बाढ़ अनुमंडल के एकडंगा पंचायत स्थित मोगलचक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को स्कूल जाने के लिए रस्सी के सहारे लोहे के पीपा पर नदी पार करना पड़ता है। मोगलचक प्राथमिक विद्यालय के पास बाढ़ में महाने नदी उफान पर रहती है। आजादनगर गांव में दलितों की बस्ती से महाने नदी पार कर कई बच्चे यहां स्कूल पढ़ने आते हैं। बच्चे घर से समय पर स्कूल के लिए निकलते हैं, लेकिन महाने नदी पार करने में रोज देर हो जाती है। कभी लोहे का पीपा नदी के दूसरी तरह लगा होता है, तब उन्हें काफी देर तक पीपा के इस तरफ आने का इंतजार करना पड़ता है। फिर बच्चों को रस्सी खींचकर लोहे के पीपा से महाने नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है। कई बार नदी पार करने के दौरान बच्चे लोहे का पीपा अनबैलेंस होने से नदी की धारा में गिर भी चुके हैं। बच्चों को रोज जान जोख़िम में डालकर रस्सी के सहारे नदी पार करना पड़ता है।
बाढ़ अनुमंडल के एकडंगा पंचायत स्थित मोगलचक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को स्कूल जाने के लिए रस्सी के सहारे लोहे के पीपा पर नदी पार करना पड़ता है। मोगलचक प्राथमिक विद्यालय के पास बाढ़ में महाने नदी उफान पर रहती है। आजादनगर गांव में दलितों की बस्ती से महाने नदी पार कर कई बच्चे यहां स्कूल पढ़ने आते हैं। बच्चे घर से समय पर स्कूल के लिए निकलते हैं, लेकिन महाने नदी पार करने में रोज देर हो जाती है। कभी लोहे का पीपा नदी के दूसरी तरह लगा होता है, तब उन्हें काफी देर तक पीपा के इस तरफ आने का इंतजार करना पड़ता है। फिर बच्चों को रस्सी खींचकर लोहे के पीपा से महाने नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है। कई बार नदी पार करने के दौरान बच्चे लोहे का पीपा अनबैलेंस होने से नदी की धारा में गिर भी चुके हैं। बच्चों को रोज जान जोख़िम में डालकर रस्सी के सहारे नदी पार करना पड़ता है।
- बाढ़ अनुमंडल के एकडंगा पंचायत स्थित मोगलचक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को स्कूल जाने के लिए रस्सी के सहारे लोहे के पीपा पर नदी पार करना पड़ता है। मोगलचक प्राथमिक विद्यालय के पास बाढ़ में महाने नदी उफान पर रहती है। आजादनगर गांव में दलितों की बस्ती से महाने नदी पार कर कई बच्चे यहां स्कूल पढ़ने आते हैं। बच्चे घर से समय पर स्कूल के लिए निकलते हैं, लेकिन महाने नदी पार करने में रोज देर हो जाती है। कभी लोहे का पीपा नदी के दूसरी तरह लगा होता है, तब उन्हें काफी देर तक पीपा के इस तरफ आने का इंतजार करना पड़ता है। फिर बच्चों को रस्सी खींचकर लोहे के पीपा से महाने नदी पार कर स्कूल जाना पड़ता है। कई बार नदी पार करने के दौरान बच्चे लोहे का पीपा अनबैलेंस होने से नदी की धारा में गिर भी चुके हैं। बच्चों को रोज जान जोख़िम में डालकर रस्सी के सहारे नदी पार करना पड़ता है।1
- 72.250 किलोग्राम गांजा के साथ पांच तस्कर गिरफ्तार जानकारी देते हुए पुलिस पदाधिकारी नेपाल से तस्करी कर दो चार पहिया गाड़ी जिसमें एक डिजायर एवं एक स्पॉटो गाड़ी था में 72.250 किलोग्राम गांजा तस्करी कार्ड नेपाल से लाया जा रहा था जानकारी मिलने के बाद वैशाली के हाजीपुर में पुलिस के द्वारा जांच के दौरान उसे गाड़ी को रोका गया एवं 5 गांजा तस्करों के साथ गिरफ्तार किया गया उक्त से की जानकारी देते हुए पुलिस पदाधिकारी।1
