वाह रे लोकतंत्र और धन्य है यहाँ की व्यवस्था! देश में जहाँ 'हर घर जल' का नारा गूँज रहा है, वहीं पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत बालाझर में एक 'महामानव' ने सरकार को ही ठेंगा दिखा दिया है। गर्मी और उमस से जनता का कंठ सूख रहा है, लेकिन इस 'महामानव' ने जनहित के शासकीय हैंडपंप पर लोहे की जाली ठोककर उसे अपनी 'पर्सनल प्रॉपर्टी' घोषित कर दिया है। अब सरकारी पानी पर दबंगई का पहरा है और जनता बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। मामला इतना फिल्मी है कि स्थानीय पंच मोहर साय भी माथा पीट रहे हैं। सालों पुराने जिन हैंडपंपों से पूरा गाँव अपनी प्यास बुझाता आ रहा था, रातों-रात उस पर 'निजी जमीन' का बोर्ड टांग दिया गया। जब पानी सिर से ऊपर गया, तो गाँव में बकायदा पंचायत सजी। सरपंच, बीडीसी (जनपद सदस्य) और ग्रामीणों ने मिलकर दबंग महाशय के सामने हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं और समझाया कि यह जनता का माल और सरकारी संपत्ति है, इसे छोड़ दें। लेकिन 'सुल्तान' को नियम-कायदे कहाँ पसंद आते हैं? दबंगई के चश्मे से कानून की किताबें धुंधली दिखाई देती हैं और उन्होंने पंचायत के फरमान को हवा में उड़ाते हुए साफ कह दिया कि जाली तो यहीं रहेगी, जिसे जो उखाड़ना है उखाड़ ले। कानून का ऐसा खौफ शायद ही कहीं और देखने को मिले। इस पूरे मामले ने प्रशासन की 'चुस्ती' पर भी करारा व्यंग्य कर दिया है। जहाँ सरकार कागजों पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि एक अदद लोहे की फेंसिंग के सामने पूरा सिस्टम लाचार नजर आ रहा है। बालाझर के ग्रामीण अब गुस्से से उबल रहे हैं। उनका कहना है कि अगर एक शासकीय हैंडपंप को आजाद कराने के लिए भी जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ें, तो फिर नीचे का अमला सिर्फ कुर्सियां तोड़ने के लिए बैठा है क्या? थक-हारकर ग्रामीणों ने अब शासन और जिला प्रशासन के आला अफसरों की चौखट पर गुहार लगाई है। उनकी सीधी मांग है कि इस हैंडपंप को 'अवैध कैद' से रिहा कराया जाए और तानाशाही दिखाने वाले को कानून का असली स्वाद चखाया जाए। अब गेंद प्रशासन के पाले में है। देखना दिलचस्प होगा कि साहब लोग इस भीषण गर्मी में ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए 'लोहे का पिंजरा' तोड़ते हैं या फिर दबंगई के आगे नतमस्तक होकर फाइल दबा देते हैं!
वाह रे लोकतंत्र और धन्य है यहाँ की व्यवस्था! देश में जहाँ 'हर घर जल' का नारा गूँज रहा है, वहीं पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम पंचायत बालाझर में एक 'महामानव' ने सरकार को ही ठेंगा दिखा दिया है। गर्मी और उमस से जनता का कंठ सूख रहा है, लेकिन इस 'महामानव' ने जनहित के शासकीय हैंडपंप पर लोहे की जाली ठोककर उसे अपनी 'पर्सनल प्रॉपर्टी' घोषित कर दिया है। अब सरकारी पानी पर दबंगई का पहरा है और जनता बूंद-बूंद पानी के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है। मामला इतना फिल्मी है कि स्थानीय पंच मोहर साय भी माथा पीट रहे हैं। सालों पुराने जिन हैंडपंपों से पूरा गाँव अपनी प्यास बुझाता आ रहा था, रातों-रात उस पर 'निजी जमीन' का बोर्ड टांग दिया गया। जब पानी सिर से ऊपर गया, तो गाँव में बकायदा पंचायत सजी। सरपंच, बीडीसी (जनपद सदस्य) और ग्रामीणों ने मिलकर दबंग महाशय के सामने हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं और समझाया कि यह जनता का माल और सरकारी संपत्ति है, इसे छोड़ दें। लेकिन 'सुल्तान' को नियम-कायदे कहाँ पसंद आते हैं? दबंगई के चश्मे से कानून की किताबें धुंधली दिखाई देती हैं और उन्होंने पंचायत के फरमान को हवा में उड़ाते हुए साफ कह दिया कि जाली तो यहीं रहेगी, जिसे जो उखाड़ना है उखाड़ ले। कानून का ऐसा खौफ शायद ही कहीं और देखने को मिले। इस पूरे मामले ने प्रशासन की 'चुस्ती' पर भी करारा व्यंग्य कर दिया है। जहाँ सरकार कागजों पर पानी की तरह पैसा बहा रही है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि एक अदद लोहे की फेंसिंग के सामने पूरा सिस्टम लाचार नजर आ रहा है। बालाझर के ग्रामीण अब गुस्से से उबल रहे हैं। उनका कहना है कि अगर एक शासकीय हैंडपंप को आजाद कराने के लिए भी जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ें, तो फिर नीचे का अमला सिर्फ कुर्सियां तोड़ने के लिए बैठा है क्या? थक-हारकर ग्रामीणों ने अब शासन और जिला प्रशासन के आला अफसरों की चौखट पर गुहार लगाई है। उनकी सीधी मांग है कि इस हैंडपंप को 'अवैध कैद' से रिहा कराया जाए और तानाशाही दिखाने वाले को कानून का असली स्वाद चखाया जाए। अब गेंद प्रशासन के पाले में है। देखना दिलचस्प होगा कि साहब लोग इस भीषण गर्मी में ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए 'लोहे का पिंजरा' तोड़ते हैं या फिर दबंगई के आगे नतमस्तक होकर फाइल दबा देते हैं!
