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दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत फेकला थाना क्षेत्र के सिनुरगोपाल गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बेटी अपने दिवंगत पिता की पैतृक संपत्ति के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही है। आराधना कुमारी नामक इस बेटी का आरोप है कि उसे न केवल उसके हिस्से की जमीन से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है, बल्कि उसके अस्तित्व और पहचान पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामला इतना गंभीर है कि उसे अपने ही पैतृक घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया जा रहा, जो बेटियों के अधिकारों और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला स्वर्गीय जय गोविंद झा के परिवार से संबंधित है। बताया जाता है कि जय गोविंद झा के दो पुत्र थे—मारकंडे झा और मंगल झा। मंगल झा के दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं, जबकि मारकंडे झा की एकमात्र संतान आराधना कुमारी हैं, जिनके कोई भाई नहीं हैं। आराधना के पिता मारकंडे झा का निधन वर्षों पहले हो गया था, और कुछ वर्ष पूर्व उनकी माता का भी निधन हो गया। माता-पिता के गुजर जाने के बाद जब आराधना ने अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की, तो उनके चाचा और अन्य परिजनों ने उन्हें पहचानने से ही इनकार कर दिया। आराधना बताती हैं कि बचपन से शादी के बाद तक वह अपने पैतृक गांव सिनुरगोपाल आती-जाती रही हैं और गांव के लोग उन्हें मारकंडे झा की बेटी के रूप में ही जानते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत में संपत्ति के एक हिस्से को करीब 10 लाख रुपये में देने की बात हुई थी, लेकिन जब उन्होंने अपनी वैध हिस्सेदारी पर जोर दिया और पैसे पर समझौता करने से इनकार किया, तो उन्हें पहचानने से मुकर गए। मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया, जब 13 जून 2026 को आराधना अपने पैतृक घर के आंगन में जाने पहुंचीं। पीड़िता का आरोप है कि उनके चाचा, चाची और चाचा के पुत्र-पुत्रियों ने उन्हें जबरन घर से बाहर निकाल दिया और विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार व मारपीट भी की। मजबूरन, उन्हें थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगानी पड़ी। गांव के अधिकांश लोग और समाज के बुजुर्ग भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि आराधना, मारकंडे झा की पुत्री हैं और उन्हें अपने पिता की संपत्ति में कानूनी व नैतिक अधिकार मिलना चाहिए। यह पूरा मामला एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर रहा है कि जब कानून बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार देता है, तब भी कई बेटियां अपने ही घर में अपने हक के लिए संघर्ष क्यों कर रही हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कर पीड़ित बेटी को न्याय दिलाया जाएगा, क्योंकि बेटियों का अधिकार छीना नहीं जा सकता। अब देखना यह होगा कि वर्षों से पहचान और पैतृक संपत्ति के लिए संघर्ष कर रही आराधना कुमारी को कब न्याय मिलता है और क्या उन्हें अपने पिता की विरासत में उनका वैधानिक अधिकार मिल पाता है या नहीं।

1 hr ago
user_Lakshman Kumar Dev
Lakshman Kumar Dev
Local News Reporter गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
1 hr ago

दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत फेकला थाना क्षेत्र के सिनुरगोपाल गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बेटी अपने दिवंगत पिता की पैतृक संपत्ति के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही है। आराधना कुमारी नामक इस बेटी का आरोप है कि उसे न केवल उसके हिस्से की जमीन से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है, बल्कि उसके अस्तित्व और पहचान पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामला इतना गंभीर है कि उसे अपने ही पैतृक घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया जा रहा, जो बेटियों के अधिकारों और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला स्वर्गीय जय गोविंद झा के परिवार से संबंधित है। बताया जाता है कि जय गोविंद झा के दो

पुत्र थे—मारकंडे झा और मंगल झा। मंगल झा के दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं, जबकि मारकंडे झा की एकमात्र संतान आराधना कुमारी हैं, जिनके कोई भाई नहीं हैं। आराधना के पिता मारकंडे झा का निधन वर्षों पहले हो गया था, और कुछ वर्ष पूर्व उनकी माता का भी निधन हो गया। माता-पिता के गुजर जाने के बाद जब आराधना ने अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की, तो उनके चाचा और अन्य परिजनों ने उन्हें पहचानने से ही इनकार कर दिया। आराधना बताती हैं कि बचपन से शादी के बाद तक वह अपने पैतृक गांव सिनुरगोपाल आती-जाती रही हैं और गांव के लोग उन्हें मारकंडे झा की बेटी के रूप में ही जानते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि

