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मौत के मुहाने पर मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी, प्रशासन की चुप्पी बनी खतरा कैमोर। देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को जहां सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहीं कैमोर नगर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां मासूम बच्चे मौत के साए में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं — एक ऐसा सच, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप जाए। टूटी दीवारें, झुकी छत, चारों ओर फैली गंदगी और सीलन भरा माहौल… यह दृश्य किसी खंडहर का नहीं, बल्कि उस आंगनवाड़ी का है, जहां रोज़ दर्जनों मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना चाहिए। “नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे गीत यहां कटाक्ष बनकर रह जाते हैं, क्योंकि जब पढ़ाई का माहौल ही असुरक्षित हो, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है? जर्जर भवन बना जानलेवा खतरा स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह आंगनवाड़ी पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है। दीवारों में गहरी दरारें छत से लगातार टपकता पानी फर्श पर सीलन और कीचड़ चारों ओर गंदगी और दुर्गंध हर पल यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कचरे और आवारा पशुओं का अड्डा बना केंद्र स्थिति और भयावह तब हो जाती है, जब आंगनवाड़ी के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और नगर परिषद द्वारा डाला गया कचरा इस स्थान को संक्रमण का केंद्र बना देता है। यहां मच्छर, मक्खियां और गंदगी बच्चों को बीमार करने के लिए काफी हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है। गर्भवती महिलाओं की जान भी जोखिम में इस केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। जर्जर भवन में बैठकर टीका लगवाना महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। यदि छत या दीवार गिर जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? — यह सवाल अब पूरे नगर में गूंज रहा है। प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ी चिंता स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो समय-समय पर निरीक्षण होता है, और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई। समाजसेवी संगठनों द्वारा कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है। नया भवन नहीं तो बड़ा हादसा तय! वार्ड क्रमांक-6 के नागरिकों की एक ही मांग — सुरक्षित नया आंगनवाड़ी भवन। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है, जिसकी कीमत मासूम जानों से चुकानी पड़ सकती है। प्रशासन से सीधा सवाल क्या किसी बच्चे की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन? क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? आखिर कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित भविष्य? जनता की अपील — अभी कार्रवाई करें, कल पछतावा न हो नगरवासियों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। क्योंकि… देश का भविष्य मलबे के ढेर में नहीं, सुरक्षित कक्षाओं में गढ़ा जाता है। मौत के मुहाने पर मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी, प्रशासन की चुप्पी बनी खतरा कैमोर। देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को जहां सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहीं कैमोर नगर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां मासूम बच्चे मौत के साए में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं — एक ऐसा सच, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप जाए। टूटी दीवारें, झुकी छत, चारों ओर फैली गंदगी और सीलन भरा माहौल… यह दृश्य किसी खंडहर का नहीं, बल्कि उस आंगनवाड़ी का है, जहां रोज़ दर्जनों मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना चाहिए। “नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे गीत यहां कटाक्ष बनकर रह जाते हैं, क्योंकि जब पढ़ाई का माहौल ही असुरक्षित हो, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है? जर्जर भवन बना जानलेवा खतरा स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह आंगनवाड़ी पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है। दीवारों में गहरी दरारें छत से लगातार टपकता पानी फर्श पर सीलन और कीचड़ चारों ओर गंदगी और दुर्गंध हर पल यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कचरे और आवारा पशुओं का अड्डा बना केंद्र स्थिति और भयावह तब हो जाती है, जब आंगनवाड़ी के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और नगर परिषद द्वारा डाला गया कचरा इस स्थान को संक्रमण का केंद्र बना देता है। यहां मच्छर, मक्खियां और गंदगी बच्चों को बीमार करने के लिए काफी हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है। गर्भवती महिलाओं की जान भी जोखिम में इस केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। जर्जर भवन में बैठकर टीका लगवाना महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। यदि छत या दीवार गिर जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? — यह सवाल अब पूरे नगर में गूंज रहा है। प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ी चिंता स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो समय-समय पर निरीक्षण होता है, और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई। समाजसेवी संगठनों द्वारा कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है। नया भवन नहीं तो बड़ा हादसा तय! वार्ड क्रमांक-6 के नागरिकों की एक ही मांग — सुरक्षित नया आंगनवाड़ी भवन। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है, जिसकी कीमत मासूम जानों से चुकानी पड़ सकती है। प्रशासन से सीधा सवाल क्या किसी बच्चे की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन? क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? आखिर कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित भविष्य? जनता की अपील — अभी कार्रवाई करें, कल पछतावा न हो नगरवासियों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। क्योंकि… देश का भविष्य मलबे के ढेर में नहीं, सुरक्षित कक्षाओं में गढ़ा जाता है।

