उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र में लद्दाख के पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य के लिए अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक और युवाओं की खामोशी को लेकर एक बेहद कड़वी व परेशान करने वाली सच्चाई पर गंभीर चर्चा हो रही है। फिल्म '3 Idiots' के काल्पनिक किरदार 'फुंसुक वांगडू' पर सिनेमाघरों में तालियां बजाने और भावुक होने वाली युवा पीढ़ी आज असल जिंदगी के नायक सोनम वांगचुक के संघर्ष पर पूरी तरह खामोश बैठी है। यह विरोधाभास आज के समाज और युवाओं की सोच पर गहरे सवाल खड़े करता है, जो रील और रीयल के अंतर को भूल चुके हैं। सोशल मीडिया पर मामूली मनोरंजन और रील्स पर करोड़ों व्यूज देने वाला युवा वर्ग देश के सबसे संवेदनशील हिस्से लद्दाख और जलवायु परिवर्तन के इतने बड़े आंदोलन पर डिजिटल चुप्पी साधे हुए है। सोनम वांगचुक का पूरा जीवन पर्यावरण संरक्षण और अनूठे वैज्ञानिक आविष्कारों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने सर्दियों में व्यर्थ बहने वाले पानी को जमा कर कृत्रिम ग्लेशियर बनाने की 'आइस स्तूप' तकनीक विकसित की, जो गर्मियों में पिघलकर लद्दाख के किसानों के लिए वरदान साबित होती है। इसके अलावा, उन्होंने 1988 में 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (SECMOL) की स्थापना की, जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलने वाला एक ऐसा स्कूल है जहां व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है। उन्होंने शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान में भी हीटर या कोयले के बिना अंदर से गर्म रहने वाले पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी के घरों (सोलर हीटेड मड हाउसेज) का निर्माण किया। उनके इन्हीं अभूतपूर्व कार्यों और जीवन संघर्ष से प्रेरित होकर फिल्म '3 Idiots' में आमिर खान का 'फुंसुक वांगडू' किरदार रचा गया था। इन ऐतिहासिक योगदानों के लिए उन्हें एशिया का नोबेल माना जाने वाला रमन मैग्सेसे पुरस्कार (2018), ग्लोबल अवार्ड फॉर सस्टेनेबल आर्किटेक्चर (2017) और रोलेक्स अवार्ड फॉर एंटरप्राइज (2016) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। वर्तमान में सोनम वांगचुक लद्दाख की अनूठी पहचान, जमीन और संसाधनों को बड़े उद्योगों के अंधाधुंध दोहन से बचाने के लिए इसे भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। हिमालयी ग्लेशियरों को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए वे कड़ाके की ठंड में लगातार अनशन और लंबी पदयात्राएं कर रहे हैं। उनका यह संघर्ष केवल लद्दाख का नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का है। युवाओं को अब जागना होगा और उनके इस संदेश "सरल जीवन जिएं ताकि दूसरे भी जी सकें" को केवल फिल्मों में नहीं, बल्कि समाज में जिंदा रखना होगा।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र में लद्दाख के पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य के लिए अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक और युवाओं की खामोशी को लेकर एक बेहद कड़वी व परेशान करने वाली सच्चाई पर गंभीर चर्चा हो रही है। फिल्म '3 Idiots' के काल्पनिक किरदार 'फुंसुक वांगडू' पर सिनेमाघरों में तालियां बजाने और भावुक होने वाली युवा पीढ़ी आज असल जिंदगी के नायक सोनम वांगचुक के संघर्ष पर पूरी तरह खामोश बैठी है। यह विरोधाभास आज के समाज और युवाओं की सोच पर गहरे सवाल खड़े करता है, जो रील और रीयल के अंतर को भूल चुके हैं। सोशल मीडिया पर मामूली मनोरंजन और रील्स पर करोड़ों व्यूज देने वाला युवा वर्ग देश के सबसे संवेदनशील हिस्से लद्दाख और जलवायु परिवर्तन के इतने बड़े आंदोलन पर डिजिटल चुप्पी साधे हुए है। सोनम वांगचुक का पूरा जीवन पर्यावरण संरक्षण और अनूठे वैज्ञानिक आविष्कारों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने सर्दियों में व्यर्थ बहने वाले पानी को जमा कर कृत्रिम ग्लेशियर बनाने की 'आइस स्तूप' तकनीक विकसित की, जो गर्मियों में पिघलकर लद्दाख के किसानों के लिए वरदान साबित होती है। इसके अलावा, उन्होंने 1988 