- अम्बिकापुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के जिलाध्यक्ष और महापौर से संबंधित कथित वायरल ऑडियो विवाद को लेकर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष सफी अहमद ने एक बड़ा बयान जारी किया है।1
- आज 22 जून को अंबिकापुर महापौर मंजूषा भगत ने मीडिया के सामने आकर अपने 'ऑडियो ट्रेडिंग' को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके खिलाफ एक षड्यंत्र किया जा रहा है। मीडिया से बात करते हुए महापौर मंजूषा भगत के आंसू छलक पड़े, और उन्होंने खुद को एक मजबूर महिला बताया। भगत ने कहा कि उनके साथ गलत हो रहा है, और यह 'ऑडियो ट्रेडिंग' इसी षड्यंत्र का हिस्सा है।1
- छत्तीसगढ़ के सीतापुर इलाके से रोजगार की तलाश में चेन्नई गई तीन युवतियां वहां फंस गई हैं। इन युवतियों ने एक वीडियो जारी कर मदद की गुहार लगाई है, जिसके बाद सीतापुर के स्थानीय विधायक रामकुमार टोप्पो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह पूरा मामला सीतापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भरतपुर, बेलजोरा और बिनई की युवतियों से जुड़ा है। बताया गया है कि जशपुर में तीन महीने का सिलाई प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उन्हें प्लेसमेंट दिलाने का झांसा देकर चेन्नई के कांचीपुरम ले जाया गया था। युवतियों का आरोप है कि दो युवतियों और एक युवक ने उन्हें नौकरी दिलाने के नाम पर चेन्नई पहुंचाया था। अब उन्हें घर वापस लौटने के लिए परेशान किया जा रहा है और घर वापसी के नाम पर प्रत्येक युवती से दस-दस हजार रुपये की मांग की जा रही है। चेन्नई में फंसी युवतियों ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो से संपर्क कर अपनी आपबीती सुनाई और सुरक्षित घर वापसी की गुहार लगाई। विधायक रामकुमार टोप्पो ने शिकायत मिलते ही तुरंत संज्ञान लिया और स्थानीय पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए कि इस गंभीर मामले में जल्द से जल्द युवतियों को सकुशल वापस लाया जाए। विधायक टोप्पो ने कहा, "युवतियों के साथ हुई धोखाधड़ी की जानकारी मिली है। यह बहुत गंभीर मामला है। मैंने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे तुरंत कार्रवाई करें और चेन्नई में फंसी हमारी बेटियों को सुरक्षित घर वापस लाएं।" सीतापुर थाना पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और उन लोगों की तलाश कर रही है जो युवतियों को प्लेसमेंट के नाम पर चेन्नई ले गए थे। इस घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है।1
- सरगुजा जिले की तीन युवतियों को सिलाई प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट के बहाने चेन्नई ले जाया गया, जहाँ अब उन्हें घर लौटने के लिए प्रत्येक से 10-10 हजार रुपए की मांग की जा रही है। युवतियों ने एक वीडियो बनाकर सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो से मदद की गुहार लगाई है। यह घटना सरगुजा संभाग के सीतापुर, मैनपाट और जशपुर क्षेत्र से मानव तस्करी की लगातार सामने आ रही शिकायतों के बीच हुई है, जहाँ अक्सर नाबालिगों को महानगरों में अच्छे काम और पैसों का लालच देकर ले जाया जाता है, और फिर उन्हें घर नहीं आने दिया जाता या बेच दिया जाता है। सरगुजा जिले के सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत भरतपुर के बेलजोरा बिनई की इन तीनों युवतियों ने अपने वीडियो में बताया कि उन्होंने जशपुर में तीन महीने का सिलाई प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद दो युवतियों और एक युवक द्वारा उन्हें नौकरी दिलाने के नाम पर चेन्नई के कांचीपुरम ले जाया गया। वे अब वहाँ फँस गई हैं और घर वापस आना चाहती हैं, लेकिन उन्हें छोड़ा नहीं जा