3 hrs ago
user_Balkishan Namdev
Balkishan Namdev
Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
3 hrs ago

मौत के मुहाने पर मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी, प्रशासन की चुप्पी बनी खतरा कैमोर। देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को जहां सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहीं कैमोर नगर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां मासूम बच्चे मौत के साए में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं — एक ऐसा सच, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप जाए। टूटी दीवारें, झुकी छत, चारों ओर फैली गंदगी और सीलन भरा माहौल… यह दृश्य किसी खंडहर का नहीं, बल्कि उस आंगनवाड़ी का है, जहां रोज़ दर्जनों मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना चाहिए। “नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे गीत यहां कटाक्ष बनकर रह जाते हैं, क्योंकि जब पढ़ाई का माहौल ही असुरक्षित हो, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है? जर्जर भवन बना जानलेवा खतरा स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह आंगनवाड़ी पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है। दीवारों में गहरी दरारें छत से लगातार टपकता पानी फर्श पर सीलन और कीचड़ चारों ओर गंदगी और दुर्गंध हर पल यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कचरे और आवारा पशुओं का अड्डा बना केंद्र स्थिति और भयावह तब हो जाती है, जब आंगनवाड़ी के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और नगर परिषद द्वारा डाला गया कचरा इस स्थान को संक्रमण का केंद्र बना देता है। यहां मच्छर, मक्खियां और गंदगी बच्चों को बीमार करने के लिए काफी हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है। गर्भवती महिलाओं की जान भी जोखिम में इस केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। जर्जर भवन में बैठकर टीका लगवाना महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। यदि छत या दीवार गिर जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? — यह सवाल अब पूरे नगर में गूंज रहा है। प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ी चिंता स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो समय-समय पर निरीक्षण होता है, और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई। समाजसेवी संगठनों द्वारा कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है। नया भवन नहीं तो बड़ा हादसा तय! वार्ड क्रमांक-6 के नागरिकों की एक ही मांग — सुरक्षित नया आंगनवाड़ी भवन। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है, जिसकी कीमत मासूम जानों से चुकानी पड़ सकती है। प्रशासन से सीधा सवाल क्या किसी बच्चे की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन? क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? आखिर कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित भविष्य? जनता की अपील — अभी कार्रवाई करें, कल पछतावा न हो नगरवासियों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। क्योंकि… देश का भविष्य मलबे के ढेर में नहीं, सुरक्षित कक्षाओं में गढ़ा जाता है। मौत के मुहाने पर मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी, प्रशासन की चुप्पी बनी खतरा कैमोर। देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को जहां सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहीं कैमोर नगर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां मासूम बच्चे मौत के साए में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं — एक ऐसा सच, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप जाए। टूटी दीवारें, झुकी छत, चारों ओर फैली गंदगी और सीलन भरा माहौल… यह दृश्य किसी खंडहर का नहीं, बल्कि उस आंगनवाड़ी का है, जहां रोज़ दर्जनों मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना चाहिए। “नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे गीत यहां कटाक्ष बनकर रह जाते हैं, क्योंकि जब पढ़ाई का माहौल ही असुरक्षित हो, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है? जर्जर भवन बना जानलेवा खतरा स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह आंगनवाड़ी पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है। दीवारों में गहरी दरारें छत से लगातार टपकता पानी फर्श पर सीलन और कीचड़ चारों ओर गंदगी और दुर्गंध हर पल यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कचरे और आवारा पशुओं का अड्डा बना केंद्र स्थिति और भयावह तब हो जाती है, जब आंगनवाड़ी के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और नगर परिषद द्वारा डाला गया कचरा इस स्थान को संक्रमण का केंद्र बना देता है। यहां मच्छर, मक्खियां और गंदगी बच्चों को बीमार करने के लिए काफी हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है। गर्भवती महिलाओं की जान भी जोखिम में इस केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। जर्जर भवन में बैठकर टीका लगवाना महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। यदि छत या दीवार गिर जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? — यह सवाल अब पूरे नगर में गूंज रहा है। प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ी चिंता स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो समय-समय पर निरीक्षण होता है, और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई। समाजसेवी संगठनों द्वारा कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है। नया भवन नहीं तो बड़ा हादसा तय! वार्ड क्रमांक-6 के नागरिकों की एक ही मांग — सुरक्षित नया आंगनवाड़ी भवन। