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बारा में सरकारी जमीन चिह्नित कर भूमि सिनो को दो नहीं 12 नवम्बर को अनवरत आन्दोलन की थी चेतावनी बारा, प्रयागराज। तहसील बारा क्षेत्र के नीबी, लोहगरा, हड्डी टोला, चंद्रा सहित पूरे क्षेत्र में पड़ी सरकारी भूमि को चिन्हित कर भूमिहीनों को पट्टा देने, गौवंश और वन्य जीवों के नाम आरक्षित करने और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर किसानों ने बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। किसान नेताओं ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी सैकड़ों परिवार भूमिहीन हैं, जबकि जगह-जगह सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हैं या बंजर पड़ी हैं। गौवंश सड़कों पर भटक रहे हैं और वन्य जीवों के लिए कोई आरक्षित चारागाह नहीं है।इन सभी मुद्दों को लेकर आगामी 12 नवंबर को तहसील बारा में अनवरत आंदोलन किया जाएगा।आंदोलन का एक ही नारा होगा - जब तक काम नहीं, तब तक वापसी नहीं जय जवान, जय किसान।
राकेश पटेल सी न्यूज़
बारा में सरकारी जमीन चिह्नित कर भूमि सिनो को दो नहीं 12 नवम्बर को अनवरत आन्दोलन की थी चेतावनी बारा, प्रयागराज। तहसील बारा क्षेत्र के नीबी, लोहगरा, हड्डी टोला, चंद्रा सहित पूरे क्षेत्र में पड़ी सरकारी भूमि को चिन्हित कर भूमिहीनों को पट्टा देने, गौवंश और वन्य जीवों के नाम आरक्षित करने और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर किसानों ने बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। किसान नेताओं ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी सैकड़ों परिवार भूमिहीन हैं, जबकि जगह-जगह सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हैं या बंजर पड़ी हैं। गौवंश सड़कों पर भटक रहे हैं और वन्य जीवों के लिए कोई आरक्षित चारागाह नहीं है।इन सभी मुद्दों को लेकर आगामी 12 नवंबर को तहसील बारा में अनवरत आंदोलन किया जाएगा।आंदोलन का एक ही नारा होगा - जब तक काम नहीं, तब तक वापसी नहीं जय जवान, जय किसान।
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- भीतेश्वर धाम दुबहा में बाल कृष्ण की लीलाओं से गूंजा पांडाल *भीटेश्वर धाम दुबहा में बाल कृष्ण की लीलाओं से गूंजा पंडाल* *मटकी फोड़,गोवर्धन पूजा और 56 भोग ने मोहा मन* *डॉ. अरुणाचार्य जी महाराज की अमृतवाणी पर झूमे श्रद्धालु* *बारा प्रयागराज।* क्षेत्र के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ *भीटेश्वर धाम दुबहा* में चल रहे *सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ* में शनिवार का दिन *बाल कृष्ण के प्रेम, मस्ती और भक्ति* के नाम रहा।आज के दिन *कथा व्यास डॉक्टर अरुणाचार्य जी महाराज* ने अपने मुखारविंद से भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का इतना सजीव वर्णन किया कि पूरा पंडाल वृंदावन बन गया। *श्री बाल कृष्ण लीला - माखन चोर की लीला:* महाराज जी ने बताया - "नंदलाला बचपन में कितने नटखट थे। यशोदा मैया के लाख मना करने पर भी गोपियों के घर जाकर माखन चुराते,मटकी फोड़ते और फिर भोली सूरत बनाकर कहते - मैंने नहीं किया। यह लीला हमें सिखाती है कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम के भूखे हैं, उनके माखन के नहीं।" कथा सुनते ही बच्चे और महिलाएं भाव-विभोर हो गईं। *मटकी फोड़ उत्सव - पंडाल में बरसा दही-माखन:* बाल लीला के दौरान ही पंडाल में *मटकी फोड़* का सजीव मंचन किया गया। एक ऊंची मटकी में दही-माखन भरकर लटकाया गया, जिसे बाल गोपाल बने बच्चों ने फोड़ा। जैसे ही मटकी फूटी, श्रद्धालुओं पर दही-माखन की बौछार हुई और पूरा पंडाल *"गोविंदा आला रे आला"* और *"माखन मिश्री के भोग"* के जयकारों से गूंज उठा। *गोवर्धन पूजा - छोटी उंगली पर उठाया गोवर्धन पर्वत:* सबसे मार्मिक प्रसंग रहा *गोवर्धन लीला।