- समस्तीपुर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर पशुपालक किसानों के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता, प्रभावित लोगों एवं पशुओं के लिए सरकार द्वारा व्यापक इंतजाम । समस्तीपुर, जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जिला प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लगातार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। प्रभावित लोगों को भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, आवागमन एवं आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ पशुओं के लिए भी चारा, आश्रय एवं चिकित्सा की समुचित व्यवस्था की गई है। जिले में बाढ़ से कुल 2,33,212 की आबादी प्रभावित हुई है। प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा लगातार राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वर्तमान में 121 कम्युनिटी किचन संचालित किए जा रहे हैं। इन कम्युनिटी किचन के माध्यम से अब तक कुल 4,22,591 मील परोसे जा चुके हैं। कम्युनिटी किचन में भोजन की गुणवत्ता एवं नियमित संचालन की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावित परिवारों को तत्काल आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अब तक 36,800 पॉलिथीन शीट्स का वितरण किया जा चुका है। आवश्यकता के अनुसार प्रभावित परिवारों को अन्य आवश्यक राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं बाढ़ प्रभावित लोगों को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 22 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। इन कैंपों के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श एवं दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। पशुओं की सुरक्षा एवं देखभाल के लिए भी जिला प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 17 पशु राहत कैंप/शेड संचालित किए जा रहे हैं। पशुपालकों एवं उनके पशुओं के लिए अब तक 1,044 क्विंटल पशु चारा/भूसा उपलब्ध कराया जा चुका है तथा इसका वितरण लगातार जारी है। पशुओं के उपचार के लिए 17 पशु चिकित्सा कैंप संचालित किए जा रहे हैं। इन कैंपों के माध्यम से अब तक 2,531 पशुओं का उपचार किया जा चुका है। आवश्यकता के अनुसार पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा एवं चारा उपलब्ध कराया जा रहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन तथा राहत एवं बचाव कार्यों को सुचारू बनाए रखने के लिए 227 नावों का परिचालन तीनों प्रभावित प्रखंडों में किया जा रहा है। नावों के माध्यम से प्रभावित लोगों के आवागमन के साथ-साथ राहत सामग्री को भी जरूरतमंद क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति की लगातार समीक्षा एवं निगरानी की जा रही है। संबंधित पदाधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से भ्रमण कर राहत एवं बचाव कार्यों का अनुश्रवण करने तथा आवश्यकता के अनुरूप त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार तक समय पर आवश्यक सहायता पहुंचे तथा प्रभावित लोगों एवं पशुओं को भोजन, स्वास्थ्य सुविधा, सुरक्षित आवागमन, आश्रय एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की कमी न रहे।1
- अज्ञात चोरों ने शटर का ताला काट कपड़े दुकान में की चोरी, नगद समेत लाखों के कपड़े की हुई चोरी1
- मुख्यमंत्री पर आरोप लगाना बंद करो! प्रशांत किशोर को BJP प्रवक्ता की खुली चेतावनी? 🔥 #प्रशांतकिशोर #BiharPolitics #BJP #BiharNews #PoliticalNews #ViralNews मुख्यमंत्री पर आरोप लगाना बंद करो! प्रशांत किशोर को BJP प्रवक्ता की खुली चेतावनी? 🔥 #प्रशांतकिशोर #BiharPolitics #BJP #BiharNews #PoliticalNews #ViralNews1