पंचायत में संपत्ति के एक हिस्से को करीब 10 लाख रुपये में देने की बात हुई थी, लेकिन जब उन्होंने अपनी वैध हिस्सेदारी पर जोर दिया और पैसे पर समझौता करने से इनकार किया, तो उन्हें पहचानने से मुकर गए। मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया, जब 13 जून 2026 को आराधना अपने पैतृक घर के आंगन में जाने पहुंचीं। पीड़िता का आरोप है कि उनके चाचा, चाची और चाचा के पुत्र-पुत्रियों ने उन्हें जबरन घर से बाहर निकाल दिया और विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार व मारपीट भी की। मजबूरन, उन्हें थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगानी पड़ी। गांव के अधिकांश लोग और समाज के बुजुर्ग भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि आराधना, मारकंडे झा की पुत्री हैं

और उन्हें अपने पिता की संपत्ति में कानूनी व नैतिक अधिकार मिलना चाहिए। यह पूरा मामला एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर रहा है कि जब कानून बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार देता है, तब भी कई बेटियां अपने ही घर में अपने हक के लिए संघर्ष क्यों कर रही हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कर पीड़ित बेटी को न्याय दिलाया जाएगा, क्योंकि बेटियों का अधिकार छीना नहीं जा सकता। अब देखना यह होगा कि वर्षों से पहचान और पैतृक संपत्ति के लिए संघर्ष कर रही आराधना कुमारी को कब न्याय मिलता है और क्या उन्हें अपने पिता की विरासत में उनका वैधानिक अधिकार मिल पाता है या नहीं।

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  • दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत फेकला थाना क्षेत्र के सिनुरगोपाल गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बेटी अपने दिवंगत पिता की पैतृक संपत्ति के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही है। आराधना कुमारी नामक इस बेटी का आरोप है कि उसे न केवल उसके हिस्से की जमीन से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है, बल्कि उसके अस्तित्व और पहचान पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामला इतना गंभीर है कि उसे अपने ही पैतृक घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया जा रहा, जो बेटियों के अधिकारों और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला स्वर्गीय जय गोविंद झा के परिवार से संबंधित है। बताया जाता है कि जय गोविंद झा के दो पुत्र थे—मारकंडे झा और मंगल झा। मंगल झा के दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं, जबकि मारकंडे झा की एकमात्र संतान आराधना कुमारी हैं, जिनके कोई भाई नहीं हैं। आराधना के पिता मारकंडे झा का निधन वर्षों पहले हो गया था, और कुछ वर्ष पूर्व उनकी माता का भी निधन हो गया। माता-पिता के गुजर जाने के बाद जब आराधना ने अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की, तो उनके चाचा और अन्य परिजनों ने उन्हें पहचानने से ही इनकार कर दिया। आराधना बताती हैं कि बचपन से शादी के बाद तक वह अपने पैतृक गांव सिनुरगोपाल आती-जाती रही हैं और गांव के लोग उन्हें मारकंडे झा की बेटी के रूप में ही जानते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत में संपत्ति के एक हिस्से को करीब 10 लाख रुपये में देने की बात हुई थी, लेकिन जब उन्होंने अपनी वैध हिस्सेदारी पर जोर दिया और पैसे पर समझौता करने से इनकार किया, तो उन्हें पहचानने से मुकर गए। मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया, जब 13 जून 2026 को आराधना अपने पैतृक घर के आंगन में जाने पहुंचीं। पीड़िता का आरोप है कि उनके चाचा, चाची और चाचा के पुत्र-पुत्रियों ने उन्हें जबरन घर से बाहर निकाल दिया और विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार व मारपीट भी की। मजबूरन, उन्हें थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगानी पड़ी। गांव के अधिकांश लोग और समाज के बुजुर्ग भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि आराधना, मारकंडे झा की पुत्री हैं और उन्हें अपने पिता की संपत्ति में कानूनी व नैतिक अधिकार मिलना चाहिए। यह पूरा मामला एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर रहा है कि जब कानून बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार देता है, तब भी कई बेटियां अपने ही घर में अपने हक के लिए संघर्ष क्यों कर रही हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कर पीड़ित बेटी को न्याय दिलाया जाएगा, क्योंकि बेटियों का अधिकार छीना नहीं जा सकता। अब देखना यह होगा कि वर्षों से पहचान और पैतृक संपत्ति के लिए संघर्ष कर रही आराधना कुमारी को कब न्याय मिलता है और क्या उन्हें अपने पिता की विरासत में उनका वैधानिक अधिकार मिल पाता है या नहीं।
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    दरभंगा जिले के बहादुरपुर प्रखंड अंतर्गत फेकला थाना क्षेत्र के सिनुरगोपाल गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक बेटी अपने दिवंगत पिता की पैतृक संपत्ति के लिए वर्षों से संघर्ष कर रही है। आराधना कुमारी नामक इस बेटी का आरोप है कि उसे न केवल उसके हिस्से की जमीन से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है, बल्कि उसके अस्तित्व और पहचान पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। मामला इतना गंभीर है कि उसे अपने ही पैतृक घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया जा रहा, जो बेटियों के अधिकारों और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

