पलिया तहसील क्षेत्र बेखौफ चल रहा में सफेद रेत का काला कारोबार बेखौफ,रस्म अदायगी में सिमटा तहसील प्रशासन पलिया कलां खीरी। पलिया तहसील क्षेत्र में इन दिनों सफेद रेत का काला कारोबार अपने चरम पर है। हैरत की बात यह है कि जो अवैध खनन कभी रात के अंधेरे में चोरी-छिपे हुआ करता था, वह अब तहसील प्रशासन की नाक के नीचे दिन के उजाले में बेखौफ अंजाम दिया जा रहा है। खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे नियमों को ताक पर रखकर नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल खानापूर्ति और रस्म अदायगी तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो पलिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बालू और मिट्टी के अवैध खनन का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। सड़कों पर बेतरतीब दौड़ती रेत और मिट्टी से लदी ट्रालियां इस अवैध कारोबार की तस्दीक खुद कर रही हैं। सबसे चौंकाने वाला पहलू 'एक परमिट, सौ चक्कर' का खेल है। खनन माफिया कथित तौर पर प्रशासन से एक परमिट जारी करवाते हैं और उसी की आड़ में दिन भर दर्जनों ट्रालियां अवैध रूप से दौड़ाई जाती हैं। जब भी कोई जांच की बात आती है, तो इसी पुराने परमिट को ढाल बनाकर दिखा दिया जाता है। अवैध खनन के इस खेल से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार इस काले कारोबार का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती साबित हो रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि शारदा नदी के तटवर्ती इलाकों में जिस तरह अंधाधुंध बालू निकाली जा रही है, उससे नदी की धारा का रुख बदल सकता है। ग्रामीणों का दर्द है कि मानसून आने पर जब शारदा नदी उफान पर होगी, तो अवैध खनन के कारण बने गहरे गड्ढों और भौगोलिक बदलाव की वजह से उन्हें एक बार फिर भीषण बाढ़ की जद में आना पड़ेगा। ग्रामीणों के मुताबिक, "प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा हमें अपने घर और फसलें गंवाकर भुगतना होगा।" प्रशासनिक शिथिलता का आलम यह है कि सड़कों पर सरपट दौड़ते ये ओवरलोड वाहन न सिर्फ राजस्व को चूना लगा रहे हैं, बल्कि आए दिन दुर्घटनाओं को भी दावत दे रहे हैं। कभी-कभार दिखावे के लिए एक-दो ट्रालियों को रोककर कार्रवाई की खानापूर्ति कर दी जाती है, जिससे खनन सिंडिकेट के मनोबल पर कोई खास असर नहीं पड़ता। अवैध खनन के इस नेटवर्क ने क्षेत्र की पारिस्थितिकी को भी नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया है, फिर भी जिम्मेदारों की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। बाक्स पलिया क्षेत्र हर साल शारदा नदी की विनाशकारी बाढ़ और कटान का दंश झेलता है। इसके बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी ग्रामीणों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा रही है। ग्रामीणों का आक्रोश स्पष्ट है— "जब रक्षक ही हमें तबाही के मुँह में धकेलने को तैयार हैं, तो हमारी पुकार कौन सुनेगा?" क्या प्रशासन को मानसून का इंतज़ार है, जब ये अवैध गड्ढे जलसमाधि का कारण बनेंगे? जिम्मेदारों की यह कार्यशैली न केवल संदिग्ध है, बल्कि सीधे तौर पर जन-धन की हानि को न्योता दे रही है। बाक्स पलिया क्षेत्र में सफेद रेत का यह काला खेल सिर्फ प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूख और सत्ता के कथित संरक्षण का जीता-जागता प्रमाण है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं के तार सीधे 'ऊपर' तक जुड़े हैं, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन केवल 'रस्म अदायगी' तक सीमित है। विडंबना देखिए, जो जनप्रतिनिधि चुनाव के वक्त बाढ़ से बचाने के वादे करते थे, आज वही इस अवैध खनन पर मौन साधकर ग्रामीणों को तबाही के मुँह में धकेल रहे हैं।