- रात होते ही बंद हो जाती है मॉडल अस्पताल की लिफ्ट, सीढ़ियों के गेट पर ताला आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल, अस्पताल प्रबंधन की व्यवस्था पर भी सवालिया निशान बिहारशरीफ। बिहारशरीफ स्थित मॉडल अस्पताल की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मरीजों और उनके परिजनों के अनुसार, देर रात अस्पताल की लिफ्ट बंद कर दी जाती है। ऐसे में ऊपरी मंजिल से नीचे आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया जाता है कि लिफ्ट बंद होने के बाद जब लोग सीढ़ियों के रास्ते नीचे आने का प्रयास करते हैं, तो सीढ़ी से नीचे उतरने के बाद गेट पर बड़े आकार की जंजीर और ताला लगा होने की बात सामने आती है। इससे लोगों में यह चिंता बनी रहती है कि रात के समय यदि अस्पताल में अचानक कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए और मरीजों को तत्काल बाहर निकालने की जरूरत पड़े, तो ऐसी स्थिति में सुरक्षित और सुगम निकासी कैसे होगी। मरीजों के परिजनों का आरोप है कि रात के समय अस्पताल में व्यवस्था की निगरानी को लेकर भी पर्याप्त गंभीरता नहीं बरती जाती। उनका कहना है कि देर रात अस्पताल उपाधीक्षक या प्रबंधक की मौजूदगी नहीं रहने से सुरक्षा व्यवस्था मुख्य रूप से तैनात गार्ड के भरोसे रहती है। मॉडल अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में रात के समय लिफ्ट और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। मरीजों और उनके परिजनों ने मांग की है कि अस्पताल प्रशासन पूरे मामले की जांच कराकर रात में लिफ्ट संचालन, सीढ़ियों के गेट और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त करे, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में मरीजों की जान जोखिम में न पड़े।1
- दस दिनों में ही धंस गई पंचायत भवन की छत, होगी जांच बाढ़ अनुमंडल में बराह पंचायत के हसपुरा गांव में दस दिन पहले बना पंचायत भवन का छत धंस गया। ग्रामीण निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। अनुसूचित जाति टोला में दस लाख रुपए की लागत से पंचायत भवन का निर्माण होना था। दस दिनों पहले ठेकेदार ने पंचायत भवन के छत की ढलाई कराई थी। लेकिन थोड़ी बारिश में ही पंचायत भवन की छत धंस गई, जो किसी भी समय नीचे गिरने की स्थिति में है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत भवन के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। मुखिया जी ने निर्माण कार्य के दौरान कभी इसकी गुणवत्ता की जांच नहीं की और न ही कोई इंजीनियर ही निरीक्षण के लिए आया। ठेकेदार ने मनमाने तरीके से निर्माण कार्य को पूरा किया है। पंचायत भवन की स्थिति इतनी घटिया है कि यह कुछ महीनों में ही भरभराकर गिर सकती है। हालत यह है कि लोग निर्माणाधीन पंचायत भवन में जाने से भी डरते हैं। ग्रामीणों के हंगामे के बाद अब मुखिया ने पंचायत भवन की छत फिर से तोड़कर निर्माण कराने की बात कही है। जेई और ठेकेदार की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी के बाद अधिकारी भी हरकत में आए हैं और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने पर राजी हुए हैं। बाइट स्थानीय ग्रामीण1
- बिहार में परिवर्तन राजनीतिक नहीं समाजिक होना चाहिए तभी एक बेहतर समाज का निर्माण होगा1
- पढ़ने का जूनून ऐसा की बच्चा पानी में नाद का नौका बना कर चल दिया स्कूल पढ़ने की जिद के आगे हर बाधा छोटी है। सुविधाएं हों या न हों, अगर मन में पढ़ने का जुनून हो तो कोई भी मुश्किल रास्ता नहीं रोक सकती। कटिहार से सामने आया यह वीडियो इसकी मिसाल है, जिसमें पानी से घिरे इलाके में एक बच्चा नाव पर खड़े होकर स्कूल जाता दिखाई दे रहा है। मुश्किल हालात के बावजूद बच्चे की पढ़ाई के प्रति लगन और जिद लोगों को प्रेरित कर रही है। प्रशासन द्वारा बनाये गये सिस्टम पर सवाल.1