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सिवनी में धूमधाम से मनाया गया वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्मोत्सव। सिवनी में धूमधाम से मनाया गया वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्मोत्सव। शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की वीरगाथा को याद कर गूंजा पूरा परिसर — “रानी अवंती बाई अमर रहें!”
सरवन वर्मा पत्रकार
सिवनी में धूमधाम से मनाया गया वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्मोत्सव। सिवनी में धूमधाम से मनाया गया वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्मोत्सव। शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की वीरगाथा को याद कर गूंजा पूरा परिसर — “रानी अवंती बाई अमर रहें!”
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- सिवनी में धूमधाम से मनाया गया वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्मोत्सव। सिवनी में धूमधाम से मनाया गया वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्मोत्सव। शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की वीरगाथा को याद कर गूंजा पूरा परिसर — “रानी अवंती बाई अमर रहें!”1
- *बादलपार बाजार चौक में शिव अभिषेक, हवन पूजन एवं विशाल भंडारा का कार्यक्रम किया गया* आज बादल पार बाजार चौक स्थित भगवान भोलेनाथ के मंदिर में शिव अभिषेक के साथ हवन पूजन का कार्यक्रम बड़े ही विधि विधान के साथ कार्यक्रम संपन्न किया गया तत्पश्चात विशाल भंडारा का भी आयोजन किया गया।3
- वीरता साहस एवं स्वाभिमान की प्रतीक रानी अवंतीबाई लोधी की जयंती पर बादल पार क्षेत्र में उत्साह एवं गौरव का माहौल देखने को मिला रानी अवंती बाई लोधी की जयंती पर बादलपार एवं आसपास के लोधी समाज के लोग एकत्रित होकर बाइक रैली निकाल कर ग्राम भ्रमण किया रैली में अवंती बाई लोधी की जय घोष के नारे लगाए गए एवं ग्राम भ्रमण कर रैली सिवनी के लिए रवाना हो गई1
- वंदे मातरम् के अपमान के विरोध में युवा मोर्चा का कैंडल मार्च, सिवनी में जताया आक्रोश सिवनी। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस के AICC कार्यालय में राष्ट्रगौरव एवं राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के कथित अनादर के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा, मध्यप्रदेश के आह्वान पर प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन एवं कैंडल मार्च आयोजित किए गए। इसी क्रम में सिवनी में भी युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने भाजपा कार्यालय से कचहरी चौक तक कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। युवा मोर्चा का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के प्रति जानबूझकर अनादर किया गया, जो देशवासियों की भावनाओं और राष्ट्रगौरव का अपमान है। इसी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने ‘वंदे मातरम् का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए और कचहरी चौक पहुंचकर सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया।1
- Seoni News: धधकते कंटेनर से NH-44 पर मचा हड़कंप, चार घंटे जाम के बीच पुलिस वाहन भी पलटा1
- पोदार प्रेप की शिक्षिकाओं और स्टाफ के सहयोग से कार्यक्रम सफल एवं यादगार बना। *तीन पीढ़ियों (बच्चे, माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी) ने मिलकर स्वतंत्रता दिवस मनाया।* *कार्यक्रम में देशभक्ति गीत, नृत्य, खेल एवं विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।* *बच्चों में भारतीय संस्कार, पारिवारिक प्रेम और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया गया।* *चेयरमैन अंशुल गोयल, डायरेक्टर अमित पांडेय सहित विद्यालय के पदाधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।* *पोदार प्रेप की शिक्षिकाओं और स्टाफ के सहयोग से कार्यक्रम सफल एवं यादगार* *सिवनी से मोहित यादव 9584667143*1
- देशभक्ति और भक्ति के संगम से निकली भव्य कावड़ यात्रा, 14 किमी पैदल चलकर भसियागढ़ में किया जलाभिषेक1