रहा। उनका कहना है कि जो लोग उन्हें वहाँ लाए थे, उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया है। कुछ दिन पहले हुई बातचीत में उनसे कहा गया था कि अगर वे घर जाना चाहती हैं, तो प्रत्येक लड़की को 10-10 हजार रुपए देने होंगे। युवतियों ने अपनी तबीयत खराब होने की भी बात कही है। विधायक रामकुमार टोप्पो के संज्ञान में यह वीडियो आने के बाद उन्होंने तत्काल प्रशासन और पुलिस को सूचना दी। उन्होंने प्रशासन व पुलिस को चेन्नई में फंसी तीनों युवतियों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने के निर्देश दिए हैं। यह भी बताया गया है कि सीतापुर और मैनपाट क्षेत्र के कई नाबालिग लड़के-लड़कियां मानव तस्करी का शिकार हो चुके हैं, जिनमें से कई की घर वापसी हो चुकी है, जबकि कई का अभी तक पता नहीं चल सका है।1
- गुमला जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत कातिंग गांव में सोमवार को जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने लगभग 24 लाख रुपये की लागत वाली पीसीसी सड़क का विधिवत शिलान्यास किया। इस परियोजना के तहत मुख्य सड़क से गोरटो तक करीब 500 मीटर लंबा मार्ग निर्मित होगा, जिससे क्षेत्र के ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा प्राप्त होगी।1
- गुमला में उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की अध्यक्षता में सोमवार को समाहरणालय सभागार में जिला टास्क फोर्स (खनन), एनसीओआरडी (NCORD), सड़क सुरक्षा और कारा सुरक्षा से संबंधित एक विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में अवैध खनन एवं खनिज परिवहन पर नियंत्रण, मादक पदार्थों की रोकथाम, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने तथा मंडल कारा की सुरक्षा एवं आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद संबंधित विभागों को आवश्यक व कड़े दिशा-निर्देश दिए गए। अवैध खनन और खनिज परिवहन के विषय पर उपायुक्त ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की अवधि समाप्त होने के बावजूद सभी संभावित बालू घाटों और नदी क्षेत्रों में नियमित छापामारी अभियान चलाकर अवैध बालू उत्खनन और परिवहन पर पूर्ण रोक सुनिश्चित की जाए। उन्होंने पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्रों में जिला टास्क फोर्स द्वारा संयुक्त रूप से नियमित निरीक्षण और कार्रवाई करने तथा प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में जानकारी दी गई कि जिले के अंतर्गत कैटेगरी-11 के 18 बालू घाटों (एक इकाई) की ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया पूरी कर सैद्धांतिक सहमति दी जा चुकी है, जिस पर उपायुक्त ने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों को ग्राम सभा की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि जिले में बालू उपलब्धता की समस्या का स्थायी समाधान हो सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन में लगे वाहनों के चालान, ओवरलोडिंग एवं सुरक्षा मानकों की नियमित जांच करने तथा खनिजों को तिरपाल से ढँककर परिवहन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए। उपायुक्त ने सभी वृहत खनिज (बॉक्साइट) और लघु खनिज (पत्थर) क्षेत्रों में समाप्त हो चुके खनन पट्टों व चालू पट्टाक्षेत्र से बाहर होने वाले अवैध खनन पर सतत निगरानी रखने का निर्देश दिया। साथ ही, खनन पट्टों और क्रशर इकाइयों की नियमित जांच कर बाउंड्री पिलर, साइन बोर्ड, क्रशर कवरिंग एवं अन्य वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया। मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए एनसीओआरडी की समीक्षा के दौरान, उपायुक्त ने जिले में व्यापक जागरूकता और प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, सार्वजनिक एवं संवेदनशील स्थलों पर मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा जिले के बाहर से आने वाले मादक पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला और संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने का आह्वान किया। कारा सुरक्षा की समीक्षा करते हुए, उपायुक्त ने मंडल कारा के नवनिर्मित भवनों को तुरंत हैंडओवर करने तथा विस्तारित कारा खंड में बंदियों को स्थानांतरित करने से पहले सीसीटीवी कैमरा और