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3 hrs ago
user_ABN News Plus
ABN News Plus
पत्रकार Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh•
3 hrs ago

More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
  • अजीत मिश्रा (खोजी) मुजफ्फरनगर। थाने वाली रोड पर एक बेटी अपनी माँ के साथ घर के बाहर खड़ी थी। दिनदहाड़े बाइक पर दो लड़के आए। रेकी की। लौटे। और सीधे पूछा – "क्या रेट है?" ये सवाल नहीं था। ये ऐलान था उस बेखौफी का जो रसूख की कोख से पैदा होती है। पीड़िता चीख-चीख कर बता रही है: "बोले- हमारे पीछे बैठ के चल। मैंने कहा ये मेरा घर है, मेरी मम्मी है। बोले- फिर हम तेरे घर के अंदर चल रहे हैं।" गालियां दीं। धक्का दिया। भाग गए। हैवानियत यहीं नहीं रुकी। पुलिस के आने के बाद भी आरोपी दोबारा लौटा। गली में चिल्लाया – "उस लड़की को बुलाओ, मुझे उसके पैसे लगाने हैं!" रोकने वाले चाचा को धक्का मारा। स्कूटी की चाबी छीनने पर ही भागा। नाम अब सामने हैं – आर्यमान और शौर्य गुप्ता। आर्यमान BJP के पूर्व मंत्री का बेटा बताया जा रहा है। दोनों गिरफ्तार हैं। सलाखों के पीछे हैं। लेकिन सवाल सलाखों से बड़ा है। सवाल 1: घर की दहलीज़ पर खड़ी लड़की को 'रेट' पूछने का दुस्साहस कहाँ से आता है? जवाब साफ है – ताकत के नशे से। 'पापा मंत्री थे' वाले नशे से। 'थाने-पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ेगी' वाले नशे से। सवाल 2: पुलिस के सामने दोबारा लौटकर "पैसे लगाने हैं" कहना क्या है? ये कानून को ठेंगा दिखाना है। ये बताना है कि 'हमारी पहुँच ऊपर तक है, हमारा कोई क्या कर लेगा।' पीड़िता का एक-एक शब्द इस सिस्टम के मुँह पर तमाचा है: "मैं अपने घर में अपने भाई की तू-तड़ाक नहीं सुनती। कोई गैर आदमी आकर इतनी गंदी गाली दे जाए, मैं चुप नहीं बैठूंगी। इनकी बढ़िया पिटाई हो। लड़कियां घर के बाहर भी सेफ नहीं हैं।" ये सिर्फ छेड़छाड़ की खबर नहीं है। ये ऐलान-ए-जंग है। ये जंग है उस सोच के खिलाफ जो बेटी को घर के बाहर देखते ही 'माल' समझती है। ये जंग है उस रसूख के खिलाफ जो बाइक पर बैठकर बेटियों का 'रेट' तय करने निकलता है। गिरफ्तारी हो गई है। बहुत अच्छी बात। अब इंसाफ का इम्तिहान है। अगर ये 'साहबज़ादे' दो दिन में ज़मानत पर बाहर घूमते मिले, तो समझ लेना कि इस शहर की हर बेटी का रेट 'दो कौड़ी' तय हो गया है। और अगर कानून ने मिसाल बनाई, तो शायद कल कोई बाइक वाला किसी बेटी से 'रेट' पूछने से पहले सौ बार सोचेगा। फैसला अब अदालत का नहीं, पूरे सिस्टम का होगा। या तो बेटियां बचेंगी, या 'साहबज़ादों' का रसूख।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
मुजफ्फरनगर। थाने वाली रोड पर एक बेटी अपनी माँ के साथ घर के बाहर खड़ी थी। दिनदहाड़े बाइक पर दो लड़के आए। रेकी की। लौटे। और सीधे पूछा – "क्या रेट है?" 
