स्वीट कॉर्न की खेती पर किसानों को मिलेगा 50% अनुदान: प्रधान वैज्ञानिक स्वीट कॉर्न की खेती पर किसानों को मिलेगा 50% अनुदान: प्रधान वैज्ञानिक बेतिया | सत्यम श्रीवास्तव की रिपोर्ट बेतिया जिले में किसानों के लिए बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती आय बढ़ाने का नया माध्यम बनकर उभर रही है। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि बदलते समय में ये फसलें किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि बेबी कॉर्न की फसल मात्र 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान साल में कई बार इसकी खेती कर सकते हैं। जिले के विशुनपुर रघुनाथ क्षेत्र के युवा किसान रवि कुमार ने पारंपरिक खेती से हटकर बेबी कॉर्न को अपनाया और कम समय में बेहतर मुनाफा अर्जित किया। बेबी कॉर्न की खासियत इसकी दोहरी उपयोगिता है। इसका भुट्टा बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है, वहीं हरा पौधा पशुओं के लिए पौष्टिक चारा बनता है। किसान संजय कुमार के अनुसार, इस चारे के उपयोग से मवेशियों की दूध उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होती है। ग्राम बैकुंठवा, प्रखंड नौतन के किसान राघोशरण प्रसाद ने बताया कि इस खेती से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। अब किसान कम समय में नकदी फसल तैयार कर सीधे बाजार से जुड़ पा रहे हैं। वहीं, स्वीट कॉर्न की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। डॉ. सिंह ने बताया कि स्वीट कॉर्न की खेती के लिए बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। यह फसल 65 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी बाजार में अच्छी मांग है। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक खेती की ओर बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि आज खेती केवल पारंपरिक कार्य नहीं, बल्कि एक लाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। जो किसान समय और बाजार की मांग को समझते हुए नई फसलों को अपनाएंगे, वही भविष्य में आगे बढ़ेंगे। इस अवसर पर माधोपुर पैक्स अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह, रवि कुमार, सौरभ कुमार सहित कई किसान मौजूद रहे।
स्वीट कॉर्न की खेती पर किसानों को मिलेगा 50% अनुदान: प्रधान वैज्ञानिक स्वीट कॉर्न की खेती पर किसानों को मिलेगा 50% अनुदान: प्रधान वैज्ञानिक बेतिया | सत्यम श्रीवास्तव की रिपोर्ट बेतिया जिले में किसानों के लिए बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती आय बढ़ाने का नया माध्यम बनकर उभर रही है। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि बदलते समय में ये फसलें किसानों के लिए लाभकारी विकल्प साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि बेबी कॉर्न की फसल मात्र 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान साल में कई बार इसकी खेती कर सकते हैं। जिले के विशुनपुर रघुनाथ क्षेत्र के युवा किसान रवि कुमार ने पारंपरिक खेती से हटकर बेबी कॉर्न को अपनाया और कम समय में बेहतर मुनाफा अर्जित किया। बेबी कॉर्न की खासियत इसकी दोहरी उपयोगिता है। इसका भुट्टा बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है, वहीं हरा पौधा पशुओं के लिए पौष्टिक चारा बनता है। किसान संजय कुमार के अनुसार, इस चारे के उपयोग से मवेशियों की दूध उत्पादन क्षमता भी बढ़ती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय होती है। ग्राम बैकुंठवा, प्रखंड नौतन के किसान राघोशरण प्रसाद ने बताया कि इस खेती से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। अब किसान कम समय में नकदी फसल तैयार कर सीधे बाजार से जुड़ पा रहे हैं। वहीं, स्वीट कॉर्न की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। डॉ. सिंह ने बताया कि स्वीट कॉर्न की खेती के लिए बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। यह फसल 65 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी बाजार में अच्छी मांग है। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे आधुनिक खेती की ओर बढ़ सकें। उन्होंने कहा कि आज खेती केवल पारंपरिक कार्य नहीं, बल्कि एक लाभकारी व्यवसाय बन चुकी है। जो किसान समय और बाजार की मांग को समझते हुए नई फसलों को अपनाएंगे, वही भविष्य में आगे बढ़ेंगे। इस अवसर पर माधोपुर पैक्स अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह, रवि कुमार, सौरभ कुमार सहित कई किसान मौजूद रहे।
- बगहा से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। नगर थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 35 स्थित पुअर हाउस के एक बगीचे में प्रेमी जोड़े का शव संदिग्ध हालत में पेड़ से लटका हुआ मिलने से हड़कंप मच गया। जैसे ही स्थानीय लोगों की नजर इन शवों पर पड़ी, पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही नगर थाना की पुलिस बिना देरी किए मौके पर पहुंची और घटनास्थल की घेराबंदी कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लैब यानी FSL टीम को भी बुलाया गया, जिसने मौके पर पहुंचकर हर छोटे-बड़े साक्ष्य को बारीकी से खंगालना शुरू किया। पुलिस ने दोनों शवों को पेड़ से नीचे उतारकर अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, ताकि मौत के असली कारणों का पता लगाया जा सके। इस पूरे मामले पर DSP कैलाश प्रसाद का भी बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि जैसे ही घटना की जानकारी मिली, पुलिस टीम तुरंत सक्रिय हुई और मौके पर पहुंचकर पूरे एरिया को सुरक्षित करते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई। DSP के मुताबिक, फॉरेंसिक टीम की