हिमबस प्लस कार्ड से सफर होगा आसान, किराये में छूट के साथ कैशबैक का भी लाभ कुल्लू टुडे न्यूज़ रामपुर बुशहर, 27 अगस्त डिजिटल युग में सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक और यात्रियों के लिए किफायती बनाने की दिशा में हिमाचल पथ परिवहन निगम ने हिमबस प्लस कार्ड की शुरुआत की है। यह कार्ड यात्रियों को नकदरहित यात्रा की सुविधा देने के साथ-साथ किराये में रियायत और मासिक यात्रा व्यय के आधार पर कैशबैक का लाभ भी प्रदान करेगा। खासकर नियमित रूप से एचआरटीसी बसों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह कार्ड उपयोगी साबित हो सकता है।राष्ट्रीय साझा गतिशीलता कार्ड व्यवस्था के अनुरूप तैयार हिमबस प्लस कार्ड के माध्यम से सामान्य यात्रियों को मूल किराये पर 5 प्रतिशत तथा वरिष्ठ नागरिकों को 15 प्रतिशत की रियायत मिलेगी। यह सुविधा एचआरटीसी की सभी बसों में लागू होगी। वरिष्ठ नागरिक की पात्रता निर्धारित करने के लिए आवेदन जमा करने की तिथि को आयु की गणना का आधार माना जाएगा। सामान के टिकट पर रियायत का लाभ नहीं मिलेगा। *अधिक यात्रा, अधिक कैशबैक* हिमबस प्लस कार्ड की एक महत्वपूर्ण विशेषता मासिक यात्रा व्यय पर मिलने वाली कैशबैक है। कार्ड से एचआरटीसी बसों में किए गए मासिक उपयोग के आधार पर यात्रियों को अलग-अलग श्रेणियों में नकद वापसी मिलेगी। एक हजार से अधिक और 1500 रुपये तक के मासिक उपयोग पर 100 रुपये, 1501 से 2000 रुपये तक 200 रुपये, 2001 से 3000 रुपये तक 300 रुपये, 3001 से 4000 रुपये तक 500 रुपये, 4001 से 5000 रुपये तक 750 रुपये, 5001 से 7500 रुपये तक 1000 रुपये, 7501 से 10000 रुपये तक 1500 रुपये तथा 10000 रुपये से अधिक के मासिक उपयोग पर 2000 रुपये तक नकद वापसी का प्रावधान है।इस गणना की खास बात यह है कि यह प्रत्येक कैलेंडर माह के आधार पर अलग-अलग होगी। एक माह में किए गए यात्रा व्यय को अगले माह में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। *एक वर्ष के लिए वैध होगा कार्ड* हिमबस प्लस कार्ड प्राप्त करने के लिए 365 रुपये का प्रारंभिक शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसमें सभी लागू कर शामिल हैं। कार्ड की वैधता एक वर्ष की होगी तथा अगले वर्ष के लिए नवीनीकरण शुल्क भी 365 रुपये निर्धारित है। कार्ड खोने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में नया कार्ड प्राप्त करने के लिए 365 रुपये का पूरा कार्ड शुल्क देना होगा। *ऑनलाइन आवेदन की सुविधा* यात्री हिमबस प्लस कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन एचआरटीसी की वेबसाइट अथवा एचआरटीसी स्मार्ट पास पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं। इसके लिए हिमाचल नागरिक पहचान के माध्यम से पंजीकरण कर लॉगिन करना होगा। आवेदन में उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करने के बाद पत्राचार का पता और नजदीकी एचआरटीसी डिपो का चयन किया जा सकता है। निर्धारित शुल्क का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग अथवा यूपीआई के माध्यम से किया जा सकता है।आवेदन के बाद कार्ड इंडिया पोस्ट के माध्यम से आवेदक को भेजा जाएगा। यदि डाक के माध्यम से कार्ड प्राप्त नहीं होता है तो आवेदन के दौरान चयनित एचआरटीसी डिपो से कार्ड प्राप्त किया जा सकेगा। कार्ड प्राप्त होने के बाद यात्रा शुरू करने से पहले निकटतम एचआरटीसी टिकट बुकिंग काउंटर पर एसबीआई पॉइंट ऑफ सेल मशीन के माध्यम से इसे सक्रिय करवाना आवश्यक होगा। *अन्य परिवहन सेवाओं में भी उपयोग* हिमबस प्लस कार्ड राष्ट्रीय साझा गतिशीलता कार्ड व्यवस्था के तहत अन्य सहभागी परिवहन सेवाओं में भी उपयोग किया जा सकेगा। इनमें दिल्ली मेट्रो, हरियाणा रोडवेज तथा अन्य राष्ट्रीय साझा गतिशीलता कार्ड सक्षम परिवहन सेवाएं शामिल हैं। हालांकि, एचआरटीसी के बाहर किए गए लेन-देन को कैशबैक की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।