*"विचारों का प्रदूषण: जब मन का गंगाजल नाला बन जाए"*दुनिया में सबसे खतरनाक प्रदूषण नूरपुर (31 जुलाई, 2026), भूषण शर्मा *"विचारों का प्रदूषण: जब मन का गंगाजल नाला बन जाए"* दुनिया में सबसे खतरनाक प्रदूषण वायु, जल या ध्वनि का नहीं, बल्कि विचारों का प्रदूषण है। हवा प्रदूषित हो जाए तो मास्क बचा सकता है, पानी दूषित हो जाए तो उसे शुद्ध किया जा सकता है, लेकिन जब मन और विचार प्रदूषित हो जाएं, तब उसका जहर पूरे समाज में फैलता है। यही जहर रिश्तों को तोड़ता है, समाज को बांटता है और राष्ट्र की आत्मा तक को घायल कर देता है। विचार जल के समान हैं। जल अपने आप में न तो पवित्र होता है और न अपवित्र। उसमें जो मिलाया जाता है, वह वैसा ही बन जाता है। यदि उसमें गंदगी घोल दी जाए तो वह नाला बनकर दुर्गंध फैलाता है, और यदि उसमें आस्था, संस्कार और सद्भाव की सुगंध घोल दी जाए तो वही गंगाजल बनकर जीवन को पवित्र कर देता है। ठीक यही बात मनुष्य के विचारों पर भी लागू होती है। आज समाज का सबसे बड़ा संकट आर्थिक नहीं, वैचारिक है। हम पहले असहमत होते थे, अब एक-दूसरे से घृणा करने लगे हैं। सोशल मीडिया ने संवाद का मंच कम और निर्णय सुनाने की अदालत अधिक बना दिया है। बिना तथ्य जाने फैसले सुनाए जा रहे हैं, बिना सोचे-समझे चरित्र हनन किया जा रहा है और बिना संवेदना के शब्दों के तीर चलाए जा रहे हैं। यह सब उस गंदगी का परिणाम है, जो धीरे-धीरे हमारे विचारों में भरती जा रही है। विडंबना यह है कि आज शिक्षित लोग भी विचारों की शुद्धता से अधिक अपनी विचारधारा की श्रेष्ठता सिद्ध करने में लगे हैं। सत्य की जगह सुविधा ने ले ली है और तर्क की जगह कटुता ने। परिणाम यह है कि परिवारों में संवाद कम हो रहा है, मित्रता राजनीति की भेंट चढ़ रही है और समाज छोटे-छोटे वैचारिक खेमों में बंटता जा रहा है। महापुरुषों ने हमेशा कहा कि मनुष्य की पहचान उसके धन, पद या शक्ति से नहीं, बल्कि उसके विचारों से होती है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को ऊंचे विचार अपनाने का संदेश दिया, महात्मा गांधी ने विचारों की पवित्रता को जीवन का आधार बनाया और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा कि महान सपने महान विचारों से जन्म लेते हैं। इतिहास इस बात का साक्षी है कि सभ्यताओं का निर्माण हथियारों से नहीं, विचारों से हुआ है। आज आवश्यकता केवल स्मार्ट शहरों की नहीं, स्मार्ट विचारों की है। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ मानवीय संवेदनाएं भी देनी होंगी। घरों में संस्कारों की चर्चा लौटानी होगी, विद्यालयों में नैतिक शिक्षा को सम्मान देना होगा और सोशल मीडिया पर शब्दों की मर्यादा को पुनर्जीवित करना होगा। क्योंकि विषैले विचारों से कभी स्वस्थ समाज का निर्माण नहीं हो सकता। हर व्यक्ति प्रतिदिन स्वयं से एक प्रश्न पूछे—क्या मैं अपने विचारों से समाज में सुगंध फैला रहा हूं या दुर्गंध? यदि उत्तर ईमानदारी से मिल गया, तो शायद आधी समस्याएं अपने आप समाप्त हो जाएंगी। याद रखिए, विचारों का गंगाजल समाज को जोड़ता है, जबकि विचारों का नाला केवल विभाजन, वैमनस्य और विनाश की ओर ले जाता है। इसलिए यदि वास्तव में देश बदलना है, तो शुरुआत सड़कों से नहीं, अपने विचारों से करनी होगी। क्योंकि राष्ट्र का भविष्य संसद में बनने से पहले नागरिकों के मन में बनता है। ---- *राजीव पठानिया, नूरपुर*
