Shuru
Apke Nagar Ki App…
वृद्ध आश्रम अनूपगढ़ का हिंदी सोंग देवतुल्य वृद्धजनों के नाम जरुर सुने आगे शेयर करें।9672185366
User2307
वृद्ध आश्रम अनूपगढ़ का हिंदी सोंग देवतुल्य वृद्धजनों के नाम जरुर सुने आगे शेयर करें।9672185366
More news from राजस्थान and nearby areas
- Post by User23071
- Post by Duc News Rajsthan चैनल1
- लालगढ़ जाटान किसानों की परेशानी से जुड़ी एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। सरकार भले ही किसानों के हितों को लेकर बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। धान मंडी में फसल लेकर पहुंचने वाले किसानों को भारी अव्यवस्थाओं और शोषण का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का आरोप है कि जिस फसल को वे लगभग 6 महीने तक दिन-रात मेहनत और खून-पसीना एक करके तैयार करते हैं, वही फसल मंडी में पहुंचने के बाद सड़क पर बिखरी नजर आती है। व्यापारियों द्वारा अनाज को व्यवस्थित रखने के बजाय खुले में डाल दिया जाता है, जिससे किसानों की मेहनत मिट्टी में मिलती दिख रही है। मंडी में किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए शेड बनाए गए हैं, लेकिन इन शेडों का उपयोग किसानों के बजाय व्यापारियों द्वारा किया जा रहा है। शेड के नीचे व्यापारियों के ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़े रहते हैं, जबकि किसानों का अनाज खुले आसमान के नीचे पड़ा रहता है। इतना ही नहीं, पंजाब से आने वाली कंबाइन मशीनें भी मंडी के शेडों पर कब्जा जमाए हुए हैं। किसानों का कहना है कि ये मशीनें व्यापारियों के परिचितों की होती हैं, इसलिए उन्हें प्राथमिकता दी जाती है। इस कारण आम किसान की फसल को कोई संरक्षण नहीं मिल पाता। एक पीड़ित किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रात करीब 10 बजे उसने मीडिया से संपर्क कर मंडी की वास्तविक स्थिति दिखाई। खराब मौसम के कारण खुले में पड़ी फसल को नुकसान होने का डर बना हुआ है, जिससे किसान मानसिक रूप से भी परेशान नजर आ रहा है। किसान ने मांग की है कि मीडिया के माध्यम से सरकार तक उनकी आवाज पहुंचाई जाए, ताकि इस समस्या का समाधान हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या केवल लालगढ़ जाटान तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राजस्थान की धान मंडियों में व्यापारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से किसान शोषण का शिकार हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और किसानों को राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। लालगढ़ जाटान. शेड के नीचे खड़ी हुई कंबाइन व ट्रैक्टर ट्रालियां। लालगढ़ जाटान किसानों की फसल धान मंडी में सड़कों पर बिखरी हुई।1
- Post by Babulal kaswan1
- पत्रकार इकबाल खान उत्तर प्रदेश के नोएडा और ग्रेटर नोएडा में घरेलू और कमर्शल एलपीजी गैस की भारी किल्लत ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि इसका असर अब औद्योगिक उत्पादन पर भी साफ दिखने लगा है। जानकारी के अनुसार, गैस संकट के चलते कई फैक्ट्रियों और इकाइयों में उत्पादन करीब 20 प्रतिशत तक गिर गया है। उद्योगों की रफ्तार धीमी पड़ने से कामगारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि दो वक्त की रोटी के लिए जूझ रहे मजदूर अब मजबूरी में अपने गांवों की ओर पलायन करने लगे हैं। इस संकट की सबसे ज्यादा मार दिहाड़ी मजदूरों और कामगारों पर पड़ी है, जो बिल्डर साइटों, गारमेंट यूनिट्स और एक्सपोर्ट कंपनियों में काम करते हैं। इन कामगारों के पास स्थायी गैस कनेक्शन नहीं होता और वे छोटे 5 किलो वाले सिलेंडर या पेट्रोमेक्स के जरिए अपना गुजारा करते थे।अब बाजार में गैस की उपलब्धता लगभग खत्म हो चुकी है। जहां कहीं गैस मिल भी रही है, वहां ऊंचे दाम वसूले जा रहे हैं, जिससे गरीब मजदूरों के लिए खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है। इधर बीकानेर में भी हालात अलग नहीं हैं। यहां खुले बाजार में 1से 2 किलो गैस भरवाने पर 170 से 200 रुपये प्रति किलो तक वसूले जा रहे हैं। खासकर बाहर से आए प्रवासी मजदूरों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है, जिनके पास कोई गैस कनेक्शन नहीं है। ऐसे मजदूरों के लिए शहर में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नजर नहीं आ रही है, जिससे वे अपना दो वक्त का खाना बना सकें। सरकार को इन प्रवासी मजदूरों के लिए अलग से व्यवस्था करनी चाहिए, जैसे अस्थायी रसोई या सस्ती गैस उपलब्ध कराना, ताकि उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें।यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई और मजदूरों के लिए राहत कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर न केवल उद्योगों बल्कि सामाजिक ढांचे पर भी देखने को मिल सकता है।1
- "सादर निवेदन है कि कोटमदेसर (बीकानेर) के पास स्थित नहर से कुछ लोगों द्वारा खुलेआम पाइप डालकर अवैध रूप से पानी की चोरी की जा रही है। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि एक लंबा पाइप नहर के अंदर डाला गया है, जो सीधे एक निजी प्लांट में पानी खींच रहा है। इस अवैध गतिविधि के कारण नहर के पानी का स्तर कम हो रहा है और टेल (छोर) पर स्थित किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। कृपया इस पर तुरंत संज्ञान लें, मौके की जांच करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें ताकि सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके।"1
- भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल की कीमत 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दी. सूत्रों ने बताया कि मिडिल ईस्ट में युद्ध के बाद दुनिया भर में तेल की कीमतों में हालिया उछाल का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाला जा रहा है. भारत में फ्यूल मार्केटिंग कंपनियों पर दबाव है क्योंकि 28 फरवरी से अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद रिटेल पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर हैं. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर मिलिट्री हमले किए थे, जिसके बाद तेहरान ने बड़ी जवाबी कार्रवाई की थी. नायरा एनर्जी, जो भारत के 102,075 पेट्रोल पंपों में से 6,967 चलाती है, ने इनपुट लागत में बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालने का फैसला किया है. हालांकि कंपनी के प्रवक्ता ने इस खबर पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की. रिलायंस इंडस्ट्रीज़ और बीपी पीएलयू का फ्यूल रिटेलिंग जॉइंट वेंचर, जियो-बीपी, जिसके 2,185 पेट्रोल पंप हैं, ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी नुकसान होने के बावजूद अभी तक कीमतें नहीं बढ़ाई हैं. #bikaner #new #patrol1
- Post by Duc News Rajsthan चैनल1