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है, जिसकी कीमत मासूम जानों से चुकानी पड़ सकती है। प्रशासन से सीधा सवाल क्या किसी बच्चे की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन? क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? आखिर कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित भविष्य? जनता की अपील — अभी कार्रवाई करें, कल पछतावा न हो नगरवासियों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। क्योंकि… देश का भविष्य मलबे के ढेर में नहीं, सुरक्षित कक्षाओं में गढ़ा जाता है।

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  • मौत के मुहाने पर मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी, प्रशासन की चुप्पी बनी खतरा कैमोर। देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को जहां सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहीं कैमोर नगर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां मासूम बच्चे मौत के साए में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं — एक ऐसा सच, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप जाए। टूटी दीवारें, झुकी छत, चारों ओर फैली गंदगी और सीलन भरा माहौल… यह दृश्य किसी खंडहर का नहीं, बल्कि उस आंगनवाड़ी का है, जहां रोज़ दर्जनों मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना चाहिए। “नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे गीत यहां कटाक्ष बनकर रह जाते हैं, क्योंकि जब पढ़ाई का माहौल ही असुरक्षित हो, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है? जर्जर भवन बना जानलेवा खतरा स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह आंगनवाड़ी पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है। दीवारों में गहरी दरारें छत से लगातार टपकता पानी फर्श पर सीलन और कीचड़ चारों ओर गंदगी और दुर्गंध हर पल यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कचरे और आवारा पशुओं का अड्डा बना केंद्र स्थिति और भयावह तब हो जाती है, जब आंगनवाड़ी के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और नगर परिषद द्वारा डाला गया कचरा इस स्थान को संक्रमण का केंद्र बना देता है। यहां मच्छर, मक्खियां और गंदगी बच्चों को बीमार करने के लिए काफी हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है। गर्भवती महिलाओं की जान भी जोखिम में इस केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। जर्जर भवन में बैठकर टीका लगवाना महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। यदि छत या दीवार गिर जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? — यह सवाल अब पूरे नगर में गूंज रहा है। प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ी चिंता स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो समय-समय पर निरीक्षण होता है, और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई। समाजसेवी संगठनों द्वारा कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है। नया भवन नहीं तो बड़ा हादसा तय! वार्ड क्रमांक-6 के नागरिकों की एक ही मांग — सुरक्षित नया आंगनवाड़ी भवन। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है, जिसकी कीमत मासूम जानों से चुकानी पड़ सकती है। प्रशासन से सीधा सवाल क्या किसी बच्चे की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन? क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? आखिर कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित भविष्य? जनता की अपील — अभी कार्रवाई करें, कल पछतावा न हो नगरवासियों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। क्योंकि… देश का भविष्य मलबे के ढेर में नहीं, सुरक्षित कक्षाओं में गढ़ा जाता है।
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    मौत के मुहाने पर मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी, प्रशासन की चुप्पी बनी खतरा
कैमोर।
देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को जहां सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहीं कैमोर नगर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां मासूम बच्चे मौत के साए में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं — एक ऐसा सच, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप जाए।
टूटी दीवारें, झुकी छत, चारों ओर फैली गंदगी और सीलन भरा माहौल… यह दृश्य किसी खंडहर का नहीं, बल्कि उस आंगनवाड़ी का है, जहां रोज़ दर्जनों मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना चाहिए।
“नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे गीत यहां कटाक्ष बनकर रह जाते हैं, क्योंकि जब पढ़ाई का माहौल ही असुरक्षित हो, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है?