* महाराज जी ने कहा - "जब इंद्रदेव ने अभिमान में आकर ब्रज में 7 दिन तक मूसलाधार बारिश की, तो 7 साल के नन्हे कन्हैया ने अपनी छोटी उंगली पर *गोवर्धन पर्वत को 7 दिन तक उठाकर* पूरे ब्रजवासियों, गौ-धन की रक्षा की। यह बताता है कि भगवान कभी अपने भक्तों को अकेला नहीं छोड़ते।" कथा सुनकर कई बुजुर्गों की आंखें भर आईं। पंडाल में गोवर्धन पर्वत की झांकी भी सजाई गई थी। *छप्पन भोग- महाप्रसाद का अलौकिक दर्शन:* गोवर्धन पूजा के उपलक्ष्य में आज भगवान श्री बाल कृष्ण को *56 प्रकार के व्यंजनों का छप्पन भोग* अर्पित किया गया। इसमें माखन-मिश्री,लड्डू,पूड़ी,कचौड़ी, खीर,हलवा,फल,मिष्ठान सहित 56 भोगों की विशाल थाली सजाई गई। श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से दर्शन किए और महाप्रसाद ग्रहण किया। पुजारी ने बताया कि यशोदा मैया दिन में 8 पहर,7 दिन तक 56 भोग लगाती थीं, तभी से यह परंपरा है। *रविवार* होने के कारण पंडाल में भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं कृष्ण भजनों पर नाच उठीं। पूरा दुबहा धाम *"राधे-राधे"* के जयकारों से गूंजता रहा। सोमवार को *रास पंचाध्यायी महाराम और श्री कृष्णा रुक्मणी विवाह* का प्रसंग सुनाया जाएगा। आयोजक समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।2
- बारा में सरकारी जमीन चिह्नित कर भूमि सिनो को दो नहीं 12 नवम्बर को अनवरत आन्दोलन की थी चेतावनी बारा, प्रयागराज। तहसील बारा क्षेत्र के नीबी, लोहगरा, हड्डी टोला, चंद्रा सहित पूरे क्षेत्र में पड़ी सरकारी भूमि को चिन्हित कर भूमिहीनों को पट्टा देने, गौवंश और वन्य जीवों के नाम आरक्षित करने और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर किसानों ने बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। किसान नेताओं ने कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी सैकड़ों परिवार भूमिहीन हैं, जबकि जगह-जगह सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे हैं या बंजर पड़ी हैं। गौवंश सड़कों पर भटक रहे हैं और वन्य जीवों के लिए कोई आरक्षित चारागाह नहीं है।इन सभी मुद्दों को लेकर आगामी 12 नवंबर को तहसील बारा में अनवरत आंदोलन किया जाएगा।आंदोलन का एक ही नारा होगा - जब तक काम नहीं, तब तक वापसी नहीं जय जवान, जय किसान।1
- प्रयागराज में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, DCP यमुनानगर विवेक चंद्र यादव का तबादला प्रयागराज में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, DCP यमुनानगर विवेक चंद्र यादव का तबादला प्रयागराज - पुलिस कमिश्नरेट प्रयागराज में लगातार तबादलों का दौर जारी है। इसी क्रम में पुलिस कमिश्नर ने बड़ा फेरबदल करते हुए DCP यमुनानगर विवेक चंद्र यादव का स्थानांतरण कर दिया है। सूत्रों के अनुसार पुलिसिंग को और बेहतर बनाने के लिए कमिश्नर द्वारा लगातार विभाग में बदलाव किए जा रहे हैं।1
- उत्तर प्रदेश के झांसी में एक चूहे के साथ कथित क्रूरता का मामला सामने आया है। ओरछा गेट स्थित कसाई मंडी इलाके में कुछ युवकों पर चूहे को रस्सी से बांधकर ज्वलनशील पदार्थ डालने और आग लगाने का आरोप, विडियो वायरल उत्तर प्रदेश के झांसी में एक चूहे के साथ कथित क्रूरता का मामला सामने आया है। ओरछा गेट स्थित कसाई मंडी इलाके में कुछ युवकों पर चूहे को रस्सी से बांधकर ज्वलनशील पदार्थ डालने और आग लगाने का आरोप है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। वीडियो सामने आने पर लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जुनैद कुरैशी, जीशान कुरैशी, आसिफ कुरैशी और सफीक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 के तहत FIR दर्ज की है। सीओ सिटी प्रिया सिंह के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के आधार पर शहर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा संख्या 319/26 दर्ज किया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, वहीं एक की तलाश जारी है।1
