नगर पालिका परिषद बांदा की घोर लापरवाही के कारण तीन दिनों की लगातार बारिश से शहर के अधिकतर मोहल्ले जलमग्न हो गए हैं। सड़कों पर चारों तरफ गंदगी फैली है, जिसके चलते आम जनता अपने घरों में कैद रहने को मजबूर है और बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति लोहिया पुल से अतर्रा चुंगी के बीच बनी हुई है, जहाँ सफाई न होने के कारण नाला पूरी तरह चोक है। विराट पैलेस से अतर्रा चुंगी के बीच नाला सफाई का कार्य नहीं किया गया और सेढू तलैया से विराट पैलेस तक का निर्माण कार्य भी अधूरा पड़ा है, जहाँ ठेकेदार द्वारा मिट्टी का बांध बना देने से पानी की निकासी ठप हो गई है। छोटी काली देवी मंदिर के पास 30-40 साल पुरानी पुलिया चोक होने से कालू कुआं सहित करीब एक दर्जन मोहल्लों का पानी ईदगाह रोड तक घरों में घुस गया है, जिससे पिछले 15 घंटों से सैकड़ों मकान डूबे हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारों को फोन करने पर केवल यही जवाब मिल रहा है कि मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम है, इसलिए अभी कोई मदद नहीं हो सकती। बांदा की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाते हुए लोगों ने पूछा है कि आखिर लाखों का नुकसान और जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? अधिशासी अधिकारी से वार्ता के बाद पंप भेजने का आश्वासन तो मिला, लेकिन धरातल पर पंप की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। स्थानीय निवासियों को रात भर जागकर अपने घरों की रक्षा करनी पड़ी, जिससे न खाना बन सका और न ही सुबह का नाश्ता। पिछले तीन वर्षों से मुख्यमंत्री कार्यालय, मंडल आयुक्त और जिलाधिकारी को अवगत कराने के बावजूद नाले के निर्माण में बरती जा रही अनियमितताओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरकारी रिकॉर्ड में 14 फीट चौड़े दर्ज इस नाले को मात्र 4-5 फीट में समेट दिया गया है, जबकि नया बन रहा नाला भी मात्र 6-7 फीट चौड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बाकर ने इस स्थिति को विस्फोटक बताया है और चेतावनी दी है कि यदि नाले को 15-20 फीट चौड़ा और 10-15 फीट गहरा नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन, नगर पालिका, सांसदों और विधायकों से तत्काल प्रभाव से एक विस्तृत प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजने की मांग की है। लोगों का कहना है कि नाले पर अतिक्रमण के खिलाफ कोई एक्शन न लेना इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन पंप लगाकर भरे हुए पानी को निकलवाकर जनता की मुसीबत कम करेगा, या फिर लोग बारिश के दौरान इसी तरह जलभराव और जान-माल के खतरे के बीच पिसते रहेंगे।
नगर पालिका परिषद बांदा की घोर लापरवाही के कारण तीन दिनों की लगातार बारिश से शहर के अधिकतर मोहल्ले जलमग्न हो गए हैं। सड़कों पर चारों तरफ गंदगी फैली है, जिसके चलते आम जनता अपने घरों में कैद रहने को मजबूर है और बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति लोहिया पुल से अतर्रा चुंगी के बीच बनी हुई है, जहाँ सफाई न होने के कारण नाला पूरी तरह चोक है। विराट पैलेस से अतर्रा चुंगी के बीच नाला सफाई का कार्य नहीं किया गया और सेढू तलैया से विराट पैलेस तक का निर्माण कार्य भी अधूरा पड़ा है, जहाँ ठेकेदार द्वारा मिट्टी का बांध बना देने
से पानी की निकासी ठप हो गई है। छोटी काली देवी मंदिर के पास 30-40 साल पुरानी पुलिया चोक होने से कालू कुआं सहित करीब एक दर्जन मोहल्लों का पानी ईदगाह रोड तक घरों में घुस गया है, जिससे पिछले 15 घंटों से सैकड़ों मकान डूबे हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारों को फोन करने पर केवल यही जवाब मिल रहा है कि मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम है, इसलिए अभी कोई मदद नहीं हो सकती। बांदा की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाते हुए लोगों ने पूछा है कि आखिर लाखों का नुकसान और जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? अधिशासी अधिकारी से वार्ता
