छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर मोटी रकम की मांग की जा रही है। इस ऑडियो में अंबिकापुर की मेयर मंजूषा भगत और भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया की आवाज़ होने का दावा किया जा रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में ज़ोरदार चर्चा छिड़ गई है। वायरल ऑडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए, मेयर मंजूषा भगत ने इसे पूरी तरह निराधार बताते हुए अपने खिलाफ रची गई साज़िश करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस ऑडियो के ज़रिए उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, और इसकी सत्यता की जांच आवश्यक है। मेयर ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए अजाक थाने में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है। फिलहाल, पुलिस मेयर की शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है। हालांकि, वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, और यह स्पष्ट किया गया है कि तथ्यों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर मोटी रकम की मांग की जा रही है। इस ऑडियो में अंबिकापुर की मेयर मंजूषा भगत और भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया की आवाज़ होने का दावा किया जा रहा है। इस मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में ज़ोरदार चर्चा छिड़ गई है। वायरल ऑडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए, मेयर मंजूषा भगत ने इसे पूरी तरह निराधार बताते हुए अपने खिलाफ रची गई साज़िश करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस ऑडियो के ज़रिए उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है, और इसकी सत्यता की जांच आवश्यक है। मेयर ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए अजाक थाने में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है। फिलहाल, पुलिस मेयर की शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है। हालांकि, वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, और यह स्पष्ट किया गया है कि तथ्यों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।
- भारत एनकाउंटर मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसके तहत इस घटना की पूरी सच्चाई सामने आ गई है। दर्शकों से अपनी राय साझा करने और इस जानकारी को आगे शेयर करने का आग्रह किया गया है।1
- मनेंद्रगढ़ कोतवाली पुलिस ने कठौतिया क्षेत्र में चोरी के संदेह में एक युवक की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, 14 जून की रात ग्राम बिछली में राजकुमार गोंड और उनकी पत्नी प्रमिला गोंड को चोरी के शक में रोका गया था, जिसके बाद गजरूप सिंह, मनोज सिंह और कौशल सिंह ने उनके साथ मारपीट की थी। इस घटना में गंभीर रूप से घायल राजकुमार को उपचार के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, जहां 18 जून को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। युवक की मौत के बाद मामले में हत्या की धारा 103(1) बीएनएस जोड़ी गई। विवेचना के दौरान आरोपियों की संलिप्तता प्रमाणित होने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने गजरूप सिंह और मनोज सिंह के कब्जे से घटना में प्रयुक्त डंडे भी बरामद किए हैं। इस कार्रवाई में कोतवाली प्रभारी विवेक पाटले सहित पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ में एक गंभीर घटना सामने आई है, जहाँ अवैध गांजा बिक्री का विरोध करने पर एक विक्रेता द्वारा कथित तौर पर एक गर्भवती महिला के पेट पर मुक्का मारने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि इस मामले में पुलिस से शिकायत करने के बाद भी पीड़िता को कोई सहायता नहीं मिली।1
- नागपुर के रहने वाले करण जायसवाल नामक व्यक्ति छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले से लापता हो गए हैं। उनके दोस्तों ने उन्हें ढूंढने की अपील की है, जिसमें कहा गया है कि यदि किसी को भी करण जायसवाल के बारे में कोई जानकारी मिलती है, तो वे जल्द से जल्द एक दिए गए नंबर पर कॉल करके सूचित करें।1
- अनूपपुर के निगवानी स्थित मुख्य बाजार में एक खतरनाक गड्ढा लंबे समय से लोगों की जान के लिए खतरा बना हुआ है। हाल ही में एक छोटी बच्ची इस गड्ढे में गिर गई थी, पर गनीमत रही कि कोई बड़ा हादसा टल गया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि जब इस मामले की शिकायत ग्राम पंचायत के सरपंच से की गई, तो उन्होंने गंभीरता दिखाने की बजाय "जो करना हो कर लो" जैसी संवेदनहीन बात कही। यदि यह आरोप सही है, तो यह जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन और पंचायत से यह मांग की जा रही है कि बाजार क्षेत्र में रोजाना आवागमन करने वाले सैकड़ों लोगों और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस गड्ढे की तत्काल मरम्मत की जाए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार न करना पड़े। वीडियो के माध्यम से ऐसी लापरवाही पर कार्रवाई की अपील की गई है।1