यह मामला स्वर्गीय जय गोविंद झा के परिवार से संबंधित है। बताया जाता है कि जय गोविंद झा के दो पुत्र थे—मारकंडे झा और मंगल झा। मंगल झा के दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं, जबकि मारकंडे झा की एकमात्र संतान आराधना कुमारी हैं, जिनके कोई भाई नहीं हैं। आराधना के पिता मारकंडे झा का निधन वर्षों पहले हो गया था, और कुछ वर्ष पूर्व उनकी माता का भी निधन हो गया। माता-पिता के गुजर जाने के बाद जब आराधना ने अपने पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की, तो उनके चाचा और अन्य परिजनों ने उन्हें पहचानने से ही इनकार कर दिया। आराधना बताती हैं कि बचपन से शादी के बाद तक वह अपने पैतृक गांव सिनुरगोपाल आती-जाती रही हैं और गांव के लोग उन्हें मारकंडे झा की बेटी के रूप में ही जानते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत में संपत्ति के एक हिस्से को करीब 10 लाख रुपये में देने की बात हुई थी, लेकिन जब उन्होंने अपनी वैध हिस्सेदारी पर जोर दिया और पैसे पर समझौता करने से इनकार किया, तो उन्हें पहचानने से मुकर गए।

मामले ने तब और गंभीर मोड़ ले लिया, जब 13 जून 2026 को आराधना अपने पैतृक घर के आंगन में जाने पहुंचीं। पीड़िता का आरोप है कि उनके चाचा, चाची और चाचा के पुत्र-पुत्रियों ने उन्हें जबरन घर से बाहर निकाल दिया और विरोध करने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार व मारपीट भी की। मजबूरन, उन्हें थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगानी पड़ी। गांव के अधिकांश लोग और समाज के बुजुर्ग भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि आराधना, मारकंडे झा की पुत्री हैं और उन्हें अपने पिता की संपत्ति में कानूनी व नैतिक अधिकार मिलना चाहिए।