ये सवाल नहीं था। ये ऐलान था उस बेखौफी का जो रसूख की कोख से पैदा होती है। 
पीड़िता चीख-चीख कर बता रही है: "बोले- हमारे पीछे बैठ के चल। मैंने कहा ये मेरा घर है, मेरी मम्मी है। बोले- फिर हम तेरे घर के अंदर चल रहे हैं।" गालियां दीं। धक्का दिया। भाग गए। 
हैवानियत यहीं नहीं रुकी। पुलिस के आने के बाद भी आरोपी दोबारा लौटा। गली में चिल्लाया – "उस लड़की को बुलाओ, मुझे उसके पैसे लगाने हैं!" रोकने वाले चाचा को धक्का मारा। स्कूटी की चाबी छीनने पर ही भागा।
नाम अब सामने हैं – आर्यमान और शौर्य गुप्ता। आर्यमान BJP के पूर्व मंत्री का बेटा बताया जा रहा है। दोनों गिरफ्तार हैं। सलाखों के पीछे हैं। 
लेकिन सवाल सलाखों से बड़ा है। 
सवाल 1: घर की दहलीज़ पर खड़ी लड़की को 'रेट' पूछने का दुस्साहस कहाँ से आता है? जवाब साफ है – ताकत के नशे से। 'पापा मंत्री थे' वाले नशे से। 'थाने-पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ेगी' वाले नशे से।
सवाल 2: पुलिस के सामने दोबारा लौटकर "पैसे लगाने हैं" कहना क्या है? ये कानून को ठेंगा दिखाना है। ये बताना है कि 'हमारी पहुँच ऊपर तक है, हमारा कोई क्या कर लेगा।'
पीड़िता का एक-एक शब्द इस सिस्टम के मुँह पर तमाचा है: "मैं अपने घर में अपने भाई की तू-तड़ाक नहीं सुनती। कोई गैर आदमी आकर इतनी गंदी गाली दे जाए, मैं चुप नहीं बैठूंगी। इनकी बढ़िया पिटाई हो। लड़कियां घर के बाहर भी सेफ नहीं हैं।"
ये सिर्फ छेड़छाड़ की खबर नहीं है। ये ऐलान-ए-जंग है। ये जंग है उस सोच के खिलाफ जो बेटी को घर के बाहर देखते ही 'माल' समझती है। ये जंग है उस रसूख के खिलाफ जो बाइक पर बैठकर बेटियों का 'रेट' तय करने निकलता है।
गिरफ्तारी हो गई है। बहुत अच्छी बात। अब इंसाफ का इम्तिहान है। 
अगर ये 'साहबज़ादे' दो दिन में ज़मानत पर बाहर घूमते मिले, तो समझ लेना कि इस शहर की हर बेटी का रेट 'दो कौड़ी' तय हो गया है। 
और अगर कानून ने मिसाल बनाई, तो शायद कल कोई बाइक वाला किसी बेटी से 'रेट' पूछने से पहले सौ बार सोचेगा। 
फैसला अब अदालत का नहीं, पूरे सिस्टम का होगा। या तो बेटियां बचेंगी, या 'साहबज़ादों' का रसूख।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • Post by Vipin Rai Journalist
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    Post by Vipin Rai Journalist
    user_Vipin Rai Journalist
    Vipin Rai Journalist
    खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • लम्भुआ कोतवाली क्षेत्र के बेदूपारा बाईपास पर शनिवार शाम करीब 7 बजे एक अनियंत्रित आयशर ट्रक कंटेनर ने एक ट्रैक्टर को टक्कर मार दी। इस हादसे में ट्रैक्टर सवार लोग बाल-बाल बच गए। गनीमत रही की किसी को चोटें नहीं आई। हाथरस से बलिया सामान लेकर जा रहा आयशर ट्रक कंटेनर (UP 82 T 7304) अचानक अनियंत्रित होकर गलत दिशा से आ रहे ट्रैक्टर से टकरा गया। टक्कर के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक के खलासी अरविंद पुत्र राम सेवक, निवासी नंगला रामजीत, जिला एटा को हिरासत में ले लिया। खलासी कथित तौर पर शराब के नशे में था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आगे की विधिक कार्यवाही कर रही है।
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    लम्भुआ कोतवाली क्षेत्र के बेदूपारा बाईपास पर शनिवार शाम करीब 7 बजे एक अनियंत्रित आयशर ट्रक कंटेनर ने एक ट्रैक्टर को टक्कर मार दी। इस हादसे में ट्रैक्टर सवार लोग बाल-बाल बच गए। गनीमत रही की किसी को चोटें नहीं आई। 
हाथरस से बलिया सामान लेकर जा रहा आयशर ट्रक कंटेनर (UP 82 T 7304) अचानक अनियंत्रित होकर गलत दिशा से आ रहे ट्रैक्टर से टकरा गया। टक्कर के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया।
पुलिस ने ट्रक के खलासी अरविंद पुत्र राम सेवक, निवासी नंगला रामजीत, जिला एटा को हिरासत में ले लिया। खलासी कथित तौर पर शराब के नशे में था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आगे की विधिक कार्यवाही कर रही है।
    user_Ashok verma
    Ashok verma