जर्जर भवन बना जानलेवा खतरा
स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह आंगनवाड़ी पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है।
दीवारों में गहरी दरारें
छत से लगातार टपकता पानी
फर्श पर सीलन और कीचड़
चारों ओर गंदगी और दुर्गंध
हर पल यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
कचरे और आवारा पशुओं का अड्डा बना केंद्र
स्थिति और भयावह तब हो जाती है, जब आंगनवाड़ी के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और नगर परिषद द्वारा डाला गया कचरा इस स्थान को संक्रमण का केंद्र बना देता है।
यहां मच्छर, मक्खियां और गंदगी बच्चों को बीमार करने के लिए काफी हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है।
गर्भवती महिलाओं की जान भी जोखिम में
इस केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है।
जर्जर भवन में बैठकर टीका लगवाना महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है।
यदि छत या दीवार गिर जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? — यह सवाल अब पूरे नगर में गूंज रहा है।
प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ी चिंता
स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो समय-समय पर निरीक्षण होता है, और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई।
समाजसेवी संगठनों द्वारा कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है।
नया भवन नहीं तो बड़ा हादसा तय!
वार्ड क्रमांक-6 के नागरिकों की एक ही मांग — सुरक्षित नया आंगनवाड़ी भवन।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है, जिसकी कीमत मासूम जानों से चुकानी पड़ सकती है।
प्रशासन से सीधा सवाल
क्या किसी बच्चे की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन?
क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
आखिर कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित भविष्य?
जनता की अपील — अभी कार्रवाई करें, कल पछतावा न हो
नगरवासियों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके।
क्योंकि…
देश का भविष्य मलबे के ढेर में नहीं, सुरक्षित कक्षाओं में गढ़ा जाता है।
    user_Balkishan Namdev
    Balkishan Namdev
    Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • कटनी रिश्वत नहीं दी तो नौकरी पर संकट, जन अभियान परिषद की महिला परामर्शदाता का आरोप
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    कटनी रिश्वत नहीं दी तो नौकरी पर संकट, जन अभियान परिषद की महिला परामर्शदाता का आरोप
    user_विकास श्रीवास्तव
    विकास श्रीवास्तव
    पत्रकार कटनी नगर, कटनी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • *प्रेस नोट* *बिलहरी कुठला पुलिस द्वारा धोखाधड़ी करने वाले को किया गया गिरफ्तार* पुलिस अधीक्षक श्री मान अभिनय विश्वकर्मा (भा.पु.से.) द्वारा जिले के सभी थाना चौकी प्रभारियों को धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर शीघ्र गिरफ्तारी करने के निर्देश दिए थे इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डेहरिया,नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती नेहा पच्चिसीया,थाना प्रभारी कुठला राजेंद्र मिश्रा के मार्ग दर्शन में चौकी प्रभारी बिलहरी सुयश पाण्डेय व बिलहरी स्टाफ द्वारा धोखाधड़ी के आरोपी को गिरफ्तार किया है । घटना का विवरण: आवेदक राजेंद्र विश्वकर्मा पिता स्वर्गीय श्री रामपाल विश्वकर्मा उम्र 56 साल निवासी रोशन नगर के द्वारा दी गई लिखित आवेदन में बताया कि आर्यवत शिक्षा समिति रोशन नगर कटनी को पैसे की आवश्यकता होती है जीशान पिता कुश्तर उर्फ रहमान निवासी नजीराबाद जिला सतना द्वारा उक्त संस्था को डोनेशन दिलाने के नाम पर संस्था की एक्सिस बैंक का खाता प्राप्त कर संस्था के खाते में लेनदेन कर धोखाधड़ी किया है। प्रार्थी की शिकायत पर मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया विवेचना दौरान धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया गया है आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया जहां से आरोपी को पी. आर. में लेकर आरोपी से आगे की पूछताछ की जा रही है *सराहनीय भूमिका*: थाना प्रभारी कुठला निरीक्षक राजेंद्र मिश्रा, चौकी प्रभारी बिलहरी सुयश पांडे ,सहायक उप निरीक्षक दामोदर राव,प्रधान आरक्षक 33 धर्मेंद्र यादव ,प्रधान आरक्षक 654 भरत विश्वकर्मा,, आरक्षक 568 लव उपाध्याय, 708 संदीप भलावी डीबी भारती समाचार रिपोर्टर- लवलेश बर्मन कटनी
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    *प्रेस नोट* 
*बिलहरी कुठला पुलिस द्वारा धोखाधड़ी करने वाले को किया गया गिरफ्तार* 
पुलिस अधीक्षक श्री मान अभिनय विश्वकर्मा (भा.पु.से.) द्वारा जिले के सभी थाना चौकी प्रभारियों को धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर शीघ्र गिरफ्तारी करने के निर्देश दिए थे इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डेहरिया,नगर पुलिस अधीक्षक श्रीमती नेहा पच्चिसीया,थाना प्रभारी कुठला राजेंद्र मिश्रा के मार्ग दर्शन में चौकी प्रभारी बिलहरी सुयश पाण्डेय व बिलहरी स्टाफ द्वारा धोखाधड़ी के आरोपी को गिरफ्तार किया है ।