- रामपुर जेल से रिहा होने के बाद आज़म खान ने कहा, अब कहने के लिए बचा ही क्या है? मैं क्या कहूं? कानून खत्म ही हो गया है। मुसलमान होने की सजा है।हमारी गलती बस इतनी थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। यही हमारा गुनाह है। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनवाए। यही हमारा गुनाह है. रामपुर जेल से रिहा होने के बाद आज़म खान ने कहा, अब कहने के लिए बचा ही क्या है? मैं क्या कहूं? कानून खत्म ही हो गया है। मुसलमान होने की सजा है।हमारी गलती बस इतनी थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। यही हमारा गुनाह है। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनवाए। यही हमारा गुनाह है.1
- करोड़ों का नाला, ढाई सूत की सरिया और घटिया निर्माण का आरोप! रानीगंज में सरकारी धन की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल* दस एमएम सरिया का दावा, मौके पर पतली सरिया का इस्तेमाल? खुदाई से ढलाई तक जांच के घेरे में निर्माण कार्य, ठेकेदार और जिम्मेदार अभियंताओं की जवाबदेही पर सवाल* शंकरगढ़, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत विकासखंड शंकरगढ़ के रेलवे लाइन पार रानीगंज में रानीगंज से नारीबारी मार्ग की ओर करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे नाले के निर्माण कार्य में गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। निर्माण स्थल पर दिखाई दे रही स्थिति और श्रमिकों द्वारा बताई गई जानकारी के बीच अंतर ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच की आवश्यकता बढ़ा दी है। नाले में इस्तेमाल हो रही सरिया की मोटाई, कंक्रीट की गुणवत्ता, खुदाई की गहराई, आधार निर्माण और ढलाई की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब आखिर कौन देगा? जनता के धन से हो रहे निर्माण में यदि गुणवत्ता से समझौता हुआ तो इसकी जिम्मेदारी किसके सिर जाएगी? *दस एमएम सरिया बताई, मौके पर ढाई सूत की सरिया का संदेह—आखिर सच क्या है?* निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों द्वारा नाले में दस एमएम यानी लगभग तीन सूत की सरिया लगाए जाने की बात बताई गई, जबकि मौके पर मीडिया के निरीक्षण के दौरान इस्तेमाल की जा रही सरिया की मोटाई ढाई सूत के आसपास होने का संदेह सामने आया। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निर्माण में वास्तव में कितने एमएम की सरिया इस्तेमाल की जा रही है? क्या सरिया की मोटाई स्वीकृत तकनीकी प्राक्कलन के अनुरूप है? क्या सरिया की दूरी, जाल की बनावट और उसकी मात्रा निर्धारित डिजाइन के अनुसार रखी गई है? यदि मौके पर इस्तेमाल सरिया स्वीकृत मानक से कम पाई जाती है तो क्या ठेकेदार को भुगतान किया जाएगा या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? सरिया की वास्तविक मोटाई की पुष्टि तकनीकी मापन से होनी चाहिए, लेकिन उठे सवालों को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा। *नाले की खुदाई कितनी, ढलाई कितनी और आधार की मजबूती का हिसाब कौन देगा?* नाले की मजबूती केवल ऊपर से दिखाई देने वाली सीमेंट-कंक्रीट की ढलाई पर निर्भर नहीं करती। निर्धारित गहराई तक खुदाई, तल की सही तैयारी, आधार की मजबूती, कंक्रीट की मोटाई और सरिया की सही स्थिति निर्माण की गुणवत्ता के अहम हिस्से हैं। मौके पर सवाल यह भी है कि नाले की खुदाई कितनी गहराई तक की जा रही है? क्या खुदाई की माप तकनीकी नक्शे के अनुसार है? तल में पत्थर की गिट्टी किस निर्धारित मोटाई और प्रक्रिया से डाली जा रही है? उसके ऊपर कंक्रीट की ढलाई कितनी मोटी की जा रही है? क्या ढलाई से पहले विभागीय अभियंता मौके पर जांच करते हैं या निर्माण कार्य ठेकेदार की मर्जी से आगे बढ़ रहा है? निर्माण स्थल के वीडियो में तल की तैयारी और गिट्टी डालने की प्रक्रिया दिखाई देने की बात सामने आई है। अब विभाग को तकनीकी माप के साथ वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। *सीमेंट, बालू, गिट्टी और पानी के अनुपात की जांच क्यों नहीं?