पलिया तहसील क्षेत्र बेखौफ चल रहा में सफेद रेत का काला कारोबार बेखौफ,रस्म अदायगी में सिमटा तहसील प्रशासन पलिया कलां खीरी। पलिया तहसील क्षेत्र में इन दिनों सफेद रेत का काला कारोबार अपने चरम पर है। हैरत की बात यह है कि जो अवैध खनन कभी रात के अंधेरे में चोरी-छिपे हुआ करता था, वह अब तहसील प्रशासन की नाक के नीचे दिन के उजाले में बेखौफ अंजाम दिया जा रहा है। खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे नियमों को ताक पर रखकर नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल खानापूर्ति और रस्म अदायगी तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो पलिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बालू और मिट्टी के अवैध खनन का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। सड़कों पर बेतरतीब दौड़ती रेत और मिट्टी से लदी ट्रालियां इस अवैध कारोबार की तस्दीक खुद कर रही हैं। सबसे चौंकाने वाला पहलू 'एक परमिट, सौ चक्कर' का खेल है। खनन माफिया कथित तौर पर प्रशासन से एक परमिट जारी करवाते हैं और उसी की आड़ में दिन भर दर्जनों ट्रालियां अवैध रूप से दौड़ाई जाती हैं। जब भी कोई जांच की बात आती है, तो इसी पुराने परमिट को ढाल बनाकर दिखा दिया जाता है। अवैध खनन के इस खेल से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार इस काले कारोबार का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती साबित हो रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि शारदा नदी के तटवर्ती इलाकों में जिस तरह अंधाधुंध बालू निकाली जा रही है, उससे नदी की धारा का रुख बदल सकता है। ग्रामीणों का दर्द है कि मानसून आने पर जब शारदा नदी उफान पर होगी, तो अवैध खनन के कारण बने गहरे गड्ढों और भौगोलिक बदलाव की वजह से उन्हें एक बार फिर भीषण बाढ़ की जद में आना पड़ेगा। ग्रामीणों के मुताबिक, "प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा हमें अपने घर और फसलें गंवाकर भुगतना होगा।" प्रशासनिक शिथिलता का आलम यह है कि सड़कों पर सरपट दौड़ते ये ओवरलोड वाहन न सिर्फ राजस्व को चूना लगा रहे हैं, बल्कि आए दिन दुर्घटनाओं को भी दावत दे रहे हैं। कभी-कभार दिखावे के लिए एक-दो ट्रालियों को रोककर कार्रवाई की खानापूर्ति कर दी जाती है, जिससे खनन सिंडिकेट के मनोबल पर कोई खास असर नहीं पड़ता। अवैध खनन के इस नेटवर्क ने क्षेत्र की पारिस्थितिकी को भी नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया है, फिर भी जिम्मेदारों की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। बाक्स पलिया क्षेत्र हर साल शारदा नदी की विनाशकारी बाढ़ और कटान का दंश झेलता है। इसके बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी ग्रामीणों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा रही है। ग्रामीणों का आक्रोश स्पष्ट है— "जब रक्षक ही हमें तबाही के मुँह में धकेलने को तैयार हैं, तो हमारी पुकार कौन सुनेगा?" क्या प्रशासन को मानसून का इंतज़ार है, जब ये अवैध गड्ढे जलसमाधि का कारण बनेंगे? जिम्मेदारों की यह कार्यशैली न केवल संदिग्ध है, बल्कि सीधे तौर पर जन-धन की हानि को न्योता दे रही है। बाक्स पलिया क्षेत्र में सफेद रेत का यह काला खेल सिर्फ प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूख और सत्ता के कथित संरक्षण का जीता-जागता प्रमाण है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं के तार सीधे 'ऊपर' तक जुड़े हैं, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन केवल 'रस्म अदायगी' तक सीमित है। विडंबना देखिए, जो जनप्रतिनिधि चुनाव के वक्त बाढ़ से बचाने के वादे करते थे, आज वही इस अवैध खनन पर मौन साधकर ग्रामीणों को तबाही के मुँह में धकेल रहे हैं।