मदद से हर पहलू पर गहन जांच की जा रही है, लेकिन फिलहाल मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। मृतकों की पहचान वार्ड नंबर 35 पुअर हाउस निवासी गुलाब मिस्त्री की बेटी शाहबुन नैश और बगहा रत्नमाला निवासी असगर मिस्त्री के पुत्र के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन असली सच्चाई क्या है—यह अभी भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है। क्या यह मामला प्रेम प्रसंग में आत्महत्या का है या फिर इसके पीछे कोई साजिश और हत्या की कहानी छिपी हुई है? इस सवाल का जवाब अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच में जुटी हुई है और किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। इस दर्दनाक घटना के बाद इलाके में शोक और दहशत का माहौल है, वहीं हर किसी की नजर अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के नतीजों पर टिकी हुई है, जो इस डबल डेथ मिस्ट्री से पर्दा उठाएगी।1
- आज बेतिया में नगर निगम प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाया जा रहा है। 21.04.2026.1
- nautan - बरियार पुर में लगी आग में 17 घर और लाखों की संपत्ति जल कर राख हो गया !!1
- **मझौलिया में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन सख्त, 7 दिनों का अल्टीमेटम** **मझौलिया | जापान साह की रिपोर्ट** मझौलिया प्रखंड में सड़क अतिक्रमण को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। मंगलवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार एवं पुलिस पदाधिकारी भानु प्रकाश ने पुलिस बल के साथ मझौलिया प्रखंड मुख्यालय से बाजार चौक होते हुए मझौलिया चीनी मिल और रेलवे गुमटी तक अतिक्रमण हटाने को लेकर निरीक्षण किया। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बार-बार समझाने के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि अतिक्रमणकारियों को **7 दिनों का अंतिम मौका** दिया जा रहा है। प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी ने बताया कि मझौलिया बाजार और सरिसवा बाजार में सड़क पर किए गए अतिक्रमण को निर्धारित समय के भीतर नहीं हटाया गया तो बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण हटाया जाएगा और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से मझौलिया बाजार में दुकानदारों के बीच अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। इस दौरान राजस्व अमीन सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे।1
- Post by News Seva 181
- राज्य में चल रही जनगणना 2027 के साथ-साथ स्व गणना की भी की गई है व्यवस्था। इसके लिए सरकार ने जारी किए है वेब साइट। जिस पर कोई भी भारतीय नागरिक अपनी पारिवारिक जानकारी भर कर अपनी गणना करा सकता है।जिसे बाद में बीएलओ द्वारा वेरिफाई किया जाएगा।1
- केंद्र सरकार द्वारा सांसद में लाया गया परिसीमन बिल और महिला आरक्षण को महागठबंधन ने किया विरोध जिसको लेकर बिल खरीच हुआ उसके विरोध में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेताओं ने बेतिया में निकाला धिक्कार मार्च1
- नौतन प्रखंड के मंगलपुर कला पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या 7 स्थित बरियारपुर गांव में मंगलवार की देर शाम उस समय भयावह मंजर देखने को मिला जब अचानक लगी भीषण आग ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और दर्जनों घर इसकी चपेट में आकर पूरी तरह जलकर राख हो गए। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि किसी को संभलने या सामान बचाने का भी मौका नहीं मिल सका। घरों में रखा अनाज, कपड़े, गहने, बर्तन, पलंग, कुर्सी और अन्य सभी घरेलू सामान पलभर में जलकर खाक हो गया, जिससे पीड़ित परिवारों की पूरी जिंदगी की जमा-पूंजी समाप्त हो गई। अचानक हुई इस घटना से पूरे गांव में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई, लोग अपने-अपने घरों से सामान निकालने की कोशिश करते रहे लेकिन आग की भयावहता के आगे सब बेबस नजर आए। घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने अपने स्तर से आग पर काबू पाने का भरसक प्रयास किया, बाल्टी, पंप और उपलब्ध संसाधनों से लोग आग बुझाने में जुट गए, लेकिन तेज हवा और आग की तीव्रता के कारण स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। इसके बाद अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों के सहयोग से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक भारी तबाही हो चुकी थी। इस अगलगी की घटना में सुबोध राम, अकलु राम सहित दर्जनों परिवारों के घर पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए, जिससे वे खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार आग लगने के कारणों का स्पष्ट पता अभी तक नहीं चल सका है, हालांकि प्रारंभिक आशंका जताई जा रही है कि चूल्हे की चिंगारी या शॉर्ट सर्किट के कारण यह भीषण हादसा हुआ हो सकता है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत और शोक का माहौल कायम है। गांव के लोग अपने उजड़े हुए आशियाने को देखकर गम और सदमे में हैं। सूचना मिलने पर पंचायत समिति सदस्य रंजन यादव भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने प्रशासन को तत्काल जानकारी देते हुए पीड़ित परिवारों के लिए शीघ्र राहत और मुआवजे की मांग की है। इस दर्दनाक हादसे के बाद बरियारपुर गांव में मातम पसरा हुआ है और हर तरफ सिर्फ राख और उजड़े हुए घरों के निशान नजर आ रहे हैं। ग्रामीण प्रशासन से जल्द से जल्द राहत सामग्री, आवास व्यवस्था और मुआवजा उपलब्ध कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि इस भीषण त्रासदी से प्रभावित परिवारों को कुछ सहारा मिल सके।1