*"विचारों का प्रदूषण: जब मन का गंगाजल नाला बन जाए"*दुनिया में सबसे खतरनाक प्रदूषण नूरपुर (31 जुलाई, 2026), भूषण शर्मा *"विचारों का प्रदूषण: जब मन का गंगाजल नाला बन जाए"* दुनिया में सबसे खतरनाक प्रदूषण वायु, जल या ध्वनि का नहीं, बल्कि विचारों का प्रदूषण है। हवा प्रदूषित हो जाए तो मास्क बचा सकता है, पानी दूषित हो जाए तो उसे शुद्ध किया जा सकता है, लेकिन जब मन और विचार प्रदूषित हो जाएं, तब उसका जहर पूरे समाज में फैलता है। यही जहर रिश्तों को तोड़ता है, समाज को बांटता है और राष्ट्र की आत्मा तक को घायल कर देता है। विचार जल के समान हैं। जल अपने आप में न तो पवित्र होता है और न अपवित्र। उसमें जो मिलाया जाता है, वह वैसा ही बन जाता है। यदि उसमें गंदगी घोल दी जाए तो वह नाला बनकर दुर्गंध फैलाता है, और यदि उसमें आस्था, संस्कार और सद्भाव की सुगंध घोल दी जाए तो वही गंगाजल बनकर जीवन को पवित्र कर देता है। ठीक यही बात मनुष्य के विचारों पर भी लागू होती है। आज समाज का सबसे बड़ा संकट आर्थिक नहीं, वैचारिक है। हम पहले असहमत होते थे, अब एक-दूसरे से घृणा करने लगे हैं। सोशल मीडिया ने संवाद का मंच कम और निर्णय सुनाने की अदालत अधिक बना दिया है। बिना तथ्य जाने फैसले सुनाए जा रहे हैं, बिना सोचे-समझे चरित्र हनन किया जा रहा है और बिना संवेदना के शब्दों के तीर चलाए जा रहे हैं। यह सब उस गंदगी का परिणाम है, जो धीरे-धीरे हमारे विचारों में भरती जा रही है। विडंबना यह है कि आज शिक्षित लोग भी विचारों की शुद्धता से अधिक अपनी विचारधारा की श्रेष्ठता सिद्ध करने में लगे हैं। सत्य की जगह सुविधा ने ले ली है और तर्क की जगह कटुता ने। परिणाम यह है कि परिवारों में संवाद कम हो रहा है, मित्रता राजनीति की भेंट चढ़ रही है और समाज छोटे-छोटे वैचारिक खेमों में बंटता जा रहा है। महापुरुषों ने हमेशा कहा कि मनुष्य की पहचान उसके धन, पद या शक्ति से नहीं, बल्कि उसके विचारों से होती है। स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को ऊंचे विचार अपनाने का संदेश दिया, महात्मा गांधी ने विचारों की पवित्रता को जीवन का आधार बनाया और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा कि महान सपने महान विचारों से जन्म लेते हैं। इतिहास इस बात का साक्षी है कि सभ्यताओं का निर्माण हथियारों से नहीं, विचारों से हुआ है। आज आवश्यकता केवल स्मार्ट शहरों की नहीं, स्मार्ट विचारों की है। बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ मानवीय संवेदनाएं भी देनी होंगी। घरों में संस्कारों की चर्चा लौटानी होगी, विद्यालयों में नैतिक शिक्षा को सम्मान देना होगा और सोशल मीडिया पर शब्दों की मर्यादा को पुनर्जीवित करना होगा। क्योंकि विषैले विचारों से कभी स्वस्थ समाज का निर्माण नहीं हो सकता। हर व्यक्ति प्रतिदिन स्वयं से एक प्रश्न पूछे—क्या मैं अपने विचारों से समाज में सुगंध फैला रहा हूं या दुर्गंध? यदि उत्तर ईमानदारी से मिल गया, तो शायद आधी समस्याएं अपने आप समाप्त हो जाएंगी। याद रखिए, विचारों का गंगाजल समाज को जोड़ता है, जबकि विचारों का नाला केवल विभाजन, वैमनस्य और विनाश की ओर ले जाता है। इसलिए यदि वास्तव में देश बदलना है, तो शुरुआत सड़कों से नहीं, अपने विचारों से करनी होगी। क्योंकि राष्ट्र का भविष्य संसद में बनने से पहले नागरिकों के मन में बनता है। ---- *राजीव पठानिया, नूरपुर*
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- मणिमहेश कैलाश संगम संस्था हमीरपुर की बेड़ा तारने की रस्म श्रद्धापूर्वक सम्पन्न सुजानपुर प्रसिद्ध शक्तिपीठ कालीनाथ कालेश्वर महादेव मंदिर में मणिमहेश कैलाश संगम संस्था, हमीरपुर द्वारा पवित्र बेड़ा तारने की रस्म श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ सम्पन्न की गई। इस धार्मिक आयोजन में संस्था के पदाधिकारियों, विभिन्न शाखाओं के शाखा अध्यक्षों तथा बड़ी संख्या में शिवभक्तों ने भाग लेकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया।कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार एवं पारंपरिक विधि-विधान के साथ बेड़ा पूजन किया गया। इसके उपरांत श्रद्धालुओं ने सुसज्जित बेड़े को कंधों पर उठाकर धार्मिक शोभायात्रा निकाली। पूरे परिसर में "हर-हर महादेव" एवं "जय मणिमहेश" के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो उठा।1