घटना का विवरण: आवेदक राजेंद्र विश्वकर्मा पिता स्वर्गीय श्री रामपाल विश्वकर्मा उम्र 56 साल निवासी रोशन नगर के द्वारा दी गई लिखित आवेदन में बताया कि आर्यवत शिक्षा समिति रोशन नगर कटनी को पैसे की आवश्यकता होती है जीशान पिता कुश्तर उर्फ रहमान निवासी नजीराबाद जिला सतना द्वारा उक्त संस्था को डोनेशन दिलाने के नाम पर संस्था की एक्सिस बैंक का खाता प्राप्त कर संस्था के खाते में लेनदेन कर धोखाधड़ी किया है। प्रार्थी की शिकायत पर मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया विवेचना दौरान धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया गया है आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया जहां से आरोपी को पी. आर. में लेकर आरोपी से आगे की पूछताछ की जा रही है 
*सराहनीय भूमिका*: थाना प्रभारी कुठला निरीक्षक राजेंद्र मिश्रा, चौकी प्रभारी बिलहरी सुयश पांडे ,सहायक उप निरीक्षक दामोदर राव,प्रधान आरक्षक 33 धर्मेंद्र यादव ,प्रधान आरक्षक 654 भरत विश्वकर्मा,, आरक्षक 568 लव उपाध्याय,  708 संदीप भलावी
डीबी भारती समाचार 
रिपोर्टर- लवलेश बर्मन
कटनी
    user_Lovelesh barman
    Lovelesh barman
    पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • ​रैपुरा-पन्ना मार्ग पर स्थित मोहंद्रा घाटी में आज मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। यहाँ 'जय हो' ट्रेवलर्स की एक यात्री बस और सामने से आ रहे ट्रक के बीच भीषण टक्कर हो गई। यह हादसा घाटी के एक खतरनाक मोड़ पर हुआ, जिससे बस में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया। ​​प्राप्त जानकारी के अनुसार, जय हो ट्रेवलर्स की यात्री बस कटनी से पन्ना की ओर आ रही थी। जैसे ही बस मोहंद्रा घाटी के मोड़ पर पहुँची, सामने से आ रहे ट्रक से उसकी सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहनों के अगले हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ​घटना के तुरंत बाद मार्ग से गुजर रहे राहगीरों ने मानवता दिखाते हुए तत्काल राहत कार्य शुरू किया। हादसे में घायल हुए यात्रियों को तुरंत बस से बाहर निकाला गया और सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुँच गई। ​घटना में कुछ यात्रियों को चोटें आई हैं, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है वही दुर्घटना के बाद मार्ग पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बनी रही, जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद सुचारू कराया। ​फिलहाल ​पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक रूप से घाटी के अंधे मोड़ को हादसे का कारण माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसा किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या तेज रफ्तार के कारण।
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    ​रैपुरा-पन्ना मार्ग पर स्थित मोहंद्रा घाटी में आज मंगलवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। यहाँ 'जय हो' ट्रेवलर्स की एक यात्री बस और सामने से आ रहे ट्रक के बीच भीषण टक्कर हो गई। यह हादसा घाटी के एक खतरनाक मोड़ पर हुआ, जिससे बस में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया।
​​प्राप्त जानकारी के अनुसार, जय हो ट्रेवलर्स की यात्री बस कटनी से पन्ना की ओर आ रही थी। जैसे ही बस मोहंद्रा घाटी के मोड़ पर पहुँची, सामने से आ रहे ट्रक से उसकी सीधी भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहनों के अगले हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
​घटना के तुरंत बाद मार्ग से गुजर रहे राहगीरों ने मानवता दिखाते हुए तत्काल राहत कार्य शुरू किया। हादसे में घायल हुए यात्रियों को तुरंत बस से बाहर निकाला गया और सूचना मिलते ही पुलिस टीम भी मौके पर पहुँच गई।
​घटना में कुछ यात्रियों को चोटें आई हैं, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है वही दुर्घटना के बाद मार्ग पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बनी रही, जिसे पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद सुचारू कराया।
​फिलहाल ​पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्राथमिक रूप से घाटी के अंधे मोड़ को हादसे का कारण माना जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हादसा किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ या तेज रफ्तार के कारण।
    user_Saurabh Singh
    Saurabh Singh
    पत्रकार शाहनगर, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र के ग्राम भजिया में 14 वर्षीय किशोर कृष्णा कोल पिता दुर्गा कोल 2 दिन से लापता है उसकी तलाश में स्थानीय पुलिस के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ( NDRF ) की टीम जुटी हुई है । जलाशय के किनारे किशोर की चप्पल मिलने के बाद डूबने की आशंका जताई जा रही है.......