के बाद पंप भेजने का आश्वासन तो मिला, लेकिन धरातल पर पंप की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। स्थानीय निवासियों को रात भर जागकर अपने घरों की रक्षा करनी पड़ी, जिससे न खाना बन सका और न ही सुबह का नाश्ता। पिछले तीन वर्षों से मुख्यमंत्री कार्यालय, मंडल आयुक्त और जिलाधिकारी को अवगत कराने के बावजूद नाले के निर्माण में बरती जा रही अनियमितताओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरकारी रिकॉर्ड में 14 फीट चौड़े दर्ज इस नाले को मात्र 4-5 फीट में समेट दिया गया है, जबकि नया बन रहा नाला भी मात्र 6-7 फीट चौड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बाकर ने इस स्थिति को विस्फोटक बताया है और
चेतावनी दी है कि यदि नाले को 15-20 फीट चौड़ा और 10-15 फीट गहरा नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन, नगर पालिका, सांसदों और विधायकों से तत्काल प्रभाव से एक विस्तृत प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजने की मांग की है। लोगों का कहना है कि नाले पर अतिक्रमण के खिलाफ कोई एक्शन न लेना इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन पंप लगाकर भरे हुए पानी को निकलवाकर जनता की मुसीबत कम करेगा, या फिर लोग बारिश के दौरान इसी तरह जलभराव और जान-माल के खतरे के बीच पिसते रहेंगे।
- नगर पालिका परिषद बांदा की घोर लापरवाही के कारण तीन दिनों की लगातार बारिश से शहर के अधिकतर मोहल्ले जलमग्न हो गए हैं। सड़कों पर चारों तरफ गंदगी फैली है, जिसके चलते आम जनता अपने घरों में कैद रहने को मजबूर है और बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति लोहिया पुल से अतर्रा चुंगी के बीच बनी हुई है, जहाँ सफाई न होने के कारण नाला पूरी तरह चोक है। विराट पैलेस से अतर्रा चुंगी के बीच नाला सफाई का कार्य नहीं किया गया और सेढू तलैया से विराट पैलेस तक का निर्माण कार्य भी अधूरा पड़ा है, जहाँ ठेकेदार द्वारा मिट्टी का बांध बना देने से पानी की निकासी ठप हो गई है। छोटी काली देवी मंदिर के पास 30-40 साल पुरानी पुलिया चोक होने से कालू कुआं सहित करीब एक दर्जन मोहल्लों का पानी ईदगाह रोड तक घरों में घुस गया है, जिससे पिछले 15 घंटों से सैकड़ों मकान डूबे हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदारों को फोन करने पर केवल यही जवाब मिल रहा है कि मुख्यमंत्री जी का कार्यक्रम है, इसलिए अभी कोई मदद नहीं हो सकती। बांदा की बदहाल स्थिति पर सवाल उठाते हुए लोगों ने पूछा है कि आखिर लाखों का नुकसान और जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? अधिशासी अधिकारी से वार्ता के बाद पंप भेजने का आश्वासन तो मिला, लेकिन धरातल पर पंप की कोई व्यवस्था नहीं दिखी। स्थानीय निवासियों को रात भर जागकर अपने घरों की रक्षा करनी पड़ी, जिससे न खाना बन सका और न ही सुबह का नाश्ता। पिछले तीन वर्षों से मुख्यमंत्री कार्यालय, मंडल आयुक्त और जिलाधिकारी को अवगत कराने के बावजूद नाले के निर्माण में बरती जा रही अनियमितताओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। सरकारी रिकॉर्ड में 14 फीट चौड़े दर्ज इस नाले को मात्र 4-5 फीट में समेट दिया गया है, जबकि नया बन रहा नाला भी मात्र 6-7 फीट चौड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद बाकर ने इस स्थिति को विस्फोटक बताया है और चेतावनी दी है कि यदि नाले को 15-20 फीट चौड़ा और 10-15 फीट गहरा नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने जिला प्रशासन, नगर पालिका, सांसदों और विधायकों से तत्काल प्रभाव से एक विस्तृत प्रस्ताव प्रदेश सरकार को भेजने की मांग की है। लोगों का कहना है कि नाले पर अतिक्रमण के खिलाफ कोई एक्शन न लेना इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन पंप लगाकर भरे हुए पानी को निकलवाकर जनता की मुसीबत कम करेगा, या फिर लोग बारिश के दौरान इसी तरह जलभराव और जान-माल के खतरे के बीच पिसते रहेंगे।4