इलेक्ट्रिक फेंसिंग अनिवार्य रूप से स्थापित करने का निर्देश दिया। उन्होंने नवनिर्मित बंदी बैरकों में अधूरी निकासी व्यवस्था को पूर्ण करने, ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत करने और प्रशासनिक भवन की छत पर क्षतिग्रस्त प्लास्टर की मरम्मत कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में मंडल कारा का समग्र सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्णय भी लिया गया। सड़क सुरक्षा की समीक्षा के तहत, उपायुक्त ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए व्यापक जन जागरूकता और प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क दुर्घटना में घायलों की सहायता कर अस्पताल पहुँचाने वाले ‘गुड सेमेरिटन’ व्यक्तियों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने को कहा। बैठक में गुमला-पलमा रोड और पटेल चौक से चंडाली तक सड़क निर्माण कार्य की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने एनएच-78 के दुर्घटना संभावित स्थलों पर हाई मास्क लाइट लगाने, ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में साइनेज और रोड लाइटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी पेट्रोल पंपों पर ‘बिना हेलमेट तेल नहीं’ अभियान को सख्ती से लागू करने तथा प्रत्येक पेट्रोल पंप पर प्रदूषण जांच केंद्र (PUC Center) स्थापित करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। परिवहन विभाग को विशेष वाहन जांच अभियान चलाने, हेलमेट चेकिंग प्वाइंट विकसित करने तथा स्कूलों एवं महाविद्यालयों में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने का निर्देश दिया गया। इस दौरान हिट एंड रन मामलों से संबंधित लंबित आवेदनों एवं राहत प्रकरणों की भी समीक्षा हुई। बैठक में अपर समाहर्ता, अनुमंडल पदाधिकारीगण, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला खनन पदाधिकारी, जेल अधीक्षक, उत्पाद अधीक्षक, पुलिस विभाग के पदाधिकारी, सभी अंचल अधिकारी, थाना प्रभारी सहित संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।2
- बुढ़िया करम पर्व की पूर्व संध्या पर गुमला जिले के डुमरी स्थित सरना धूमकुड़िया भवन परिसर में एक भव्य बुजुर्ग मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पचास से अधिक बुजुर्ग महिला एवं पुरुषों ने भाग लेकर समाज की सांस्कृतिक एकता और परंपराओं को मजबूत करने का सशक्त संदेश दिया। समारोह के दौरान, समाज के वरिष्ठ बुद्धिजीवियों अकलू भगत, जगरनाथ भगत, रविशंकर भगत, सुमित्रा कुमारी और अन्नपूर्णा देवी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे आयोजन आदिवासी समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वक्ताओं ने समुदाय के लोगों से अपने विकास के प्रति सजग रहने और अपनी संस्कृति, परंपरा तथा विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का आह्वान किया। साथ ही, उन्होंने सरना धर्मस्थलों के संरक्षण, सामाजिक विकास, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने और अच्छे संस्कार देने की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ डुमरी की महिलाओं द्वारा बुजुर्गों के चरण धोकर सम्मानपूर्वक स्वागत करने के साथ हुआ। इसके उपरांत, बुजुर्गों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और शांतिपूर्ण जीवन की कामना के लिए विशेष प्रार्थना की गई। इस समारोह को सफल बनाने में बेला देवी, मुखिया संजय उरांव, बीरेंद्र भगत, सुखमनी देवी, जसिंता देवी, बिमला कुजूर, फूलकुमारी देवी, गंगोत्री देवी, अजय भगत, मनोज उरांव, देवेश उरांव और लौंगी देवी सहित अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह कार्यक्रम समाज में बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का एक प्रभावी संदेश देने में सफल रहा।1
- सूरजपुर जिले के पटना थाना क्षेत्र के पंडोपारा, काटकोना गांव में एक मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। चरित्र पर शक के चलते, पति जितेंद्र घसिया ने अपनी पत्नी के हाथ-पैर बांधकर उसके साथ बर्बरता की। इस दौरान उसने पत्नी के बाल काटकर उसका सिर मुंडवा दिया और कालिख भी पोती। इतना ही नहीं, पति ने इस पूरी घटना का खुद वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।1