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यह मुंबई के पहले डॉन हाजी मस्तान के जीवन की शुरुआत से संबंधित है। बताया गया है कि हाजी मस्तान, जिन्हें मुंबई का पहला डॉन कहा जाता है, और सुल्तान मिर्ज़ा की कहानी पर आधारित 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' फिल्म बनी है, जिसे आप सभी ने देखा होगा।

1 hr ago
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जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
1 hr ago
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यह मुंबई के पहले डॉन हाजी मस्तान के जीवन की शुरुआत से संबंधित है। बताया गया है कि हाजी मस्तान, जिन्हें मुंबई का पहला डॉन कहा जाता है, और सुल्तान मिर्ज़ा की कहानी पर आधारित 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' फिल्म बनी है, जिसे आप सभी ने देखा होगा।

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  • यह मुंबई के पहले डॉन हाजी मस्तान के जीवन की शुरुआत से संबंधित है। बताया गया है कि हाजी मस्तान, जिन्हें मुंबई का पहला डॉन कहा जाता है, और सुल्तान मिर्ज़ा की कहानी पर आधारित 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' फिल्म बनी है, जिसे आप सभी ने देखा होगा।
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    यह मुंबई के पहले डॉन हाजी मस्तान के जीवन की शुरुआत से संबंधित है। बताया गया है कि हाजी मस्तान, जिन्हें मुंबई का पहला डॉन कहा जाता है, और सुल्तान मिर्ज़ा की कहानी पर आधारित 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई' फिल्म बनी है, जिसे आप सभी ने देखा होगा।
    user_News_n_News
    News_n_News
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • जय श्री रामधर्म संगठन द्वारा व्यक्त एक गहन भावनात्मक संदेश में, यह कामना की गई है कि काश सब साथ होते। इस भावना के अनुसार, यदि सब मिलकर चलते, तो लोग बुराई के रास्ते से दूर रहते और उनकी जिंदगी संस्कारों में ढलती। संदेश में यह भी इच्छा व्यक्त की गई है कि ऐसे में किसी का प्यार बेरहमी से बिछड़ता नहीं।
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    जय श्री रामधर्म संगठन द्वारा व्यक्त एक गहन भावनात्मक संदेश में, यह कामना की गई है कि काश सब साथ होते। इस भावना के अनुसार, यदि सब मिलकर चलते, तो लोग बुराई के रास्ते से दूर रहते और उनकी जिंदगी संस्कारों में ढलती। संदेश में यह भी इच्छा व्यक्त की गई है कि ऐसे में किसी का प्यार बेरहमी से बिछड़ता नहीं।
    user_टेकेशवर गिरी गोस्वामी
    टेकेशवर गिरी गोस्वामी
    जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • मध्य प्रदेश सरकार का कृषि विभाग और बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर, मिलकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 'जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम' चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य फसलों को अनिश्चित मौसम से बचाना है। इसी कड़ी में, नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव ब्लॉक स्थित ग्राम झांसी घाट में एक मिनी कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किया गया है, जो स्थानीय किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहा है। इस खरीफ सीजन में सेंटर द्वारा प्रदान किया जा रहा रेज्ड बेड प्लांटर (मेड़ बनाकर बुवाई करने वाली मशीन) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। क्षेत्र के कई किसान इस मशीन का उपयोग कर अपने खेतों में उठी हुई क्यारियों (बेड) पर मक्का और सोयाबीन की बुवाई कर रहे हैं, जिससे उनकी फसलें मौसम के जोखिमों से सुरक्षित रह सकें। ग्राम झांसी घाट के किसान श्री निशान सिंह राजा पटेल ने इस तकनीक से लगभग 20 एकड़ में बुवाई की है, और श्री योगेश जी जैसे अन्य किसान भी इस मशीन का लगातार लाभ उठा रहे हैं। बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर के तकनीकी विशेषज्ञ श्री दीपेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि संस्थान ने इस खरीफ सीजन में नरसिंहपुर जिले में इस आधुनिक मशीन से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में बुवाई करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को इस तकनीक से जोड़कर लाभ पहुंचाना और उनकी फसलों को मौसम की अनिश्चितता से बचाना है। कृषक श्री राजा पटेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस तकनीक को जलवायु अनुकूल खेती के लिए एक 'ब्रह्मास्त्र' बताया। उन्होंने इसके कई महत्वपूर्ण लाभ गिनाए, जैसे अत्यधिक बारिश की स्थिति में बेड के दोनों ओर बनी नालियों से पानी का आसानी से निकल जाना, जिससे पौधों की जड़ें गलने से बच जाती हैं। वहीं, कम बारिश होने पर इन्हीं नालियों में पानी रुकने से जमीन में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, जो सूखे के दौरान फसल को जीवन प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, यह विधि खाद प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों को भी सुविधाजनक बनाती है, क्योंकि पौधों की कतारें व्यवस्थित रहती हैं। कस्टम हायरिंग सेंटर और BISA के तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इस तकनीक का प्रसार गोटेगांव क्षेत्र के किसानों को कम लागत में सुरक्षित और आधुनिक खेती करने का एक उत्कृष्ट विकल्प प्रदान कर रहा है।
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    मध्य प्रदेश सरकार का कृषि विभाग और बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर, मिलकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 'जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम' चला रहे हैं, जिसका उद्देश्य फसलों को अनिश्चित मौसम से बचाना है। इसी कड़ी में, नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव ब्लॉक स्थित ग्राम झांसी घाट में एक मिनी कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किया गया है, जो स्थानीय किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध करा रहा है।