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार, 9 जुलाई को बांदा और बबेरू विधानसभा क्षेत्र के लिए 710 करोड़ रुपये से अधिक की कुल 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। उन्होंने यह घोषणा एक जनसभा को संबोधित करते हुए की। जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में बुंदेलखंड की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो क्षेत्र कभी पलायन, प्यास और डकैतों के लिए जाना जाता था, वह आज विकास, सुरक्षा और निवेश का केंद्र बन रहा है। मुख्यमंत्री ने जनता से विकास की राजनीति को समर्थन देने और 'विकास विरोधी सोच' को खारिज करने की अपील की। उन्होंने 'डबल इंजन सरकार' की सराहना करते हुए बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, मेडिकल कॉलेज, पेयजल, सिंचाई और रोजगार जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से क्षेत्र को एक नई पहचान मिली है। इस कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को नियुक्ति पत्र, चेक, आवास की चाबी और आयुष्मान कार्ड सहित कई प्रकार के लाभ भी वितरित किए।1
- Post by Jitendra kumar कोरी1
- देश के अलग-अलग हिस्सों में कृषि उपज के भंडारण को बेहतर बनाने के लिए कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांवों में इन सुविधाओं की उपलब्धता को बढ़ाना है। कोल्ड स्टोरेज की इन नई सुविधाओं से फल, सब्जियां और अन्य जल्दी खराब होने वाली फसलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना संभव हो सकेगा। इस कवायद से न केवल फसलों का नुकसान कम होगा, बल्कि किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर विपणन के अवसर भी प्राप्त होंगे।1
- मौदहा नगर में पुरानी स्टेट बैंक के पास लगे एक बिजली के पोल में करंट उतरने की आशंका से स्थानीय लोगों में गहरी दहशत है। लोगों का कहना है कि हल्की बारिश होते ही इस पोल में चिंगारी निकलने लगती है, जिससे उन्हें हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों ने विभागीय अधिकारियों से तुरंत पोल की जाँच करवाकर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।1
- योगी आदित्यनाथ की रैली में सही व्यवस्था का अभाव रहा। कार्यक्रम स्थल पर कोई उचित प्रबंध मौजूद नहीं थे।1
- मुख्यमंत्री ने बाँदा में ₹710 करोड़ की विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, जिसमें कुल 229 परियोजनाएँ शामिल हैं। इन परियोजनाओं का संबंध बाँदा विधानसभा और बबेरू विधानसभा क्षेत्रों से है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कई योजनाओं के लाभार्थियों को लाभान्वित किया, जिसमें आवास की चाभियाँ, आयुष्मान कार्ड, ₹5 लाख के चेक और सिलाई मशीनें शामिल थीं। अपने उद्बोधन में मुख्यमंत्री योगी ने बाँदा को सप्तऋषि बामदेव की पावन धरा बताया और बुंदेलखंड की प्रगति पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 9 साल पहले बुंदेलखंड की स्थिति बहुत खराब थी, जहाँ पलायन, पिछड़ापन, प्यास और माफियाओं (भू माफिया, बालू माफिया, वन माफिया) व डकैतों का राज था। उस समय थाने में एफआईआर तक दर्ज नहीं होती थी और व्यापारी भय के साए में जीते थे। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के आगमन और 2017 में सरकार बनने के बाद क्षेत्र में आशा की नई किरण जगने का दावा किया। उन्होंने बताया कि अब बुंदेलखंड के हर खेत को पानी और पेयजल मिल रहा है, लोग सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र प्राप्त कर रहे हैं, और सबके सपने साकार हो रहे हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज और कृषि विश्वविद्यालय के संचालन को अच्छी प्रतिनिधि चुनने का परिणाम बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2017 से पहले प्रदेश को लूटा जाता था और गरीबों के लिए कोई योजना नहीं थी, जबकि आज हर गरीब को योजना का लाभ मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार तुष्टिकरण की राजनीति नहीं करती और बेटी व व्यापारियों की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों को यमराज के पास भेज दिया जाता है। मुख्यमंत्री ने बाँदा को विकास का मॉडल और महापुरुषों का सम्मान करने वाला क्षेत्र बताया, चित्रकूट में श्री राम की स्मृति का जिक्र किया। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो हिन्दू परंपरा और सनातन का अपमान करते हैं, हिन्दू धर्म को कोसते हैं, और जिन्हें अयोध्या, काशी, मिर्जापुर के मंदिर अच्छे नहीं लगते। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर कब्रिस्तान में पैसा लगाने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा सरकार में पैसा मंदिरों में लग रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि डिफेंस कॉरिडोर और ब्रह्मोस मिसाइल के निर्माण से पाकिस्तान डर रहा है, और कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के शासनकाल में महापुरुषों की मूर्तियाँ क्यों नहीं लगीं या सड़कें क्यों नहीं बनीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि सपा-पोषित माफियाओं के कब्जे से गरीबों और व्यापारियों की 64 हजार एकड़ जमीन खाली कराई गई है। इसके अलावा, नौजवानों को रोजगार दिया गया है, कारीगरों के हुनर का विकास हुआ है, और बाँदा के शजर पत्थर की पहुँच विदेश तक हो गई है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में बुंदेलखंड में लोग नौकरी मांगने आएंगे। कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री ने बाँदा में 710 करोड़ की 229 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया, बुंदेलखंड के विकास की सराहना करते हुए पिछली सरकारों पर जमकर निशाना साधा और अपनी सरकार की उपलब्धियों पर जोर दिया।4
- हमीरपुर में राठ-बिखराया मार्ग पर काजीपुरा पुलिया के पास सड़क के बीच बना एक विशाल गड्ढा राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) खंड संख्या-2 की घोर उदासीनता के कारण यह गड्ढा पिछले लगभग एक वर्ष से बिना मरम्मत के पड़ा है, जिससे हर पल दुर्घटना का गंभीर खतरा बना हुआ है। विशेष रूप से बरसात के मौसम में, जब गड्ढे में पानी भर जाता है, तो इसकी गहराई का अनुमान लगाना असंभव हो जाता है। ऐसी स्थिति में दोपहिया और चारपहिया वाहनों के साथ-साथ पैदल चलने वाले लोगों के लिए भी हर कदम पर दुर्घटना का जोखिम रहता है। प्रतिदिन हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, और विभाग की लापरवाही लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करने पर मजबूर कर रही है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि इस स्थान पर कई छोटे-बड़े हादसे पहले भी हो चुके हैं, फिर भी लोक निर्माण विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया और न ही जनप्रतिनिधियों ने इस गंभीर समस्या पर ध्यान दिया। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद विभाग केवल आश्वासन देता रहा, जबकि सड़क की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। क्षेत्रवासियों ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल इस जानलेवा गड्ढे की मरम्मत कर सड़क को सुरक्षित बनाने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जवाबदेही संबंधित विभाग की होगी। अब यह बड़ा सवाल उठता है कि क्या लोक निर्माण विभाग किसी बड़ी दुर्घटना की प्रतीक्षा कर रहा है, या फिर लोगों के जीवन को बचाने के लिए इस खतरनाक गड्ढे की मरम्मत समय पर की जाएगी?1