- छत्तीसगढ़ के नागरिकों से उन बच्चों की मदद के लिए आगे आने की मार्मिक अपील की गई है जो काम की तलाश में बाहर गए हैं। इस गुहार में विशेष रूप से 'किसी की बेटी' का जिक्र किया गया है और सभी बच्चों के लिए सहायता मांगी गई है। लोगों से अनुरोध किया गया है कि वे इस संदेश को सभी गांवों में यथासंभव साझा करें और इन बच्चों की सहायता करें, क्योंकि यह संभावना है कि इनमें से कोई अपना या संबंधी हो।1
- बीती रात करीब 11 बजे, काशीराम निवासी शिवम मिश्रा सरकारी तंत्र से तंग आकर और भरत तिवारी की हत्या से आहत होकर पानी की टंकी पर चढ़ गया। यह घटना स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सामने आई एक बड़ी खबर से जुड़ी बताई जा रही है। शिवम मिश्रा के इस कदम ने पूरे बिहार में तहलका मचा दिया है।1
- छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड मुख्यालय में 22 जून 2026 को सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग और संयुक्त सामाजिक संगठनों के तत्वावधान में एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के तहत प्रतापपुर थाना परिसर के समीप से एक रैली निकाली गई, जो मुख्य मार्गों से होते हुए कदमपारा चौक पहुँची। वहाँ बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्रित होकर विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया और सांकेतिक पुतला दहन भी किया। कार्यक्रम के दौरान सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार बंछोर ने समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील की, अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन और एकता को अत्यंत आवश्यक बताया। सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने अपने संबोधन में बताया कि रायपुर में 6 जून 2026 को हुई आदिवासी संगठनों की संयुक्त बैठक में पारित प्रस्तावों के आधार पर तैयार एक संयुक्त ज्ञापन 22 जून को महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को सौंपा गया। इसी क्रम में प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में भी ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। पोया ने केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा 'वनवासी' शब्द के उपयोग पर कड़ी आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि इससे आदिवासी समाज की पहचान और अस्मिता आहत होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “हम वनवासी नहीं, बल्कि आदिवासी हैं और प्रकृति के रक्षक हैं। अपनी पहचान, परंपरा और संस्कृति से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।” इसके अतिरिक्त, बीपीएस पोया ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी मंत्रोच्चारण संबंधी निर्देशों पर भी सवाल उठाया, शिक्षा व्यवस्था को धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और समावेशी बनाने की वकालत करते हुए विज्ञान एवं पर्यावरण आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देने की बात कही। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख मांगों में स्थानीय भर्ती में प्राथमिकता एवं 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करना, निजीकरण का विरोध, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, भू-माफियाओं पर नियंत्रण के लिए कठोर कानून बनाना, आदिवासी धर्म कोड की मान्यता, परिसीमन से जुड़े मुद्दों का समाधान, ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति, उद्योग-व्यापार एवं खनन में आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करना, नक्सल प्रभावित निर्दोष बंदियों की रिहाई, डीलिस्टिंग का विरोध, आस्था केंद्रों एवं देवगुड़ियों का संरक्षण, पेसा एवं वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, तथा आदिवासी शिक्षा, मातृभाषा और पाँचवीं अनुसूची के संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे। आयोजकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार एवं प्रशासन द्वारा इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर बिमला अगरिया, गौरीशंकर नेताम, विनय पावले, लक्ष्मण आर्मो, सफलाल, अमर बहादुर सिंह आयाम, बनवारी खलखो, राजू सिंह आयाम, जीतन सोनहा, रामचंद्र मांझी, अंजली आयाम, लक्ष्मी बैगा, इंद्रपाल सिंह चेरवा, प्रदीप सिंह, राजेश सिंह पोया, राम सिंह पोया (GSU जिलाध्यक्ष), त्रिभुवन सिंह टेकाम, मंजू मिंज (पूर्व जिला पंचायत सदस्य) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।1