान के मैच देखकर उनके मन में देश के लिए खेलने और नाम रोशन करने का जुनून जगा। इसके बाद उन्होंने अपने घर की छत पर नेट लगाकर व्हीलचेयर पर धीरे-धीरे अभ्यास करना शुरू किया। किशनगढ़ बास और खैरथल में संचालित अकादमियों में अभ्यास और कोच के अच्छे सहयोग को उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय दिया। ग्रामीण पृष्ठभूमि से अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुंचने की जुबेर की यह उपलब्धि आज के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। जुबेर खान का मानना है कि यदि किशनगढ़ बास में खेल के लिए अच्छा मैदान उपलब्ध हो तो भारत के और भी बच्चे खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं।1
- राजस्थान सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसके निर्देशों के अनुसार अलवर जिले में दिन के समय दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक बत्तियां बंद रहेंगी। इस निर्णय से आमजन को काफी राहत मिली है।2