में 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (SECMOL) की स्थापना की, जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलने वाला एक ऐसा स्कूल है जहां व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है। उन्होंने शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान में भी हीटर या कोयले के बिना अंदर से गर्म रहने वाले पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी के घरों (सोलर हीटेड मड हाउसेज) का निर्माण किया। उनके इन्हीं अभूतपूर्व कार्यों और जीवन संघर्ष से प्रेरित होकर फिल्म '3 Idiots' में आमिर खान का 'फुंसुक वांगडू' किरदार रचा गया था। इन ऐतिहासिक योगदानों के लिए उन्हें एशिया का नोबेल माना जाने वाला रमन मैग्सेसे पुरस्कार (2018), ग्लोबल अवार्ड फॉर सस्टेनेबल आर्किटेक्चर (2017) और रोलेक्स अवार्ड फॉर एंटरप्राइज (2016) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। वर्तमान में सोनम वांगचुक लद्दाख की अनूठी पहचान, जमीन और संसाधनों को बड़े उद्योगों के अंधाधुंध दोहन से बचाने के लिए इसे भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। हिमालयी ग्लेशियरों को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए वे कड़ाके की ठंड में लगातार अनशन और लंबी पदयात्राएं कर रहे हैं। उनका यह संघर्ष केवल लद्दाख का नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का है। युवाओं को अब जागना होगा और उनके इस संदेश "सरल जीवन जिएं ताकि दूसरे भी जी सकें" को केवल फिल्मों में नहीं, बल्कि समाज में जिंदा रखना होगा।
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के देवमई ब्लॉक अंतर्गत जाफरपुर सितर्रा गांव में मनरेगा और खनन माफियाओं के गठजोड़ ने मिलकर लगभग 150 वर्ष पुराने ऐतिहासिक 'लाल बिहारा तालाब' (लाल हजारा तालाब) का अस्तित्व ही मिटा दिया है। साल 2020 में मनरेगा के तहत सिल्ट सफाई के बहाने इस पुरातात्विक धरोहर की जेसीबी मशीनों से 15 फीट गहरी अवैध खुदाई की गई थी। सिंचाई विभाग के तत्कालीन अवर अभियंता राम सकुन पटेल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस 6 बीघे के ऐतिहासिक तालाब से लगभग 61,668 घनमीटर बेशकीमती मिट्टी का अवैध खनन किया गया। इस मिट्टी को खनन माफियाओं ने पास की ही प्लॉटिंग की जमीनों को पाटने के लिए खुलेआम बेच दिया। सेठ लाल बिहारी द्वारा निर्मित इस पक्के तालाब में चारों तरफ पक्की चारदीवारी, सात सीढ़ीदार रास्ते और प्राचीन ईंटों की सुंदर दीवारें थीं, जिन्हें जेसीबी चलाकर पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। जब समाचार पत्रों में इस महाघोटाले की खबर प्रमुखता से प्रकाशित हुई, तो तत्कालीन ग्राम प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों ने तालाब की 15 फीट गहराई को छिपाने और साक्ष्य मिटाने के लिए रातभर निजी ट्यूबवेलों से इसमें पानी भरवा दिया। तत्कालीन एसडीएम प्रहलाद सिंह ने मामले का संज्ञान लेकर तहसीलदार गणेश सिंह से दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन स्थानीय ब्लॉक प्रशासन और कानूनगो की गोलमोल रिपोर्ट व लीपापोती के कारण आज 6 साल बीत जाने के बाद भी फाइलें धूल फांक रही हैं और दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी प्रशासनिक विडंबना जुलाई 2026 की रिपोर्टों में देखने को मिल रही है। प्रशासन जिले में 'अमृत सरोवर' अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रहा है। अकेले फतेहपुर और आसपास के क्षेत्रों में ₹3 करोड़ से अधिक खर्च किए जाने के बावजूद 279 अमृत सरोवर पूरी तरह सूखे और बदहाल पड़े हैं। जहां नए तालाब खोदने के लिए करोड़ों का बजट स्वीकृत हो रहा है, वहीं इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए अब खुदाई की नहीं, बल्कि माफियाओं द्वारा लूटी गई 61 हजार घनमीटर मिट्टी को वापस भरकर इसके प्राचीन स्वरूप को बहाल करने की आवश्यकता है। इस गंभीर अपराध पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई और वित्तीय रिकवरी न होने से स्थानीय ग्रामीणों व समाजसेवियों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है।4
