सीतापुर जनपद में लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हुसैनगंज मोहल्ले की ऐतिहासिक 'मैसर्स प्लाईवुड प्रोडक्ट्स फैक्ट्री' पर आखिरकार प्रशासन ने अपना शिकंजा कस दिया है। पिछले करीब 25 वर्षों से बंद पड़ी इस फैक्ट्री की लगभग 70 बीघा (5.7 हेक्टेयर) बेशकीमती जमीन को जिला प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। जिलाधिकारी (DM) डॉ. राजा गणपति आर. के न्यायालय से जारी 16 पन्नों के ऐतिहासिक आदेश के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई, जिसमें 68 साल पुराने रिकॉर्ड खंगालने के बाद मालिकाना हक के दावों को फर्जी पाया गया। जांच में सामने आया कि फैक्ट्री के मूल भागीदार अंग्रेज थे, जो दशकों पहले भारत छोड़कर चले गए थे। उनके जाने के बाद रिजर्व बैंक (RBI) की अनुमति के बिना अवैध रूप से स्वामित्व हस्तांतरण करने की कोशिश की गई। तथाकथित दावेदारों द्वारा डीएम कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज भ्रामक और फर्जी पाए गए। कोर्ट ने इसे अरबों रुपये की सरकारी जमीन हड़पने की साजिश मानते हुए सभी निजी दावों और श्रमिक संगठनों की आपत्तियों को खारिज कर दिया। संपत्ति को 'बोना वेकेंटिया' (स्वामी विहीन) घोषित कर राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया गया, क्योंकि 1958 के बाद से फर्म के रिकॉर्ड में कोई वैध बदलाव नहीं मिला था। डीएम के आदेश पर तत्काल अमल करते हुए एसडीएम सदर, सीओ सदर नेहा त्रिपाठी और कोतवाली देहात पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पूरे फैक्ट्री परिसर को चारों तरफ से घेरकर अपने नियंत्रण में ले लिया और आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनएच-24 पर स्थित इस महत्वपूर्ण और प्राइम लोकेशन वाली जमीन का इस्तेमाल अब जनहित में किया जाएगा। इस भूमि पर जल्द ही किसी बड़े सरकारी निर्माण या विकास परियोजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि 2001 से पूरी तरह बंद पड़ी यह फैक्ट्री कभी अपनी बेहतरीन क्वालिटी के प्लाईवुड के लिए पूरे एशिया में प्रसिद्ध थी, और इस 70 बीघा जमीन की बाजार कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है।
सीतापुर जनपद में लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हुसैनगंज मोहल्ले की ऐतिहासिक 'मैसर्स प्लाईवुड प्रोडक्ट्स फैक्ट्री' पर आखिरकार प्रशासन ने अपना शिकंजा कस दिया है। पिछले करीब 25 वर्षों से बंद पड़ी इस फैक्ट्री की लगभग 70 बीघा (5.7 हेक्टेयर) बेशकीमती जमीन को जिला प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। जिलाधिकारी (DM) डॉ. राजा गणपति आर. के न्यायालय से जारी 16 पन्नों के ऐतिहासिक आदेश के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई, जिसमें 68 साल पुराने रिकॉर्ड खंगालने के बाद मालिकाना हक के दावों को फर्जी पाया गया। जांच में सामने आया कि फैक्ट्री के मूल भागीदार अंग्रेज थे, जो दशकों पहले भारत छोड़कर चले गए थे। उनके जाने के बाद रिजर्व बैंक (RBI) की अनुमति के बिना अवैध रूप से स्वामित्व हस्तांतरण करने की कोशिश की गई। तथाकथित दावेदारों द्वारा डीएम कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज भ्रामक और फर्जी पाए गए। कोर्ट ने इसे अरबों रुपये की सरकारी जमीन हड़पने की साजिश मानते हुए सभी निजी दावों और श्रमिक संगठनों की आपत्तियों