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    कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र के ग्राम भजिया में 14 वर्षीय किशोर कृष्णा कोल पिता दुर्गा कोल 2 दिन से लापता है उसकी तलाश में स्थानीय पुलिस के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल ( NDRF ) की टीम जुटी हुई है । जलाशय के किनारे किशोर की चप्पल मिलने के बाद डूबने की आशंका जताई जा रही है.......
    user_Sachin kushwaha
    Sachin kushwaha
    बड़वारा, कटनी, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • सतगुरु रविदास जी की जयंती में समाज को एकत्रित करने का प्रयास UGC Act के बारे में कुछ जानकारी #bhimarmy #newsupdate #news #ᴛʀᴇᴅɪɴɢ #indianfashion
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    सतगुरु रविदास जी की जयंती में समाज को एकत्रित करने का  प्रयास  UGC Act के बारे में कुछ जानकारी #bhimarmy #newsupdate #news #ᴛʀᴇᴅɪɴɢ #indianfashion
    user_News7india
    News7india
    बड़वारा, कटनी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • Post by Rahul Lakhera
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    Post by Rahul Lakhera
    user_Rahul Lakhera
    Rahul Lakhera
    Actor Sihora, Jabalpur•
    7 hrs ago
  • मौत के मुहाने पर मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी, प्रशासन की चुप्पी बनी खतरा कैमोर। देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को जहां सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहीं कैमोर नगर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां मासूम बच्चे मौत के साए में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं — एक ऐसा सच, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप जाए। टूटी दीवारें, झुकी छत, चारों ओर फैली गंदगी और सीलन भरा माहौल… यह दृश्य किसी खंडहर का नहीं, बल्कि उस आंगनवाड़ी का है, जहां रोज़ दर्जनों मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना चाहिए। “नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे गीत यहां कटाक्ष बनकर रह जाते हैं, क्योंकि जब पढ़ाई का माहौल ही असुरक्षित हो, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है? जर्जर भवन बना जानलेवा खतरा स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह आंगनवाड़ी पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है। दीवारों में गहरी दरारें छत से लगातार टपकता पानी फर्श पर सीलन और कीचड़ चारों ओर गंदगी और दुर्गंध हर पल यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कचरे और आवारा पशुओं का अड्डा बना केंद्र स्थिति और भयावह तब हो जाती है, जब आंगनवाड़ी के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और नगर परिषद द्वारा डाला गया कचरा इस स्थान को संक्रमण का केंद्र बना देता है। यहां मच्छर, मक्खियां और गंदगी बच्चों को बीमार करने के लिए काफी हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है। गर्भवती महिलाओं की जान भी जोखिम में इस केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। जर्जर भवन में बैठकर टीका लगवाना महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है। यदि छत या दीवार गिर जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? — यह सवाल अब पूरे नगर में गूंज रहा है। प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ी चिंता स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो समय-समय पर निरीक्षण होता है, और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई। समाजसेवी संगठनों द्वारा कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है। नया भवन नहीं तो बड़ा हादसा तय! वार्ड क्रमांक-6 के नागरिकों की एक ही मांग — सुरक्षित नया आंगनवाड़ी भवन। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है, जिसकी कीमत मासूम जानों से चुकानी पड़ सकती है। प्रशासन से सीधा सवाल क्या किसी बच्चे की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन? क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है? आखिर कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित भविष्य? जनता की अपील — अभी कार्रवाई करें, कल पछतावा न हो नगरवासियों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके। क्योंकि… देश का भविष्य मलबे के ढेर में नहीं, सुरक्षित कक्षाओं में गढ़ा जाता है।
