राजस्थान में पिछले 15 सालों से विद्यार्थी मित्र, पंचायत सहायक और अब पंचायत शिक्षक के नाम पर संविदा पर काम कर रहे हजारों शिक्षकों का सब्र मंगलवार को टूट गया। राजस्थान पंचायत शिक्षक एवं विद्यालय सहायक संघ, संभाग भरतपुर के बैनर तले शिक्षकों ने भरतपुर की सड़कों पर संभाग स्तरीय शंखनाद एवं ध्यान आकर्षण रैली निकाली और सरकार को सीधी चेतावनी दी कि अब शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। भरतपुर संभाग के चारों जिलों से आए हजारों पंचायत शिक्षकों और विद्यालय सहायकों ने नमन मैरिज होम, किला के पास से संभागीय आयुक्त कार्यालय तक पैदल मार्च किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस हुंकार रैली का नेतृत्व संभाग अध्यक्ष योगेश कौशिक, नरेंद्र सिनासिनी, मुनेंद्र लवानिया, लेखराम गुर्जर, सवाई माधोपुर से हेमराज दीक्षित और करौली से राजवीर ने किया, जबकि प्रदेश से नरेंद्र चौधरी, खेमेंद्र गीठाला और रामजीत गुर्जर भी मोर्चे पर डटे रहे। रैली के बाद एक आक्रोशित प्रतिनिधिमंडल ने भरतपुर जिला कलक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि राजस्थान संविदा सेवा नियम, 2022 के तहत कार्यरत पंचायत शिक्षकों एवं विद्यालय सहायकों को तुरंत ग्रेड पे के साथ सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने नियमित कर्मचारियों की तरह पूरा वेतनमान, पदोन्नति, पेंशन और सभी सेवा लाभ देने की भी मांग की, आरोप लगाया कि सरकार 15 साल से बच्चों का भविष्य संवारने वाले इन शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। मंच से गरजते हुए संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी उनकी मांगों को अनसुना किया, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में आग की तरह फैल जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़कों से लेकर विधानसभा तक संग्राम छेड़ा जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। संघ ने एकजुट होकर अंतिम सांस तक संघर्ष करने का ऐलान करते हुए कहा कि अब आर-पार की लड़ाई होगी और कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी पंचायत शिक्षकों, विद्यालय सहायकों और सहयोगी संगठनों का आभार जताया।
राजस्थान में पिछले 15 सालों से विद्यार्थी मित्र, पंचायत सहायक और अब पंचायत शिक्षक के नाम पर संविदा पर काम कर रहे हजारों शिक्षकों का सब्र मंगलवार को टूट गया। राजस्थान पंचायत शिक्षक एवं विद्यालय सहायक संघ, संभाग भरतपुर के बैनर तले शिक्षकों ने भरतपुर की सड़कों पर संभाग स्तरीय शंखनाद एवं ध्यान आकर्षण रैली निकाली और सरकार को सीधी चेतावनी दी कि अब शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। भरतपुर संभाग के चारों जिलों से आए हजारों पंचायत शिक्षकों और विद्यालय सहायकों ने नमन मैरिज होम, किला के पास से संभागीय आयुक्त कार्यालय तक पैदल मार्च किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस हुंकार रैली का नेतृत्व संभाग अध्यक्ष योगेश कौशिक, नरेंद्र सिनासिनी, मुनेंद्र लवानिया, लेखराम गुर्जर, सवाई माधोपुर से हेमराज दीक्षित और करौली से राजवीर ने किया, जबकि प्रदेश से नरेंद्र चौधरी, खेमेंद्र गीठाला और रामजीत गुर्जर भी मोर्चे पर डटे रहे। रैली के बाद एक आक्रोशित प्रतिनिधिमंडल ने भरतपुर जिला कलक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि राजस्थान संविदा सेवा नियम, 2022 के तहत कार्यरत पंचायत शिक्षकों एवं विद्यालय सहायकों को तुरंत ग्रेड पे के साथ सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने नियमित कर्मचारियों की तरह पूरा वेतनमान, पदोन्नति, पेंशन और सभी सेवा लाभ देने की भी मांग की, आरोप लगाया कि सरकार 15 साल से बच्चों का भविष्य संवारने वाले इन शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। मंच से गरजते हुए संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी उनकी मांगों को अनसुना किया, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में आग की तरह फैल जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़कों से लेकर विधानसभा तक संग्राम छेड़ा जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। संघ ने एकजुट होकर अंतिम सांस तक संघर्ष करने का ऐलान करते हुए कहा कि अब आर-पार की लड़ाई होगी और कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी पंचायत शिक्षकों, विद्यालय सहायकों और सहयोगी संगठनों का आभार जताया।