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के श्याम खेड़ा गांव (पोस्ट कोरसम) में बिना किसी पैमाइश के ही इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कराया जा रहा है। इस अनियोजित निर्माण के कारण सड़क का हिस्सा घर के नीचे दबा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य की सुध लेने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं आता है। सड़क के अत्यधिक संकरी होने के कारण यहां से वाहनों के गुजरने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- फतेहपुर के खजुहा स्थित श्री आर.एस.जी. इण्टर कॉलेज में छात्रों को सहजन (मोरिंगा) के औषधीय, पोषण और पर्यावरणीय महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम एवं भंडारे का आयोजन किया गया। मंगलवार, 14 जुलाई 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि सहजन एक बेहद उपयोगी और औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है, जिसके फल, पत्तियां और अन्य हिस्से स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन, कैल्शियम, आयरन और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में काफी मददगार हैं। इस मौके पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राकेश कुमार गुप्ता ने सभी विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ औषधीय पौधों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। इसके साथ ही, बिन्दकी रेंज से आए वन दरोगा रवीन्द्र कुमार, अवधेश कुमार यादव और श्रुति कीर्ति ने भी छात्रों को सहजन के औषधीय गुणों, पौधरोपण और हरित पर्यावरण के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के अन्य शिक्षकों और शिक्षिकाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।1
- फतेहपुर के असोथर में स्थित राम किशोर सिंह इंटर कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की नगर इकाई द्वारा "खेलो भारत" अभियान के अंतर्गत खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता के दौरान छात्र-छात्राओं के लिए भाला फेंक, गोला फेंक और डिस्क थ्रो स्पर्धाएं आयोजित की गईं, जिसमें विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह के साथ भाग लेकर अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए एबीवीपी फतेहपुर के तहसील संयोजक प्रतीक शुक्ला ने उपस्थित खिलाड़ियों और छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि खेल न केवल शारीरिक विकास का जरिया हैं, बल्कि ये अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से नियमित रूप से खेल गतिविधियों में सहभागिता करने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान नगर मंत्री धर्मेंद्र जी, अंश सिंह सहित कई अन्य कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। अंत में सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें खेल भावना के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया।1
- फतेहपुर के ओमघाट पर अमावस्या के अवसर पर गंगा बचाओ सेवा समिति नमामि गंगे एवं जिला गंगा समिति द्वारा गंगा आरती का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान गंगा घाट की सफाई की गई और सभी उपस्थित लोगों ने स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लिया। गंगा बचाओ सेवा समिति के प्रदेश अध्यक्ष शैलेंद्र शरन सिंपल द्वारा आयोजित इस गंगा आरती में श्रद्धालुओं ने दीपदान किया। इसमें मुख्य यजमान और मुख्य अतिथि के रूप में पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक अपनी पत्नी और माता जी के साथ उपस्थित रहे। पुलिस अधीक्षक ने इस अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि मां गंगा को अविरल और निर्मल बनाए रखना हम सब का दायित्व है। वहीं, क्रय विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष संजीव गुप्ता ने लोगों से अपील की कि गंगा नदी को गंदा न करें एवं मां गंगा को स्वच्छ रखें। कार्यक्रम के अंत में डीपीओ ज्ञान तिवारी ने आरती में शामिल होने पहुंचे गंगा भक्तों को स्वच्छता का संकल्प दिलाया। इस मौके पर मुख्य रूप से स्वामी विज्ञाननंद सरस्वती जी महाराज, गायत्री परिवार के रामस्वरूप गुप्ता, रवींद्र सिंह, व्यापार मंडल के जिला प्रभारी संजय गुप्ता, विनोद कुमार गुप्ता, आशा त्रिपाठी, सुनीता गुप्ता, लक्ष्मी सिंह, वंदना गुप्ता, मधु गुप्ता, पुष्पा गुप्ता, उर्मिला तिवारी, प्रज्ञा गुप्ता, आशीष गुप्ता, पंकज कुमार, राघवेंद्र, अनुज, अहम शर्मा, सुमित, शिवम मिश्रा और आर्यन मिश्रा सहित कई लोग मौजूद रहे।1