- भारत का दिल कहे जाने वाले गाँवों की स्थिति आज भी बदहाल बनी हुई है। हालांकि सरकार ग्रामीण विकास के लिए तमाम महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और हीलाहवाली के चलते ये योजनाएं धरातल पर आने से पहले ही दम तोड़ देती हैं। ऐसा ही एक मामला लखीमपुर खीरी जिले की तहसील पलिया तहसील के ग्राम मरुआ पश्चिम से सामने आया है। यहाँ ग्रामीणों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने लाखों रुपये की लागत से पानी की टंकी का निर्माण तो कराया, लेकिन देखरेख के अभाव में यह शो-पीस बनकर रह गई है। बातचीत में ग्रामीणों ने बताया कि आधे गांव में पानी आता है और आधे में सालों से जलापूर्ति ठप है हम दूसरे गांव में पानी लेने जाते हैं जहां पर हम लोगों को कई बार रुसवा भी होना पड़ता है लोग अपने यहां पानी भरने से मना कर देते, जलापूर्ति सही न होने के चलते हमें आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। क्या बोले जिम्मेदार। इस संबंध में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अमित मौर्य का कहना है कि इस गांव में जहां पर टंकी बनी है वहां से चार मजरे को ही पानी जा पा रहा है और यहां पर लोगों का पानी इसलिए नहीं मिल पा रहा है क्योंकि वहां से यहां की दूरी बहुत ज्यादा है। इसको लेकर मैं उच्च अधिकारियों से अपील की थी जिसके चलते नई टंकी का निर्माण कराया जा रहा था लेकिन फिलहाल वह भी रुकी हुई है। बाइट:- ग्राम प्रधान प्रतिनिधि अमृत मौर्य1
- Post by Sanjay Kumar1
- Post by Rida1
- पलिया कलां खीरी। पलिया तहसील क्षेत्र में इन दिनों सफेद रेत का काला कारोबार अपने चरम पर है। हैरत की बात यह है कि जो अवैध खनन कभी रात के अंधेरे में चोरी-छिपे हुआ करता था, वह अब तहसील प्रशासन की नाक के नीचे दिन के उजाले में बेखौफ अंजाम दिया जा रहा है। खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे नियमों को ताक पर रखकर नदियों का सीना छलनी कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल खानापूर्ति और रस्म अदायगी तक ही सीमित नजर आ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों की मानें तो पलिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में बालू और मिट्टी के अवैध खनन का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। सड़कों पर बेतरतीब दौड़ती रेत और मिट्टी से लदी ट्रालियां इस अवैध कारोबार की तस्दीक खुद कर रही हैं। सबसे चौंकाने वाला पहलू 'एक परमिट, सौ चक्कर' का खेल है। खनन माफिया कथित तौर पर प्रशासन से एक परमिट जारी करवाते हैं और उसी की आड़ में दिन भर दर्जनों ट्रालियां अवैध रूप से दौड़ाई जाती हैं। जब भी कोई जांच की बात आती है, तो इसी पुराने परमिट को ढाल बनाकर दिखा दिया जाता है। अवैध खनन के इस खेल से आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि वे लगातार इस काले कारोबार का विरोध कर रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती साबित हो रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि शारदा नदी के तटवर्ती इलाकों में जिस तरह अंधाधुंध बालू निकाली जा रही है, उससे नदी की धारा का रुख बदल सकता है। ग्रामीणों का दर्द है कि मानसून आने पर जब शारदा नदी उफान पर होगी, तो अवैध खनन के कारण बने गहरे गड्ढों और भौगोलिक बदलाव की वजह से उन्हें एक बार फिर भीषण बाढ़ की जद में आना पड़ेगा। ग्रामीणों के मुताबिक, "प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा हमें अपने घर और फसलें गंवाकर भुगतना होगा।" प्रशासनिक शिथिलता का आलम यह है कि सड़कों पर सरपट दौड़ते ये ओवरलोड वाहन न सिर्फ राजस्व को चूना लगा रहे हैं, बल्कि आए दिन दुर्घटनाओं को भी दावत दे रहे हैं। कभी-कभार दिखावे के लिए एक-दो ट्रालियों को रोककर कार्रवाई की खानापूर्ति कर दी जाती है, जिससे खनन सिंडिकेट के मनोबल पर कोई खास असर नहीं पड़ता। अवैध खनन के इस नेटवर्क ने क्षेत्र की पारिस्थितिकी को भी नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया है, फिर भी जिम्मेदारों की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है। बाक्स पलिया क्षेत्र हर साल शारदा नदी की विनाशकारी बाढ़ और कटान का दंश झेलता है। इसके बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी ग्रामीणों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा रही है। ग्रामीणों का आक्रोश स्पष्ट है— "जब रक्षक ही हमें तबाही के मुँह में धकेलने को तैयार हैं, तो हमारी पुकार कौन सुनेगा?" क्या प्रशासन को मानसून का इंतज़ार है, जब ये अवैध गड्ढे जलसमाधि का कारण बनेंगे? जिम्मेदारों की यह कार्यशैली न केवल संदिग्ध है, बल्कि सीधे तौर पर जन-धन की हानि को न्योता दे रही है। बाक्स पलिया क्षेत्र में सफेद रेत का यह काला खेल सिर्फ प्रशासनिक शिथिलता नहीं, बल्कि राजनीतिक रसूख और सत्ता के कथित संरक्षण का जीता-जागता प्रमाण है। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफियाओं के तार सीधे 'ऊपर' तक जुड़े हैं, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन केवल 'रस्म अदायगी' तक सीमित है। विडंबना देखिए, जो जनप्रतिनिधि चुनाव के वक्त बाढ़ से बचाने के वादे करते थे, आज वही इस अवैध खनन पर मौन साधकर ग्रामीणों को तबाही के मुँह में धकेल रहे हैं।1
- लखीमपुर खीरी: कागजों में साफ हो गईं नालियां, जमीन पर गंदगी का अंबार; ग्रामीणों का आरोप- पोर्टल पर लगी फर्जी रिपोर्ट पलिया कलां, लखीमपुर खीरी विकासखंड पलिया की ग्राम पंचायत त्रिलोकपुर के मजरा कंधरिया में स्वच्छता अभियान के दावों की हवा निकलती नजर आ रही है। गाँव की नालियां पूरी तरह चौक हो चुकी हैं, जिससे सड़कों पर गंदगी का अंबार लगा है। हैरानी की बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर की गई ऑनलाइन शिकायत के निस्तारण में कथित तौर पर 'गलत रिपोर्ट' लगाकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। क्या है पूरा मामला? कंधरिया के ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से नालियों की सफाई न होने के कारण कीचड़ और गंदा पानी रास्तों पर फैल रहा है। इससे न केवल आने-जाने में दिक्कत हो रही है, बल्कि संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने जब इसकी ऑनलाइन शिकायत की, तो विभाग द्वारा रिपोर्ट लगा दी गई कि सफाई कार्य पूर्ण हो चुका है। ग्रामीणों ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। प्रधान पति का दो टूक जवाब जब ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि/पति से संपर्क किया, तो उन्होंने अपनी असमर्थता जताते हुए पल्ला झाड़ लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान पति ने साफ तौर पर कह दिया कि हमारे पास कोई सफाई कर्मी नहीं है, हम सफाई नहीं करवा सकते।ग्रामीणों में भारी आक्रोश गाँव के निवासियों का कहना है कि एक तरफ सरकार स्वच्छता पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता को गुमराह कर रहे हैं। ग्रामीणों ने अब इस मामले की उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत करने और फर्जी निस्तारण रिपोर्ट लगाने वाले दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।1
- सीओ पलिया की अगुवाई में संपूर्णानगर थाने में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन शनिवार को संपूर्णानगर थाने में संपूर्ण समाधान दिवस का आयोजन पलिया पुलिस क्षेत्राधिकारी जितेंद्र सिंह परिहार के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान सीओ पलिया ने फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान के निर्देश दिए। कार्यक्रम में आए लोगों ने अपनी विभिन्न समस्याएं अधिकारियों के समक्ष रखीं, जिनमें से कई का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शेष प्रकरणों को शीघ्र निपटारे के लिए संबंधित विभागों को भेजा गया। अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाएगा। इस मौके पर थाना प्रभारी कृष्ण कुमार, दरोगा अमरपाल समेत क्षेत्र के तमाम लेखपाल मौजूद रहे4
