मंत्री का एक्शन अस्पताल का ऑपरेशन: मधेपुरा मॉडल अस्पताल में बदली व्यवस्था, अब ‘रेफर’ नहीं इलाज पर जोर अस्पताल वही है लेकिन तस्वीर बदल रही है।जहां कभी बेहतर इलाज के लिए मरीजों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था, वहां अब इलाज की सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की कोशिश तेज हो गई है। दरअसल मधेपुरा के मॉडल अस्पताल यानी सदर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के एक्शन के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव का दावा किया जा रहा है। अब अस्पताल में महिलाओं की सर्जरी हो रही है।डेंटल सर्जरी की सुविधा मिल रही है। सामान्य चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं और हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा भी बढ़ाई जा रही है।इतना ही नहीं इमरजेंसी में सर्जरी की व्यवस्था और रेफरल मामलों के बेहतर मैनेजमेंट पर जोर दिया जा रहा है।और आने वाले दिनों में आंख और कान की सर्जरी शुरू करने की तैयारी है। यानी कोशिश साफ है ।मरीज को इलाज के लिए बाहर भेजने से पहले अस्पताल में ही इलाज की पूरी संभावना तलाश की जाए।ये मधेपुरा का मॉडल अस्पताल है,सरकारी अस्पताल की वही पहचान, वही व्यवस्था लेकिन अब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नई तस्वीर बनाने की कोशिश हो रही है।मरीजों को स्थानीय स्तर पर ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा सुविधा मिले, इसके लिए अस्पताल में सर्जरी और उपचार की सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। महिलाओं की सर्जरी डेंटल सर्जरी,सामान्य चिकित्सा और हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा।इन सेवाओं का विस्तार उन मरीजों के लिए बड़ी राहत बन सकता है, जिन्हें पहले इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। किसी अस्पताल की असली परीक्षा तब होती है जब मरीज गंभीर हालत में इमरजेंसी में पहुंचता है।ऐसे समय में रेफर की पर्ची नहीं तुरंत इलाज की जरूरत होती है।मधेपुरा मॉडल अस्पताल में इमरजेंसी के दौरान जरूरत पड़ने पर सर्जरी की व्यवस्था उपलब्ध होने की बात अस्पताल प्रशासन ने कही है। कोशिश यही है कि उपलब्ध संसाधनों और डॉक्टरों की मदद से मरीज को तत्काल उपचार दिया जाए।और अगर अस्पताल में इलाज संभव है तो उसे अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पताल भेजने की जरूरत न पड़े। बाइट — डॉ. सचिन कुमार | अस्पताल उपाधीक्षक मॉडल अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रयास है कि अधिक से अधिक मरीजों का इलाज यहीं किया जाए और अनावश्यक रेफरल को कम किया जाए। अब उस व्यवस्था की बात जिसका सबसे ज्यादा असर मरीज और उसके परिवार पर पड़ता है।गंभीर मरीज को बड़े अस्पताल भेजना कई बार जरूरी होता है।लेकिन उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करके अगर मरीज का इलाज स्थानीय स्तर पर हो सकता है, तो उसे बाहर भेजने से बचाना अस्पताल की बड़ी जिम्मेदारी है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल में अब इसी सोच के साथ रेफरल मामलों को बेहतर तरीके से मैनेज करने का दावा किया जा रहा है। डीपीएम प्रिंस कुमार के मुताबिक पहले की तुलना में मरीजों को बाहर रेफर करने की दर में धीरे-धीरे कमी आ रही है। यानी अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए पहले उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इलाज की संभावना तलाशने पर जोर है। बाइट — प्रिंस कुमार | डीपीएम रेफरल मामलों को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर इस्तेमाल कर मरीजों को मॉडल अस्पताल में ही इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। अब आंख और कान की बारी मधेपुरा मॉडल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का सिलसिला आगे भी जारी रखने की तैयारी है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक जल्द ही आंख और कान की सर्जरी की सुविधा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इन दोनों सेवाओं के शुरू होने के बाद जिले के मरीजों को इनसे जुड़ी सर्जरी के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल में स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होना बड़ी राहत साबित हो सकता है। क्योंकि बाहर का इलाज सिर्फ महंगा नहीं होता बल्कि मरीज के साथ पूरे परिवार की परेशानी भी बढ़ाता है। असली बदलाव की कसौटी लेकिन सवाल सिर्फ सुविधाएं बढ़ाने का नहीं है।