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*अंतिम प्रशिक्षण के बाद मतदान दल रवाना, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान के लिए दिए आवश्यक निर्देश* चित्तौड़गढ़। निंबाहेड़ा नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के तहत सहायक रिटर्निंग अधिकारी विकास पंचोली के निर्देशन में मतदान को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मंगलवार को मतदान कार्मिकों को अंतिम प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के बाद मतदान दलों को उनके निर्धारित मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया गया। प्रशिक्षण में मतदान प्रक्रिया, ईवीएम संचालन, मॉकपोल, निर्वाचन सामग्री एवं मतदान दिवस की सम्पूर्ण प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई,,,,*👮🚓🚔🚨🌹🌹
Hello Chittorgarh News
*अंतिम प्रशिक्षण के बाद मतदान दल रवाना, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण मतदान के लिए दिए आवश्यक निर्देश* चित्तौड़गढ़। निंबाहेड़ा नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के तहत सहायक रिटर्निंग अधिकारी विकास पंचोली के निर्देशन में मतदान को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मंगलवार को मतदान कार्मिकों को अंतिम प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण के बाद मतदान दलों को उनके निर्धारित मतदान केंद्रों के लिए रवाना किया गया। प्रशिक्षण में मतदान प्रक्रिया, ईवीएम संचालन, मॉकपोल, निर्वाचन सामग्री एवं मतदान दिवस की सम्पूर्ण प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई,,,,*👮🚓🚔🚨🌹🌹
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- सांवरिया सेठ के दरबार में करोड़ों की दानराशि, नीलगाय शिकार पर वन विभाग का बड़ा एक्शन! पहले चरण में सांवरिया सेठ के भंडार से निकले ₹7 करोड़ 53 लाख 60 हजार, 14 सितंबर को फिर खुलेगा भंडार… इधर नीलगाय के बच्चे के शिकार मामले में 2 आरोपी गिरफ्तार, न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जेल!1
- शंभूपुरा में उड़ती धूल से आमजन परेशान, ग्रामीणों ने भारी वाहन बाहर निकालने की मांग की। दैनिक वीरधरा राजस्थान। शंभूपुरा।कस्बे में दिनभर गुजरने वाले भारी वाहनों के चलते उड़ती धूल से दुकानदार, आमजन ओर राहगीरों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कस्बे के अंदर से होकर दिनभर बड़ी संख्या में भारी वाहन गुजरते है, जबकि यहाँ आबादी क्षेत्र भी है और बाजार भी, जिससे उड़ती धूल मिट्टी से तो आमजन परेशान है ही साथ ही साथ हर समय बड़ी दुर्घटना का अंदेशा लगा रहता है, ग्रामीणों ने पुलिस प्रसासन से मांग की है कि बसों को छोड़कर सभी भारी वाहन बाईपास से निकाले, कस्बे में आने वाले इन सभी भारी वाहनों का प्रवेश निषेध करे, ताकि भविष्य में कभी होने वाली बड़ी अनहोनी से बचा जा सके। थानाधिकारी धर्मराज मीणा ने कहा कि हमारी भी प्राथमिकता यही रहती की यातायात व्यवस्थित हो, कस्बे में भारी वाहन आ रहे और उससे आमजन परेशान है, दुर्घटना का खतरा है तो इसे डायवर्ड करेंगे।1
- पुलिस को दौड़ा दौड़ा कर मारा महिलाओं ने शराब दुकानों के खिलाफ महिलाओं का आक्रोश सर चढ़कर बोला1
- #छोटीसादड़ी #वार्डनंबर1 #नगरपालिकाचुनाव #सीमामनीषउपाध्याय #मनीषउपाध्याय #चुनाव2026 #नगरपालिकाचुनाव2026 #वार्ड1 #विकास #जनताकीआवाज #चुनावीसरगर्मी #DesiNews247 #DesiReporter #राजस्थानन्यूज #स्थानीयसमाचार1
- दिन दहाड़े बजरी का बेखोप खेल भीलवाड़ा जिले के बागौर गाँव की नदी से जुड़ा मामला दिनदहाड़े बजरी का बेखौफ खेल! बागोर नदी से बजरी से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली धड़ल्ले से दौड़े, तेज रफ्तार और बिना नंबर प्लेट वाहनों से ग्रामीणों में दहशत रात का खेल अब दिन के उजाले में! नदी से बजरी दोहन के आरोप, आब्बा खेड़ी–आमली–चीड़खेड़ा होते हुए गंगापुर तक दौड़ रहे वाहन बागोर, भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिले के बागोर थाना क्षेत्र में बागोर नदी से कथित बजरी दोहन का कारोबार एक बार फिर चर्चा