- एडवोकेट अप्पू सिंह स्लाथिया ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इटू से CMO GMC बख्शी नगर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। #Jammu #GMCBakshiNagar #CMO #AppuSinghSlathia #SakinaItoo #JammuNews #BreakingNews #TillTheEndNews1
- ऊना में इस साल 150 हेक्टेयर में होगा पौधारोपण, जिला वन मंडल ने अभियान को लेकर बनाई रणनीति, जल्द होगा वन महोत्सव की तिथि का ऐलान। जिला वन मंडल अधिकारी विकल्प यादव ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि इस वर्ष वन महोत्सव के तहत जिले में लगभग 150 हेक्टेयर भूमि पर पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए वन विभाग द्वारा करीब एक लाख पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पौधारोपण अभियान को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जल्द ही वन महोत्सव की तिथि घोषित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अभियान में वन विभाग के अलावा शिक्षा, पंचायत, ग्रामीण विकास सहित अन्य सरकारी विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों को पौधारोपण से जोड़ा जाए ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हरित क्षेत्र में भी वृद्धि हो सके। विकल्प यादव ने कहा कि केवल पौधे लगाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उनकी देखरेख और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए पौधारोपण वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जाएगी और लगाए गए पौधों के संरक्षण के लिए आवश्यक प्रबंध किए जाएंगे। उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि वे वन महोत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लें और अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाकर उन्हें संरक्षित करने का संकल्प लें। इससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।1
- विधायक विवेक शर्मा,,बोले,, कि,,,कुटलैहड़ की पंचायत हटली के रिवाड़ से दगड़ूंह के लिए जब का प्रावधान ही नहीं था,,भूमि विवाद था,,तो कैसे वन गया,,92 लाख का पुल,,वह भी अधूरा,,इसकी होगी जांच,,लोकनिवि मंडल बंगाणा को दिए आदेश,,1
- पवित्र गीता जी के विरुद्ध साधना से कोई लाभ नहीं। ओर प्रेमानंद गीता के विरुद्ध साधना कर ओर करवा रहे है देखे प्रमाण1
- #JammuKiAwaaz Ko Dabane Ki Sajish? Panthers Neta Taranter Singh Ka Bada Bayan "Ye sirf Rajput Sabha ka nahi, balki Jammu ki awaaz ko dabane ki sazish hai," — Panthers Party leader Taranter Singh ne mudde par teekhi pratikriya dete hue gambhir aarop lagaye. Aakhir kis mudde par diya gaya ye bayan? Dekhiye poori report aur janiye poora maamla. #Jammu #RajputSabha #PanthersParty #TaranterSingh #BreakingNews #LatestUpdate #NewsUpdate #TillTheEndNews1
