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मुरैना शहर में शिक्षा विभाग की टीम ने कोचिंग संस्थानों का अचानक औचक निरीक्षण किया, जिससे कई संचालकों में हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई के दौरान कुछ संस्थान संचालक अपने सेंटरों पर ताला लगाकर भाग खड़े हुए। जांच में सामने आया है कि शहर के करीब 80 प्रतिशत कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा संबंधी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की गंभीर कमी पाई गई है। विभाग ने इन संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अगले 3 से 4 दिन के भीतर अग्निशमन व्यवस्था, सुरक्षित निकास मार्ग, स्वच्छ पेयजल, शौचालय की सुविधा और विद्युत सुरक्षा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग द्वारा बेसमेंट में संचालित कोचिंग संस्थानों की भी गहनता से जांच की जा रही है।
JP NEWS झोलाछाप पत्रकार /Rohit bajouriya
मुरैना शहर में शिक्षा विभाग की टीम ने कोचिंग संस्थानों का अचानक औचक निरीक्षण किया, जिससे कई संचालकों में हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई के दौरान कुछ संस्थान संचालक अपने सेंटरों पर ताला लगाकर भाग खड़े हुए। जांच में सामने आया है कि शहर के करीब 80 प्रतिशत कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा संबंधी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की गंभीर कमी पाई गई है। विभाग ने इन संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अगले 3 से 4 दिन के भीतर अग्निशमन व्यवस्था, सुरक्षित निकास मार्ग, स्वच्छ पेयजल, शौचालय की सुविधा और विद्युत सुरक्षा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग द्वारा बेसमेंट में संचालित कोचिंग संस्थानों की भी गहनता से जांच की जा रही है।
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- मुरैना शहर में शिक्षा विभाग की टीम ने कोचिंग संस्थानों का अचानक औचक निरीक्षण किया, जिससे कई संचालकों में हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई के दौरान कुछ संस्थान संचालक अपने सेंटरों पर ताला लगाकर भाग खड़े हुए। जांच में सामने आया है कि शहर के करीब 80 प्रतिशत कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा संबंधी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की गंभीर कमी पाई गई है। विभाग ने इन संचालकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अगले 3 से 4 दिन के भीतर अग्निशमन व्यवस्था, सुरक्षित निकास मार्ग, स्वच्छ पेयजल, शौचालय की सुविधा और विद्युत सुरक्षा सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें। शिक्षा विभाग द्वारा बेसमेंट में संचालित कोचिंग संस्थानों की भी गहनता से जांच की जा रही है।1
- धौलपुर जिले के भभूतिपुरा गांव में चंबल के कुख्यात पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की ति ये की बैठक में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और हरियाणा से बड़ी संख्या में गुर्जर समाज के लोग उमड़ पड़े। यह बैठक अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में 29 जून को जगन गुर्जर की हुई हत्या के बाद बुलाई गई थी, जिसके बाद से यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। समाज के प्रतिनिधियों ने इस दौरान आगे की रणनीति पर गहन चर्चा की। बैठक में गुर्जर समाज ने कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से जगन गुर्जर के भाई पप्पू गुर्जर को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल से धौलपुर जेल स्थानांतरित करने की मांग शामिल है। इसके अलावा, समाज ने सरकार से अन्य लंबित मांगों पर भी जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया। समुदाय ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 12 जुलाई तक उनकी ये सभी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो गुर्जर समाज द्वारा गठित 21 सदस्यीय समिति अगली रणनीति तय करते हुए बड़े आंदोलन की शुरुआत करेगी। फिलहाल, प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में शांतिपूर्ण स्थिति बनी हुई है।4