* नाले के निर्माण में इस्तेमाल हो रही सीमेंट, बालू, गिट्टी और पानी की गुणवत्ता तथा उनका निर्धारित अनुपात भी जांच का विषय है। क्या कंक्रीट स्वीकृत श्रेणी के अनुसार तैयार किया जा रहा है? क्या मिश्रण निर्धारित अनुपात में हो रहा है? क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांची गई है? ढलाई के बाद नियमानुसार तराई यानी क्योरिंग कराई जा रही है या नहीं? यदि कंक्रीट की गुणवत्ता कमजोर रही तो नाले में दरारें पड़ने, किनारों के टूटने और जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता परीक्षण कराना जरूरी है, न कि शिकायत सामने आने के बाद कागजी जांच की औपचारिकता निभाना। *करोड़ों का काम, लेकिन ठेकेदार और कार्यदायी संस्था का नाम तक स्पष्ट क्यों नहीं?* आखिर यह नाला किस विभाग या कार्यदायी संस्था द्वारा बनवाया जा रहा है? इसकी स्वीकृत लागत कितनी है? ठेकेदार कौन है? निर्माण कार्य पूरा करने की समयसीमा क्या निर्धारित है? कार्यस्थल पर योजना से संबंधित सूचना पट्ट लगा है या नहीं? यदि लगा है तो उस पर दर्ज विवरण के अनुसार निर्माण कराया जा रहा है या नहीं? क्या निर्माण कार्य की माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा मौके पर किए गए काम से मेल खाती है? क्या ठेकेदार को भुगतान से पहले गुणवत्ता की जांच होती है? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना चाहिए। सरकारी निर्माण कार्य में पारदर्शिता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। *अवर अभियंता से अधिशासी अभियंता तक—निगरानी की जिम्मेदारी किसकी?* निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी केवल ठेकेदार की नहीं, बल्कि संबंधित विभाग के तकनीकी अधिकारियों की भी होती है। मौके पर अवर अभियंता कितनी बार निरीक्षण कर चुके हैं? सहायक अभियंता और अधिशासी अभियंता ने निर्माण की गुणवत्ता की जांच की है या नहीं? क्या सरिया की मोटाई, ढलाई की मोटाई और कंक्रीट की गुणवत्ता का परीक्षण कराया गया? यदि निर्माण कार्य मानकों के विपरीत हो रहा है तो क्या विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है? और यदि जानकारी है तो अब तक सुधारात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग को देना चाहिए। *जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से तकनीकी जांच की मांग* रानीगंज नाला निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों पर जिलाधिकारी प्रयागराज और मुख्य विकास अधिकारी को संज्ञान लेकर निष्पक्ष तकनीकी जांच करानी चाहिए। संबंधित विभाग के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और अवर अभियंता की मौजूदगी में सरिया की वास्तविक मोटाई, खुदाई की गहराई, आधार की मोटाई, कंक्रीट की गुणवत्ता और निर्माण की माप का परीक्षण कराया जाए। यदि नाला विकासखंड अथवा ग्राम पंचायत की योजना से बन रहा है तो खंड विकास अधिकारी और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की भूमिका भी स्पष्ट की जाए। वहीं यदि निर्माण किसी अन्य विभाग या संस्था के माध्यम से कराया जा रहा है तो उसकी जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों का नाम सार्वजनिक किया जाए। *जनता के पैसे से निर्माण, ठेकेदार की मनमानी नहीं चलेगी!