पर्वतीय क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी को देखते हुए कार्ड में ऑफलाइन लेन-देन की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने या कमजोर होने की स्थिति में भी टिकटिंग सुविधा जारी रखी जा सकेगी। कार्ड को फोन पे, गूगल पे, भीम तथा एसबीआई अनुप्रयोगों सहित समर्थित डिजिटल भुगतान माध्यमों से पुनः रिचार्ज किया जा सकता है। *पुराने रियायती कार्डों का नया निर्गमन बंद* हिमबस प्लस कार्ड लागू होने के बाद पुराने कागज आधारित रियायती कार्डों, जिनमें स्मार्ट कार्ड, सम्मान कार्ड और ग्रीन कार्ड शामिल हैं, का नया निर्गमन अथवा नवीनीकरण बंद रहेगा। हालांकि, पहले से जारी ऐसे कार्ड अपनी निर्धारित वैधता अवधि तक मान्य रहेंगे। वैधता समाप्त होने के बाद इनका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। क्षेत्रीय प्रबंधक, हिमाचल पथ परिवहन निगम रामपुर, हुमेश शर्मा ने बताया कि हिमबस प्लस कार्ड यात्रियों को डिजिटल, नकदरहित और रियायती यात्रा की सुविधा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने यात्रियों से इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा नकदरहित यात्रा को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
हिमबस प्लस कार्ड से सफर होगा आसान, किराये में छूट के साथ कैशबैक का भी लाभ कुल्लू टुडे न्यूज़ रामपुर बुशहर, 27 अगस्त डिजिटल युग में सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक और यात्रियों के लिए किफायती बनाने की दिशा में हिमाचल पथ परिवहन निगम ने हिमबस प्लस कार्ड की शुरुआत की है। यह कार्ड यात्रियों को नकदरहित यात्रा की सुविधा देने के साथ-साथ किराये में रियायत और मासिक यात्रा व्यय के आधार पर कैशबैक का लाभ भी प्रदान करेगा। खासकर नियमित रूप से एचआरटीसी बसों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह कार्ड उपयोगी साबित हो सकता है।राष्ट्रीय साझा गतिशीलता कार्ड व्यवस्था के अनुरूप तैयार हिमबस प्लस कार्ड के माध्यम से सामान्य यात्रियों को मूल किराये पर 5 प्रतिशत तथा वरिष्ठ नागरिकों को 15 प्रतिशत की रियायत मिलेगी। यह सुविधा एचआरटीसी की सभी बसों में लागू होगी। वरिष्ठ नागरिक की पात्रता निर्धारित करने के लिए आवेदन जमा करने की तिथि को आयु की गणना का आधार माना जाएगा। सामान के टिकट पर रियायत का लाभ नहीं मिलेगा। *अधिक यात्रा, अधिक कैशबैक* हिमबस प्लस कार्ड की एक महत्वपूर्ण विशेषता मासिक यात्रा व्यय पर मिलने वाली कैशबैक है। कार्ड से एचआरटीसी बसों में किए गए मासिक उपयोग के आधार पर यात्रियों को अलग-अलग श्रेणियों में नकद वापसी मिलेगी। एक हजार से अधिक और 1500 रुपये तक के मासिक उपयोग पर 100 रुपये, 1501 से 2000 रुपये तक 200 रुपये, 2001 से 3000 रुपये तक 300 रुपये, 3001 से 4000 रुपये तक 500 रुपये, 4001 से 5000 रुपये तक 750 रुपये, 5001 से 7500 रुपये तक 1000 रुपये, 7501 से 10000 रुपये तक 1500 रुपये तथा 10000 रुपये से अधिक के मासिक उपयोग पर 2000 रुपये तक नकद वापसी का प्रावधान है।