सवाल है क्या इन सुविधाओं का लाभ मरीज को समय पर मिलेगा? क्या जरूरत के वक्त डॉक्टर उपलब्ध होंगे? क्या जरूरी सर्जरी अस्पताल में ही हो पाएगी? क्या रेफरल वास्तव में जरूरत के आधार पर होगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मरीजों के अनुभव से मिलेंगे। फिलहाल अस्पताल प्रशासन का दावा है कि व्यवस्था को बेहतर करने और मरीजों को ज्यादा से ज्यादा इलाज स्थानीय स्तर पर देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। कहते हैं नाम से नहीं, काम से पहचान बनती है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल भी अब इसी कसौटी पर है। स्वास्थ्य मंत्री का एक्शन,अस्पताल प्रबंधन की सक्रियता सर्जरी की सुविधा ,हड्डियों के इलाज का विस्तार रेफरल मैनेजमेंट में सुधार और आंख-कान की सर्जरी शुरू करने की तैयारी ये सब मिलकर एक नई तस्वीर बनाने की कोशिश जरूर दिखा रहे हैं। अब जरूरत है कि ये बदलाव सिर्फ दावों और फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज को जमीन पर महसूस हों। क्योंकि गरीब मरीज के लिए सरकारी अस्पताल सिर्फ एक इमारत नहीं होता वही उसका सबसे बड़ा सहारा होता है। और जब उस सहारे में इलाज की सुविधा बढ़ती है तो सिर्फ अस्पताल की तस्वीर नहीं बदलती बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीद बदलती है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल की बदलती तस्वीर फिलहाल इसी उम्मीद की कहानी कह रही है।
मंत्री का एक्शन अस्पताल का ऑपरेशन: मधेपुरा मॉडल अस्पताल में बदली व्यवस्था, अब ‘रेफर’ नहीं इलाज पर जोर अस्पताल वही है लेकिन तस्वीर बदल रही है।जहां कभी बेहतर इलाज के लिए मरीजों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था, वहां अब इलाज की सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की कोशिश तेज हो गई है। दरअसल मधेपुरा के मॉडल अस्पताल यानी सदर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के एक्शन के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव का दावा किया जा रहा है। अब अस्पताल में महिलाओं की सर्जरी हो रही है।डेंटल सर्जरी की सुविधा मिल रही है। सामान्य चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं और हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा भी बढ़ाई जा रही है।इतना ही नहीं इमरजेंसी में सर्जरी की व्यवस्था और रेफरल मामलों के बेहतर मैनेजमेंट पर जोर दिया जा रहा है।और आने वाले दिनों में आंख और कान की सर्जरी शुरू करने की तैयारी है। यानी कोशिश साफ है ।मरीज को इलाज के लिए बाहर भेजने से पहले अस्पताल में ही इलाज की पूरी संभावना तलाश की जाए।ये मधेपुरा का मॉडल अस्पताल है,सरकारी अस्पताल की वही पहचान, वही व्यवस्था लेकिन अब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नई तस्वीर बनाने की कोशिश हो रही है।मरीजों को स्थानीय स्तर पर ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा सुविधा मिले, इसके लिए अस्पताल में सर्जरी और उपचार की सेवाओं का विस्तार