इस खरीफ सीजन में सेंटर द्वारा प्रदान किया जा रहा रेज्ड बेड प्लांटर (मेड़ बनाकर बुवाई करने वाली मशीन) किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। क्षेत्र के कई किसान इस मशीन का उपयोग कर अपने खेतों में उठी हुई क्यारियों (बेड) पर मक्का और सोयाबीन की बुवाई कर रहे हैं, जिससे उनकी फसलें मौसम के जोखिमों से सुरक्षित रह सकें। ग्राम झांसी घाट के किसान श्री निशान सिंह राजा पटेल ने इस तकनीक से लगभग 20 एकड़ में बुवाई की है, और श्री योगेश जी जैसे अन्य किसान भी इस मशीन का लगातार लाभ उठा रहे हैं।

बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर के तकनीकी विशेषज्ञ श्री दीपेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि संस्थान ने इस खरीफ सीजन में नरसिंहपुर जिले में इस आधुनिक मशीन से लगभग 500 एकड़ क्षेत्र में बुवाई करवाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों को इस तकनीक से जोड़कर लाभ पहुंचाना और उनकी फसलों को मौसम की अनिश्चितता से बचाना है।

कृषक श्री राजा पटेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस तकनीक को जलवायु अनुकूल खेती के लिए एक 'ब्रह्मास्त्र' बताया। उन्होंने इसके कई महत्वपूर्ण लाभ गिनाए, जैसे अत्यधिक बारिश की स्थिति में बेड के दोनों ओर बनी नालियों से पानी का आसानी से निकल जाना, जिससे पौधों की जड़ें गलने से बच जाती हैं। वहीं, कम बारिश होने पर इन्हीं नालियों में पानी रुकने से जमीन में लंबे समय तक नमी बनी रहती है, जो सूखे के दौरान फसल को जीवन प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, यह विधि खाद प्रबंधन और अन्य कृषि कार्यों को भी सुविधाजनक बनाती है, क्योंकि पौधों की कतारें व्यवस्थित रहती हैं।

कस्टम हायरिंग सेंटर और BISA के तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इस तकनीक का प्रसार गोटेगांव क्षेत्र के किसानों को कम लागत में सुरक्षित और आधुनिक खेती करने का एक उत्कृष्ट विकल्प प्रदान कर रहा है।
    user_DEEPAK SAHU
    DEEPAK SAHU
    रिपोर्टर गोटेगांव, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • मंडला में नारायणगंज के चुटका परमाणु परियोजना से प्रभावित 44 विस्थापित परिवारों ने ग्राम गौंझीमाल स्थित आधुनिक पुनर्वास एवं पुर्नस्थापन कॉलोनी में अपने नए आवासों में गृह प्रवेश किया। प्रशासन ने इस पहल को प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। प्रदेश की पीएचई मंत्री श्रीमती सम्पतिया उईके ने स्वयं नए आवासों में पहुंचकर इन परिवारों का पारंपरिक स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मंत्री श्रीमती उईके ने प्रभावितों को पुनर्वास अवार्ड राशि के प्रतीकात्मक चेक भी सौंपे और कहा कि सरकार प्रत्येक परिवार को बेहतर जीवन और सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि इस कॉलोनी में श्रीराम, हनुमान, राधा-कृष्ण के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति के आराध्य बड़ादेव मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए, मंत्री ने आगामी दो दिनों के भीतर बच्चों के लिए स्कूल संचालन शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि परियोजना से प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्स के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। एनपीसीआईएल की इस परियोजना के तहत कुल 330 परिवारों में से अब तक 119 परिवारों को इस कॉलोनी में बसाया जा चुका है। कार्यक्रम में उपस्थित कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने बताया कि नए आवासों में शिफ्ट हुए 44 परिवारों के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक माह तक नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस सर्वसुविधायुक्त कॉलोनी में स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली, पक्की सड़कें और सुदृढ़ नाली जैसी आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इस अवसर पर अपर कलेक्टर राजेन्द्र कुमार सिंह, एसडीएम सोनल सिडाम, एसडीएम सीएल वर्मा, स्थानीय सरपंच श्री विश्राम सहित एनपीसीआईएल के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे।
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    मंडला में नारायणगंज के चुटका परमाणु परियोजना से प्रभावित 44 विस्थापित परिवारों ने ग्राम गौंझीमाल स्थित आधुनिक पुनर्वास एवं पुर्नस्थापन कॉलोनी में अपने नए आवासों में गृह प्रवेश किया। प्रशासन ने इस पहल को प्रभावित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। प्रदेश की पीएचई मंत्री श्रीमती सम्पतिया उईके ने स्वयं नए आवासों में पहुंचकर इन परिवारों का पारंपरिक स्वागत किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मंत्री श्रीमती उईके ने प्रभावितों को पुनर्वास अवार्ड राशि के प्रतीकात्मक चेक भी सौंपे और कहा कि सरकार प्रत्येक परिवार को बेहतर जीवन और सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि इस कॉलोनी में श्रीराम, हनुमान, राधा-कृष्ण के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति के आराध्य बड़ादेव मंदिर का निर्माण कराया जाएगा। शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए, मंत्री ने आगामी दो दिनों के भीतर बच्चों के लिए स्कूल संचालन शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि परियोजना से प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को आउटसोर्स के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। एनपीसीआईएल की इस परियोजना के तहत कुल 330 परिवारों में से अब तक 119 परिवारों को इस कॉलोनी में बसाया जा चुका है।