इस गणना की खास बात यह है कि यह प्रत्येक कैलेंडर माह के आधार पर अलग-अलग होगी। एक माह में किए गए यात्रा व्यय को अगले माह में आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। *एक वर्ष के लिए वैध होगा कार्ड* हिमबस प्लस कार्ड प्राप्त करने के लिए 365 रुपये का प्रारंभिक शुल्क निर्धारित किया गया है, जिसमें सभी लागू कर शामिल हैं। कार्ड की वैधता एक वर्ष की होगी तथा अगले वर्ष के लिए नवीनीकरण शुल्क भी 365 रुपये निर्धारित है। कार्ड खोने या क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में नया कार्ड प्राप्त करने के लिए 365 रुपये का पूरा कार्ड शुल्क देना होगा। *ऑनलाइन आवेदन की सुविधा* यात्री हिमबस प्लस कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन एचआरटीसी की वेबसाइट अथवा एचआरटीसी स्मार्ट पास पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं। इसके लिए हिमाचल नागरिक पहचान के माध्यम से पंजीकरण कर लॉगिन करना होगा। आवेदन में उपलब्ध जानकारी का सत्यापन करने के बाद पत्राचार का पता और नजदीकी एचआरटीसी डिपो का चयन किया जा सकता है। निर्धारित शुल्क का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग अथवा यूपीआई के माध्यम से किया जा सकता है।आवेदन के बाद कार्ड इंडिया पोस्ट के माध्यम से आवेदक को भेजा जाएगा। यदि डाक के माध्यम से कार्ड प्राप्त नहीं होता है तो आवेदन के दौरान चयनित एचआरटीसी डिपो से कार्ड प्राप्त किया जा सकेगा। कार्ड प्राप्त होने के बाद यात्रा शुरू करने से पहले निकटतम एचआरटीसी टिकट बुकिंग काउंटर पर एसबीआई पॉइंट ऑफ सेल मशीन के माध्यम से इसे सक्रिय करवाना आवश्यक होगा। *अन्य परिवहन सेवाओं में भी उपयोग* हिमबस प्लस कार्ड राष्ट्रीय साझा गतिशीलता कार्ड व्यवस्था के तहत अन्य सहभागी परिवहन सेवाओं में भी उपयोग किया जा सकेगा। इनमें दिल्ली मेट्रो, हरियाणा रोडवेज तथा अन्य राष्ट्रीय साझा गतिशीलता कार्ड सक्षम परिवहन सेवाएं शामिल हैं। हालांकि, एचआरटीसी के बाहर किए गए लेन-देन को कैशबैक की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।पर्वतीय क्षेत्रों में कमजोर इंटरनेट कनेक्टिविटी को देखते हुए कार्ड में ऑफलाइन लेन-देन की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने या कमजोर होने की स्थिति में भी टिकटिंग सुविधा जारी रखी जा सकेगी। कार्ड को फोन पे, गूगल पे, भीम तथा एसबीआई अनुप्रयोगों सहित समर्थित डिजिटल भुगतान माध्यमों से पुनः रिचार्ज किया जा सकता है। *पुराने रियायती कार्डों का नया निर्गमन बंद* हिमबस प्लस कार्ड लागू होने के बाद पुराने कागज आधारित रियायती कार्डों, जिनमें स्मार्ट कार्ड, सम्मान कार्ड और ग्रीन कार्ड शामिल हैं, का नया निर्गमन अथवा नवीनीकरण बंद रहेगा। हालांकि, पहले से जारी ऐसे कार्ड अपनी निर्धारित वैधता अवधि तक मान्य रहेंगे। वैधता समाप्त होने के बाद इनका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। क्षेत्रीय प्रबंधक, हिमाचल पथ परिवहन निगम रामपुर, हुमेश शर्मा ने बताया कि हिमबस प्लस कार्ड यात्रियों को डिजिटल, नकदरहित और रियायती यात्रा की सुविधा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने यात्रियों से इस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाने तथा नकदरहित यात्रा को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
- "दूध प्लांट में 24° (डिग्री) से कम का दूध स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इसी नियम के कारण आज तीन बाल्टियां वापस कर दी गई हैं, क्योंकि जांच में उनका तापमान 24° से नीचे पाया गया था।" "दूध प्लांट में 24° (डिग्री) से कम का दूध दत्तनगर मिल्क प्लांट में स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इसी नियम के कारण आज तीन बाल्टियां वापस कर दी गई हैं, क्योंकि जांच में उनका तापमान 24° से नीचे पाया गया था।"1