    Local News Reporter लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • संत कबीर नगर।।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “मिशन शक्ति फेज-5.0” के द्वितीय चरण के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर श्री संदीप कुमार मीना के निर्देशन एवं अपर पुलिस अधीक्षक श्री सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण, एंटी रोमियो अभियान तथा महिलाओं/बालिकाओं की सुरक्षा एवं जागरूकता के संबंध में चलाए जा रहे अभियान के क्रम में थाना कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के गोला बाजार एवं थाना बखिरा क्षेत्र के कस्बा बखिरा में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।नुक्कड़ नाटक के माध्यम से “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” एवं वूमेन पावर लाइन 1090 के संबंध में संदेश प्रसारित करते हुए महिलाओं एवं बालिकाओं को मिशन शक्ति फेज-5.0 के उद्देश्यों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही साइबर सुरक्षा एवं विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं बालिकाओं को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, जैसे मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, निराश्रित महिला पेंशन योजना तथा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई एवं उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।इसके अतिरिक्त, महिलाओं/बालिकाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों जैसे वूमेन पावर लाइन 1090, पुलिस आपातकालीन सेवा 112, एम्बुलेंस सेवा 108, चाइल्ड लाइन 1098, स्वास्थ्य सेवा 102, महिला हेल्पलाइन 181, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 एवं साइबर हेल्पलाइन 1930 के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान गुड टच-बैड टच, घरेलू हिंसा तथा साइबर अपराधों से बचाव के उपायों पर भी जागरूक किया गया एवं पम्पलेट वितरित किए गए।
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    संत कबीर नगर।।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित “मिशन शक्ति फेज-5.0” के द्वितीय चरण के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर श्री संदीप कुमार मीना के निर्देशन एवं अपर पुलिस अधीक्षक श्री सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण, एंटी रोमियो अभियान तथा महिलाओं/बालिकाओं की सुरक्षा एवं जागरूकता के संबंध में चलाए जा रहे अभियान के क्रम में थाना कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के गोला बाजार एवं थाना बखिरा क्षेत्र के कस्बा बखिरा में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।नुक्कड़ नाटक के माध्यम से “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” एवं वूमेन पावर लाइन 1090 के संबंध में संदेश प्रसारित करते हुए महिलाओं एवं बालिकाओं को मिशन शक्ति फेज-5.0 के उद्देश्यों के प्रति जागरूक किया गया। साथ ही साइबर सुरक्षा एवं विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं एवं बालिकाओं को सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, जैसे मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, निराश्रित महिला पेंशन योजना तथा मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई एवं उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।इसके अतिरिक्त, महिलाओं/बालिकाओं को विभिन्न महत्वपूर्ण हेल्पलाइन नंबरों जैसे वूमेन पावर लाइन 1090, पुलिस आपातकालीन सेवा 112, एम्बुलेंस सेवा 108, चाइल्ड लाइन 1098, स्वास्थ्य सेवा 102, महिला हेल्पलाइन 181, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 एवं साइबर हेल्पलाइन 1930 के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान गुड टच-बैड टच, घरेलू हिंसा तथा साइबर अपराधों से बचाव के उपायों पर भी जागरूक किया गया एवं पम्पलेट वितरित किए गए।
    user_खबरें 24
    खबरें 24
    Court reporter खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    8 hrs ago
  • ज़माना चाँद पर पहुँच गया और हमारे गाँव की सड़कें आज भी आज़ादी का इंतज़ार कर रही हैं। कच्ची राहें और टूटते सपने... आखिर कब तक? 🛤️🥀
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    ज़माना चाँद पर पहुँच गया और हमारे गाँव की सड़कें आज भी आज़ादी का इंतज़ार कर रही हैं। कच्ची राहें और टूटते सपने... आखिर कब तक? 🛤️🥀
    user_Harsh shukla
    Harsh shukla
    Mechanic लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
  • nice
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    nice
    user_Satyavan Chauhan
    Satyavan Chauhan
