सीहोर में जंगल-खेतों में आग के मामले बढ़ेः वन्यजीव छोड़ रहे ठिकाना, अब चार एकड़ खेत में लगी आग, एक हफ्ते में दर्जन भर घटनाएं ??? सीहोर में जंगल-खेतों में आग के मामले बढ़ेः वन्यजीव छोड़ रहे ठिकाना, अब चार एकड़ खेत में लगी आग, एक हफ्ते में दर्जन भर घटनाएं सीहोर 6 घंटे पहले 0:36 शेयर सीहोर जिले के बेशकीमती जंगल लगातार आग की चपेट में हैं, जिससे वन्यजीव पलायन को मजबूर हो रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में जिले में खेतों और जंगलों में आग लगने की दर्जनभर से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। वन विभाग और वन विकास निगम के जंगलों में बार-बार आग लगने से इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।गुरुवार रात बारवाखेड़ी खेड़ी में चार एकड़ खेत में आग लगने से हजारों का नुकसान हुआ। इससे पहले, सोमवार को ग्राम जमुनिया फतेहपुर के खेत में आग लगी थी, जबकि 9 मार्च को निपानिया खुर्द के खेत में भी आगजनी की घटना हुई थी। तीन दिन पहले आलमपुरा में 40 एकड़ फसल जलकर राख हो गई थी। जंगलों में बढ़ी आग की घटनाएं गर्मी बढ़ने के साथ ही मार्च के तीसरे सप्ताह से जिले की भेरूंदा तहसील स्थित सरकारी सागवान के जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। नयापुरा सब-रेंज के जंगलों में भी आग देखी गई है। इसके अतिरिक्त, बसंतपुर कुरी नयापुरा, सन कोटा कोसमी और सिराड़ी के जंगल भी आग से प्रभावित हुए हैं। पिपलानी सब-रेंज के खजूर पानी, इटावा, सिराली और डोगला पानी जैसे कई वन क्षेत्र भी बार-बार आग की घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। वन्यजीवों छोड़ रहे ठिकाना इन आगजनी की घटनाओं के कारण वन्यप्राणी भी अपने आवास छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। रात के समय जंगल लाल रोशनी से जगमगाते दिखाई देते हैं, जो आग की भयावहता को दर्शाता है।
सीहोर में जंगल-खेतों में आग के मामले बढ़ेः वन्यजीव छोड़ रहे ठिकाना, अब चार एकड़ खेत में लगी आग, एक हफ्ते में दर्जन भर घटनाएं ??? सीहोर में जंगल-खेतों में आग के मामले बढ़ेः वन्यजीव छोड़ रहे ठिकाना, अब चार एकड़ खेत में लगी आग, एक हफ्ते में दर्जन भर घटनाएं सीहोर 6 घंटे पहले 0:36 शेयर सीहोर जिले के बेशकीमती जंगल लगातार आग की चपेट में हैं, जिससे वन्यजीव पलायन को मजबूर हो रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में जिले में खेतों और जंगलों में आग लगने की दर्जनभर से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। वन विभाग और वन विकास निगम के जंगलों में बार-बार आग लगने से इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।गुरुवार रात बारवाखेड़ी खेड़ी में चार एकड़ खेत में आग लगने से हजारों का नुकसान हुआ। इससे पहले, सोमवार को ग्राम जमुनिया फतेहपुर के खेत में आग लगी थी, जबकि 9 मार्च को निपानिया खुर्द के खेत में भी आगजनी की घटना हुई थी। तीन दिन पहले आलमपुरा में 40 एकड़ फसल जलकर राख हो गई थी। जंगलों में बढ़ी आग की घटनाएं गर्मी बढ़ने के साथ ही मार्च के तीसरे सप्ताह से जिले की भेरूंदा तहसील स्थित सरकारी सागवान के जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। नयापुरा सब-रेंज के जंगलों में भी आग देखी गई है। इसके अतिरिक्त, बसंतपुर कुरी नयापुरा, सन कोटा कोसमी और सिराड़ी के जंगल भी आग से प्रभावित हुए हैं। पिपलानी सब-रेंज के खजूर पानी, इटावा, सिराली और डोगला पानी जैसे कई वन क्षेत्र भी बार-बार आग की घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। वन्यजीवों छोड़ रहे ठिकाना इन आगजनी की घटनाओं के कारण वन्यप्राणी भी अपने आवास छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। रात के समय जंगल लाल रोशनी से जगमगाते दिखाई देते हैं, जो आग की भयावहता को दर्शाता है।