* रानीगंज से नारीबारी मार्ग की ओर बन रहा नाला क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन यदि निर्माण के दौरान ही गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो भविष्य में इसकी मजबूती और उपयोगिता पर संदेह होना स्वाभाविक है। क्या नाला निर्धारित मानकों के अनुसार बनेगा या कुछ वर्षों में टूट-फूट और जलभराव की समस्या फिर सामने आएगी? क्या निर्माण पूरा होने के बाद भी इसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी तय होगी? जनता के धन से हो रहे निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या मानकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर तकनीकी जांच करे, निर्माण की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करे और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो ठेकेदार सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे। *सवाल साफ है—करोड़ों की लागत से बन रहे नाले की गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा और निर्माण में गड़बड़ी मिलने पर जवाबदेही किसकी तय होगी?*1
- शराब के नशे मे युवक व दो महिलाओं ने बीच सड़क पर की मारपीट शराब पीने के बाद युवक व दो महिलाओं ने बीच सड़क पर की मारपीट वीडियो हो रहा वायरल मिर्जापुर ड्रमंण्डगंज क्षेत्र के रतेह चौराहा पर शराब पीने के बाद दो महिलाएं और एक युवक आपस में उलझ गए और कहासुनी के बाद एक दूसरे पर चप्पलों से मारपीट करने लगे। वायरल वीडियो में युवक ने एक महिला के साथ धक्का मुक्की करते हुए बीच सड़क पर गिरा दिया। शराब के नशे में धुत दोनों महिलाओं और युवक के इस कारनामे को सड़क से गुजरने वाले राहगीर देखते रहे।इसी दौरान किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार बीते शनिवार शाम को भैंसोड़ गांव से आए एक युवक और दो महिलाओं ने कंपोजिट शराब की दुकान पर जाकर शराब खरीदी तीनों आपस में एक साथ बैठकर शराब पी । कुछ देर बाद शराब के नशे में होने पर दोनों महिलाएं और युवक बीच सड़क आपस में कहासुनी करने लगे चप्पल से मारपीट करने लगे।बीच सड़क पर तीनों का उत्पात देख लोगों की डाट फटकार के बाद दोनों महिलाएं और युवक कुछ देर बाद वहां से खिसक लिए। वायरल हो रहे वीडियो को देखकर ग्रामीणों में महिलाओं के शराब के नशे में बीच सड़क पर उत्पात मचाने को लेकर क्षेत्र में तरह तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।1
- करोड़ों का नाला ढाई सूट की सरिया और घटिया निर्माण का आरोप रानीगंज में सरकारी धन की गुणवत्ता पर बड़ा आरोप लोग पूछ रहे सवाल जिम्मेदार मौन शंकरगढ़, प्रयागराज। बारा तहसील अंतर्गत विकासखंड शंकरगढ़ के रानीगंज (रेलवे लाइन पार) में रानीगंज से नारीबारी मार्ग की ओर बन रहे करोड़ों रुपये के नाले में घटिया निर्माण का बड़ा आरोप लगा है। 10 MM का दावा, मौके पर ढाई सूत निर्माण में लगे श्रमिकों ने 10 MM यानी तीन सूत की सरिया लगाने की बात कही, जबकि मौके पर निरीक्षण के दौरान लग रही सरिया ढाई सूत के आसपास नजर आई। सवाल है कि क्या सरिया की मोटाई, जाल की दूरी और मात्रा स्वीकृत एस्टीमेट के अनुसार है खुदाई से ढलाई तक सवालों में नाले की खुदाई कितनी गहरी की गई? तल में गिट्टी किस मोटाई से डाली गई? कंक्रीट की ढलाई कितनी मोटी है सीमेंट-बालू-गिट्टी का अनुपात क्या है। क्या ढलाई के बाद तराई हो रही है? मौके पर विभागीय इंजीनियर जांच करने आते भी हैं या काम ठेकेदार की मर्जी से चल रहा है पारदर्शिता गायब यह नाला किस विभाग का है, लागत कितनी है, ठेकेदार कौन है, सूचना पट्ट कहां है? कुछ भी मौके पर स्पष्ट नहीं है।जिम्मेदार कौन गुणवत्ता की जिम्मेदारी सिर्फ ठेकेदार की नहीं, अवर अभियंता से लेकर अधिशासी अभियंता तक की है। क्या किसी ने सरिया की माप और कंक्रीट की गुणवत्ता चेक की ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि मौके पर तकनीकी टीम भेजकर सरिया की मोटाई, खुदाई की गहराई और कंक्रीट की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गड़बड़ी मिलने पर ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो।1