यह पूरा मामला एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर रहा है कि जब कानून बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का अधिकार देता है, तब भी कई बेटियां अपने ही घर में अपने हक के लिए संघर्ष क्यों कर रही हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कर पीड़ित बेटी को न्याय दिलाया जाएगा, क्योंकि बेटियों का अधिकार छीना नहीं जा सकता। अब देखना यह होगा कि वर्षों से पहचान और पैतृक संपत्ति के लिए संघर्ष कर रही आराधना कुमारी को कब न्याय मिलता है और क्या उन्हें अपने पिता की विरासत में उनका वैधानिक अधिकार मिल पाता है या नहीं।
    user_Lakshman Kumar Dev
    Lakshman Kumar Dev
    Local News Reporter गोरा बौरम, दरभंगा, बिहार•
    1 hr ago
  • बिहार के पटना में एक कोचिंग विवाद के बीच रोशन आनंद के भाई प्रिंस की हत्या कर दी गई है। परिजनों ने इस मामले में एक बड़ा खुलासा करते हुए सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि क्या इस हत्या के पीछे खान सर का हाथ है।
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    बिहार के पटना में एक कोचिंग विवाद के बीच रोशन आनंद के भाई प्रिंस की हत्या कर दी गई है। परिजनों ने इस मामले में एक बड़ा खुलासा करते हुए सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि क्या इस हत्या के पीछे खान सर का हाथ है।
    user_PTB gramin
    PTB gramin
    News Anchor Darbhanga, Bihar•
    3 hrs ago
  • मधुबनी पुलिस अधीक्षक ने एक थानाध्यक्ष और डायल 112 के कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई गांजा की तस्करी में उनकी संदिग्ध भूमिका के आरोपों के बाद की गई है।
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    मधुबनी पुलिस अधीक्षक ने एक थानाध्यक्ष और डायल 112 के कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई गांजा की तस्करी में उनकी संदिग्ध भूमिका के आरोपों के बाद की गई है।
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    Local News Reporter लहेरिअसारै, दरभंगा•
    3 hrs ago
  • 9 जून 2026 को दरभंगा में अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) और किसान महासभा के संयुक्त तत्वावधान में सैकड़ों गरीब, वासहीन और भूमिहीनों ने एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला। यह मार्च पोलो मैदान धरना स्थल से शुरू होकर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) कार्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने एनएच-27 स्थित मब्बी इंजीनियरिंग कॉलेज से लेकर चक जमाल बाजार समिति के किनारे बरसों से बसे परिवारों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की, साथ ही बुल्डोजर कार्रवाई बंद करने और सभी वासहीनों को 5 डिसमिल जमीन व पक्का मकान उपलब्ध कराने की जोरदार नारेबाजी की। सभा को संबोधित करते हुए खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा ने सरकार पर दलितों और गरीबों के आशियाने पर बुल्डोजर चलाने का आरोप लगाया और कहा कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुरजोर मांग की कि जिन भूमिहीनों के पास सरकारी पर्चा है, उन्हें तुरंत जमीन पर दखल-कब्जा दिलाया जाए, और सरकार को पहले बसाने फिर हटाने की नीति अपनानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, धीरेन्द्र झा ने सेटेलाइट टाउनशिप के नाम पर किसानों की जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक को अविलंब वापस लेने और किसानों का मालिकाना हक बहाल करने की भी मांग की। मार्च का नेतृत्व भाकपा माले और खेग्रामस के नेता अभिषेक कुमार, सत्यनारायण पासवान, शनिचरी देवी, पप्पू कुमार पासवान और हरि पासवान संयुक्त रूप से कर रहे थे। नेताओं ने कड़ी चेतावनी दी कि यदि बिना उचित पुनर्वास के गरीबों को उनके घरों से उजाड़ा गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस कार्यक्रम में अशोक पासवान, विश्वनाथ पासवान, पप्पू खां, अवधेश कुमार सिंह, विनोद सिंह, सुमित्रा देवी और जमाल उद्दीन सहित कई अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे।
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    9 जून 2026 को दरभंगा में अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) और किसान महासभा के संयुक्त तत्वावधान में सैकड़ों गरीब, वासहीन और भूमिहीनों ने एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला। यह मार्च पोलो मैदान धरना स्थल से शुरू होकर अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) कार्यालय तक पहुंचा। प्रदर्शनकारियों ने एनएच-27 स्थित मब्बी इंजीनियरिंग कॉलेज से लेकर चक जमाल बाजार समिति के किनारे बरसों से बसे परिवारों को बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की, साथ ही बुल्डोजर कार्रवाई बंद करने और सभी वासहीनों को 5 डिसमिल जमीन व पक्का मकान उपलब्ध कराने की जोरदार नारेबाजी की।

सभा को संबोधित करते हुए खेग्रामस के राष्ट्रीय महासचिव धीरेन्द्र झा ने सरकार पर दलितों और गरीबों के आशियाने पर बुल्डोजर चलाने का आरोप लगाया और कहा कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने पुरजोर मांग की कि जिन भूमिहीनों के पास सरकारी पर्चा है, उन्हें तुरंत जमीन पर दखल-कब्जा दिलाया जाए, और सरकार को पहले बसाने फिर हटाने की नीति अपनानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, धीरेन्द्र झा ने सेटेलाइट टाउनशिप के नाम पर किसानों की जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक को अविलंब वापस लेने और किसानों का मालिकाना हक बहाल करने की भी मांग की।