किया जा रहा है। महिलाओं की सर्जरी डेंटल सर्जरी,सामान्य चिकित्सा और हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा।इन सेवाओं का विस्तार उन मरीजों के लिए बड़ी राहत बन सकता है, जिन्हें पहले इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। किसी अस्पताल की असली परीक्षा तब होती है जब मरीज गंभीर हालत में इमरजेंसी में पहुंचता है।ऐसे समय में रेफर की पर्ची नहीं तुरंत इलाज की जरूरत होती है।मधेपुरा मॉडल अस्पताल में इमरजेंसी के दौरान जरूरत पड़ने पर सर्जरी की व्यवस्था उपलब्ध होने की बात अस्पताल प्रशासन ने कही है। कोशिश यही है कि उपलब्ध संसाधनों और डॉक्टरों की मदद से मरीज को तत्काल उपचार दिया जाए।और अगर अस्पताल में इलाज संभव है तो उसे अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पताल भेजने की जरूरत न पड़े। बाइट — डॉ. सचिन कुमार | अस्पताल उपाधीक्षक मॉडल अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रयास है कि अधिक से अधिक मरीजों का इलाज यहीं किया जाए और अनावश्यक रेफरल को कम किया जाए। अब उस व्यवस्था की बात जिसका सबसे ज्यादा असर मरीज और उसके परिवार पर पड़ता है।गंभीर मरीज को बड़े अस्पताल भेजना कई बार जरूरी होता है।लेकिन उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करके अगर मरीज का इलाज स्थानीय स्तर पर हो सकता है, तो उसे बाहर भेजने से बचाना अस्पताल की
बड़ी जिम्मेदारी है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल में अब इसी सोच के साथ रेफरल मामलों को बेहतर तरीके से मैनेज करने का दावा किया जा रहा है। डीपीएम प्रिंस कुमार के मुताबिक पहले की तुलना में मरीजों को बाहर रेफर करने की दर में धीरे-धीरे कमी आ रही है। यानी अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए पहले उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इलाज की संभावना तलाशने पर जोर है। बाइट — प्रिंस कुमार | डीपीएम रेफरल मामलों को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर इस्तेमाल कर मरीजों को मॉडल अस्पताल में ही इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। अब आंख और कान की बारी मधेपुरा मॉडल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का सिलसिला आगे भी जारी रखने की तैयारी है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक जल्द ही आंख और कान की सर्जरी की सुविधा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इन दोनों सेवाओं के शुरू होने के बाद जिले के मरीजों को इनसे जुड़ी सर्जरी के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल में स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होना बड़ी राहत साबित हो सकता है। क्योंकि बाहर का इलाज सिर्फ महंगा नहीं होता बल्कि मरीज के साथ पूरे परिवार की परेशानी भी बढ़ाता है। असली बदलाव की कसौटी लेकिन सवाल
सिर्फ सुविधाएं बढ़ाने का नहीं है।सवाल है क्या इन सुविधाओं का लाभ मरीज को समय पर मिलेगा? क्या जरूरत के वक्त डॉक्टर उपलब्ध होंगे? क्या जरूरी सर्जरी अस्पताल में ही हो पाएगी? क्या रेफरल वास्तव में जरूरत के आधार पर होगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मरीजों के अनुभव से मिलेंगे। फिलहाल अस्पताल प्रशासन का दावा है कि व्यवस्था को बेहतर करने और मरीजों को ज्यादा से ज्यादा इलाज स्थानीय स्तर पर देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। कहते हैं नाम से नहीं, काम से पहचान बनती है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल भी अब इसी कसौटी पर है। स्वास्थ्य मंत्री का एक्शन,अस्पताल प्रबंधन की सक्रियता सर्जरी की सुविधा ,हड्डियों के इलाज का विस्तार रेफरल मैनेजमेंट में सुधार और आंख-कान की सर्जरी शुरू करने की तैयारी ये सब मिलकर एक नई तस्वीर बनाने की कोशिश जरूर दिखा रहे हैं। अब जरूरत है कि ये बदलाव सिर्फ दावों और फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज को जमीन पर महसूस हों। क्योंकि गरीब मरीज के लिए सरकारी अस्पताल सिर्फ एक इमारत नहीं होता वही उसका सबसे बड़ा सहारा होता है। और जब उस सहारे में इलाज की सुविधा बढ़ती है तो सिर्फ अस्पताल की तस्वीर नहीं बदलती बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीद बदलती है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल की बदलती तस्वीर फिलहाल इसी उम्मीद की कहानी कह रही है।
