‘रक्षा सूत्र केवल धागा नहीं, श्रेष्ठ कर्म व पवित्रता का संकल्प’: ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र पर आध्यात्मिक उल्लास से मना रक्षाबंधन पर्व सनावद ग्राउंड रिपोर्ट: ऋषि एरन एमपी का आईना प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के स्थानीय सेवा केंद्र पर पावन पर्व रक्षाबंधन अत्यंत श्रद्धा, आध्यात्मिक आनंद और सादगीपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस मांगलिक अवसर पर राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी ने उपस्थित सभी भाइयों के मस्तक पर आत्म-स्मृति का चंदन तिलक लगाया, कलाई पर पवित्र रक्षा सूत्र बांधा और मिठाई खिलाकर उनके सुखद व स्वर्णिम जीवन की मंगल कामना की। पर्व के आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश: मानवीय मूल्यों और वैश्विक भाईचारे का प्रतीक: राजयोगिनी उर्मिला दीदी ने रक्षाबंधन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को समझाते हुए कहा कि यह पर्व केवल लौकिक भाई-बहन के स्नेह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, आत्मिक पवित्रता और वैश्विक भ्रातृत्व (वसुधैव कुटुंबकम्) की पावन स्मृति दिलाता है। चंदन तिलक व रक्षा सूत्र का संदेश: उन्होंने बताया कि मस्तक पर लगाया जाने वाला चंदन का तिलक जीवन को चंदन की तरह शीतल, सुगंधित और पवित्र बनाने की प्रेरणा देता है। दाएं हाथ पर रक्षा सूत्र बांधने और दाएं हाथ से ही तिलक लगाने की परंपरा का मूल संदेश है कि हमारा प्रत्येक कर्म श्रेष्ठ, सत्य और सकारात्मक चिंतन से परिपूर्ण हो। संबंधों में मिठास का भाव: मुख मीठा कराने का वास्तविक अर्थ है कि हमारी वाणी में सदैव मधुरता रहे और आपसी संबंधों में कभी कटुता न आए। आध्यात्मिक वातावरण में बंधी स्नेह की डोर: सेवा केंद्र पर जुटे सभी भाई-बहनों ने ध्यान (राजयोग) का अभ्यास कर श्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प लिया। अंत में सभी ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और प्रसाद ग्रहण किया।
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तिलक लगाया, कलाई पर पवित्र रक्षा सूत्र बांधा और मिठाई खिलाकर उनके सुखद व स्वर्णिम जीवन की मंगल कामना की। पर्व के आध्यात्मिक रहस्यों पर प्रकाश: मानवीय मूल्यों और वैश्विक भाईचारे का प्रतीक: राजयोगिनी उर्मिला दीदी ने रक्षाबंधन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों को समझाते हुए कहा कि यह पर्व केवल लौकिक भाई-बहन के स्नेह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, आत्मिक पवित्रता और वैश्विक भ्रातृत्व (वसुधैव
कुटुंबकम्) की पावन स्मृति दिलाता है। चंदन तिलक व रक्षा सूत्र का संदेश: उन्होंने बताया कि मस्तक पर लगाया जाने वाला चंदन का तिलक जीवन को चंदन की तरह शीतल, सुगंधित और पवित्र बनाने की प्रेरणा देता है। दाएं हाथ पर रक्षा सूत्र बांधने और दाएं हाथ से ही तिलक लगाने की परंपरा का मूल संदेश है कि हमारा प्रत्येक कर्म श्रेष्ठ, सत्य और सकारात्मक चिंतन से
परिपूर्ण हो। संबंधों में मिठास का भाव: मुख मीठा कराने का वास्तविक अर्थ है कि हमारी वाणी में सदैव मधुरता रहे और आपसी संबंधों में कभी कटुता न आए। आध्यात्मिक वातावरण में बंधी स्नेह की डोर: सेवा केंद्र पर जुटे सभी भाई-बहनों ने ध्यान (राजयोग) का अभ्यास कर श्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प लिया। अंत में सभी ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं और प्रसाद ग्रहण किया।