मार्च का नेतृत्व भाकपा माले और खेग्रामस के नेता अभिषेक कुमार, सत्यनारायण पासवान, शनिचरी देवी, पप्पू कुमार पासवान और हरि पासवान संयुक्त रूप से कर रहे थे। नेताओं ने कड़ी चेतावनी दी कि यदि बिना उचित पुनर्वास के गरीबों को उनके घरों से उजाड़ा गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस कार्यक्रम में अशोक पासवान, विश्वनाथ पासवान, पप्पू खां, अवधेश कुमार सिंह, विनोद सिंह, सुमित्रा देवी और जमाल उद्दीन सहित कई अन्य नेताओं ने भी अपने विचार रखे।
    user_Janpad Bihar24
    Janpad Bihar24
    Media company Darbhanga, Bihar•
    13 hrs ago
  • दरभंगा के बहादुरपुर अंचल कार्यालय में आयोजित जनता दरबार के दौरान पुलिस बल की कमी का मामला सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कमी के कारण भूमि विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई और व्यवस्था बनाए रखने में बाधाएँ आ रही हैं। अंचलाधिकारी ने बताया कि विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत हर शनिवार को जनता दरबार का आयोजन किया जाता है, जहाँ बहादुरपुर क्षेत्र के आठ थानों से आने वाले भूमि विवाद के मामलों की सुनवाई होती है। हाल ही में आयोजित जनता दरबार में लगभग 300 से 400 लोग अपनी समस्याएँ लेकर पहुँचे थे। पर्याप्त पुलिस बल न होने से जहाँ एक ओर व्यवस्था बनाए रखने में कठिनाई हो रही है, वहीं कई बार एक पक्ष के आने और दूसरे पक्ष के अनुपस्थित रहने से मामलों के निष्पादन में भी दिक्कतें आती हैं। सीओ का यह भी कहना है कि यदि पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध हो, तो जनता दरबार को और बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता दरबार, राज्य सरकार द्वारा संचालित अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं से अलग है और इसका मुख्य उद्देश्य भूमि विवादों का समाधान करना है। शनिवार को कुल छह मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें से कुछ का आपसी सहमति से और शेष का विधि सम्मत तरीके से निपटारा किया गया।
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    दरभंगा के बहादुरपुर अंचल कार्यालय में आयोजित जनता दरबार के दौरान पुलिस बल की कमी का मामला सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कमी के कारण भूमि विवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई और व्यवस्था बनाए रखने में बाधाएँ आ रही हैं।

अंचलाधिकारी ने बताया कि विभागीय दिशा-निर्देशों के तहत हर शनिवार को जनता दरबार का आयोजन किया जाता है, जहाँ बहादुरपुर क्षेत्र के आठ थानों से आने वाले भूमि विवाद के मामलों की सुनवाई होती है। हाल ही में आयोजित जनता दरबार में लगभग 300 से 400 लोग अपनी समस्याएँ लेकर पहुँचे थे। पर्याप्त पुलिस बल न होने से जहाँ एक ओर व्यवस्था बनाए रखने में कठिनाई हो रही है, वहीं कई बार एक पक्ष के आने और दूसरे पक्ष के अनुपस्थित रहने से मामलों के निष्पादन में भी दिक्कतें आती हैं। सीओ का यह भी कहना है कि यदि पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध हो, तो जनता दरबार को और बेहतर ढंग से संचालित किया जा सकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता दरबार, राज्य सरकार द्वारा संचालित अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं से अलग है और इसका मुख्य उद्देश्य भूमि विवादों का समाधान करना है। शनिवार को कुल छह मामलों की सुनवाई की गई, जिनमें से कुछ का आपसी सहमति से और शेष का विधि सम्मत तरीके से निपटारा किया गया।
    user_Raman kumar Darbhanga Tak
    Raman kumar Darbhanga Tak
    हयाघाट, दरभंगा, बिहार•
    23 hrs ago
  • बिहार के दरभंगा में दिनदहाड़े हुई एक वारदात ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, मिलेनियम बाइकर्स शोरूम के मैनेजर मो. फैज की हत्या कर बदमाश उनकी स्कूटी लेकर मौके से फरार हो गए। इस गंभीर घटना के बाद, स्थानीय पुलिस और एफएसएल टीम मामले की गहन जांच में जुट गई है।
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    बिहार के दरभंगा में दिनदहाड़े हुई एक वारदात ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, मिलेनियम बाइकर्स शोरूम के मैनेजर मो. फैज की हत्या कर बदमाश उनकी स्कूटी लेकर मौके से फरार हो गए। इस गंभीर घटना के बाद, स्थानीय पुलिस और एफएसएल टीम मामले की गहन जांच में जुट गई है।
    user_Prabhat Times Madhubani
    Prabhat Times Madhubani
    Local News Reporter मधुबनी, मधुबनी, बिहार•
    15 hrs ago
  • पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने दरभंगा में एक मृतक शोरूम मैनेजर के परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान, उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति हर जगह बनी हुई है।
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    पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने दरभंगा में एक मृतक शोरूम मैनेजर के परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान, उन्होंने कहा कि ऐसी ही स्थिति हर जगह बनी हुई है।
    user_Darpan24 News
    Darpan24 News
    Local News Reporter लहेरिअसारै, दरभंगा•
    4 hrs ago
  • पाटलिपुत्र में अभी-अभी एक छात्र का निधन हो गया है। इस घटना को लोग देख सकते हैं।
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    पाटलिपुत्र में अभी-अभी एक छात्र का निधन हो गया है। इस घटना को लोग देख सकते हैं।
    user_Roshan Kumar
    Roshan Kumar
    सिंहवारा, दरभंगा, बिहार•
    15 hrs ago
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