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bhadekh diwara gadi mohalla jila jalaun uttar pradesh 285125
Dhruv Nishad
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More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- खास खबर है जालौन जिले के जालौन कोतवाली क्षेत्र से जुड़ी हुई जहां आज़ सुबह सुबह विभाग का प्रशासनिक हंटर चला है पीटीओ विनय कुमार पाण्डेय ने बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के पास से ओवरलोड वाहनों को पकड़ कर कोतवाली जालौन में खड़ा कराया है1
- जालौन के उरई कोतवाली क्षेत्र में कालपी रोड स्थित बृजवासी रेस्टोरेंट के सामने बुधवार को ओवरटेक विवाद को लेकर बाइक और कार सवारों के बीच जमकर मारपीट हुई। सड़क के बीचों-बीच हुए इस हंगामे के कारण कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कालपी रोड पर एक तेज रफ्तार कार चालक और बाइक सवार के बीच ओवरटेक को लेकर कहासुनी हुई। यह विवाद जल्द ही बढ़ गया और दोनों पक्षों ने अपने वाहन रोककर सड़क पर उतर आए। कुछ ही देर में दोनों तरफ से अन्य लोग भी मौके पर पहुंच गए और हाथापाई शुरू हो गई। इस मारपीट से राहगीरों में दहशत फैल गई और यातायात में बाधा उत्पन्न हुई।1
- लखनऊ सदन में क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर विधायक विनोद चतुर्वेदी ने जोरदार ढंग से अपनी बात रखी। उन्होंने बरही बंबा से बसरेही तक लगभग 23 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण की माँग उठाते हुए कहा कि यह सड़क क्षेत्र की जनता के लिए अत्यंत आवश्यक है। विधायक ने बताया कि इस विषय को आदरणीय विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना के माध्यम से संबंधित मंत्री के समक्ष रखा गया, जिस पर मंत्री द्वारा सकारात्मक आश्वासन दिया गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि शीघ्र ही मार्ग निर्माण की स्वीकृति प्राप्त होगी और कार्य प्रारंभ कराया जाएगा। सड़क बनने से क्षेत्र में आवागमन सुगम होगा, ग्रामीणों को राहत मिलेगी तथा क्षेत्र के विकास को नई दिशा प्राप्त होगी।1
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- शादी के बाद दूल्हा निकला किन्नर तो शादी में आए किन्नर नेक लेने पता चला कि वह किन्नर है तो अपने किन्नर साथ ले गए। यह मामला बाराबंकी का है जहां शादी के दौरान पता चला की लड़का किन्नर तो लड़की वालों ने लड़का को पीटा पुलिस आने के पहले शादी में नेक लेने के लिए वहां किन्नर आ गए और वह अपने साथ ले गए । वह लड़का किन्नर के साथ ढोलक बा साथ में घूमते थे।।1
- *🌿 श्री कृष्ण कहते हैं 🌿* ✨ "*आशा* और *विश्वास* कभी गलत नहीं होते..!! ये हम पर निर्भर करता है कि, हमने *आशा* किससे की और *विश्वास* किस पर किया..!!" 🌸 *--------------------------------* *❤️ True 👍 False*1
- जालौन दिव्यांग युवक ने पुलिस और प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगाया, दरोगा पर समझौते का आरोप, डीएम से लगाई गुहार जालौन जिले के उरई तहसील क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ एक दिव्यांग युवक ने पुलिस और प्रशासन पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। पीड़ित युवक का कहना है कि थाने में तैनात दरोगा द्वारा मामले में समझौते का दबाव बनाने को लेकर नोटिस भेजे जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, ग्राम डकोर निवासी अनुराग पुत्र रविन्द्र कुमार, जो दिव्यांग हैं और पिछले वर्ष सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए थे, ने जिलाधिकारी जालौन को एक प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। दिव्यांग अनुराग का कहना है कि थाना डकोर में तैनात दरोगा पुष्पेन्द्र सिंह तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें बार-बार 126/135 बी.एन.एस. के नोटिस भेजे जा रहे हैं। अनुराग का आरोप है कि ये नोटिस उन्हें परेशान करने और एक पारिवारिक विवाद में समझौते के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से भेजे जा रहे हैं। दरअसल, अनुराग के परिवार का लैट्रिन गड्ढे के विवाद को लेकर मामला पहले से ही माननीय सिविल जज जूनियर डिवीजन जालौन एवं सीजेएम न्यायालय उरई में विचाराधीन है। अनुराग ने बताया कि वह कानून का सम्मान करने वाला नागरिक है और न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद स्थानीय पुलिस उन्हें परेशान कर रही है। अनुराग ने यह भी कहा है कि वह वर्तमान में चलने-फिरने में असमर्थ हैं और उनका इलाज अब भी जारी है। उन्होंने अपने चिकित्सा दस्तावेज और कोर्ट के कागजात भी जिलाधिकारी को सौंपे हैं। अनुराग ने जिलाधिकारी जालौन से मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।1
- जिला जालौन के नगर जालौन में सोमवार को साप्ताहिक बंदी घोषित होने के बावजूद बाजार खुला रहना शासन-प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जब नियम के अनुसार बंदी का दिन तय है, तो उसका पालन कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है। यदि बाजार खुलेआम संचालित हो रहा है और कोई अधिकारी निरीक्षण या कार्रवाई नहीं कर रहा, तो इसका अर्थ है कि या तो बंदी के नियमों की अनदेखी हो रही है या फिर प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की कमी है। साप्ताहिक बंदी का उद्देश्य दुकानदारों को विश्राम देना, यातायात व भीड़ नियंत्रण तथा व्यवस्था बनाए रखना होता है, लेकिन नियम लागू न होने से इसका महत्व खत्म हो जाता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय प्रशासन, नगर पालिका व श्रम विभाग को संयुक्त रूप से जांच कर नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि सभी व्यापारियों पर एक समान नियम लागू हो सके और बंदी सिर्फ कागजों तक सीमित न रह जाए।1