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महोबा के ग्रामीण इस वक्त गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। गांव की सड़कें पूरी तरह से बदहाल हो चुकी हैं और जगह-जगह जलभराव की समस्या ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है।
इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
महोबा के ग्रामीण इस वक्त गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। गांव की सड़कें पूरी तरह से बदहाल हो चुकी हैं और जगह-जगह जलभराव की समस्या ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है।
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- महोबा जिला चिकित्सालय की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में परिजन एक बीमार मरीज को कंधों पर उठाकर इमरजेंसी विभाग की ओर ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि अस्पताल परिसर में समय पर स्ट्रेचर और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को स्वयं मरीज को उठाकर ले जाना पड़ा, जिसने जिला अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बताया है। मरीजों और परिजनों को होने वाली इस भारी परेशानी को देखते हुए लोगों ने अस्पताल प्रशासन से आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं में सुधार करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने यह भी आग्रह किया है कि अस्पताल में पर्याप्त स्ट्रेचर और कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में किसी को इस स्थिति का सामना न करना पड़े।1
- महोबा के ग्रामीण इस वक्त गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। गांव की सड़कें पूरी तरह से बदहाल हो चुकी हैं और जगह-जगह जलभराव की समस्या ने लोगों का जीवन दूभर कर दिया है।1
- उत्तर प्रदेश के महोबा जिले का अयोध्या धाम से जुड़ाव सामने आया है।1
- पनवाड़ी विकासखंड क्षेत्र के नकरा गांव स्थित किलाहुआ वी पैक्स समिति लिमिटेड में किसानों से खरीदा गया सरकारी अनाज समय पर उठान न होने के कारण खुले में पड़ा हुआ है। लगातार हो रही बारिश के कारण यह अनाज भीगकर खराब होने लगा है, जिससे सरकारी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दिनों से अनाज का उठान नहीं कराया गया है, जबकि मौसम विभाग ने पहले ही बारिश की संभावना जताई थी। समिति परिसर में बड़ी मात्रा में गेहूं और अन्य अनाज खुले में रखा है, जिस पर सीधे बारिश का पानी गिरने से बोरियों में नमी आ गई है और वे खराब होने लगी हैं। यदि तत्काल अनाज को सुरक्षित गोदामों में नहीं पहुँचाया गया, तो भारी मात्रा में सरकारी अनाज सड़ सकता है, जिससे लाखों रुपये के नुकसान की संभावना है। ग्रामीणों का कहना है कि समिति के जिम्मेदार अधिकारियों को इस समस्या की जानकारी है, फिर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। किसानों ने भी अपनी उपज सरकार की खरीद नीति के तहत समिति को बेची थी, लेकिन अब वे इसके रखरखाव में बरती जा रही लापरवाही से चिंतित हैं। क्षेत्रीय लोगों ने जिला प्रशासन और खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारियों से तत्काल अनाज का उठान कराकर उसे सुरक्षित गोदामों में भंडारित करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जाँच कर आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है, ताकि सरकारी अनाज की बर्बादी को रोका जा सके और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।1
- छतरपुर जिले की छिरावल पंचायत के जामनान पुरवा की सड़क जर्जर स्थिति में है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इस बदहाल मार्ग की मरम्मत और उचित समाधान की मांग की है।1
- नगर पालिका परिषद बांदा की घोर लापरवाही के कारण तीन दिनों की लगातार बारिश से शहर के अधिकतर मोहल्ले जलमग्न हो गए हैं। सड़कों पर चारों तरफ गंदगी फैली है, जिसके चलते आम जनता अपने घरों में कैद रहने को मजबूर है और बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति लोहिया पुल से अतर्रा चुंगी के बीच बनी हुई है, जहाँ सफाई न होने के कारण नाला पूरी तरह चोक है। विराट पैलेस से अतर्रा चुंगी के बीच नाला सफाई का कार्य नहीं किया गया और सेढू तलैया से विराट पैलेस तक का निर्माण कार्य भी अधूरा पड़ा है, जहाँ ठेकेदार द्वारा मिट्टी का बांध बना देने से पानी की निकासी ठप हो गई है। छोटी काली देवी मंदिर के पास 30-40 साल पुरानी पुलिया चोक होने से कालू कुआं सहित करीब एक दर्जन मोहल्लों का पानी ईदगाह रोड तक घरों में घुस गया है, जिससे पिछले 15 घंटों से सैकड़ों मकान डूबे हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारों को फोन करने पर केवल यही जवाब मिल रहा है कि मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम है, इसलिए अभी कोई मदद नहीं हो सकती। बांदा की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाते हुए लोगों ने पूछा है कि आखिर लाखों का नुकसान और जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? अधिशासी अधिकारी से वार्ता के बाद पंप भेजने का आश्वासन तो मिला, लेकिन धरातल पर पंप की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। स्थानीय निवासियों को रात भर जागकर अपने घरों की रक्षा करनी पड़ी, जिससे न खाना बन सका और न ही सुबह का नाश्ता। पिछले तीन वर्षों से मुख्यमंत्री कार्यालय, मंडल आयुक्त और जिलाधिकारी को अवगत कराने के बावजूद नाले के निर्माण में बरती जा रही अनियमितताओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरकारी रिकॉर्ड में 14 फीट चौड़े दर्ज इस नाले को मात्र 4-5 फीट में समेट दिया गया है, जबकि नया बन रहा नाला भी मात्र 6-7 फीट चौड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बाकर ने इस स्थिति को विस्फोटक बताया है और चेतावनी दी है कि यदि नाले को 15-20 फीट चौड़ा और 10-15 फीट गहरा नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन, नगर पालिका, सांसदों और विधायकों से तत्काल प्रभाव से एक विस्तृत प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजने की मांग की है। लोगों का कहना है कि नाले पर अतिक्रमण के खिलाफ कोई एक्शन न लेना इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन पंप लगाकर भरे हुए पानी को निकलवाकर जनता की मुसीबत कम करेगा, या फिर लोग बारिश के दौरान इसी तरह जलभराव और जान-माल के खतरे के बीच पिसते रहेंगे।4
- जैतपुर पंचायत के सचिव पर कथित लापरवाही का आरोप है, जिसके चलते वहाँ के ग्रामीण बेहाल हैं। यह कथित लापरवाही ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, जिससे उनका जनजीवन प्रभावित हो रहा है।1
- मेरठ कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर ललिता गौतम हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर धरना दे रहे दलित समाज के लोगों पर पुलिस ने बर्बर कार्रवाई की है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मौके पर पहुँचे एसपी अविनाश पांडे ने आंदोलनकारियों पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया, जिसे उन्होंने पूरी तरह से असंवैधानिक बताया है। पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों को पीटा गया और उन्हें हिरासत में लेकर पुलिस वैन में डाल दिया गया। आरोप है कि वैन के भीतर भी आंदोलनकारियों पर अत्याचार का सिलसिला नहीं थमा और रवि गौतम को विशेष रूप से वैन के अंदर ले जाकर पीटा गया। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों में भारी आक्रोश है।1