    Nurse आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • अजीत मिश्रा (खोजी) ​ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश दिनांक: 18 अप्रैल 2026 स्थान: हरैया, बस्ती ​हरैया (बस्ती)। उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ 'निपुण भारत' मिशन के तहत परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती जनपद के विकास खंड हरैया अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय मझौवा बाबू से आई एक तस्वीर ने पूरी व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। यहाँ मध्याह्न भोजन (MDM) पकाने के लिए किसी लकड़ी या गैस का नहीं, बल्कि उस ब्लैकबोर्ड (श्यामपट्ट) का इस्तेमाल किया गया, जिस पर बच्चों का भविष्य लिखा जाना था। ​सिलेंडर है तो धुआं क्यों? ​सरकार ने हर विद्यालय में रसोई गैस सिलेंडर की व्यवस्था सुनिश्चित की है ताकि पर्यावरण बचा रहे और बच्चों को स्वच्छ माहौल में भोजन मिले। लेकिन मझौवा बाबू विद्यालय में नियमों को ताक पर रखकर चूल्हे पर रोटियां सेंकी जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि क्या गैस सिलेंडर रिफिल कराने के पैसे डकारे जा रहे हैं या फिर जिम्मेदारों की सुस्ती इस कदर हावी है कि उन्हें चूल्हे का धुआं नजर नहीं आता? ​शिक्षा के 'हथियार' की आहुति ​हैरानी की बात तो यह है कि चूल्हा जलाने के लिए सूखी लकड़ियों के बजाय विद्यालय के ब्लैकबोर्ड को फाड़कर आग के हवाले कर दिया गया। जिस श्यामपट्ट पर शिक्षक ककहरा सिखाते थे, वह आज चूल्हे में जलकर राख हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि विद्यालय प्रशासन के लिए शिक्षा के उपकरणों की क्या अहमियत है। ​गंदगी का अंबार: स्कूल या तबेला? ​विद्यालय की अव्यवस्था यहीं खत्म नहीं होती। क्लासरूम के अंदर फैला पुआल और चारों तरफ पसरी गंदगी स्वच्छ भारत अभियान के दावों की पोल खोल रही है। जिस परिसर में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहां गंदगी का साम्राज्य जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। ​बड़ा सवाल: > "अगर गैस खत्म थी, तो लकड़ी का इंतजाम क्यों नहीं हुआ? और अगर कुछ नहीं मिला, तो क्या सीधे बच्चों की पढ़ाई के संसाधनों को ही जला देना एकमात्र विकल्प था?" ​मूकदर्शक बना विभाग ​इस पूरे प्रकरण में विद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह मौन हैं। नियमों की धज्जियां उड़ती देख भी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की चुप्पी यह इशारा करती है कि शायद मिलीभगत का खेल ऊपर तक है। ​अब देखना यह है कि इस वायरल तस्वीर और खबर के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मझौवा बाबू विद्यालय के लापरवाह जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर कागजी घोड़ों के बीच इस मामले को भी दबा दिया जाएगा।
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    अजीत मिश्रा (खोजी)
​ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश दिनांक: 18 अप्रैल 2026
स्थान: हरैया, बस्ती
​हरैया (बस्ती)। उत्तर प्रदेश सरकार एक तरफ 'निपुण भारत' मिशन के तहत परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती जनपद के विकास खंड हरैया अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय मझौवा बाबू से आई एक तस्वीर ने पूरी व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। यहाँ मध्याह्न भोजन (MDM) पकाने के लिए किसी लकड़ी या गैस का नहीं, बल्कि उस ब्लैकबोर्ड (श्यामपट्ट) का इस्तेमाल किया गया, जिस पर बच्चों का भविष्य लिखा जाना था।
​सिलेंडर है तो धुआं क्यों?
​सरकार ने हर विद्यालय में रसोई गैस सिलेंडर की व्यवस्था सुनिश्चित की है ताकि पर्यावरण बचा रहे और बच्चों को स्वच्छ माहौल में भोजन मिले। लेकिन मझौवा बाबू विद्यालय में नियमों को ताक पर रखकर चूल्हे पर रोटियां सेंकी जा रही हैं। सवाल यह उठता है कि क्या गैस सिलेंडर रिफिल कराने के पैसे डकारे जा रहे हैं या फिर जिम्मेदारों की सुस्ती इस कदर हावी है कि उन्हें चूल्हे का धुआं नजर नहीं आता?
​शिक्षा के 'हथियार' की आहुति
​हैरानी की बात तो यह है कि चूल्हा जलाने के लिए सूखी लकड़ियों के बजाय विद्यालय के ब्लैकबोर्ड को फाड़कर आग के हवाले कर दिया गया। जिस श्यामपट्ट पर शिक्षक ककहरा सिखाते थे, वह आज चूल्हे में जलकर राख हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि विद्यालय प्रशासन के लिए शिक्षा के उपकरणों की क्या अहमियत है।
​गंदगी का अंबार: स्कूल या तबेला?