- मंत्री का एक्शन अस्पताल का ऑपरेशन: मधेपुरा मॉडल अस्पताल में बदली व्यवस्था, अब ‘रेफर’ नहीं इलाज पर जोर अस्पताल वही है लेकिन तस्वीर बदल रही है।जहां कभी बेहतर इलाज के लिए मरीजों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था, वहां अब इलाज की सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की कोशिश तेज हो गई है। दरअसल मधेपुरा के मॉडल अस्पताल यानी सदर अस्पताल में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के एक्शन के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव का दावा किया जा रहा है। अब अस्पताल में महिलाओं की सर्जरी हो रही है।डेंटल सर्जरी की सुविधा मिल रही है। सामान्य चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं और हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा भी बढ़ाई जा रही है।इतना ही नहीं इमरजेंसी में सर्जरी की व्यवस्था और रेफरल मामलों के बेहतर मैनेजमेंट पर जोर दिया जा रहा है।और आने वाले दिनों में आंख और कान की सर्जरी शुरू करने की तैयारी है। यानी कोशिश साफ है ।मरीज को इलाज के लिए बाहर भेजने से पहले अस्पताल में ही इलाज की पूरी संभावना तलाश की जाए।ये मधेपुरा का मॉडल अस्पताल है,सरकारी अस्पताल की वही पहचान, वही व्यवस्था लेकिन अब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर नई तस्वीर बनाने की कोशिश हो रही है।मरीजों को स्थानीय स्तर पर ज्यादा से ज्यादा चिकित्सा सुविधा मिले, इसके लिए अस्पताल में सर्जरी और उपचार की सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। महिलाओं की सर्जरी डेंटल सर्जरी,सामान्य चिकित्सा और हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा।इन सेवाओं का विस्तार उन मरीजों के लिए बड़ी राहत बन सकता है, जिन्हें पहले इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता था। किसी अस्पताल की असली परीक्षा तब होती है जब मरीज गंभीर हालत में इमरजेंसी में पहुंचता है।ऐसे समय में रेफर की पर्ची नहीं तुरंत इलाज की जरूरत होती है।मधेपुरा मॉडल अस्पताल में इमरजेंसी के दौरान जरूरत पड़ने पर सर्जरी की व्यवस्था उपलब्ध होने की बात अस्पताल प्रशासन ने कही है। कोशिश यही है कि उपलब्ध संसाधनों और डॉक्टरों की मदद से मरीज को तत्काल उपचार दिया जाए।और अगर अस्पताल में इलाज संभव है तो उसे अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पताल भेजने की जरूरत न पड़े। बाइट — डॉ. सचिन कुमार | अस्पताल उपाधीक्षक मॉडल अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है। प्रयास है कि अधिक से अधिक मरीजों का इलाज यहीं किया जाए और अनावश्यक रेफरल को कम किया जाए। अब उस व्यवस्था की बात जिसका सबसे ज्यादा असर मरीज और उसके परिवार पर पड़ता है।गंभीर मरीज को बड़े अस्पताल भेजना कई बार जरूरी होता है।लेकिन उपलब्ध सुविधाओं का इस्तेमाल करके अगर मरीज का इलाज स्थानीय स्तर पर हो सकता है, तो उसे बाहर भेजने से बचाना अस्पताल की बड़ी जिम्मेदारी है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल में अब इसी सोच के साथ रेफरल मामलों को बेहतर तरीके से मैनेज करने का दावा किया जा रहा है। डीपीएम प्रिंस कुमार के मुताबिक पहले की तुलना में मरीजों को बाहर रेफर करने की दर में धीरे-धीरे कमी आ रही है। यानी अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए पहले उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इलाज की संभावना तलाशने पर जोर है। बाइट — प्रिंस कुमार | डीपीएम रेफरल मामलों को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर इस्तेमाल कर मरीजों को मॉडल अस्पताल में ही इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। अब आंख और कान की बारी मधेपुरा