को खारिज कर दिया। संपत्ति को 'बोना वेकेंटिया' (स्वामी विहीन) घोषित कर राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया गया, क्योंकि 1958 के बाद से फर्म के रिकॉर्ड में कोई वैध बदलाव नहीं मिला था। डीएम के आदेश पर तत्काल अमल करते हुए एसडीएम सदर, सीओ सदर नेहा त्रिपाठी और कोतवाली देहात पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पूरे फैक्ट्री परिसर को चारों तरफ से घेरकर अपने नियंत्रण में ले लिया और आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनएच-24 पर स्थित इस महत्वपूर्ण और प्राइम लोकेशन वाली जमीन का इस्तेमाल अब जनहित में किया जाएगा। इस भूमि पर जल्द ही किसी बड़े सरकारी निर्माण या विकास परियोजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि 2001 से पूरी तरह बंद पड़ी यह फैक्ट्री कभी अपनी बेहतरीन क्वालिटी के प्लाईवुड के लिए पूरे एशिया में प्रसिद्ध थी, और इस 70 बीघा जमीन की बाजार कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है।
- आज सुबह वायरल हुए एक वीडियो में पुलिस पर उत्पीड़न का आरोप लगाने वाला शख्स दरअसल गांजा तस्कर मोहित गोस्वामी है। पुलिस उसे गैंगस्टर एक्ट में वांछित होने के कारण पकड़ने गई थी। बताया गया है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए मोहित ने गेट बंद कर महिलाओं को आगे कर दिया था और इसी दौरान वीडियो को वायरल कर दिया था। पुलिस ने गैंगस्टर मोहित को अब पकड़ लिया है, जिसका अच्छा खासा आपराधिक इतिहास भी बताया गया है। पुलिस अब उसकी संपत्ति जब्त करने की बात कह रही है।1
- सीतापुर जिले के ग्राम पंचायत भवन में आयुष्मान कार्ड बनवाने के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है। यह अवैध वसूली ग्राम पंचायत भवन के भीतर ही हो रही है।1
- उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में, ग्राम पंचायत बेनीगंज देहात उलझा में नाली का निर्माण नहीं हो रहा है।1
- लखनऊ में मुंशी पुलिया से पॉलिटेक्निक और कामता तक सोमवार सुबह भीषण ट्रैफिक जाम लग गया, जिसने लोगों की रफ्तार को पूरी तरह रोक दिया। इस जाम में ऑफिस जाने वाले कर्मचारी और यहाँ तक कि एंबुलेंस भी घंटों फंसी रहीं, जिससे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। यह जाम 500 मीटर से भी अधिक लंबा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति रोज़ाना की है, जहाँ पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के साथ-साथ लोग घंटों गाड़ियों में फँसकर भीषण गर्मी झेलने को मजबूर हैं। उन्होंने इस समस्या के लिए सड़क किनारे अवैध पार्किंग, ई-रिक्शा और ऑटो की अव्यवस्था, कट व चौराहों पर ट्रैफिक नियंत्रण की कमी, और पीक आवर्स में पर्याप्त पुलिस बल की अनुपलब्धता को मुख्य कारण बताया है। भीषण गर्मी के बीच घंटों गाड़ियों में परेशान होकर इंतजार करना आमजन की मजबूरी बन गया है। जनता ने प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा है कि हर रोज़ ऐसी ही स्थिति क्यों बनी रहती है और ट्रैफिक पुलिस व डीसीपी ट्रैफिक का प्लान ज़मीन पर क्यों नहीं दिख रहा है। लोगों ने मुंशी पुलिया, पॉलिटेक्निक और कामता जैसे व्यस्त रूट्स पर स्थायी समाधान की मांग की है। जनता ने प्रशासन से तत्काल ठोस कार्रवाई करने की अपील की है, ताकि उन्हें इस रोज़ाना की परेशानी से राहत मिल सके।1
- बाराबंकी के निंदूरा ब्लॉक क्षेत्र में लखनऊ-महमूदाबाद मार्ग पर सोमवार सुबह एक गंभीर सड़क हादसा हो गया। टिकरा गांव के सामने सड़क पर खड़े एक डंपर में पीछे से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना से दोनों डंपरों को भारी क्षति पहुँची, उनके अगले हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और एक डंपर सड़क से नीचे उतर गया। गनीमत रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन दोनों डंपरों के चालक मामूली रूप से घायल हो गए। टक्कर की तेज आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुँचे और राहत कार्य में जुट गए। उन्होंने घायल चालकों को वाहनों से बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार भी दिया। सूचना मिलने पर बड्डूपुर पुलिस थाना प्रभारी मनोज सोनकर पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस ने स्थिति का जायजा लिया और क्षतिग्रस्त डंपरों को सड़क किनारे हटवाकर यातायात को सुचारु कराया। इस हादसे के कारण मार्ग पर कुछ समय के लिए जाम लग गया था, जिससे राहगीरों को असुविधा हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस हादसे का कारण तेज रफ्तार और लापरवाही हो सकती है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और दोनों डंपर चालकों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने वाहन चालकों से सड़क पर सावधानी बरतने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।1