- अम्बेडकर में पुलिस ने एक हॉफ एनकाउंटर किया हर जेब से बरामदगी की एक जेब से तमाम नोट निकली, दरोगा जी मशीन से भी तेज निकले और बता दिया कि - "128 नोट है" आरोपी से सबकुछ कैमरे पर ही बुलवा लिया, कुछ भी इधर-उधर नहीं होने का चेन , मोबाइल, पैसा- कौन किसका है- सब एकदम रटा हुआ था जुबान पर1
- चंदन चौकी खीरी:- जिला लखीमपुर खीरी के चंदन चौकी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में भारत नेपाल मैत्री होली महोत्सव का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम के अंतर्गत पलिया की आम जनता और चंदन चौकी की स्थानीय जनता आरएसएस के कार्यकर्ता भारी संख्या में मौजूद रहे। इस कार्यक्रम के मंच संचालक रवि गुप्ता ने बड़ी गर्मजोशी के साथ मंच का संचालन किया कार्यक्रम में आए सभी नेपाल व भारत के अतिथियों को अयोध्या के श्री राम जी की स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओमपाल सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भारत नेपाल राष्ट्र उत्तर प्रदेश उत्तराखंड (वरिष्ठ प्रचारक) के कुटुंब प्रबोधन प्रमुख नेपाल से आए वरिष्ठ अधिकारी और व्यापारी को भारत नेपाल की रोटी बेटी के रिश्ते पर चर्चा की और सामाजिक समरसता पर चर्चा की अपने संबोधन के समापन में बताया कि नेपाल पहले से हिंदू राष्ट्र है उसको हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता नहीं है भारत हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किंतु वह हिंदू राष्ट्र ही है और हम यह चाहते हैं कि भारत नेपाल के बीच समरसता बनी रहे हमारे संबंध अच्छे हो और आपसी भाईचारे और मजबूत हूं। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ओमपाल सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वरिष्ठ प्रचारक भारत नेपाल राष्ट्र उत्तर प्रदेश उत्तराखंड के कुटुंब प्रमुख उपस्थित रहे साथ ही 39वीं वाहिनी के एसएसबी कमांडेंट राजेंद्र राजेश्वरी, सहायक कमांडेंट, भाजपा नेता रवि गुप्ता, दिनेश मिश्रा मंडल करवा, गौरव सिंह खंडकारवा बिजुआ, धीरेंद्र सिंह खंडा सेवा शिक्षण प्रमुख, सुमित तिवारी खंड शारीरिक शिक्षण प्रमुख, राहुल तिवारी मंडल कारवां,बलजीत सिंह शहर जिला कार्यवाह, निरंजन लाल नगर संघ चालक, कृष्ण अवतार भाटी जिला संपर्क प्रमुख, मुकुट बिहारी जिला समरसता प्रमुख, संतराम गुप्ता खंड संचालक, सुनील कुमार निघासन सरस्वती शिशु मंदिर प्रधानाचार्य, संजीव सहखंड कार्यवाहक, शिवपाल सिंह सीमा जागरण मंच प्रमुख, आशुतोष कुमार एबीवीपी, धर्म जागरण प्रमुख संजय सिंह, नगर प्रचारक योगेंद्र, जिला प्रचारक शिव प्रकाश तथा नेपाल के मुख्य अतिथि हरिशंकर ठाकुर भारत नेपाल मैत्री संघ के सुदूर पश्चिम अध्यक्ष, श्रवण देउबा धनगढ़ी नेपाल पत्रकार महासंघ अध्यक्ष, हेमंत पौडेल पत्रकार, लक्ष्मण साउथ निर्माण व्यवसाई, शुभ ठाकुर इंडस्ट्रिलिस्ट, पदमराज जोशी धार्मिकअभियंता, त्रिलोक पांडे खिलाड़ी, योगेश बम खिलाड़ी, सुशील पत्रकार, जीवन बिष्ट पत्रकार, सुभाष पौडेल समाजसेवी, सुभाष अग्रवाल व्यवसाई ,प्रदीप विद्या केंद्रीय सदस्य भारत नेपाल मैत्री संघ, सुभाष शाही क्रिकेट अभियंता, योगेश बम विद्यार्थी नेता, हिकमत रावल बीबीसी लंदन नेपाल के मान्यता प्राप्त पत्रकार, ऋतुराज जोशी सीबी 24 के पत्रकार, रविंद्र परिहार प्रोग्राम डायरेक्टर होटल मैनेजमेंट, सुभाष शाही मैनेजिंग डायरेक्टर एसपीए कॉलेज एवं धनगढ़ी फापला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष,की मौजूदगी में कार्यक्रम का समापन हुआ कार्यक्रम के समापन में फूलों की होली खेली गई होली के बाद सभी अतिथियों को भोजन करा विदाई दी गई।3