- राजस्थान में पिछले 15 सालों से विद्यार्थी मित्र, पंचायत सहायक और अब पंचायत शिक्षक के नाम पर संविदा पर काम कर रहे हजारों शिक्षकों का सब्र मंगलवार को टूट गया। राजस्थान पंचायत शिक्षक एवं विद्यालय सहायक संघ, संभाग भरतपुर के बैनर तले शिक्षकों ने भरतपुर की सड़कों पर संभाग स्तरीय शंखनाद एवं ध्यान आकर्षण रैली निकाली और सरकार को सीधी चेतावनी दी कि अब शोषण बर्दाश्त नहीं होगा। भरतपुर संभाग के चारों जिलों से आए हजारों पंचायत शिक्षकों और विद्यालय सहायकों ने नमन मैरिज होम, किला के पास से संभागीय आयुक्त कार्यालय तक पैदल मार्च किया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस हुंकार रैली का नेतृत्व संभाग अध्यक्ष योगेश कौशिक, नरेंद्र सिनासिनी, मुनेंद्र लवानिया, लेखराम गुर्जर, सवाई माधोपुर से हेमराज दीक्षित और करौली से राजवीर ने किया, जबकि प्रदेश से नरेंद्र चौधरी, खेमेंद्र गीठाला और रामजीत गुर्जर भी मोर्चे पर डटे रहे। रैली के बाद एक आक्रोशित प्रतिनिधिमंडल ने भरतपुर जिला कलक्टर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि राजस्थान संविदा सेवा नियम, 2022 के तहत कार्यरत पंचायत शिक्षकों एवं विद्यालय सहायकों को तुरंत ग्रेड पे के साथ सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने नियमित कर्मचारियों की तरह पूरा वेतनमान, पदोन्नति, पेंशन और सभी सेवा लाभ देने की भी मांग की, आरोप लगाया कि सरकार 15 साल से बच्चों का भविष्य संवारने वाले इन शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। मंच से गरजते हुए संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अब भी उनकी मांगों को अनसुना किया, तो यह आंदोलन पूरे प्रदेश में आग की तरह फैल जाएगा। उन्होंने कहा कि सड़कों से लेकर विधानसभा तक संग्राम छेड़ा जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। संघ ने एकजुट होकर अंतिम सांस तक संघर्ष करने का ऐलान करते हुए कहा कि अब आर-पार की लड़ाई होगी और कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी पंचायत शिक्षकों, विद्यालय सहायकों और सहयोगी संगठनों का आभार जताया।1
- थांवला के नजदीकी ग्राम टेहला में एक खेत में बने तिरपाल वाले पानी के होद में गिरने से एक 35 वर्षीय युवक की दुखद मृत्यु हो गई। मृतक बाबूलाल, जो गाँव टेहला में अपने साले सांवर राम के साथ खेती का काम करता था, सोमवार को रोज की तरह खेत में था जब यह दर्दनाक हादसा हुआ। पुलिस को मृतक के भाई मुकेश पुत्र पूरण निवासी गाँव नदी, जिला अजमेर ने बताया कि बाबूलाल होद की पाल पर पाइप हटाने-जोड़ने का काम कर रहा था। इसी दौरान उसके साले सांवर राम ने कृषि कार्य के लिए विपरीत दिशा में खड़े ट्रेक्टर-ट्रॉली को स्टार्ट किया, जिससे अचानक क्लच छूट गया। क्लच छूटने से बाबूलाल को धक्का लगा और वह गहरे पानी के होद में जा गिरा। बाबूलाल को तैरना नहीं आता था, जिस कारण वह बाहर नहीं निकल पाया। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। कड़ी मशक्कत के बाद होद की पाल तोड़कर पानी खाली किया गया और बाबूलाल को बाहर निकालकर थांवला के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने बाबूलाल को मृत घोषित कर दिया। सूचना पर थांवला थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, शव को कब्जे में लिया और चीरघर में रखवाया। मंगलवार सुबह परिजनों और पुलिस की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया। इस पूरे मामले को लेकर थांवला थाना के एएसआई रति राम विश्नोई और उनकी टीम द्वारा आगे की जांच जारी है।2