कार्यक्रम में उपस्थित कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे ने बताया कि नए आवासों में शिफ्ट हुए 44 परिवारों के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक माह तक नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस सर्वसुविधायुक्त कॉलोनी में स्वच्छ पेयजल, निर्बाध बिजली, पक्की सड़कें और सुदृढ़ नाली जैसी आधुनिक नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इस अवसर पर अपर कलेक्टर राजेन्द्र कुमार सिंह, एसडीएम सोनल सिडाम, एसडीएम सीएल वर्मा, स्थानीय सरपंच श्री विश्राम सहित एनपीसीआईएल के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण भी मौजूद रहे।
    user_Prahlad Kachhwaha
    Prahlad Kachhwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by Neelesh THAKUR
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    Post by Neelesh THAKUR
    user_Neelesh THAKUR
    Neelesh THAKUR
    Mandla, Madhya Pradesh•
    11 hrs ago
  • महिष्मति घाट पर भारी मात्रा में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। क्षेत्र में कूड़ेदानों की उचित व्यवस्था न होने के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो गई है।
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    महिष्मति घाट पर भारी मात्रा में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। क्षेत्र में कूड़ेदानों की उचित व्यवस्था न होने के कारण यह समस्या और भी गंभीर हो गई है।
    user_Sanjay nanda
    Sanjay nanda
    Local News Reporter Mandla, Madhya Pradesh•
    12 hrs ago
  • लखनऊ के अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित एक इमारत में लगी भीषण आग के कारण एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया है। इस घटना में कुल 15 छात्रों की मौत हो गई, जिनकी उम्र 20 से 24 साल के बीच बताई जा रही है। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत इमारत में बनी एक पेट शॉप और गेमिंग जोन से हुई थी। लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि वे ऊपर चल रही एक कोचिंग तक पहुंच गईं, जिसके कारण कई छात्र इमारत के अंदर फंस गए। आग पर काबू पाने और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए SDRF, NDRF और दमकल विभाग की 10 से अधिक गाड़ियों को मौके पर तैनात किया गया। राहत और बचाव कार्य देर रात तक लगातार जारी रहा। अधिकारियों ने राहत कार्य में और तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
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    लखनऊ के अलीगंज के पुरनिया इलाके में स्थित एक इमारत में लगी भीषण आग के कारण एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया है। इस घटना में कुल 15 छात्रों की मौत हो गई, जिनकी उम्र 20 से 24 साल के बीच बताई जा रही है।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, आग की शुरुआत इमारत में बनी एक पेट शॉप और गेमिंग जोन से हुई थी। लपटें इतनी तेजी से फैलीं कि वे ऊपर चल रही एक कोचिंग तक पहुंच गईं, जिसके कारण कई छात्र इमारत के अंदर फंस गए। आग पर काबू पाने और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए SDRF, NDRF और दमकल विभाग की 10 से अधिक गाड़ियों को मौके पर तैनात किया गया। राहत और बचाव कार्य देर रात तक लगातार जारी रहा।

अधिकारियों ने राहत कार्य में और तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
    user_Govardhan kushwaha
    Govardhan kushwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
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