- पधर:- बच्चे के लिए एनएचएआई के इंजीनियर अंकित गिल बने फरिस्ता नवजात को बचाने के लिए लिया जोखिम, मार्ग बंद होते हुए भी पहुंचाया मंडी मंडी-पठानकोट मार्ग पर कोटरोपी में बन्द पड़े मार्ग के कारण यातायात प्रभावित था और अधिकारियों को मार्ग खोलने में देर होने की संभावना थी। मार्ग का वह हिस्सा हाल ही की बारिश से क्षतिग्रस्त होकर पूरी तरह जमींदोज हो गया था और बचा हुआ हिस्सा भी वाहनों के लिए बेहद जोखिम भरा था। इसी बीच जोगिंद्रनगर की ओर से एक नवजात शिशु के साथ एक परिवार रास्ता पार कर मंडी के लिए निकला, जहाँ बच्चे को चिकित्सकीय सलाह के साथ एक आपात ऑपरेशन की आवश्यकता थी। परिस्थिति को संवेदनशील समझते हुए एनएचएआई के साइड इंजीनियर अंकित गिल मौके पर पहुंचे। जब उन्होंने परिवार की आपात स्थिति सुनी तो आनन‑फानन अपनी टीम को आदेश दिए और अपनी गाड़ी उपलब्ध कराते हुए जोखिम उठाकर परिवार को सुरक्षित रूप से मंडी पहुँचया। अंकित गिल ने न केवल बच्चे का समय पर उपचार सुनिश्चित किया बल्कि तब तक कोटरोपी पर डटे रहे जब तक रात में मार्ग की बहाली का काम पूरा न हो सका। उन्होंने पूरी रात अपनी गाड़ी में रहकर जनरेटर के जरिए फ्लैस लाइट जलाकर इलाके पर निगरानी बनाए रखी ताकि किसी भी प्रकार का बड़ा नुकसान न हो। स्थानीय लोग और राहगीर अंकित गिल के इस साहस और मानवता भरे कदम की खुले दिल से प्रशंसा कर रहे हैं। उनके समय पर निर्णय और मानवीय संवेदना ने एक नवजात की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। एनएचएआई के इस साइड इंजीनियर ने सिर्फ अपना कर्तव्य ही नहीं निभाया, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी कायम की है। बच्चे के माता पिता ने एनएचएआई साइड इंजीनियर अंकित गिल का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे इंसान ईश्वर सबको दे। वहीं एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेकर उमाकांत ने भी अंकित गिल की प्रशंसा की। पधर:- बच्चे के लिए एनएचएआई के इंजीनियर अंकित गिल बने फरिस्ता नवजात को बचाने के लिए लिया जोखिम, मार्ग बंद होते हुए भी पहुंचाया मंडी मंडी-पठानकोट मार्ग पर कोटरोपी में बन्द पड़े मार्ग के कारण यातायात प्रभावित था और अधिकारियों को मार्ग खोलने में देर होने की संभावना थी। मार्ग का वह हिस्सा हाल ही की बारिश से क्षतिग्रस्त होकर पूरी तरह जमींदोज हो गया था और बचा हुआ हिस्सा भी वाहनों के लिए बेहद जोखिम भरा था। इसी बीच जोगिंद्रनगर की ओर से एक नवजात शिशु के साथ एक परिवार रास्ता पार कर मंडी के लिए निकला, जहाँ बच्चे को चिकित्सकीय सलाह के साथ एक आपात ऑपरेशन की आवश्यकता थी। परिस्थिति को संवेदनशील समझते हुए एनएचएआई के साइड इंजीनियर अंकित गिल मौके पर पहुंचे। जब उन्होंने परिवार की आपात स्थिति सुनी तो आनन‑फानन अपनी टीम को आदेश दिए और अपनी गाड़ी उपलब्ध कराते हुए जोखिम उठाकर परिवार को सुरक्षित रूप से मंडी पहुँचया। अंकित गिल ने न केवल बच्चे का समय पर उपचार सुनिश्चित किया बल्कि तब तक कोटरोपी पर डटे रहे जब तक रात में मार्ग की बहाली का काम पूरा न हो सका। उन्होंने पूरी रात अपनी गाड़ी में रहकर जनरेटर के जरिए फ्लैस लाइट जलाकर इलाके पर निगरानी बनाए रखी ताकि किसी भी प्रकार का बड़ा नुकसान न हो। स्थानीय लोग और राहगीर अंकित गिल के इस साहस और मानवता भरे कदम की खुले दिल से प्रशंसा कर रहे हैं। उनके समय पर निर्णय और मानवीय संवेदना ने एक नवजात की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। एनएचएआई के इस साइड इंजीनियर ने सिर्फ अपना कर्तव्य ही नहीं निभाया, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी कायम की है। बच्चे के माता पिता ने एनएचएआई साइड इंजीनियर अंकित गिल का धन्यवाद करते हुए कहा कि ऐसे इंसान ईश्वर सबको दे। वहीं एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेकर उमाकांत ने भी अंकित गिल की प्रशंसा की।1