- रामपुर बुशहर में न्यू बस स्टैंड में परिवहन निगम द्वारा इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग पवांइट का कार्य जोरों पर #kullutodaynews #himachalpradesh #himachalupdate #MediaPower #himachalkiawaaz #KTN #ATM #shimla #kullu #rampur1
- वेस्टीज स्पेशल टूर होटल क्लार्क आगरा और आगरा फोर्ट आज ही बिजनेस का जानकारी के लिए मुझे कॉल करें 98161 33991 राजकुमार आपका बिजनेस कोच बिलासपुर हिमाचल प्रदेश दोस्तों वेस्टीज से मिला हमें घूमने का मौका यहां इस बिजनेस का खासियत है आज ही इस बिजनेस के बारे में जानकारी ली और आज ही स्टार्ट करें 9816133991 आपका बिजनेस कोच राजकुमार बिलासपुर हिमाचल प्रदेश4
- माजरा के लोगों को आश्वासन या समाधान? शिवालिक प्लांट पर जनता के सवालों का हिसाब कौन देगा? आज DK News Nalagarh किसी नेता की चमचागिरी करने नहीं आया है, किसी अधिकारी की तारीफ करने नहीं आया है और न ही किसी कंपनी का पक्ष लेने आया है। आज हम बात कर रहे हैं गांव माजरा, तहसील नालागढ़ के उन ग्रामीणों की, जो शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर लंबे समय से अपनी आवाज उठा रहे हैं। 18 मई 2026 को गांव वासी अपनी मांगों और शिकायतों को लेकर शिवालिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के गेट पर धरने पर बैठे। ग्रामीणों का कहना था कि प्लांट से निकलने वाली हवा और पानी दूषित हो रहे हैं, जिससे पर्यावरण और गांववासियों को गम्भीर बिमारियो का सामना करना पड रहा है । इन्हीं समस्याओं और शिकायतों को लेकर गांववासियों ने 18 मई को प्लांट के गेट पर धरना दिया। जनता अपनी समस्या लेकर गेट पर बैठी थी और सवाल था कि आखिर उनकी शिकायतों का समाधान कौन करेगा? इसके बाद 23 मई 2026 को बाबा हरदीप जी और एसडीएम मौके पर पहुंचे। इसके बाद अंदर जाकर कंपनी के साथ बातचीत हुई। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंदर क्या बातचीत हुई, क्या फैसला हुआ और ग्रामीणों की मांगों पर क्या तय किया गया—इसकी पूरी जानकारी गांववासियों को आखिर क्यों नहीं दी गई? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें आश्वासन देकर धरना उठवा दिया गया। लोगों को उम्मीद थी कि अब उनकी समस्या का समाधान होगा। लेकिन धरना उठने के बाद क्या हुआ? आश्वासन पर आश्वासन। एक आश्वासन मिला, फिर दूसरा आश्वासन मिला, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ग्राउंड लेवल पर स्थायी समाधान आज भी दिखाई नहीं दे रहा। और यही सवाल आज DK News Nalagarh पूछ रहा है— अगर 23 मई को बातचीत के बाद कोई ठोस फैसला हुआ था, तो वह फैसला जमीन पर कहां है? अगर ग्रामीणों को कोई लिखित समाधान दिया गया था तो वह जनता के सामने क्यों नहीं रखा गया? अगर कंपनी ने कोई जिम्मेदारी ली थी तो उसका पालन कितना हुआ? और अगर प्रशासन ने कोई समयसीमा तय की थी तो उस समयसीमा में क्या कार्रवाई हुई? जनता को सिर्फ भरोसा नहीं चाहिए, जनता को हिसाब चाहिए। आज सवाल उस गंदे पानी का भी है जिसे ग्रामीण दूषित बता रहे हैं। सवाल उस दुर्गंध का है जिसकी शिकायत ग्रामीण कर रहे हैं। सवाल यहां आने वाले hazardous और chemical waste को लेकर उठ रही चिंताओं का है। ग्रामीणों का दावा है कि इलाके में लोगों को अस्थमा, एलर्जी और किडनी से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है। लेकिन