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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में अपना दल एस कमेरावादी द्वारा एक ज्ञापन सौंपा गया है।
Bablu singh Raftaar media
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में अपना दल एस कमेरावादी द्वारा एक ज्ञापन सौंपा गया है।
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- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में अपना दल एस कमेरावादी द्वारा एक ज्ञापन सौंपा गया है।1
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के विकास भवन परिसर में बुधवार को आयोजित किसान दिवस में खाद, बिजली और पानी की गंभीर समस्याओं को लेकर किसान संगठनों ने तीखे सवाल उठाए। भाकियू महात्मा टिकैत के जिलाध्यक्ष मधुसूदन तिवारी, भारतीय किसान संघ के बहुआ ब्लाक अध्यक्ष अश्विन तिवारी, किसान नेता रंजीत पटेल और राजू कुर्मी सहित विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारियों ने जिले की सभी सहकारी समितियों में खाद की किल्लत और उसकी कालाबाजारी का मुद्दा अधिकारियों के सामने रखा। किसानों ने खाद की किल्लत दूर करने के साथ-साथ पर्याप्त बिजली देने और नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की। इस कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी पवन सिंह मीणा, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अंसल कुमार, एडीसीओ सहकारिता शनि चतुर्वेदी और कृषि विभाग के एडीओ योगेश सिंह सहित संबंधित विभागों के जिम्मेदार अधिकारी मौजूद रहे। इसके बावजूद, किसान नेता अश्विन तिवारी ने आरोप लगाया कि किसान दिवस पर उनकी समस्याएं सुनने के लिए कोई भी बड़ा अधिकारी उपस्थित नहीं था, जिसके कारण समस्याओं का कोई समाधान नहीं हो पाता है। किसानों का कहना है कि वर्तमान समय में धान की रोपाई के लिए खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है, लेकिन सरकारी समितियों में खाद उपलब्ध नहीं है और प्राइवेट समितियों में इसे अधिक रेट पर दिया जा रहा है। इसके अलावा, बारिश न होने से खेतों की सिंचाई के लिए पानी की जरूरत है पर नहरों में पानी नहीं है, और बिजली पावर हाउस में लोड का बहाना बनाकर कटौती की जा रही है। किसानों ने साफ तौर पर कहा कि जब तक किसान दिवस में बड़े अधिकारी मौजूद नहीं होंगे, तब तक उनकी समस्याओं का निदान नहीं हो सकता।1
- फतेहपुर जिले में बारिश होते ही हर सड़क पर पानी भर जाता है और यहाँ जल निकासी का कोई उपाय नहीं बचा है। स्थिति यह है कि जिले की कोई भी सड़क हो, बारिश होते ही वह पूरी तरह पानी से भर जाती है। स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी है क्योंकि पूरे फतेहपुर जिले में विकास का 'वि' भी कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। विशेष रूप से गाजीपुर रोड पर रेलवे पुल के नीचे भी इसी तरह पानी जमा हो जाता है और यह सड़क पूरी तरह से टूटी-फूटी पड़ी हुई है। इस जर्जर सड़क और भयंकर जलभराव के कारण आने-जाने वाले राहगीरों को आवागमन में भारी दिक्कतों और परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के देवमई ब्लॉक अंतर्गत जाफरपुर सितर्रा गांव में मनरेगा और खनन माफियाओं के गठजोड़ ने मिलकर लगभग 150 वर्ष पुराने ऐतिहासिक 'लाल बिहारा तालाब' (लाल हजारा तालाब) का अस्तित्व ही मिटा दिया है। साल 2020 में मनरेगा के तहत सिल्ट सफाई के बहाने इस पुरातात्विक धरोहर की जेसीबी मशीनों से 15 फीट गहरी अवैध खुदाई की गई थी। सिंचाई विभाग के तत्कालीन अवर अभियंता राम सकुन पटेल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस 6 बीघे के ऐतिहासिक तालाब से लगभग 61,668 घनमीटर बेशकीमती मिट्टी का अवैध खनन किया गया। इस मिट्टी को खनन माफियाओं ने पास की ही प्लॉटिंग की जमीनों को पाटने के लिए खुलेआम बेच दिया। सेठ लाल बिहारी द्वारा निर्मित इस पक्के तालाब में चारों तरफ पक्की चारदीवारी, सात सीढ़ीदार रास्ते और प्राचीन ईंटों की सुंदर दीवारें थीं, जिन्हें जेसीबी चलाकर पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। जब समाचार पत्रों में इस महाघोटाले की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई, तो तत्कालीन ग्राम प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों ने तालाब की 15 फीट गहराई को छिपाने और साक्ष्य मिटाने के लिए रातभर निजी ट्यूबवेलों से इसमें पानी भरवा दिया। तत्कालीन एसडीएम प्रहलाद सिंह ने मामले का संज्ञान लेकर तहसीलदार गणेश सिंह से दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन स्थानीय ब्लॉक प्रशासन और कानूनगो की गोलमोल रिपोर्ट व लीपापोती के कारण आज 6 साल बीत जाने के बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं और दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी प्रशासनिक विडंबना जुलाई 2026 की रिपोर्टों में देखने को मिल रही है। प्रशासन जिले में 'अमृत सरोवर' अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है। अकेले फतेहपुर और आसपास के क्षेत्रों में ₹3 करोड़ से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद 279 अमृत सरोवर पूरी तरह सूखे और बदहाल पड़े हैं। जहां नए तालाब खोदने के लिए करोड़ों का बजट स्वीकृत हो रहा है, वहीं इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए अब खुदाई की नहीं, बल्कि माफियाओं द्वारा लूटी गई 61 हजार घनमीटर मिट्टी को वापस भरकर इसके प्राचीन स्वरूप को बहाल करने की आवश्यकता है। इस गंभीर अपराध पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई और वित्तीय रिकवरी न होने से स्थानीय ग्रामीणों व समाजसेवियों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।4