- *सिवनी में धूमधाम से मनाया गया वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्मोत्सव* _लोधी क्षत्रिय समाज ने शौर्य और सम्मान के साथ मनाई जयंती, जिलेभर से समाजजन हुए शामिल_ सिवनी/कुरई- वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी की जयंती के अवसर पर आज 16 अगस्त को सिवनी में लोधी क्षत्रिय समाज द्वारा उनका जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम, उत्साह और गौरव के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन सिवनी-खैरीटैक स्थित लॉन में किया गया, जिसमें जिलेभर से बड़ी संख्या में लोधी समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान वक्ताओं ने उनके अदम्य साहस, वीरता, स्वाभिमान और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ किए गए संघर्ष को याद करते हुए नई पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। *अंग्रेजों के सामने झुकने से किया इनकार* वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जन्म 16 अगस्त 1831 को सिवनी जिले के मनखेड़ी गांव में जमींदार राव जुझार सिंह के घर हुआ था। उनका विवाह रामगढ़ रियासत के राजकुमार विक्रमादित्य सिंह लोधी से हुआ। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब अंग्रेजी हुकूमत ने भारतीय रियासतों पर अपना नियंत्रण मजबूत करना शुरू किया, तब रामगढ़ रियासत भी अंग्रेजों की नजर में आ गई। ऐसी परिस्थितियों में रानी अवंती बाई ने अंग्रेजों के सामने झुकने के बजाय उनके खिलाफ संघर्ष का रास्ता चुना। राजा विक्रमादित्य सिंह के अस्वस्थ होने के बाद रानी अवंती बाई ने रियासत की बागडोर संभाली। उन्होंने अपने आसपास के जमींदारों, जागीरदारों और ग्रामीणों को एकजुट किया तथा अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह की तैयारी शुरू की। *गांव-गांव जाकर लोगों को किया एकजुट* रानी अवंती बाई ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष को केवल राजमहल तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने ग्रामीणों और अपने सहयोगियों को संगठित किया तथा अंग्रेजी शासन के विरुद्ध खड़े होने का आह्वान किया। उनके नेतृत्व में रामगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध जबरदस्त प्रतिरोध खड़ा हुआ। रानी स्वयं घोड़े पर सवार होकर युद्धभूमि में उतरती थीं और अपने सैनिकों का नेतृत्व करती थीं। उनके साहस और नेतृत्व से सैनिकों में नया उत्साह पैदा होता था। *अंग्रेजी सेना से हुआ भीषण संघर्ष* 1857 के विद्रोह के दौरान रानी अवंती बाई ने अंग्रेजी सेना के खिलाफ कई मोर्चों पर संघर्ष किया। उन्होंने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद अंग्रेजी सेना का डटकर मुकाबला किया। रामगढ़ की धरती पर अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने वाली रानी ने यह स्पष्ट कर दिया था कि मातृभूमि और स्वाभिमान की रक्षा के लिए वह किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगी। अंग्रेजी सेना संख्या और संसाधनों में अधिक मजबूत थी, लेकिन रानी अवंती बाई के नेतृत्व में स्थानीय सैनिकों और ग्रामीणों ने उन्हें कड़ी चुनौती दी। उनके संघर्ष ने आसपास के क्षेत्रों में भी अंग्रेजी शासन के खिलाफ प्रतिरोध की भावना को मजबूत किया। *अंतिम समय तक नहीं मानी हार* अंग्रेजों ने रानी अवंती बाई के विद्रोह को दबाने के लिए बड़ी सैन्य शक्ति का इस्तेमाल किया। परिस्थितियां लगातार कठिन होती गईं, लेकिन रानी ने आत्मसमर्पण करना स्वीकार नहीं किया। 20 मार्च 1858 को देवहारगढ़ के युद्ध में अंग्रेजी सेना से संघर्ष के दौरान जब उन्हें लगा कि परिस्थितियां उनके विरुद्ध जा रही हैं और अंग्रेज उन्हें जीवित पकड़ सकते हैं, तब उन्होंने अंग्रेजों के हाथों बंदी बनने के बजाय अपने प्राणों की आहुति देना स्वीकार किया। रानी अवंती बाई का बलिदान भारतीय इतिहास में साहस, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया। *आज भी प्रेरणा देती है रानी की वीरगाथा* रानी अवंती बाई लोधी की वीरगाथा केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा है। उन्होंने यह संदेश दिया कि विपरीत परिस्थितियों में भी अन्याय और गुलामी के सामने सिर नहीं झुकाया जाना चाहिए। सिवनी में आयोजित जन्मोत्सव के दौरान समाजजनों ने रानी अवंती बाई के शौर्य और बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में जिलेभर से पहुंचे समाजजनों की मौजूदगी ने आयोजन को भव्य रूप प्रदान किया। रानी अवंती बाई अमर रहें के जयघोष और देशभक्ति के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी का जीवन हमें सिखाता है कि मातृभूमि, स्वाभिमान और न्याय की रक्षा के लिए साहस के साथ संघर्ष करना ही सच्ची वीरता है।2