- बांदा जिले के जसपुरा विकास खंड अंतर्गत नांदादेव गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र से लेकर रमेश डॉक्टर के दरवाजे तक जाने वाला रास्ता बेहद खराब हो चुका है। सड़क की दयनीय स्थिति के कारण स्थानीय लोगों का इस मार्ग पर चलना भी काफी मुश्किल हो गया है। इस समस्या को देखते हुए लोगों ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया है कि कृपया इस खराब रास्ते को जल्द से जल्द ठीक करवाया जाए।1
- उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के राज में क्या सिर्फ एकतरफा कानून चल रहा है? एक तरफ आगरा में सड़क के गड्ढे दिखाने वाले आम नागरिक रफीक को अमर्यादित भाषा के बहाने तुरंत जेल में ठूंस दिया जाता है, तो दूसरी तरफ गोरखपुर में चंदा चोरी पर पोस्टर लगाने वाले सपा नेता उपेन्द्र दत्त शुक्ल को गिरफ्तार कर लिया जाता है।1
- उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बिंदकी क्षेत्र में लद्दाख के पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य के लिए अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक और युवाओं की खामोशी को लेकर एक बेहद कड़वी व परेशान करने वाली सच्चाई पर गंभीर चर्चा हो रही है। फिल्म '3 Idiots' के काल्पनिक किरदार 'फुंसुक वांगडू' पर सिनेमाघरों में तालियां बजाने और भावुक होने वाली युवा पीढ़ी आज असल जिंदगी के नायक सोनम वांगचुक के संघर्ष पर पूरी तरह खामोश बैठी है। यह विरोधाभास आज के समाज और युवाओं की सोच पर गहरे सवाल खड़े करता है, जो रील और रीयल के अंतर को भूल चुके हैं। सोशल मीडिया पर मामूली मनोरंजन और रील्स पर करोड़ों व्यूज देने वाला युवा वर्ग देश के सबसे संवेदनशील हिस्से लद्दाख और जलवायु परिवर्तन के इतने बड़े आंदोलन पर डिजिटल चुप्पी साधे हुए है। सोनम वांगचुक का पूरा जीवन पर्यावरण संरक्षण और अनूठे वैज्ञानिक आविष्कारों के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने सर्दियों में व्यर्थ बहने वाले पानी को जमा कर कृत्रिम ग्लेशियर बनाने की 'आइस स्तूप' तकनीक विकसित की, जो गर्मियों में पिघलकर लद्दाख के किसानों के लिए वरदान साबित होती है। इसके अलावा, उन्होंने 1988 में 'स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख' (SECMOL) की स्थापना की, जो पूरी तरह सौर ऊर्जा से चलने वाला एक ऐसा स्कूल है जहां व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है। उन्होंने शून्य से 30 डिग्री नीचे के तापमान में भी हीटर या कोयले के बिना अंदर से गर्म रहने वाले पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी के घरों (सोलर हीटेड मड हाउसेज) का निर्माण किया। उनके इन्हीं अभूतपूर्व कार्यों और जीवन संघर्ष से प्रेरित होकर फिल्म '3 Idiots' में आमिर खान का 'फुंसुक वांगडू' किरदार रचा गया था। इन ऐतिहासिक योगदानों के लिए उन्हें एशिया का नोबेल माना जाने वाला रमन मैग्सेसे पुरस्कार (2018), ग्लोबल अवार्ड फॉर सस्टेनेबल आर्किटेक्चर (2017) और रोलेक्स अवार्ड फॉर एंटरप्राइज (2016) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। वर्तमान में सोनम वांगचुक लद्दाख की अनूठी पहचान, जमीन और संसाधनों को बड़े उद्योगों के अंधाधुंध दोहन से बचाने के लिए इसे भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग कर रहे हैं। हिमालयी ग्लेशियरों को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए वे कड़ाके की ठंड में लगातार अनशन और लंबी पदयात्राएं कर रहे हैं। उनका यह संघर्ष केवल लद्दाख का नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का है। युवाओं को अब जागना होगा और उनके इस संदेश "सरल जीवन जिएं ताकि दूसरे भी जी सकें" को केवल फिल्मों में नहीं, बल्कि समाज में जिंदा रखना होगा।1