- राजस्थान की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में सोमवार को एक सनसनीखेज हत्याकांड हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। चंबल के बीहड़ों में दशकों तक आतंक का पर्याय रहे कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल के भीतर ही हत्या कर दी गई। चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या उसी बैरक में बंद एक अन्य हार्डकोर कैदी विष्णु ने की, जिसके साथ जगन ने कुछ देर पहले तक लूडो खेला था और सामान्य तरीके से समय बिताया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, भरतपुर के चर्चित कुलदीप जघीना हत्याकांड के आरोपी विष्णु और डकैत जगन गुर्जर एक ही बैरक में बंद थे। सोमवार सुबह दोनों ने बैरक की सफाई की और साथ बैठकर लूडो खेला, लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसी बैरक से जगन गुर्जर का शव मिला। शुरुआती जांच में सामने आया है कि विष्णु ने तौलिए से जगन का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। जब जेल स्टाफ राउंड पर पहुंचा तो जगन मृत अवस्था में पड़ा था। पूछताछ में विष्णु ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना जुर्म कबूलते हुए कहा कि "मैंने ही उसे मार डाला।" जेल प्रशासन के मुताबिक, जगन गुर्जर मार्च 2026 से अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था, जबकि विष्णु पिछले तीन वर्षों से इसी जेल में कैद था। एफएसएल टीम ने मौके से साक्ष्य जुटा लिए हैं। पुलिस अधीक्षक हर्षवर्धन अग्रवाला ने बताया कि शुरुआती जांच में यह गैंगवार का मामला नहीं लग रहा है। प्रथम दृष्टया यह हत्या दोनों कैदियों के बीच हुए आपसी विवाद का परिणाम प्रतीत होती है। सूत्रों के मुताबिक, सुबह नाश्ते के दौरान दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी। पूछताछ में विष्णु ने बताया कि जगन अक्सर उसे ताने मारता था और मानसिक रूप से परेशान करता था, जिसके कारण उसने रंजिश में इस वारदात को अंजाम दिया। जेल सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा कारणों से जगन गुर्जर को दिन में सामान्य बैरक में रखा जाता था, जबकि रात के समय उसे विशेष सुरक्षा सेल में शिफ्ट किया जाता था। धौलपुर के डांग क्षेत्र के भवूतीपुरा गांव का रहने वाला जगन गुर्जर करीब 32 साल पहले अपराध की दुनिया में उतरा था। वर्ष 1994 में अपने जीजा के हत्यारों की हत्या के बाद उसने चंबल के बीहड़ों में अपना गैंग बना लिया और जल्द ही राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के सबसे खूंखार डकैतों में शामिल हो गया। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, फिरौती, लूट, डकैती और पुलिस पर हमलों समेत 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। वर्ष 2008 के गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान उसने तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के धौलपुर महल को उड़ाने की धमकी देकर सनसनी फैलाई थी, जिस पर 11 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। 2019 में उस पर दो महिलाओं के साथ मारपीट कर उन्हें निर्वस्त्र कर गांव में घुमाने का गंभीर आरोप भी लगा था। जगन ने कई बार अपराध छोड़ने का दावा किया और वर्ष 2001, 2009, 2018 और 2022 में आत्मसमर्पण भी किया, यहाँ तक कि अपनी बेटी की शादी के समय उसने अपराध की दुनिया छोड़ने की कसम भी खाई थी, लेकिन हर बार जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर से अपराध के रास्ते पर लौट गया। चंबल के बीहड़ों में वर्षों तक खौफ का दूसरा नाम रहा जगन गुर्जर अब जेल की सलाखों के पीछे अपनी ही बैरक में मारा गया है। जिस अपराध की दुनिया ने उसे पहचान दी, उसी दुनिया का अंत भी हिंसक तरीके से हुआ। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल के भीतर आखिर ऐसी वारदात कैसे हो गई? क्या यह सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक थी या यह केवल दो कैदियों के बीच विवाद का नतीजा था? इन सभी सवालों के जवाब अब विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।1