इस मुद्दे पर भी हमारा सवाल बिल्कुल साफ है— सरकार स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच क्यों नहीं करवाती? पानी की जांच करवाइए। मिट्टी की जांच करवाइए। हवा की जांच करवाइए। रिपोर्ट जनता के सामने रखिए। अगर पानी साफ है तो जनता को बताइए कि पानी साफ है। अगर पानी दूषित है तो जिम्मेदारी तय कीजिए। और अगर इन स्वास्थ्य समस्याओं का प्लांट या पानी से कोई संबंध नहीं है तो वह भी वैज्ञानिक रिपोर्ट से साफ होना चाहिए। क्योंकि DK News Nalagarh हवा में तीर नहीं चलाएगा। हम दस्तावेज के साथ सवाल पूछेंगे और मौके के वीडियो के साथ सवाल पूछेंगे। 23 मई 2026 की बैठक के लिखित दस्तावेज में ग्रामीणों की कई चिंताओं का उल्लेख है। इसमें प्लांट का निरीक्षण, वीडियोग्राफी, hazardous waste के उचित निस्तारण, untreated waste, दुर्गंध और waste management से जुड़े मुद्दों पर चर्चा दर्ज है। तो फिर सवाल यह है कि कागज पर बातें दर्ज होने के बाद जमीन पर बदलाव कितना हुआ? और हमें शर्म आती है उन नेताओं पर जो जनता के बीच आकर बार-बार आश्वासन देते हैं, लोगों को तसल्ली देते हैं, लेकिन जब ग्राउंड लेवल पर काम की बात आती है तो नतीजा दिखाई नहीं देता। नेताओं के पास तीज-त्योहारों में जाने का समय है। शादी समारोहों में पहुंचने का समय है। कार्यक्रमों में जाने का समय है। फोटो खिंचवाने और भाषण देने का समय है। लेकिन इन ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए समय क्यों नहीं है? क्या जनता सिर्फ वोट देने के समय याद आती है? चुनाव के समय नेता उन घरों तक पहुंच जाते हैं जहां पैदल रास्ता भी मुश्किल होता है। बीमार व्यक्ति के घर तक वोट मांगने पहुंचने का रास्ता निकाल लिया जाता है। लेकिन जब वही जनता अपनी समस्या लेकर धरने पर बैठती है तो उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का समय क्यों नहीं मिलता? और यहां सवाल वर्तमान विधायक से भी है— अगर आश्वासन दिए गए हैं तो अब उसका हिसाब दीजिए। कितने आश्वासन दिए गए? कब तक समाधान होना था? अब तक क्या कार्रवाई हुई? कौन-सा विभाग जिम्मेदार है? और सबसे जरूरी— माजरा के लोगों की समस्या का अंतिम समाधान आखिर कब होगा? क्योंकि ग्रामीणों को अब मीठी गोली नहीं चाहिए। झूठी तसल्ली नहीं चाहिए। सिर्फ बैठक नहीं चाहिए। सिर्फ बयान नहीं चाहिए। सिर्फ फोटो नहीं चाहिए। जनता को चाहिए— साफ पानी। साफ हवा। सुरक्षित वातावरण। वैज्ञानिक जांच। जिम्मेदारी तय होना। और सबसे बढ़कर—स्थायी समाधान। अगर ग्रामीणों के आरोप गलत हैं तो सरकार और संबंधित विभाग सामने आएं और जांच करवाकर सच जनता को बताएं। अगर आरोपों में सच्चाई है तो फिर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इस मुद्दे को बार-बार आश्वासन देकर दबा देना समाधान नहीं है। 18 मई को जनता दूषित हवा, दूषित पानी और पर्यावरण व गांववासियों को हो रहे नुकसान के खिलाफ धरने पर बैठी। 23 मई को बातचीत हुई। धरना आश्वासन के बाद उठा। उसके बाद भी आश्वासन चलते रहे। अब सवाल है— आखिर आश्वासन की यह कहानी कब खत्म होगी और समाधान की शुरुआत कब होगी? DK News Nalagarh किसी राजनीतिक पार्टी का प्रवक्ता नहीं है। हम सिर्फ इतना पूछ रहे हैं— माजरा के लोगों की आवाज कब सुनी जाएगी? उनके पानी की जांच कब होगी? उनकी शिकायतों पर अंतिम फैसला कब होगा? और जो वादे किए गए, उनका हिसाब जनता को कब मिलेगा? क्योंकि लोकतंत्र में नेता जनता से बड़े नहीं होते। नेता जनता के वोट से बनते हैं और जनता को जवाब देना उनकी जिम्मेदारी है। और अगर इस समस्या का समाधान समय रहते नहीं निकला, तो आने वाले चुनाव में जनता अपने वोट से जवाब देना अच्छी तरह जानती है। DK News Nalagarh शम्मी राजपूत सवाल पूछता रहेगा—बिना डर, बिना दबाव और बिना किसी की चमचागिरी के। क्योंकि यह सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है। यह सवाल माजरा के लोगों की जिंदगी, उनके पानी और उनके भविष्य का है।1