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के श्याम खेड़ा गांव (पोस्ट कोरसम) में बिना किसी पैमाइश के ही इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस अनियोजित निर्माण के कारण सड़क का हिस्सा घर के नीचे दबा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की सुध लेने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं आता है। सड़क के अत्यधिक संकरी होने के कारण यहां से वाहनों के गुजरने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के खागा क्षेत्र में 20वां राजापुर कस्बा बांदीपुर बेहद धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। इस खुशी के मौके पर मिलने पहुंचे दोस्तों में नदीम शेख, समीर शेख और मुन्ना सलमानी शामिल हैं।1
- उत्तर प्रदेश के रायबरेली में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के सदस्य डॉ. अमित सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में धरने पर बैठ गए हैं। यह धरना शहर के डिग्री कॉलेज चौराहे पर दिया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में डॉक्टर और निजी नर्सिंग होम के संचालक मौजूद हैं। प्रदर्शनकारी डॉक्टर डॉ. अमित सिंह की तत्काल रिहाई की मांग कर रहे हैं। डॉ. अमित सिंह पर बीते दिनों एक निजी नर्सिंग होम में इलाज में लापरवाही का आरोप लगा था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई से नाराज डॉक्टरों और IMA संगठन का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले ही डॉ. सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिससे डॉक्टरों में भारी रोष है।1
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र में लद्दाख के पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य के लिए अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक और युवाओं की खामोशी को लेकर एक बेहद कड़वी व परेशान करने वाली सच्चाई पर गंभीर चर्चा हो रही है। फिल्म '3 Idiots' के काल्पनिक किरदार 'फुंसुक वांगडू' पर सिनेमाघरों में तालियां बजाने और भावुक होने वाली युवा पीढ़ी आज असल जिंदगी के नायक सोनम वांगचुक के संघर्ष पर पूरी तरह खामोश बैठी है। यह विरोधाभास आज के समाज और युवाओं की सोच पर गहरे सवाल खड़े करता है, जो रील और रीयल के अंतर को भूल चुके हैं। सोशल मीडिया पर मामूली मनोरंजन और रील्स पर करोड़ों व्यूज देने वाला युवा वर्ग देश के सबसे संवेदनशील हिस्से लद्दाख और जलवायु परिवर्तन के इतने बड़े आंदोलन पर डिजिटल चुप्पी साधे हुए है। सोनम वांगचुक का पूरा जीवन पर्यावरण संरक्षण और अनूठे वैज्ञानिक आविष्कारों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने सर्दियों में व्यर्थ बहने वाले पानी को जमा कर कृत्रिम ग्लेशियर बनाने की 'आइस स्तूप' तकनीक विकसित की, जो गर्मियों में पिघलकर लद्दाख के किसानों के लिए वरदान साबित होती है। इसके अलावा, उन्होंने 1988 में 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (SECMOL) की स्थापना की, जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलने वाला एक ऐसा स्कूल है जहां व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है। उन्होंने शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान में भी हीटर या कोयले के बिना अंदर से गर्म रहने वाले पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी के घरों (सोलर हीटेड मड हाउसेज) का निर्माण किया। उनके इन्हीं अभूतपूर्व कार्यों और जीवन संघर्ष से प्रेरित होकर फिल्म '3 Idiots' में आमिर खान का 'फुंसुक वांगडू' किरदार रचा गया था। इन ऐतिहासिक योगदानों के लिए उन्हें एशिया का नोबेल माना जाने वाला रमन मैग्सेसे पुरस्कार (2018), ग्लोबल अवार्ड फॉर सस्टेनेबल आर्किटेक्चर (2017) और रोलेक्स अवार्ड फॉर एंटरप्राइज (2016) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। वर्तमान में सोनम वांगचुक लद्दाख की अनूठी पहचान, जमीन और संसाधनों को बड़े उद्योगों के अंधाधुंध दोहन से बचाने के लिए इसे भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। हिमालयी ग्लेशियरों को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए वे कड़ाके की ठंड में लगातार अनशन और लंबी पदयात्राएं कर रहे हैं। उनका यह संघर्ष केवल लद्दाख का नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का है। युवाओं को अब जागना होगा और उनके इस संदेश "सरल जीवन जिएं ताकि दूसरे भी जी सकें" को केवल फिल्मों में नहीं, बल्कि समाज में जिंदा रखना होगा।1