में है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी क्षेत्र से बजरी निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर दिनदहाड़े परिवहन किया जा रहा है। तेज रफ्तार से दौड़ते बजरी से भरे वाहनों को देखकर ग्रामीणों और राहगीरों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार बागोर नदी क्षेत्र से बजरी से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली आब्बा खेड़ी और आमली होते हुए ग्राम पंचायत चीड़खेड़ा के बाहर से नांदसा होकर गंगापुर थाना क्षेत्र की ओर पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ वाहनों पर नंबर प्लेट स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती, इसके बावजूद वे सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। नदी से सड़क तक बजरी का कथित कारोबार ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नदी क्षेत्र में बजरी दोहन से लेकर उसके परिवहन तक पूरा सिलसिला लगातार चल रहा है। दिन में वाहनों की आवाजाही सामने आने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि यदि दिन के उजाले में यह स्थिति है तो रात के समय नदी क्षेत्र में क्या हालात रहते होंगे। बिना नंबर प्लेट और तेज रफ्तार वाहनों पर सवाल ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से ऐसे वाहनों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वाहनों के दस्तावेज, नंबर प्लेट, बजरी की रॉयल्टी और बजरी के स्रोत की जांच की जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके। हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन? ग्रामीणों का कहना है कि तेज रफ्तार में दौड़ते बजरी से भरे वाहन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। ऐसे में सवाल है कि यदि इस मार्ग पर कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी। ग्रामीणों ने बागोर नदी से गंगापुर तक पूरे मार्ग पर निगरानी बढ़ाने और कथित अवैध बजरी परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब नजर प्रशासन और खनन विभाग की कार्रवाई पर है—क्या बागोर नदी क्षेत्र में कथित बजरी दोहन और परिवहन की जांच होगी या फिर दिनदहाड़े चलता यह खेल यूं ही जारी रहेगा?1
- 12 दिन की सेवा के बाद राम रसोड़े का समापन, यात्रियों को भेंट की 90 साड़ियां 1000 से 1500 यात्रियों को रोज मिला नि:शुल्क भोजन, 300 के ठहरने की व्यवस्था; भामाशाहों ने साड़ियां देकर महिला यात्रियों का किया सम्मान पवन अग्रवाल चिकारड़ा। राती मंगरी मंगलवाड़ क्षेत्र में मंगलवाड़-चित्तौड़ मार्ग पर बाबा रामदेव मंदिर जाने वाले यात्रियों की सेवा के लिए पिछले 12 दिनों से चल रहा राम रसोड़ा बुधवार को श्रद्धा और सेवा भावना के साथ संपन्न हुआ। राम रसोड़े में प्रतिदिन करीब 1000 से 1500 यात्रियों को नि:शुल्क भोजन, 300 यात्रियों के एक साथ ठहरने की व्यवस्था, चाय-नाश्ता तथा दवाइयां 24 घंटे उपलब्ध कराई गईं। राम रसोड़े के संचालक एवं संयोजक डॉ. ताराचंद ने बताया कि सेवा कार्य में मंगलवाड़ सहित आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने वॉलेंटियर बनकर पूरे उत्साह से यात्रियों की सेवा की। भोजन एवं ठहरने की व्यवस्था के साथ यात्रियों को सम्मान देने की भी पहल की गई। भामाशाहों ने 90 साड़ियां भेंट कर महिला यात्रियों का किया सम्मान उदयपुर के भामाशाहों की ओर से यात्रियों के लिए 40 साड़ियां उपलब्ध कराई गईं, जिन्हें रामदेवरा जाने-आने वाली महिला यात्रियों को सम्मानपूर्वक भेंट किया गया। इस पहल से प्रेरित होकर करीब 70 किलोमीटर दूर जनकपुरी, उदयपुर से पुष्पा सुथार एवं देवीलाल सुथार 50 साड़ियां लेकर राम रसोड़े पहुंचे। इस दौरान कौशल्या कुंवर, मंजू बाला, पल कुमार, उषा मोगरा, कुशबा जनवा, श्यामलाल, नरेश मेघवाल, रामचंद्र पाटीदार, लोकेश पाटीदार, जयप्रकाश मेघवाल, कुशल पाटीदार, मंजू मेघवाल, त्रिलोकनाथ, केल मोगरा, अक्षत मेघवाल, लकी मेघवाल एवं छोटा काका सहित अन्य लोगों ने यात्रियों को अपने हाथों से साड़ियां भेंट कर सम्मानित किया। सम्मान पाकर यात्रियों ने आयोजकों, वॉलेंटियर्स