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    मौत के मुहाने पर मासूम: कैमोर वार्ड-6 की जर्जर आंगनवाड़ी, प्रशासन की चुप्पी बनी खतरा
कैमोर।
देश का भविष्य कहे जाने वाले नन्हे-मुन्ने बच्चों को जहां सुरक्षित भवन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर शिक्षा मिलनी चाहिए, वहीं कैमोर नगर के खलवारा बाजार स्थित वार्ड क्रमांक-6 की आंगनवाड़ी इन तमाम दावों की पोल खोल रही है। यहां मासूम बच्चे मौत के साए में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं — एक ऐसा सच, जिसे देखकर किसी भी संवेदनशील व्यक्ति का दिल कांप जाए।
टूटी दीवारें, झुकी छत, चारों ओर फैली गंदगी और सीलन भरा माहौल… यह दृश्य किसी खंडहर का नहीं, बल्कि उस आंगनवाड़ी का है, जहां रोज़ दर्जनों मासूम बच्चों का भविष्य गढ़ा जाना चाहिए।
“नन्हा मुन्ना राही हूं, देश का सिपाही हूं…” जैसे गीत यहां कटाक्ष बनकर रह जाते हैं, क्योंकि जब पढ़ाई का माहौल ही असुरक्षित हो, तो देश का भविष्य कैसे सुरक्षित रह सकता है?
जर्जर भवन बना जानलेवा खतरा
स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह आंगनवाड़ी पूर्व उप स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में संचालित हो रही है, जिसकी हालत बेहद खराब है।
दीवारों में गहरी दरारें
छत से लगातार टपकता पानी
फर्श पर सीलन और कीचड़
चारों ओर गंदगी और दुर्गंध
हर पल यह आशंका बनी रहती है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
कचरे और आवारा पशुओं का अड्डा बना केंद्र
स्थिति और भयावह तब हो जाती है, जब आंगनवाड़ी के आसपास आवारा पशुओं का जमावड़ा और नगर परिषद द्वारा डाला गया कचरा इस स्थान को संक्रमण का केंद्र बना देता है।
यहां मच्छर, मक्खियां और गंदगी बच्चों को बीमार करने के लिए काफी हैं। ऐसे में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाना महज औपचारिकता बनकर रह गया है।
गर्भवती महिलाओं की जान भी जोखिम में
इस केंद्र में हर मंगलवार को गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है।
जर्जर भवन में बैठकर टीका लगवाना महिलाओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा है।
यदि छत या दीवार गिर जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी? — यह सवाल अब पूरे नगर में गूंज रहा है।
प्रशासन की चुप्पी बनी सबसे बड़ी चिंता
स्थानीय लोगों का आरोप है कि न तो समय-समय पर निरीक्षण होता है, और न ही शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई।
समाजसेवी संगठनों द्वारा कई बार आवाज़ उठाई गई, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते स्थिति जस की तस बनी हुई है।
नया भवन नहीं तो बड़ा हादसा तय!
वार्ड क्रमांक-6 के नागरिकों की एक ही मांग — सुरक्षित नया आंगनवाड़ी भवन।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में तब्दील हो सकती है, जिसकी कीमत मासूम जानों से चुकानी पड़ सकती है।
प्रशासन से सीधा सवाल
क्या किसी बच्चे की जान जाने के बाद जागेगा प्रशासन?
क्या किसी हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
आखिर कब मिलेगा बच्चों को सुरक्षित भविष्य?
जनता की अपील — अभी कार्रवाई करें, कल पछतावा न हो
नगरवासियों ने जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग से तत्काल संज्ञान लेकर नए भवन की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिल सके।
क्योंकि…
देश का भविष्य मलबे के ढेर में नहीं, सुरक्षित कक्षाओं में गढ़ा जाता है।
    user_Balkishan Namdev
    Balkishan Namdev
    Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
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