- भारत तिवारी की शहादत को समर्पित 80 वीडियो साझा करने की घोषणा की गई है, जिनमें से प्रत्येक वीडियो रोचक मीडिया से भरपूर होगा। इस श्रृंखला के तहत, एक वीडियो में सावित्री जटावनी ने भोजपुर कांड पर एक फिल्मी रील प्रस्तुत की है, जिसमें यह दर्शाया गया है कि देश के लिए लड़ने वालों को अंततः गोली खानी पड़ती है या फांसी पर चढ़ना पड़ता है। इस संदर्भ में, फिल्म 'क्रांतिवीर' की पूरी जानकारी साझा की गई है। 'क्रांतिवीर' फिल्म का निर्देशन और निर्माण मेहुल कुमार ने किया है, जिसकी कहानी के.के. सिंह ने लिखी है। फिल्म में नाना पाटेकर के संवाद स्वयं नाना पाटेकर ने लिखे हैं, जिसके लिए उन्हें 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला, जबकि मेहुल कुमार को 'सर्वश्रेष्ठ फिल्मफेयर अवार्ड' से सम्मानित किया गया था। यह फिल्म 22 जुलाई 1994 को रिलीज़ हुई थी, जिसमें डैनी डेन्जोंगप्पा, परेश रावल, नाना पाटेकर, फरीदा जलाल, डिंपल कपाड़िया, अतुल अग्निहोत्री और ममता कुलकर्णी ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं। डिंपल कपाड़िया ने एक गरीब पत्रकार का किरदार निभाया है जिसे माफिया डराते रहते हैं। वहीं, नाना पाटेकर के चरित्र को 9 साल की उम्र में माँ (फरीदा जलाल) द्वारा पीटे जाने के बाद घर छोड़कर चलती मोटर की सीढ़ी पर लटककर परेश रावल के आश्रय में पहुँचने वाले एक समाजवादी क्रांतिवीर के रूप में दर्शाया गया है, ठीक भरत भूषण की तरह। इस संदर्भ में, भरतभूषण तिवारी का यह कथन भी प्रस्तुत किया गया है कि उन्होंने बलिदान देने के लिए आरा की भूमि को चुना था, चाहे वह रामलीला मैदान हो या डीएम ऑफिस।2
- पूर्व दस्यु जगन गुर्जर की हत्या के मामले को लेकर गुर्जर समाज का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में, रविवार को धौलपुर के बाड़ी उपखंड के भवुतिपुरा गांव में जगन गुर्जर की तेरहवीं बैठक और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें गुर्जर समाज के सैकड़ों लोग शामिल हुए। इस सभा में सरकार पर अजमेर में हुए लिखित समझौते की शर्तों का पालन नहीं करने का गंभीर आरोप लगाया गया। जगन गुर्जर के पुत्र आशाराम के आह्वान पर आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में समाज के लोगों ने मामले की वर्तमान स्थिति पर चर्चा की और आगे की रणनीति तय की। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि अजमेर में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार के साथ जो लिखित समझौता हुआ था, उसकी शर्तों पर अब तक कोई अमल नहीं हुआ है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें अभी तक पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं कराई गई है, और अजमेर जेल में बंद पूर्व दस्यु पप्पू गुर्जर का भी अन्य जेल में स्थानांतरण नहीं किया गया है। सभा में मौजूद समाज के लोगों ने सरकार के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि यदि 12 जुलाई तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो गुर्जर समाज एक व्यापक आंदोलन शुरू करने के लिए विवश होगा। इस बैठक में आंदोलन की रूपरेखा को लेकर भी विस्तृत मंथन किया गया।4
- जौरा थाना क्षेत्र के गैपरा गांव के पास एक भीषण हादसा हो गया, जहाँ शुभ कार्य के लिए जा रही दो घोड़ियों की करंट लगने से घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और मामले की गहन जाँच में जुट गई है।1
- एक मामूली विवाद के बाद एक गर्भवती महिला के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया. इस बर्बरता के परिणामस्वरूप, महिला के गर्भ में पल रहे चार माह के बच्चे की दुखद मौत हो गई.1
- बाड़ी नगर के महाराज बाग चौराहा गोलंबर के पास स्थित नाला अक्सर जाम हो जाने से क्षेत्रवासियों, राहगीरों और विद्यार्थियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस नाले के जाम होने से गंदा और कीचड़युक्त पानी सड़क पर जमा हो जाता है, जिससे आवागमन बुरी तरह बाधित होता है। विशेष रूप से विद्यालय आने-जाने वाले छात्रों को इस स्थिति के कारण काफी कठिनाई झेलनी पड़ती है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, नगर पालिका प्रशासन को कई बार शिकायत करने पर नाले की सफाई तो कर दी जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों में नाला फिर से जाम हो जाता है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि समस्या का केवल अस्थायी समाधान किया जा रहा है, जबकि किसी स्थायी व्यवस्था का अभाव है। क्षेत्रवासियों ने अब नगर पालिका प्रशासन से इस नाले की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है, ताकि बार-बार होने वाले जलभराव और गंदगी से निजात मिल सके और आमजन को राहत मिल पाए।3