और भामाशाहों का आभार जताते हुए कहा कि यात्रा के दौरान उन्हें इस तरह सम्मानित किए जाने का अनुभव पहली बार मिला है। उन्होंने सभी के लिए बाबा रामदेव से सुख-समृद्धि की कामना की। राम रसोड़े में प्रतिदिन भजनों की धुन पर महिला-पुरुष और बच्चे-बच्चियां जमकर नृत्य करते रहे, जिससे माहौल भक्तिमय बना रहा। समापन अवसर पर सैकड़ों यात्रियों की मौजूदगी में भामाशाहों का राम रसोड़ा संचालक एवं टीम ने सम्मान किया। डॉ. ताराचंद ने कहा कि अगले वर्ष बाबा ने चाहा तो इससे भी भव्य पंडाल लगाकर 500 बेड की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि मानव सेवा ही भगवान की सेवा है। मानव, गौ, मूक-बधिर और पक्षियों की सेवा से पुण्य लाभ अर्जित किया जा सकता है।4
- एमडीएमए का बढ़ता नशा युवाओं के लिए खतरे की घंटी, महंगा नशा जुटाने के लिए चोरी तक का सहारा भीलवाड़ा। शहर और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं के बीच एमडीएमए जैसे नशीले पदार्थों का बढ़ता चलन चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह नशा महंगा होने के बावजूद युवा इसकी गिरफ्त में आते जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एमडीएमए लेने के बाद कुछ समय के लिए व्यक्ति को खुशी, उत्साह और अधिक एनर्जी महसूस हो सकती है, लेकिन धीरे-धीरे इसकी आदत मानसिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित करने लगती है। डॉक्टर के अनुसार एमडीएमए की कीमत करीब 2 हजार से 2500 रुपए प्रति ग्राम तक बताई जा रही है। महंगा होने के बावजूद इसके सेवन की प्रवृत्ति युवाओं में बढ़ रही है। नशे की लत इतनी गहरी हो सकती है कि कुछ लोग नशे के लिए पैसे जुटाने के लिए चोरी जैसी गतिविधियों का सहारा लेने लगते हैं। नशा नहीं मिले तो जिंदगी लगती है 'स्लो' विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार नशे का सेवन करने वाले युवाओं में धीरे-धीरे सामान्य जिंदगी फीकी या धीमी लगने लगती है। नशा करने के बाद मिलने वाली कृत्रिम खुशी और ऊर्जा की तुलना में सामान्य अवस्था उन्हें कम सक्रिय महसूस हो सकती है। यही स्थिति व्यक्ति को बार-बार नशे की ओर धकेल सकती है। नशा छोड़ने के लिए सिर्फ दवा काफी नहीं आरवीआरएस मेडिकल कॉलेज, भीलवाड़ा के आचार्य एवं विभागाध्यक्ष एवं मनोचिकित्सक डॉ. वीरभान चंचलानी (MBBS, MD Psychiatry) के अनुसार नशा छुड़ाने के लिए व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति को समझना बेहद जरूरी है। इसके लिए केवल दवाइयों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। डॉ. चंचलानी के अनुसार नशा छोड़ने की प्रक्रिया में भावनात्मक सहयोग, आवश्यकता के अनुसार दवाइयों का सपोर्ट और स्वयं व्यक्ति का मोटिवेशन तीनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि नशे की गिरफ्त में आया व्यक्ति इन तीनों पहलुओं पर काम करे और नशा छोड़ने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति रखे तो वह नशे की आदत से बाहर निकल सकता है। परिवार और समाज की भूमिका भी अहम विशेषज्ञों के अनुसार नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखने के बजाय इसके मानसिक और सामाजिक पहलुओं को भी समझना जरूरी है। युवाओं में नशे की शुरुआत को रोकने के लिए परिवार को उनके व्यवहार में होने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए। वहीं नशे की गिरफ्त में आ चुके युवाओं को ताने देने के बजाय उचित चिकित्सकीय एवं भावनात्मक सहयोग देना जरूरी है। विशेषज्ञ की सलाह: नशे की आदत से जूझ रहे व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय मनोचिकित्सक या नशा मुक्ति विशेषज्ञ से चिकित्सकीय सलाह दिलाना चाहिए। समय पर मदद मिलने से नशे की लत से बाहर निकलने की संभावना बेहतर हो सकती है।1
- सर्विस, एजुकेशन, डिवोशन एंड टैलेंट—चित्तौड़गढ़ एंड बेगूं से फाइव बिग अपडेट्स स्कूल चिल्ड्रन को स्कूल बैग एंड स्टेशनरी, उदित जैन बिकेम TPF प्रेसिडेंट, 101 टैलेंट्स विल बी ऑनर्ड, FMG इंटर्न्स रेज स्टाइपेंड डिमांड एंड चित्तौड़ की सृष्टि कुमावत शाइन्स इन राजस्थानी फिल्म इंडस्ट्री1