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महनार में राहत पैकेट पड़े कम, बाढ़पीड़ितों का फूटा गुस्सा महनार में राहत पैकेट पड़े कम, बाढ़पीड़ितों का फूटा गुस्सा
Mohan Kumar
महनार में राहत पैकेट पड़े कम, बाढ़पीड़ितों का फूटा गुस्सा महनार में राहत पैकेट पड़े कम, बाढ़पीड़ितों का फूटा गुस्सा
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- समस्तीपुर मोहनपुर प्रखंड क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग सोनपुर में लगाया गया मेडिकल कैंप कैंम्प प्रभारी डॉ अमित समेत कई चिकित्सक तैनात!1
- पेंशन, राशन, बिजली और कृषि से जुड़ी समस्याओं के लिए एक ही जगह मिला समाधान। बख्तियारपुर। 8 सितंबर 2026, मंगलवार। बख्तियारपुर प्रखंड की मोगलपुरा पंचायत में मंगलवार को प्रशासन गांव की चौखट तक पहुंचा। बिहार सरकार के ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ अभियान के तहत पंचायत में सहयोग शिविर लगाया गया। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने पेंशन, राशन, स्वास्थ्य, बिजली, कृषि समेत कई समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं और लिखित आवेदन दिए। शिविर का उद्देश्य ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए प्रखंड, अंचल या जिला मुख्यालय का चक्कर लगाने से राहत देना है। शिविर में मिले आवेदनों के निर्धारित समय-सीमा में निष्पादन और ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए उनकी निगरानी की बात अधिकारियों ने कही। पेंशन से परिवहन तक, एक जगह मिली जानकारी मोगलपुरा में पेंशन एवं सामाजिक सुरक्षा, राशन, स्वास्थ्य जांच, कृषि, पशुपालन, मनरेगा, जीविका, बिजली, परिवहन और बैंकिंग से जुड़े काउंटर लगाए गए। ग्रामीणों ने योजनाओं की जानकारी लेने के साथ अपनी समस्याएं दर्ज कराईं। शिविर में कुल 15 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 8 का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया। बाकी आवेदनों को भी निर्धारित समय-सीमा में निपटाने का भरोसा दिया गया। राजस्व टीम नहीं पहुंची तो मुखिया नाराज मुखिया विनय भूषण कुमार उर्फ शेर सिंह ने शिविर की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि वे प्रतिदिन सुबह 7 से 10 बजे तक पंचायतवासियों की समस्याएं सुनते हैं। हालांकि, अंचल की राजस्व टीम के शिविर में नहीं पहुंचने पर उन्होंने नाराजगी जताई और वरिष्ठ अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने की अपील की। वहीं प्रवर्तन अवर निरीक्षक प्रियंका तिवारी ने परिवहन विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। पंचायती राज अधिकारी जूही सुगंधा ने पंचायत स्तर की सुविधाओं के बारे में बताया। बीडीओ उज्ज्वलकांत ने कहा कि शिविर का उद्देश्य पंचायत स्तर पर ही लोगों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना है।1
- मंत्री के काफिले से लगा जाम, घंटो फंसे स्कूली बच्चे बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने पहुंचे PHED मंत्री के काफिला से लगी जाम मे फसे स्कूली बच्चे....1
- बख्तियारपुर दियारा में बाढ़ पीड़ितों से मिले पप्पू यादव, पूछा, अभी तक कोई नहीं आया, यादवों से इतना नफरत क्यों पूर्णिया सांसद पप्पू यादव आज बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए बख्तियारपुर दियारा पहुंचे। वे अपनी टीम के साथ नाव पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में घूमे और बाढ़ पीड़ितों की मदद की। इस दौरान उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से स्थानीय प्रशासन से मिल रही सहायता के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से पूछा कि अभी तक कोई स्थानीय जनप्रतिनिधि उनसे मिलने पहुंचा। बाढ़ पीड़ितों का जवाब सुनकर वे काफी नाराज दिखे। उन्होंने बख्तियारपुर दियारा में रूपस महाजी, काला दियारा, चिरैया दियारा और हरदास बीघा सभी बाढ़ प्रभावित पंचायतों का दौरा किया। दियारा का संपर्क बाढ़ में कुछ महीनों तक शहर से कट जाता है। इस दौरान वे गंगा की तेज धारा में एकमात्र नाव से ही बख्तियारपुर आते जाते हैं। पप्पू यादव कई जगह बाढ़ के पानी में उतरकर बाढ़ पीड़ितों की समस्याओं को सुनते दिखे। उन्होंने बाढ़ पीड़ित महिलाओं को नोटों के बंडल से निकालकर पांच पांच सौ रुपए देकर मदद भी की। बाढ़ पीड़ित लोग अपने सांसद रविशंकर प्रसाद से काफी नाराज दिखे। ग्रामीणों ने कहा कि उनके कई बार आश्वासन देने के बाद भी आज तक बख्तियारपुर दियारा के लोगों को पक्का पुल नहीं मिला है। बारिश में पीपा पुल भी हटा देने से लोग अपने घरों की छत पर कैद होकर रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा परेशानी तो गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को होती है, जो उचित इलाज नहीं मिलने पर दम तोड़ देती हैं। इस दौरान उन्होने बाढ़ पीड़ितों से पूछा कोई नही मिलने आया है यादवों से इतनी नफरत क्यों है।1
- "ना ₹8.25 लाख चाहिए, ना ₹12 लाख चाहिए, ना ₹30 लाख चाहिए! अगर जातीय अत्याचार साबित हो तो सिर्फ मुआवज़ा नहीं, न्याय चाहिए!" और अपराधियों से हमेशा के लिए सुरक्षा चाहिए देश में एससी-एसटी अत्याचार मामलों में मुआवज़े की राशि बढ़ाने को लेकर बहस तेज है। कोई ₹8.25 लाख की बात कर रहा है, कोई ₹12 लाख की, तो कोई ₹30 लाख की मांग कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल मुआवज़े की राशि बढ़ा देने से सामाजिक न्याय मिल जाएगा? एक विचार यह भी सामने रखा जा रहा है कि सरकारी खजाने से मिलने वाला पैसा आखिर जनता का ही पैसा है, जिसमें एससी-एसटी समाज का भी हिस्सा शामिल है। ऐसे में केवल राहत राशि बढ़ाने के बजाय जातीय अत्याचार करने वालों के खिलाफ कठोर और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए, ताकि पीड़ित को वास्तविक न्याय मिल सके और समाज में ऐसा अपराध करने वालों के मन में कानून का डर पैदा हो। आपकी राय क्या है? क्या समाधान सिर्फ मुआवज़े की रकम बढ़ाना है, या फिर न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है? #SCST #SCSTAct #DalitRights #SocialJustice #ReservationDebate #ChandrashekharAzad #BhimArmy #Politics #IndianPolitics #Constitution #BiharNews #NewsUpdate #AnkeshThakur #निष्पक्षकखबरेंअबतकबिहार #JusticeForAll #SCSTCommunity #TrendingNews1
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- गंगा के बढ़े जलस्तर के बीच हाजीपुर में बड़ा हादसा, महात्मा गांधी सेतु के पाया नंबर-10 से टकराकर लोगों से भरी नाव पलटी; करीब 10 लोगों के डूबने की आशंका, NDRF-SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी1