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धौलपुर जिले की सर्मथुरा रोड पर पानी भर गया है, जिसके कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
रोहित वर्मा
धौलपुर जिले की सर्मथुरा रोड पर पानी भर गया है, जिसके कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
- रोहित वर्माबारी, धौलपुर, राजस्थान👏9 hrs ago
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- सरकार को खुली चेतावनी! कलेक्ट्रेट पर गरजे मंत्रालयिक कर्मचारी, बोले- अब आर-पार की लड़ाई होगी सरकार को खुली चेतावनी! कलेक्ट्रेट पर गरजे मंत्रालयिक कर्मचारी, बोले- अब आर-पार की लड़ाई होगी धौलपुर में पंचायती राज संस्थाओं के मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने विभाग पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा और साफ कहा कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने जॉब चार्ट, पदोन्नति, ग्रेड पे वृद्धि, स्थानांतरण नीति, हार्ड ड्यूटी अलाउंस सहित विभिन्न मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की और "स्वाभिमान बचाओ आंदोलन" को मजबूत करने का संकल्प लिया।2
- धौलपुर जिले के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज के सरकारी अस्पताल में बायोमेडिकल कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहाँ मरीजों को स्वस्थ करने का दावा किया जाता है, वहीं अस्पताल परिसर में खुले में पड़ा कचरा लगातार संक्रमण को बढ़ावा दे रहा है। यह स्थिति जिला अस्पताल में इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण के दावों की पोल खोल रही है। खुले में पड़े इस कचरे से न सिर्फ स्वच्छता व्यवस्था की कमी उजागर होती है, बल्कि संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ रहा है। यहाँ तक कि बेजुबान गायें भी इस कचरे में मुँह मार रही हैं और प्लास्टिक खा रही हैं। एक अन्य गंभीर पहलू यह है कि तीन दिन पूर्व हुई बारिश के कारण कचरे का संक्रमण पास के तालाब के पानी में मिल गया है, जिससे संक्रमण और तेज़ी से फैलने की संभावना है। नियमों के अनुसार, अस्पताल में पीले, लाल और सफेद रंग के बैगों में अलग-अलग प्रकार के बायोमेडिकल कचरे का संग्रह किया जाना चाहिए, और फिर उसका वैज्ञानिक तरीके से अधिकृत एजेंसी द्वारा निस्तारण होना चाहिए। लेकिन ये तस्वीरें स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि व्यवस्था में बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों ने परिसर में फैली गंदगी और खुले में पड़े कचरे से संक्रमण फैलने का खतरा जताया है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कचरा प्रबंधन के लिए स्पष्ट नियम और व्यवस्था मौजूद है, तो फिर यह लापरवाही क्यों हो रही है? सभी की निगाहें अब इस पर टिकी हैं कि अस्पताल और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और मरीजों की सुरक्षा के लिए कचरा प्रबंधन व्यवस्था को कितना दुरुस्त कर पाता है।2
- हिमाचल प्रदेश में करोड़ों रुपये की चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस घटना के संबंध में एक व्यक्ति को उस समय पकड़ा गया, जब वह चोरी का सोना नकली प्लास्टर में छिपाकर ले जा रहा था।1
- धौलपुर जिले की महत्वाकांक्षी चंबल लिफ्ट सिंचाई एवं पेयजल परियोजना में ₹861 करोड़ के बड़े घोटाले और व्यापक भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। राजाखेड़ा कस्बे में बन रही डिग्गियों के निर्माण में ठेकेदार द्वारा IS मानकों के विपरीत घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ठेकेदार द्वारा निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है। डिग्गी की नींव और दीवार में IS 1127 ग्रेड के हार्ड ग्रेनाइट पत्थर के बजाय स्थानीय बीहड़ से लाए गए कमजोर पत्थर लगाए जा रहे हैं, जो ग्रामीणों के अनुसार हाथ से दबाने पर ही टूट जाते हैं। इसी तरह, M25 ग्रेड कंक्रीट के स्थान पर बिना सही अनुपात के सीमेंट-बजरी मिलाकर ढलाई की जा रही