सैंज में पोषण पखवाड़े का आयोजन: प्रदर्शनी के माध्यम से दिया गया बेहतर स्वास्थ्य का संदेश। देखें वीडियो। रिपोर्ट 9 अप्रैल बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वीरवार को कुल्लू के सैंज में आयोजित "पोषण पखवाड़ा" स्वास्थ्य और जागरूकता की दृष्टि से एक सराहनीय कदम रहा। कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के सही उपयोग पर विशेष बल दिया गया। यहाँ इस कार्यक्रम के मुख्य अंश दिए गए हैं: 📋 कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं मुख्य अतिथि: कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) कुल्लू, गजेंद्र ठाकुर द्वारा की गई। सहभागिता: सहज सर्कल के दो दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं, सहायकों, स्थानीय महिलाओं और स्वयंसेवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्य उद्देश्य: समुदाय को पौष्टिक आहार और बेहतर स्वास्थ्य आदतों के प्रति जागरूक करना। 🍱 विशेष आकर्षण: व्यंजनों की प्रदर्शनी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लगाई गई विशेष प्रदर्शनी रही। इसमें कार्यकर्ताओं ने अपनी रचनात्मकता और पोषण के ज्ञान का बेहतरीन प्रदर्शन किया: विविध व्यंजन: प्रदर्शनी में स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों से बने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। पोषण का प्रदर्शन: इन व्यंजनों के माध्यम से यह दिखाया गया कि कैसे घर में उपलब्ध साधारण सामग्री से भी 'प्रोटीन और विटामिन' से भरपूर संतुलित थाली तैयार की जा सकती है। सीख: उपस्थित महिलाओं को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले आहार तैयार करने की व्यावहारिक जानकारी दी गई। 🥗 जागरूकता के प्रमुख बिंदु आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनी के साथ-साथ निम्नलिखित विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी: संतुलित आहार: स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फलों और सब्जियों का महत्व। कुपोषण मुक्त समाज: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के विशेष स्वास्थ्य की देखभाल। स्वच्छता: भोजन पकाने और व्यक्तिगत स्वच्छता के कड़े नियमों का पालन। श्री अन्न (Millet): आहार में मोटे अनाज को शामिल करने के फायदे। 💡 प्रभाव इस प्रकार के आयोजनों और विशेष रूप से व्यंजनों की प्रदर्शनी से सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे लोगों की रसोई तक पहुँचती है। इससे स्थानीय समुदायों में 'सही पोषण, देश रोशन' के संकल्प को मजबूती मिली है। कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवियों की यह सक्रिय भागीदारी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य और पोषण के प्रति चेतना तेजी से बढ़ रही है।
सैंज में पोषण पखवाड़े का आयोजन: प्रदर्शनी के माध्यम से दिया गया बेहतर स्वास्थ्य का संदेश। देखें वीडियो। रिपोर्ट 9 अप्रैल बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वीरवार को कुल्लू के सैंज में आयोजित "पोषण पखवाड़ा" स्वास्थ्य और जागरूकता की दृष्टि से एक सराहनीय कदम रहा। कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के सही उपयोग पर विशेष बल दिया गया। यहाँ इस कार्यक्रम के मुख्य अंश दिए गए हैं: 📋 कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं मुख्य अतिथि: कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) कुल्लू, गजेंद्र ठाकुर द्वारा की गई। सहभागिता: सहज सर्कल के दो दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं, सहायकों, स्थानीय महिलाओं और स्वयंसेवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्य उद्देश्य: समुदाय को पौष्टिक आहार और बेहतर स्वास्थ्य आदतों के प्रति जागरूक करना। 🍱 विशेष आकर्षण: व्यंजनों की प्रदर्शनी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लगाई गई विशेष प्रदर्शनी रही। इसमें कार्यकर्ताओं ने अपनी रचनात्मकता और पोषण के ज्ञान का बेहतरीन प्रदर्शन किया: विविध व्यंजन: प्रदर्शनी में स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों से बने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। पोषण