- उज्जैन-भोपाल रेल लाइन पर बड़ा हादसाः गार्डर बदलते समय क्रेन नदी में गिरी, ट्रेनें प्रभावित उज्जैन | 2 घंटे पहले 0:18 शेयर उज्जैन-भोपाल रेल लाइन पर शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। रेलवे ब्रिज की मरम्मत करने पहुंची क्रेन गार्डर सहित नदी में गिर गई। हादसे में कोई हताहत तो नहीं हुआ, लेकिन लाखों रुपए का नुकसान हुआ है और उज्जैन आने वाली ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। उज्जैन से भोपाल रूट पर शहर से करीब 30 किमी दूर तराना स्टेशन के पास टिल्लर नदी पर दो ब्रिज से अप-डाउन टेनों की आवाजाही होती है। इनमें से एकअप-डाउन ट्रेनों की आवाजाही होती है। इनमें से एक पुराने ब्रिज के गार्डर में खराबी होने के चलते गुरुवार से उसे बदलने का काम चल रहा था। आज क्रेन से गार्डर बदला जा रहा था। दोपहर में इसी दौरान असंतुलित होने के कारण क्रेन गार्डर सहित नदी में जा गिरी। इधर, सूचना मिलते ही उज्जैन रेलवे स्टेशन से राहत दल मौके पर भेजा गया। घटना के बाद कई ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। अभी एक ही ब्रिज से ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इस संबंध में मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई है। शाम तक फिर से रूट शुरू होने की संभावना है। कर्मचारियों ने बताया कि अगर क्रेन कुछ आगे गिरती तो ब्रिज टूटने की संभावना थी।1
- शुजालपुर। क्षेत्र के ग्राम नरोला में रास्ते के विवाद को लेकर हुई मारपीट के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद पीड़ित पक्ष समाजजनों के साथ शुजालपुर स्थित एसडीओपी कार्यालय पहुंचा और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। पीड़ित पक्ष का कहना है कि कुछ लोगों द्वारा रास्ते की जमीन पर पत्थर डालने की बात को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो बाद में मारपीट में बदल गया। इस घटना में कई लोग घायल हुए थे, जिनमें से एक व्यक्ति को गंभीर चोट आने के कारण हायर सेंटर रेफर किया गया। घटना के बाद पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित परिवार और समाजजनों में नाराजगी है। इसी को लेकर बड़ी संख्या में लोग एसडीओपी कार्यालय पहुंचे और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करने तथा मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की। इस दौरान समाज के लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।1
- Post by Golu Lala1
- प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी सिंधी समाज के आराध्य भगवान झूलेलाल के पावन 1076 वें जन्मोत्सव एवं चेतीचांद (हिंदू नववर्ष) के अवसर पर शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को भव्य शोभायात्रा का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्ति भाव के साथ किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः गुरुद्वारा परिसर में भगवान झूलेलाल की विधिवत आरती एवं अभिषेक के साथ हुई। इसके पश्चात भगवान झूलेलाल को सुसज्जित पालकी में विराजमान कर बैंड-बाजे, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा श्रीराम मंदिर, प्रगति गली, बड़ा बाजार, नजरगंज, बुधवारा होते हुए पुराने सिद्धार्थ हॉस्पिटल चौराहे पर सकल हिंदू समाज ने भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर सकल हिंदू समाज अध्यक्ष नरेंद्र कुशवाहा (पूर्व पार्षद) ने पालकी में विराजमान भगवान झूलेलाल को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। पूरे मार्ग में “आयो लाल, जय झूलेलाल” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। सिंधी समाज पंचायत के अध्यक्ष सुशील भोजवानी (मुखी सा.) का पुष्पमाला एवं साफा पहनाकर सम्मान किया। वहीं सकल हिंदू समाज संयोजक मुकेश नामदेव ने सिंधी युवा संगठन अध्यक्ष रंजित अरोरा का स्वागत किया। सकल हिंदू समाज के मीडिया प्रभारी राजीव गुप्ता, संजय वर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने समाज के वरिष्ठ मनोहर भोजवानी, देवानंद भोजवानी एवं अन्य गणमान्य नागरिकों को पीले दुपट्टे पहनाकर सम्मानित किया। इस दौरान नगर के विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने पुष्प वर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया। प्रमुख रूप से युवा समाजसेवी देवकरण मालवीय, मालवीय समाज अध्यक्ष रमेश मालवीय, एडवोकेट सुनील कचनेरिया सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मातृशक्ति की भी बड़ी संख्या में सहभागिता रही, जिससे आयोजन की भव्यता और अधिक बढ़ गई। कार्यक्रम का संचालन सकल हिंदू समाज के सचिव मनीष डोंगरे ने किया।4
- AM news Parivar ki taraf se deshvasiyon ko Pradesh vasiyon ko Eid Mubarak ☺1
- 1भोपाल में जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने नागरिकों की समस्याएं सुनीं और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। हेलमेट जागरूकता, गश्त बढ़ाने, अवैध जुआ-नशे पर कार्रवाई, और साइबर सुरक्षा पर जोर दिया गया। साथ ही, संदिग्ध गतिविधियों पर डायल 112 पर सूचना देने की अपील की गई।1
- Post by Naved khan1
- सीहोर में जंगल-खेतों में आग के मामले बढ़ेः वन्यजीव छोड़ रहे ठिकाना, अब चार एकड़ खेत में लगी आग, एक हफ्ते में दर्जन भर घटनाएं सीहोर 6 घंटे पहले 0:36 शेयर सीहोर जिले के बेशकीमती जंगल लगातार आग की चपेट में हैं, जिससे वन्यजीव पलायन को मजबूर हो रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में जिले में खेतों और जंगलों में आग लगने की दर्जनभर से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। वन विभाग और वन विकास निगम के जंगलों में बार-बार आग लगने से इनके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।गुरुवार रात बारवाखेड़ी खेड़ी में चार एकड़ खेत में आग लगने से हजारों का नुकसान हुआ। इससे पहले, सोमवार को ग्राम जमुनिया फतेहपुर के खेत में आग लगी थी, जबकि 9 मार्च को निपानिया खुर्द के खेत में भी आगजनी की घटना हुई थी। तीन दिन पहले आलमपुरा में 40 एकड़ फसल जलकर राख हो गई थी। जंगलों में बढ़ी आग की घटनाएं गर्मी बढ़ने के साथ ही मार्च के तीसरे सप्ताह से जिले की भेरूंदा तहसील स्थित सरकारी सागवान के जंगलों में आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है। नयापुरा सब-रेंज के जंगलों में भी आग देखी गई है। इसके अतिरिक्त, बसंतपुर कुरी नयापुरा, सन कोटा कोसमी और सिराड़ी के जंगल भी आग से प्रभावित हुए हैं। पिपलानी सब-रेंज के खजूर पानी, इटावा, सिराली और डोगला पानी जैसे कई वन क्षेत्र भी बार-बार आग की घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। वन्यजीवों छोड़ रहे ठिकाना इन आगजनी की घटनाओं के कारण वन्यप्राणी भी अपने आवास छोड़कर पलायन करने को मजबूर हैं। रात के समय जंगल लाल रोशनी से जगमगाते दिखाई देते हैं, जो आग की भयावहता को दर्शाता है।1