- आधी रात को मुख्तार अंसारी के घर पुलिस ने दबिश दी और उनके विधायक बेटे अब्बास अंसारी से पूछताछ की। पुलिस ने अब्बास से सवाल किया कि वह यहां कैसे रह रहे हैं और उन्होंने अपना गनर क्यों बदला। इस कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने अब्बास को एक नोटिस भी थमाया।1
- सीतापुर जनपद में लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हुसैनगंज मोहल्ले की ऐतिहासिक 'मैसर्स प्लाईवुड प्रोडक्ट्स फैक्ट्री' पर आखिरकार प्रशासन ने अपना शिकंजा कस दिया है। पिछले करीब 25 वर्षों से बंद पड़ी इस फैक्ट्री की लगभग 70 बीघा (5.7 हेक्टेयर) बेशकीमती जमीन को जिला प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। जिलाधिकारी (DM) डॉ. राजा गणपति आर. के न्यायालय से जारी 16 पन्नों के ऐतिहासिक आदेश के बाद यह बड़ी कार्रवाई की गई, जिसमें 68 साल पुराने रिकॉर्ड खंगालने के बाद मालिकाना हक के दावों को फर्जी पाया गया। जांच में सामने आया कि फैक्ट्री के मूल भागीदार अंग्रेज थे, जो दशकों पहले भारत छोड़कर चले गए थे। उनके जाने के बाद रिजर्व बैंक (RBI) की अनुमति के बिना अवैध रूप से स्वामित्व हस्तांतरण करने की कोशिश की गई। तथाकथित दावेदारों द्वारा डीएम कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज भ्रामक और फर्जी पाए गए। कोर्ट ने इसे अरबों रुपये की सरकारी जमीन हड़पने की साजिश मानते हुए सभी निजी दावों और श्रमिक संगठनों की आपत्तियों को खारिज कर दिया। संपत्ति को 'बोना वेकेंटिया' (स्वामी विहीन) घोषित कर राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया गया, क्योंकि 1958 के बाद से फर्म के रिकॉर्ड में कोई वैध बदलाव नहीं मिला था। डीएम के आदेश पर तत्काल अमल करते हुए एसडीएम सदर, सीओ सदर नेहा त्रिपाठी और कोतवाली देहात पुलिस भारी बल के साथ मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने पूरे फैक्ट्री परिसर को चारों तरफ से घेरकर अपने नियंत्रण में ले लिया और आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एनएच-24 पर स्थित इस महत्वपूर्ण और प्राइम लोकेशन वाली जमीन का इस्तेमाल अब जनहित में किया जाएगा। इस भूमि पर जल्द ही किसी बड़े सरकारी निर्माण या विकास परियोजना को अमलीजामा पहनाने की तैयारी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि 2001 से पूरी तरह बंद पड़ी यह फैक्ट्री कभी अपनी बेहतरीन क्वालिटी के प्लाईवुड के लिए पूरे एशिया में प्रसिद्ध थी, और इस 70 बीघा जमीन की बाजार कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है।2
- राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत सेक्टर 9 पार्क में टहलने गई वरुणा सिंह नामक महिला को कुछ युवकों को खेलने से मना करना महंगा पड़ गया। आरोप है कि युवकों ने महिला को 'मोटी भैंस' कहकर जमकर मारपीट की और उसके कपड़े फाड़ने की भी कोशिश की। इस घटना में पीड़ित महिला के गले पर चोट के गंभीर निशान आए हैं। इस मामले में अरविंद चौकी इंचार्ज पर कोई कार्रवाई न करने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित महिला मेडिकल जांच के लिए इंदिरा नगर पुलिस स्टेशन के लगातार चक्कर लगा रही है, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।1
- भारतीय किसान यूनियन ने घोषणा की है कि कल, बड़ी संख्या में किसान लखनऊ स्थित नगर निगम कार्यालय का घेराव करेंगे।1