मॉडल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का सिलसिला आगे भी जारी रखने की तैयारी है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक जल्द ही आंख और कान की सर्जरी की सुविधा शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इन दोनों सेवाओं के शुरू होने के बाद जिले के मरीजों को इनसे जुड़ी सर्जरी के लिए बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए सरकारी अस्पताल में स्थानीय स्तर पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध होना बड़ी राहत साबित हो सकता है। क्योंकि बाहर का इलाज सिर्फ महंगा नहीं होता बल्कि मरीज के साथ पूरे परिवार की परेशानी भी बढ़ाता है। असली बदलाव की कसौटी लेकिन सवाल सिर्फ सुविधाएं बढ़ाने का नहीं है।सवाल है क्या इन सुविधाओं का लाभ मरीज को समय पर मिलेगा? क्या जरूरत के वक्त डॉक्टर उपलब्ध होंगे? क्या जरूरी सर्जरी अस्पताल में ही हो पाएगी? क्या रेफरल वास्तव में जरूरत के आधार पर होगा? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में मरीजों के अनुभव से मिलेंगे। फिलहाल अस्पताल प्रशासन का दावा है कि व्यवस्था को बेहतर करने और मरीजों को ज्यादा से ज्यादा इलाज स्थानीय स्तर पर देने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। कहते हैं नाम से नहीं, काम से पहचान बनती है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल भी अब इसी कसौटी पर है। स्वास्थ्य मंत्री का एक्शन,अस्पताल प्रबंधन की सक्रियता सर्जरी की सुविधा ,हड्डियों के इलाज का विस्तार रेफरल मैनेजमेंट में सुधार और आंख-कान की सर्जरी शुरू करने की तैयारी ये सब मिलकर एक नई तस्वीर बनाने की कोशिश जरूर दिखा रहे हैं। अब जरूरत है कि ये बदलाव सिर्फ दावों और फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि अस्पताल पहुंचने वाले हर मरीज को जमीन पर महसूस हों। क्योंकि गरीब मरीज के लिए सरकारी अस्पताल सिर्फ एक इमारत नहीं होता वही उसका सबसे बड़ा सहारा होता है। और जब उस सहारे में इलाज की सुविधा बढ़ती है तो सिर्फ अस्पताल की तस्वीर नहीं बदलती बल्कि हजारों परिवारों की उम्मीद बदलती है। मधेपुरा मॉडल अस्पताल की बदलती तस्वीर फिलहाल इसी उम्मीद की कहानी कह रही है।4
- किसानों को हुए फ़सल क्षति मुआवजे राशि में गरबरी को लेकर जिला प्रशासन से जांच की उठाया मांग सौर बाजार प्रखंड क्षेत्र के चंदौर पुर्वी पंचायत के जन प्रतिनिधि ने आपसी बैठक आयोजित कर बीते दिनों हुए फसल क्षति मुआवजे की मांग को लेकर जिला प्रशासन से जांच कर कार्रवाई की मांग किया है। इसको लेकर पंचायत के जन प्रतिनिधि का कहना है की जिस भी किसान का मक्का एवं गेहूं का फसल बीते कुछ माह पहले आंधी तूफान आने से बर्बाद हो गया था जिसमें सरकार द्वारा कुछ किसानों के खाते में फसल क्षति मुआवजे को लेकर राशि भी भेजी जा चुकी है मगर दर्जनों ऐसे किसान है जिसका सही मायने में फसल का नुकसान हुआ है लेकिन ऐसे किसान को फसल क्षति मुआवजे की राशि नहीं मिली है जो घोर चिन्ता का विषय है। ऐसे स्थिति में जांच कर वैसे किसान को फसल क्षति मुआवजे की राशि मिलनी चाहिए जिसका नुकसान हुआ है। बताया जा रहा है की किसान कॉर्डिनेटर के मनमानी रवैया से वैसे किसान को फसल क्षति मुआवजे की राशि नहीं मिली है जिसका सही मायने में नुकसान हुआ है।किसानो को हुए फ़सल1
- please follow me right 👍🥰🥰🥰🥰❌❌🥰❌❌🥰❌🥰❌🥰🫰🫰🫰🫰🫰🫰🫰1
