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पंचकूला के मेयर श्याम लाल बंसल ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को जनता को गुमराह करने की साजिश करार दिया है। मेयर ने चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Newz India 27
पंचकूला के मेयर श्याम लाल बंसल ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को जनता को गुमराह करने की साजिश करार दिया है। मेयर ने चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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- पिंजौर की भीमा देवी कॉलोनी में चार दिन तक पानी की सप्लाई बंद रहने के बाद जब नलों में पानी आया, तो वह पूरी तरह से गंदा और दूषित निकला। लंबे इंतजार के बाद भी साफ पानी न मिलने से इलाके के निवासियों में गहरा रोष फैल गया है और पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। स्थानीय निवासी महेंद्र के अनुसार, नलों से आ रहे पानी में सीवरेज का गंदा पानी मिला हुआ महसूस हो रहा था, जिसके कारण इसका उपयोग पीने या किसी भी घरेलू काम के लिए करना नामुमकिन है। बरसात के मौसम में इस प्रकार की लापरवाही से जलजनित बीमारियों का खतरा और बढ़ गया है। इस स्थिति से परेशान कॉलोनीवासियों ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग से तुरंत स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने और इस समस्या का स्थायी समाधान करने की माँग की है।1
- पंचकूला के मेयर श्याम लाल बंसल ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को जनता को गुमराह करने की साजिश करार दिया है। मेयर ने चेतावनी दी है कि उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1
- बच्चों के भविष्य और किसानों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शिक्षा, रोजगार और किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। रेणुका चौधरी ने सरकार से इन गंभीर मुद्दों पर पूरी तत्परता और गंभीरता से काम करने की अपील की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के विकास के लिए बच्चों का उज्ज्वल भविष्य और किसानों की समृद्धि सबसे ज़्यादा जरूरी है।1
- किसानों ने अपना धरना स्थगित कर दिया है। धरना स्थगित होने के साथ ही शंभू बॉर्डर का रास्ता अब पूरी तरह से खुल गया है।1
- हरियाणा की युवा नेत्री और टीम चित्रा की संस्थापक चित्रा सरवारा ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन पर केंद्र सरकार के रवैये की तीखी आलोचना की है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक मामलों की जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे इस आंदोलन को बलपूर्वक दबाने के सरकारी प्रयासों को उन्होंने लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार बताया है। उन्होंने कहा कि जिस देश का युवा अपने भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हो, वहां सत्ता को अपनी ताकत का प्रदर्शन करने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। चित्रा सरवारा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बार-बार पेपर लीक होने के कारण लाखों युवाओं के सपने बिखर गए हैं और अभ्यर्थियों की कठिन मेहनत भ्रष्टाचार तथा सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ गई। आंदोलनकारी संगठनों के हवाले से उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम से उपजी निराशा और मानसिक तनाव के कारण लगभग 20 विद्यार्थियों ने आत्महत्या जैसा दर्दनाक कदम उठाया है। उन्होंने सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन और अभिजीत दीपके के नेतृत्व में निकाले गए "संसद चलो" मार्च का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगा और संविधान हाथ में लेकर लोकतांत्रिक तरीके से जवाबदेही मांग रहे छात्रों पर सरकार ने लाठियों, डंडों और आंसू गैस के गोलों का बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्राएं घायल हुईं और युवतियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इस दमनकारी रवैये की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी राज्यसभा सहित हर मंच पर इसकी निंदा की है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी छवि बचाने और अहंकार दिखाने के बजाय छात्रों से तत्काल संवाद स्थापित करना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि पेपर लीक के प्रत्येक मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराकर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं, प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय मिले और आंदोलनरत छात्रों से बातचीत कर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जाए।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे धरना-प्रदर्शन और किसानों को राजधानी में प्रवेश करने से रोके जाने के मुद्दे पर प्रसिद्ध समाजसेवी एवं सेवानिवृत्त इंजीनियर चंदन सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने जंतर-मंतर पर मचे बवाल के बीच सरकार की नीतियों और रवैये पर कड़ा प्रहार किया है। चंदन सिंह का कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सरकार जनता की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों और युवाओं की मांगों को सुनने के बजाय उन्हें रोका जा रहा है, जो कि पूरी तरह से गलत है। इस मुद्दे पर तीखा रुख अपनाते हुए चंदन सिंह ने सरकार से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इन समस्याओं का समाधान केवल संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से ही संभव है। उन्होंने 'लोकतंत्र बचाओ, सरकार इस्तीफा दे' का नारा देते हुए सरकार पर अपना हमला तेज किया है।1
- दिल्ली पुलिस के जवान खुद ही युवाओं पर पत्थर बरसाते हुए नजर आए हैं। पुलिसकर्मियों द्वारा खुद आगे बढ़कर युवाओं पर सीधे पथराव किए जाने का यह मामला सामने आया है।1