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Kuldeep Nainawat
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- जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा क्यों हुई आग बबूला, लगाई अधिकारियों को फटकार , जनसुनवाई में आई पीड़िता की तत्काल कार्य करने को दिया आदेश #मुख्यमंत्रीभजनलालशर्मा1
- राजस्थान के बीकानेर से शुरू हुआ खेजड़ी पेड़ बाचावों अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, इस विशाल कार्यक्रम जन सैलाब के साथ साधु संत भी मौजूद रहे, कार्यक्रम स्थल से विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि आज की यह विशाल जनसभा और जन आक्रोश जयपुर और दिल्ली मे बैठे लोगों को सकते मे ला देगी,1
- कथावाचक जयाकिशोरी जयपुर पहुंची. इस दौरान उन्होंने सीएम भजनलाल से की मुलाकात। सीएमओ में यह मुलाकात हुई।1
- राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक पर सोमवार को मनरेगा बचाओ मोर्चा के आह्वान पर एक ऐतिहासिक मजदूर महापंचायत का आयोजन किया गया। पुलिस आयुक्त कार्यालय के सामने आयोजित इस महापंचायत में राजस्थान के लगभग 27 जिलों से हजारों मनरेगा मजदूरों, महिलाओं, आदिवासी समुदायों और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मजदूरों ने एक स्वर में VB–GRAM-G कानून को रद्द करने और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसके मूल अधिकार आधारित स्वरूप में बहाल करने का ऐलान किया। महापंचायत में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि मनरेगा कोई राहत या दया योजना नहीं, बल्कि संघर्षों से हासिल किया गया कानूनी अधिकार है। दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा को समाप्त कर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन’ (VB–GRAM-G) लागू किया जाना ग्रामीण मजदूरों, महिलाओं और वंचित समुदायों के साथ विश्वासघात है। प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और मनरेगा आंदोलन की अग्रणी अरुणा रॉय ने कहा कि VB–GRAM-G संविधान की आत्मा के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने पहली बार गांव के गरीब को राज्य से काम मांगने का अधिकार दिया था, जबकि नया कानून इस अधिकार को छीनकर रोजगार को केंद्र सरकार के नियंत्रण में सौंप देता है। यह लोकतांत्रिक अधिकारों के बजाय केंद्रीकरण का कानून है। मनरेगा कानून के निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि VB–GRAM-G रोजगार की गारंटी नहीं, बल्कि मजदूरों की असुरक्षा की गारंटी है। काम, मजदूरी और योजना—तीनों को ग्राम सभा और राज्यों से छीनकर केंद्र के हवाले कर दिया गया है। अब मजदूर का काम मांगना कानूनी अधिकार नहीं रहा, बल्कि यह केंद्र सरकार की अधिसूचना पर निर्भर होगा। राज्यों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ मनरेगा बचाओ मोर्चा ने कहा कि नए कानून में Normative Allocation व्यवस्था के तहत राज्यों को सीमित और पूर्व-निर्धारित बजट दिया जाएगा। वास्तविक जरूरत से अधिक मांग होने पर पूरा आर्थिक भार राज्य सरकारों को उठाना पड़ेगा, जिससे रोजगार में कटौती तय है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि VB–GRAM-G के तहत योजना निर्माण की प्रक्रिया ग्राम सभा से छीनकर केंद्रीय एजेंसियों और राष्ट्रीय आधारभूत ढांचे के हवाले कर दी गई है, जिससे स्थानीय जरूरतों और सामुदायिक निगरानी की अनदेखी हो रही है।1
- जयपुर के चित्रकूट थाना इलाके में पति के सामने पत्नी से छेड़छाड़ और बदतमीजी करने का मामला सामने आया है। वह शादी की शॉपिंग कर पति के साथ घर लौट रही थी। रॉन्ग साइड आए बदमाशों ने कार के सामने आकर रुकने पर बदतमीजी की। विरोध करने पर दंपति से मारपीट करने की कोशिश कर धमकाया। चित्रकूट नगर थाने में पीड़ित विवाहिता ने शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने बताया कि 200 फीट बाईपास अजमेर रोड निवासी विवाहिता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रिश्तेदार की शादी के चलते शॉपिंग की जा रही है। देर शाम वह अपने पति के साथ शॉपिंग करने वैशाली नगर गई थी। खरीदारी करके कार से वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान अक्षरधाम चौराहे के पास ओवर स्पीड कार सामने से आई। जिससे बचने के लिए ब्रेक लगाकर कार को रोका। आरोप है कि रॉन्ग साइड होने की कहने पर कार में सवार तीन-चार लड़के बाहर उतर आए। कहासुनी होने पर बदमाशों ने विवाहिता के साथ बदतमीजी की। पति के विरोध करने पर बदमाश दंपति से मारपीट करने पर उतारु हो गए।1
- Post by Kuldeep Nainawat1
- Sanganer Jagatpura Gyan vihar कंबल डिलीवरी पार्टनर की मौत एक ट्रक ने बेकाबू होकर डिलीवरी पार्टनर बाइक को हमारी टक्कर और उसी दौर में उसकी मौत हो गई1
- यह कोई दो सामान्य व्यक्तियों के बीच सड़क पर हुआ झगड़ा नहीं है। एक पक्ष में जनता द्वारा चुने गए दौसा विधायक डी.सी. बैरवा हैं, जबकि दूसरी ओर सरकार द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था के संचालन हेतु नियुक्त तहसीलदार हैं। इन दोनों में कौन सही है और कौन गलत यह एक अलग विमर्श का विषय हो सकता है। किंतु जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि से संवाद करने की एक मर्यादा और शिष्टाचार होता है। असभ्य भाषा और ऊँची आवाज़ में बात करना केवल एक जनप्रतिनिधि का ही नहीं, बल्कि उस पूरे क्षेत्र की जनता का अपमान है, जिनके मतों के कारण डी.सी. बैरवा आज सदन की शोभा बढ़ा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दौसा उपचुनाव में डी.सी. बैरवा ने कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के भाई जगमोहन मीणा को पराजित किया था।1