- 90 दिन का एनसीडी जांच कार्यक्रम की आज से होगी शुरुआत गैर संचारी रोगों की घर घर जाकर स्वास्थ्य कर्मी करेंगे जांच कुमारखंड। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एक सितंबर से 30 नवंबर तक चलने वाले 90 दिन तक गैर संचारी रोग जांच कार्यक्रम की आज से शुरुआत हो रही है। इसको लेकर सीएचसी स्थित सभा भवन में सोमवार को आयोजित बैठक में सभी एएनएम, सीएचओ को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए और जांच कीट व दवा भी उपलब्ध कराई गई। सीएचसी प्रभारी डॉ वरुण कुमार के नेतृत्व में आयोजित बैठक में बीएचएम कुमार धनंजय ने सभी सीएचओ व एएनएम को बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही इस जांच एवं उपचार चिकित्सा आपके द्वार अभियान के दौरान समुदाय स्तर पर गृह भ्रमण कर स्क्रीनिंग, परामर्श, दवा वितरण तथा संस्थागत सेवा के लिए पंजीयन आदि सुविधाएं आम जन को प्रदान किया जाएगा। गृह भ्रमण के दौरान रेफर किए गए मरीज एवं पंजीकृत लाभार्थी को नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा एनसीडी पोर्टल पर आंकड़ों की प्रविष्टि सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस एनसीडी जांच कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गैर संचारी रोगों, जैसे बीपी, मधुमेह, तीन प्रकार के सामान्य कैंसर (मुँह, स्तन एवं गर्भाशय के मुख का कैंसर), हृदय रोग से संबंधित, लीवर से संबंधित रोग एवं क्रोनिक बिमारी की ससमय पहचान कर जोखिम कारकों को कम करना एवं आवश्यक प्रबंधन करना और इससे होने वाली असामयिक मौतों में कमी लाना है। उन्होंने बताया कि इस दौरान लोगों को गैर संचारी रोगों की स्क्रीनिंग एवं ग्रसित मरीजों का आवश्यक उपचार एवं प्रबंधन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि आशा एएनएम के साथ घर घर जाकर जांच कर उचित सलाह व हर संभव इलाज करेंगी और ज्यादा जरूरी होंनेपर संबंधित मरीज़ को स्वास्थ्य केंद्र पर भेजने का काम करेंगे। इस दौरान आशा फेसीलिटेटर के कार्य व पोर्टल पर सभी जांच संबंधी जानकारी अपलोड करने की जानकारी दी गई। अभियान को लेकर अन्य आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। मौके पर बीसीएम मनोज कुमार सिंह सहित सभी एएनएम व सीएचओ मौजूद थे। फोटो - सीएचसी में आयोजित बैठक में एएनएम व सीएचओ को आवश्यक दिशा-निर्देश देते बीएचएम व अन्य1
- कोसी का जलस्तर बढ़ा तो मचा हड़कंप, प्रशासन की अपील—अफवाहों पर ध्यान न दें1
- छातापुर:पप्पू यादव AI और दरोगा की कराएंगे ऑनलाइन तैयारी अब बिल्कुल FREE! पप्पू यादव कराएंगे फ्री कोर्स पूर्णिया से बड़ी खबर छातापुर:पप्पू यादव AI और दरोगा की कराएंगे ऑनलाइन तैयारी अब बिल्कुल FREE! पप्पू यादव कराएंगे फ्री कोर्स पूर्णिया से बड़ी खबर1
- मात्र 18 घंटा में डाकबम पहुंची देवघर बिहार की रहने वाली है1
- सहायता प्राप्त किसानों को प्राकृतिक उत्पाद बनाने के लिए किया प्रोत्साहित कुमारखंड। प्रखंड के बैसाढ पंचायत स्थित जैव उत्पादन संसाधन केंद्र (बीआरसी) में संचालक धीरज कुमार के नेतृत्व में किसानों की बैठक आयोजित हुई। इस दौरान प्रखंड क्षेत्र के सरकारी सहायता प्राप्त 125 किसानों को प्राकृतिक उत्पाद तैयार करने को लेकर प्रोत्साहित किया गया। बैठक में संचालक ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा 125 किसानों को चिह्नित कर सूची बनाई गई और उन सभी किसानों को 4000 रु प्रति किसान को दो किस्तों में दी गई। इस पैसे से इन किसानों को प्राकृतिक उत्पाद तैयार करना है। उन्होंने बताया कि जिस तरह से जैविक खेती को लेकर किसानों को समय समय पर जानकारी दी जाती रही है उसी तरह से प्राकृतिक खेती व उत्पाद तैयार करने को लेकर अब किसानों को सहायता के साथ जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। ताकि किसान प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक हो और प्राकृतिक उत्पाद तैयार कर सकें। उन्होंने बताया कि जिस तरह से जैविक खेती किया जा रहा है उसी प्रकार प्राकृतिक खेती कम लागत में की जा सकती है। जो हर दृष्टि से लाभकारी होता है। इस दौरान उन्होंने किसानों को प्राकृतिक उत्पाद बनाने की प्रैक्टिकल रुप में भी जानकारी दी गई। मौके पर किसान सलाहकार नरेंद्र कुमार, किसान कुंदन कुमार , राजेन्द्र यादव, विद्याचरण राम, देवचरण राम, चुन्नी कुमारी, मंटू कुमार, संतोष कुमार, रमेश कुमार सहित दर्जनों किसान मौजूद थे। फोटो - बैसाढ में आयोजित बैठक में मौजूद किसानों को जानकारी देते बीआरसी संचालक1