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- पातालपानी वॉटरफॉल पर फिर लापरवाही, हादसे वाले स्थान पर पहुंच रहे पर्यटक पातालपानी। बारिश के मौसम में पातालपानी वॉटरफॉल का जलस्तर और पानी का बहाव अचानक बढ़ जाता है। इसके बावजूद कुछ पर्यटक अपनी जान जोखिम में डालने से बाज नहीं आ रहे हैं। निडर भारत न्यूज़ की विशेष टीम ने पातालपानी वॉटरफॉल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। वीडियो में दो युवक और एक युवती उस स्थान के पास जाते दिखाई दे रहे हैं, जहां पहले भी गंभीर हादसा हो चुका है। मौके पर बारिश हो रही थी और पानी का बहाव भी लगातार बदल रहा था। कभी-कभी अचानक तेज बहाव आने की स्थिति बन रही थी। साल 2011 में हरदा के पांच लोगों की पातालपानी में जान चली गई थी। उस दर्दनाक हादसे के बावजूद आज भी कुछ पर्यटक चेतावनियों को नजरअंदाज कर खतरनाक स्थानों तक पहुंच रहे हैं। प्रशासन द्वारा जगह-जगह खतरे और सावधानी से जुड़े चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन इसके बाद भी लोग सेल्फी और वीडियो बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। बारिश के दौरान झरने के आसपास चट्टानें फिसलन भरी हो जाती हैं और पानी का बहाव कुछ ही मिनटों में खतरनाक रूप ले सकता है। ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही 2011 जैसी दर्दनाक घटना को दोबारा जन्म दे सकती है। निडर भारत न्यूज़ की अपील: पातालपानी की खूबसूरती का आनंद जरूर लें, लेकिन खतरे की सीमा पार न करें। चेतावनी बोर्ड और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। एक वीडियो या सेल्फी आपकी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं है। पातालपानी वॉटरफॉल पर फिर लापरवाही, हादसे वाले स्थान पर पहुंच रहे पर्यटक पातालपानी। बारिश के मौसम में पातालपानी वॉटरफॉल का जलस्तर और पानी का बहाव अचानक बढ़ जाता है। इसके बावजूद कुछ पर्यटक अपनी जान जोखिम में डालने से बाज नहीं आ रहे हैं। निडर भारत न्यूज़ की विशेष टीम ने पातालपानी वॉटरफॉल पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। वीडियो में दो युवक और एक युवती उस स्थान के पास जाते दिखाई दे रहे हैं, जहां पहले भी गंभीर हादसा हो चुका है। मौके पर बारिश हो रही थी और पानी का बहाव भी लगातार बदल रहा था। कभी-कभी अचानक तेज बहाव आने की स्थिति बन रही थी। साल 2011 में हरदा के पांच लोगों की पातालपानी में जान चली गई थी। उस दर्दनाक हादसे के बावजूद आज भी कुछ पर्यटक चेतावनियों को नजरअंदाज कर खतरनाक स्थानों तक पहुंच रहे हैं। प्रशासन द्वारा जगह-जगह खतरे और सावधानी से जुड़े चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन इसके बाद भी लोग सेल्फी और वीडियो बनाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। बारिश के दौरान झरने के आसपास चट्टानें फिसलन भरी हो जाती हैं और पानी का बहाव कुछ ही मिनटों में खतरनाक रूप ले सकता है। ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही 2011 जैसी दर्दनाक घटना को दोबारा जन्म दे सकती है। निडर भारत न्यूज़ की अपील: पातालपानी की खूबसूरती का आनंद जरूर लें, लेकिन खतरे की सीमा पार न करें। चेतावनी बोर्ड और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। एक वीडियो या सेल्फी आपकी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं है।1
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