​विद्यालय की अव्यवस्था यहीं खत्म नहीं होती। क्लासरूम के अंदर फैला पुआल और चारों तरफ पसरी गंदगी स्वच्छ भारत अभियान के दावों की पोल खोल रही है। जिस परिसर में बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए, वहां गंदगी का साम्राज्य जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
​बड़ा सवाल: > "अगर गैस खत्म थी, तो लकड़ी का इंतजाम क्यों नहीं हुआ? और अगर कुछ नहीं मिला, तो क्या सीधे बच्चों की पढ़ाई के संसाधनों को ही जला देना एकमात्र विकल्प था?"
​मूकदर्शक बना विभाग
​इस पूरे प्रकरण में विद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पूरी तरह मौन हैं। नियमों की धज्जियां उड़ती देख भी ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की चुप्पी यह इशारा करती है कि शायद मिलीभगत का खेल ऊपर तक है।
​अब देखना यह है कि इस वायरल तस्वीर और खबर के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारी मझौवा बाबू विद्यालय के लापरवाह जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर कागजी घोड़ों के बीच इस मामले को भी दबा दिया जाएगा।
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    19 hrs ago
  • *एक्शन में कप्तान चारु निगम, लेकिन कुछ दरोगा ड्यूटी में सोकर बिगाड़ रहे पुलिस की साख* लम्भुआ तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान सामने आई दरोगा की लापरवाही ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां मजिस्ट्रेट प्रीति जैन फरियादियों की समस्याएं सुनने में जुटी थीं, वहीं पास में बैठे दरोगा साहब गहरी नींद में सोते नजर आए। यह घटना सिर्फ एक अधिकारी की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब जिले की पुलिस कप्तान चारु निगम “लेडी सिंघम” के रूप में अपनी सख्त और सक्रिय कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। वह लगातार थानों का निरीक्षण कर रही हैं, अपराधियों पर शिकंजा कस रही हैं और पुलिस विभाग को चुस्त-दुरुस्त बनाने में लगी हैं। इसके बावजूद, कुछ दरोगाओं की ऐसी गैर-जिम्मेदाराना हरकतें न सिर्फ जनता के भरोसे को कमजोर कर रही हैं, बल्कि कप्तान की सख्त छवि को भी धूमिल करने का काम कर रही हैं। मौके पर मौजूद फरियादियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब अधिकारी ड्यूटी के दौरान ही सोते नजर आएंगे, तो अपराध नियंत्रण की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
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    *एक्शन में कप्तान चारु निगम, लेकिन कुछ दरोगा ड्यूटी में सोकर बिगाड़ रहे पुलिस की साख*
लम्भुआ तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान सामने आई दरोगा की लापरवाही ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां मजिस्ट्रेट प्रीति जैन फरियादियों की समस्याएं सुनने में जुटी थीं, वहीं पास में बैठे दरोगा साहब गहरी नींद में सोते नजर आए।
यह घटना सिर्फ एक अधिकारी की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब जिले की पुलिस कप्तान चारु निगम “लेडी सिंघम” के रूप में अपनी सख्त और सक्रिय कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। वह लगातार थानों का निरीक्षण कर रही हैं, अपराधियों पर शिकंजा कस रही हैं और पुलिस विभाग को चुस्त-दुरुस्त बनाने में लगी हैं।
इसके बावजूद, कुछ दरोगाओं की ऐसी गैर-जिम्मेदाराना हरकतें न सिर्फ जनता के भरोसे को कमजोर कर रही हैं, बल्कि कप्तान की सख्त छवि को भी धूमिल करने का काम कर रही हैं। मौके पर मौजूद फरियादियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब अधिकारी ड्यूटी के दौरान ही सोते नजर आएंगे, तो अपराध नियंत्रण की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
    user_Ashok verma
    Ashok verma
    Local News Reporter लंभुआ, सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • hi dosto aplog Kaise hai hame malum hai ki aap aap ache honge
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    hi dosto aplog Kaise hai hame malum hai ki aap aap ache honge
    user_Satyavan Chauhan
    Satyavan Chauhan
    Nurse आजमगढ़, आजमगढ़, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
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