है, वह भी कच्ची मिट्टी के ऊपर, जिससे दीवारों की गुणवत्ता अत्यंत कमजोर हो रही है। नींव में ईंट-पत्थर का भी कोई उपयोग नहीं किया जा रहा है। इस घटिया निर्माण के कारण बड़े पैमाने पर जनहानि का खतरा मंडरा रहा है। परियोजना के तहत बनने वाली प्रत्येक डिग्गी में लगभग 10 लाख लीटर पानी जमा होगा। यदि ये घटिया टैंक फटते हैं, तो आसपास के खेतों और आबादी वाले इलाकों में भारी जान-माल का नुकसान हो सकता है। प्रत्येक डिग्गी से 1600 बीघा कृषि भूमि को सिंचित किया जाना है। स्थानीय किसान भोलाराम ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दिन में इंजीनियर मौके पर नहीं आते और रात के समय घटिया सामग्री से काम किया जाता है। जब उन्होंने मेट से टेस्ट रिपोर्ट मांगी तो उन्हें धमकाकर भगा दिया गया, जिसे उन्होंने ₹861 करोड़ की इस योजना में "खुली लूट" बताया। तकनीकी मानदंडों की भी लगातार अनदेखी हो रही है; नियमानुसार पत्थर, सीमेंट और सरिये की लैब टेस्ट रिपोर्ट साइट पर होनी चाहिए, लेकिन मौके पर कोई रिपोर्ट नहीं मिली। इसके अलावा, थर्ड पार्टी क्वालिटी मॉनिटर की टीम भी पिछले दो महीनों से निर्माण स्थल पर नहीं आई है। चंबल लिफ्ट योजना 23 नवंबर 2017 को शुरू की गई थी, जिसकी अनुमानित लागत ₹772.52 करोड़ थी और इसके तहत कुल 108 डिग्गियां बननी हैं। इस परियोजना का लक्ष्य मार्च 2026 तक पूरा होना है, जिससे जिले के 256 गांवों की लगभग 39,980 हेक्टेयर भूमि को फव्वारा पद्धति से सिंचित किया जा सकेगा, जिसमें राजाखेड़ा के 83 गांव भी शामिल हैं। डिग्गियां मुख्य मार्गों से लगभग 100 से 200 मीटर दूर खेतों में बनाई जा रही हैं और बीहड़ में 300 mcft रॉ वॉटर रिजर्वेशन भी बना है। अब तक 60 डिग्गियां बन चुकी हैं, जिनमें से 15 का परीक्षण सफल रहा है। हालांकि, यह परियोजना शुरुआत से ही धीमी गति से चल रही है, और 8-9 सालों में केवल 50% काम ही पूरा हो पाया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरी योजना की गुणवत्ता की जांच के लिए सोशल ऑडिट कराई जाए।1
- राजस्थान के न्यायाधिपति एवं धौलपुर संरक्षक चंद्रशेखर शर्मा ने एक दिवसीय न्यायिक क्षेत्र के निरीक्षण के लिए धौलपुर का दौरा किया। सर्किट हाउस पहुंचने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव मांगो, धौलपुर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष हरिओम शर्मा, बाड़ी अभिभाषक संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र जादौन, जिला कलेक्टर श्रीनिधि बीटी और जिला पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान सहित अन्य अधिकारियों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर नवीन न्यायालय परिसर का निरीक्षण करते हुए, धौलपुर अभिभाषक संघ ने न्यायाधिपति को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें अधिवक्ताओं के लिए नवीन न्यायालय परिसर में उपयुक्त चैंबर, पक्का बरामदा या 100 गुणा 250 बैठक हेतु भूमि उपलब्ध कराने और उत्तम पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई। संघ ने धौलपुर में एमएसीटी न्यायालय और श्रम न्यायालय में शीघ्र अधिकारी नियुक्त करने की भी बात कही। न्यायाधिपति चंद्रशेखर शर्मा ने धौलपुर न्यायिक क्षेत्र में बार-बेंच को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि उनका प्रयास है कि पीड़ितों को शीघ्र, सुलभ और सस्ता न्याय मिल सके। उन्होंने धौलपुर अभिभाषक संघ द्वारा बताई गई समस्याओं के शीघ्र निराकरण का आश्वासन दिया और अधिवक्ताओं को बैठने के लिए जमीन उपलब्ध कराने की बात भी कही। धौलपुर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष हरिओम शर्मा ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं अनंतराम त्यागी, रामनिवास परमार, विश्वनाथ बुद्धराजा, नत्थी लाल शर्मा, हरवीर सिंह सिकरवार, हरिशंकर मुद्गल, बृजेंद्र रावत और अतुल कुमार भार्गव के साथ मिलकर न्यायाधिपति शर्मा को नवीन न्यायालय परिसर की भौगोलिक और प्रायोगिक समस्याओं से अवगत कराया। इस दौरान धौलपुर अभिभाषक संघ की ओर से न्यायाधिपति चंद्रशेखर शर्मा का माला, साफा और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। धौलपुर पहुंचने पर न्यायाधिपति शर्मा की अगवानी में जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव मांगो, मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट सेला फौजदार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोपाल सैनी, न्यायाधीश राकेश गोयल सहित धौलपुर व बाड़ी के न्यायिक अधिकारी, न्यायालय प्रबंधक बृजेश शर्मा, न्यायिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ओमबाबू शर्मा, वरिष्ठ मूंसरिम राजीव शर्मा और विनय शुक्ला उपस्थित रहे। अभिभाषक संघ बाड़ी ने भी अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह जादौन के नेतृत्व में न्यायाधिपति का माला, साफा और स्मृति चिन्ह के माध्यम से सम्मान किया। अंत में, धौलपुर अभिभाषक संघ के महासचिव अरविंद सिंह गुर्जर ने सभी न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों व वरिष्ठ अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश त्यागी, उपाध्यक्ष हेमंत पचौरी, कोषाध्यक्ष विनय शर्मा, संयुक्त सचिव बृजेश बघेल, पुस्तकालय सचिव प्रशांत बघेल और ऑडिटर विवेक व्यास भी उपस्थित थे।3
- राजस्थान के न्यायाधिपति चंद्रशेखर शर्मा ने एक दिवसीय न्यायिक क्षेत्र के निरीक्षण के लिए धौलपुर का दौरा किया, जहाँ जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव मांगो, धौलपुर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष हरिओम शर्मा, बाड़ी अभिभाषक संघ के अध्यक्ष सत्येंद्र जादौन, जिला कलेक्टर श्रीनिधि बीटी और जिला पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान सहित कई अधिकारियों ने सर्किट हाउस पहुँचने पर माला पहनाकर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर नवीन न्यायालय परिसर का निरीक्षण करते हुए, धौलपुर अभिभाषक संघ ने न्यायाधिपति चंद्रशेखर शर्मा को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें अधिवक्ताओं के लिए उपयुक्त चैंबर, पक्का बरामदा या 100 गुणा 250 फीट का बैठक हेतु हॉल जैसी भूमि उपलब्ध कराने की मांग की गई। संघ ने न्यायालय में अधिवक्ताओं के लिए उत्तम पेयजल व्यवस्था और एमएसीटी न्यायालय व श्रम न्यायालय धौलपुर में शीघ्र अधिकारियों की नियुक्ति की भी मांग की। धौलपुर अभिभाषक संघ के अध्यक्ष हरिओम शर्मा ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं अनंतराम त्यागी, रामनिवास परमार, विश्वनाथ बुद्धराजा, नत्थी लाल शर्मा, हरवीर सिंह सिकरवार, हरिशंकर मुद्गल, बृजेंद्र रावत और अतुल कुमार भार्गव के साथ मिलकर न्यायाधिपति को नवीन न्यायालय परिसर में भौगोलिक और व्यावहारिक समस्याओं से अवगत कराया। न्यायाधिपति चंद्रशेखर शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि धौलपुर न्यायिक क्षेत्र में धौलपुर बार-बेंच सर्वोपरि है, और यह उनका धौलपुर की धरती पर पहला अनुभव है। उन्होंने यहाँ के न्यायिक, प्रशासनिक और पुलिस तीनों महकमों के शीर्ष अधिकारियों को श्रेष्ठ बताया। उन्होंने शीघ्र, सुलभ और सस्ता न्याय उपलब्ध कराने के अपने प्रयास पर जोर दिया और आश्वासन दिया कि धौलपुर अभिभाषक संघ द्वारा बताई गई समस्याओं का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के लिए वह पूर्ण रूप से प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने विशेष रूप से अधिवक्ताओं को बैठने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया। इस दौरान, धौलपुर अभिभाषक संघ ने माला, साफा और स्मृति चिन्ह के माध्यम से न्यायाधिपति चंद्रशेखर शर्मा का सम्मान किया। धौलपुर पहुँचने पर उनका स्वागत जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव मांगो, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सेला फौजदार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोपाल सैनी, न्यायाधीश राकेश गोयल सहित धौलपुर व बाड़ी के न्यायिक