- उत्तराखण्ड में ग्रामीण महिलाएं फूलों की खेती कर बन रही हैं आत्मनिर्भर ।1
- मोरनी में बढ़ती चोरी पर ग्रामीणों का ज्ञापन, पुलिस बल बढ़ाने और CCTV लगाने की मांग मोरनी में बढ़ती चोरी की घटनाओं पर ग्रामीणों ने पुलिस उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, पुलिस बल बढ़ाने और CCTV लगाने की मांग मोरनी। मोरनी क्षेत्र में बढ़ रही चोरी और अन्य आपराधिक घटनाओं को लेकर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने पुलिस उपायुक्त, पंचकूला के नाम ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। मोरनी पंचायत संगठन के प्रधान मोहित परमार ने वीडियो जारी कर इस संबंध में जानकारी साझा की। ज्ञापन में कहा गया है कि मोरनी क्षेत्र शांत, सुरक्षित और प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी के कारण स्थानीय लोगों में असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। घरों के बाहर खड़े मोटरसाइकिल, कार सहित अन्य वाहनों की चोरी की घटनाओं को लेकर ग्रामीणों ने चिंता जताई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मोरनी पुलिस चौकी में पर्याप्त संख्या में अतिरिक्त पुलिस कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। साथ ही पुलिस गश्त को प्रभावी बनाने के लिए कम से कम चार मोटरसाइकिल राइडर उपलब्ध करवाए जाएं। ज्ञापन में रात के समय खेड़ा बागड़ा और भुड़ मोड़ (किलापुर मार्ग) सहित प्रमुख स्थानों पर विशेष पुलिस चेक पोस्ट और नाकाबंदी लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा मोरनी के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे लगाने का सुझाव भी दिया गया है। मोहित परमार ने वीडियो के माध्यम से बताया कि क्षेत्र के ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से पुलिस प्रशासन के समक्ष सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने, सक्रिय चोरों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा हाल ही में चोरी हुए वाहनों की जल्द बरामदगी की मांग की। उन्होंने क्षेत्रवासियों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि पुलिस प्रशासन उनकी मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई करते हुए मोरनी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करेगा। ज्ञापन पर मोरनी क्षेत्र के विभिन्न गांवों के सरपंचों, जिला परिषद सदस्य, मोरनी युवा संगठन के पदाधिकारियों और स्थानीय निवासियों के हस्ताक्षर भी बताए गए हैं।1
- chin se nepal men aaya mahapralay dekhen is video men puri news1
- नेपाल में कुदरत का कहर: 95 की मौत, 750 से ज्यादा लापता; 133 भारतीय भी शामिल नेपाल के रसुवा क्षेत्र में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। 26 अगस्त तक नेपाल में कम से कम 95 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 750 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक और 37 एनआरआई शामिल हैं। राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है और मृतकों व लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है।1