- राजस्थान के धौलपुर जिले के बारी क्षेत्र में पुलिस चेकिंग अभियान के दौरान भी कई बाइक सवार बिना हेलमेट पहने सड़कों पर जाते हुए नजर आए। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए, इसे राजस्थान प्रशासन की मौजूदा कार्यप्रणाली का एक उदाहरण बताया गया है।1
- अजमेर में कुख्यात डकैत जगन गुर्जर की जेल में हुई मौत के मामले में मंगलवार को उनके परिजन और समर्थक जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने इस घटना को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और अपनी मांगों को पूरा होने तक पोस्टमार्टम न कराने का फैसला किया है। परिजनों ने प्रमुख रूप से दो मांगें रखी हैं: एक तो जगन गुर्जर की मौत के मामले में सीबीआई जांच कराई जाए, और दूसरी यह कि जगन गुर्जर के भाई पप्पू गुर्जर को अजमेर से किसी अन्य जेल में स्थानांतरित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी ये मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका धरना जारी रहेगा और शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया जाएगा। स्थिति को देखते हुए मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।1
- डीग में 30 जून 2026 को जिला महिला कांग्रेस कमेटी डीग की जिला अध्यक्ष एडवोकेट स्वेता यादव के नेतृत्व में ग्राम तमरेर से ग्राम मधुबन को जोड़ने वाली जर्जर सड़क के निर्माण और मरम्मत की मांग को लेकर जिला कलेक्टर महोदय को एक ज्ञापन सौंपा गया। एडवोकेट स्वेता यादव ने बताया कि तमरेर-मधुबन मार्ग लंबे समय से अत्यंत खराब स्थिति में है, जिस पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। इस वजह से ग्रामीणों, विद्यार्थियों, महिलाओं और किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में तो सड़क की स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जिससे आवागमन लगभग ठप्प पड़ जाता है। ग्रामीणों द्वारा कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया है, जिससे क्षेत्रवासियों में भारी रोष व्याप्त है। ज्ञापन में मांग की गई कि उक्त सड़क का शीघ्र निरीक्षण कर आवश्यक बजट स्वीकृत किया जाए और निर्माण कार्य जल्द से जल्द प्रारंभ कराया जाए, ताकि क्षेत्र के हजारों लोगों को राहत मिल सके। इसके साथ ही, सड़क निर्माण में हो रही देरी की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की भी मांग की गई। इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों ने भी सड़क की बदहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए प्रशासन से तुरंत समाधान की अपील की। एडवोकेट स्वेता यादव ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया तो ग्रामीणों के साथ मिलकर जनआंदोलन किया जाएगा। ज्ञापन सौंपते समय मिट्ठू सिंह सांखला, गोपाल प्रसाद जी, नरेश फौजदार, नरेन्द्र, राहुल, विक्रम सिंह, बच्चू सिंह, डब्बू, हेमू, कुलदीप, भावना मीडिया प्रभारी सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।1
- भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर रवि किशन ने अपना बयान जारी किया है।1
- रूपबास उपखंड के गांव सज्जनवास स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रिंसिपल सतीश तिवारी के सेवानिवृत्त होने पर लोगों ने उनका भव्य स्वागत और सम्मान किया। विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद, बैंड-बाजों के साथ एक सम्मान यात्रा निकाली गई। यह यात्रा विद्यालय से शुरू होकर रूपबास कस्बा होते हुए प्रिंसिपल तिवारी के घर तक गई, जिसमें कस्बे के एसबीआई बैंक के सामने स्थित हनुमान मंदिर से बाजार होते हुए उनके आवास तक का मार्ग शामिल था। सेवानिवृत्त प्रिंसिपल का सज्जनवास गांव के लोगों, विद्यालय परिवार और रूपबास कस्बे के निवासियों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस अवसर पर रूपबास सहित क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक एवं अधिकारीगण भी उपस्थित रहे। प्रिंसिपल तिवारी ने इस भव्य स्वागत के लिए सभी का हृदय से आभार जताया।1