अधिकारियों, न्यायालय प्रबंधक बृजेश शर्मा, न्यायिक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ओमबाबू शर्मा, वरिष्ठ मूसरिम राजीव शर्मा और विनय शुक्ला ने किया। बाड़ी अभिभाषक संघ की ओर से अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह जादौन के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने भी माला, साफा और स्मृति चिन्ह भेंट कर न्यायाधिपति का सम्मान किया। अंत में, धौलपुर अभिभाषक संघ के महासचिव अरविंद सिंह गुर्जर ने सभी न्यायिक, प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश त्यागी, उपाध्यक्ष हेमंत पचौरी, कोषाध्यक्ष विनय शर्मा, संयुक्त सचिव बृजेश बघेल, पुस्तकालय सचिव प्रशांत बघेल और ऑडिटर विवेक व्यास सहित कई न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और अधिवक्ता उपस्थित रहे।1
- धौलपुर के राजाखेड़ा कस्बे में रविवार को भगवान परशुराम जयंती के उपलक्ष्य में एक विशाल और भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम बन गई। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में विप्रजन और श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे पूरे नगर में धार्मिक उल्लास का वातावरण छा गया और भगवान परशुराम के जयघोषों से पूरा नगर गूंज उठा। शोभायात्रा का शुभारंभ बिचौला रोड स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर से वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुआ। शोभायात्रा के अध्यक्ष शुनील कौशिक ने इसकी जानकारी दी। इस अवसर पर संत पागलदास महाराज, भाजपा नेत्री नीरजा अशोक शर्मा, रूपाली दीक्षित, खेरागढ़ के युवा नेता अभय उमेश सैंथिया, पवन उपाध्याय, देवेंद्र मुद्गल मीथल शुक्ला, कैलाश चिहार, उत्तम दीक्षित, अनिल अवस्थी, गौरीशंकर उपाध्याय, अशोक पाराशर, दिलीप पाराशर, पातीराम मुद्गल, बृजमोहन मुद्गल, राम अजीत चिहारनायला खिलाड़ी मुद्गल, रणवीर डिंडोतिया, मनिया तथा राजाखेड़ा के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों विप्र बंधुओं सहित समाज के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अतिथियों ने भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण कर शोभायात्रा को आगे बढ़ाया। बिचौला रोड से शुरू हुई यह शोभायात्रा पुलिस चौकी, रामखिलाड़ी चौराहा, मुख्य बाजार और नगर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा का समापन आगरा बस स्टैंड स्थित परशुराम धर्मशाला में हुआ, जहाँ श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी वितरण का आयोजन भी किया गया। नगर भ्रमण के दौरान विभिन्न स्थानों पर सर्वसमाज और सर्वधर्म के लोगों ने श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। कई सामाजिक संगठनों ने शरबत और शीतल जल सेवा की व्यवस्था की। इस दौरान परशुराम धर्मशाला में पंडित मलखान सिंह नायला वालों की तरफ से शोभायात्रा में शामिल सभी व्यक्तियों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। शोभायात्रा में दो दर्जन से अधिक धार्मिक, सांस्कृतिक और पौराणिक विषयों पर आधारित आकर्षक झांकियाँ शामिल थीं, जिन्होंने लोगों का मन मोह लिया। सजीव प्रस्तुतियों और सुंदर सजावट से सुसज्जित ये झाँकियाँ दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। शोभायात्रा में सबसे पीछे चल रही भगवान परशुराम की भव्य चित्र झाँकी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र रही, जिस पर श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर आरती उतारी और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। शोभायात्रा के दौरान लगातार "भगवान परशुराम की जय" तथा "विप्र समाज एकता जिंदाबाद" के जयघोष गूँजते रहे। श्रद्धालु हाथों में धर्म ध्वज लिए भक्ति गीतों और बैंड-बाजों की मधुर धुनों पर आगे बढ़ते रहे। इस पूरे आयोजन ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और समाज की एकजुटता का संदेश दिया।4
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