का प्रदर्शन: इन व्यंजनों के माध्यम से यह दिखाया गया कि कैसे घर में उपलब्ध साधारण सामग्री से भी 'प्रोटीन और विटामिन' से भरपूर संतुलित थाली तैयार की जा सकती है। सीख: उपस्थित महिलाओं को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले आहार तैयार करने की व्यावहारिक जानकारी दी गई। 🥗 जागरूकता के प्रमुख बिंदु आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनी के साथ-साथ निम्नलिखित विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी: संतुलित आहार: स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फलों और सब्जियों का महत्व। कुपोषण मुक्त समाज: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के विशेष स्वास्थ्य की देखभाल। स्वच्छता: भोजन पकाने और व्यक्तिगत स्वच्छता के कड़े नियमों का पालन। श्री अन्न (Millet): आहार में मोटे अनाज को शामिल करने के फायदे। 💡 प्रभाव इस प्रकार के आयोजनों और विशेष रूप से व्यंजनों की प्रदर्शनी से सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे लोगों की रसोई तक पहुँचती है। इससे स्थानीय समुदायों में 'सही पोषण, देश रोशन' के संकल्प को मजबूती मिली है। कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवियों की यह सक्रिय भागीदारी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य और पोषण के प्रति चेतना तेजी से बढ़ रही है।
- रिपोर्ट 9 अप्रैल बुद्धि सिंह ठाकुर सैंज। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वीरवार को कुल्लू के सैंज में आयोजित "पोषण पखवाड़ा" स्वास्थ्य और जागरूकता की दृष्टि से एक सराहनीय कदम रहा। कार्यक्रम में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के सही उपयोग पर विशेष बल दिया गया। यहाँ इस कार्यक्रम के मुख्य अंश दिए गए हैं: 📋 कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं मुख्य अतिथि: कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) कुल्लू, गजेंद्र ठाकुर द्वारा की गई। सहभागिता: सहज सर्कल के दो दर्जन से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्ताओं, सहायकों, स्थानीय महिलाओं और स्वयंसेवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्य उद्देश्य: समुदाय को पौष्टिक आहार और बेहतर स्वास्थ्य आदतों के प्रति जागरूक करना। 🍱 विशेष आकर्षण: व्यंजनों की प्रदर्शनी इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा लगाई गई विशेष प्रदर्शनी रही। इसमें कार्यकर्ताओं ने अपनी रचनात्मकता और पोषण के ज्ञान का बेहतरीन प्रदर्शन किया: विविध व्यंजन: प्रदर्शनी में स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों से बने विभिन्न प्रकार के व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया। पोषण का प्रदर्शन: इन व्यंजनों के माध्यम से यह दिखाया गया कि कैसे घर में उपलब्ध साधारण सामग्री से भी 'प्रोटीन और विटामिन' से भरपूर संतुलित थाली तैयार की जा सकती है। सीख: उपस्थित महिलाओं को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाले आहार तैयार करने की व्यावहारिक जानकारी दी गई। 🥗 जागरूकता के प्रमुख बिंदु आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनी के साथ-साथ निम्नलिखित विषयों पर भी विस्तार से जानकारी दी: संतुलित आहार: स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फलों और सब्जियों का महत्व। कुपोषण मुक्त समाज: बच्चों और गर्भवती महिलाओं के विशेष स्वास्थ्य की देखभाल। स्वच्छता: भोजन पकाने और व्यक्तिगत स्वच्छता के कड़े नियमों का पालन। श्री अन्न (Millet): आहार में मोटे अनाज को शामिल करने के फायदे। 💡 प्रभाव इस प्रकार के आयोजनों और विशेष रूप से व्यंजनों की प्रदर्शनी से सरकारी योजनाओं की जानकारी सीधे लोगों की रसोई तक पहुँचती है। इससे स्थानीय समुदायों में 'सही पोषण, देश रोशन' के संकल्प को मजबूती मिली है। कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवियों की यह सक्रिय भागीदारी दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य और पोषण के प्रति चेतना तेजी से बढ़ रही है।2
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- Post by Dinesh Kumar1
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