आज चित्रकूट जिलाधिकारी ने कामदगिरि महाआरती स्थल पर चल रहे पर्यटन विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया, जहाँ उन्हें कार्य की गुणवत्ता और प्रगति में कई गंभीर कमियाँ मिलीं। इन अनियमितताओं पर उन्होंने संबंधित कार्यदायी संस्था और ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई। यह परियोजना राज्य सेक्टर के तहत पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत है और इसका निर्माण यू०पी० प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, परियोजना को 20 फरवरी 2025 को शासनादेश संख्या 65/2025/आई०एफ०-887225/001-41-2002-002-4-2025-सीजन-1890451 के माध्यम से प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिली है, जिसकी कुल स्वीकृत लागत ₹260.68 लाख है। कार्य जुलाई 2025 में शुरू हुआ था और इसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस परियोजना में मल्टीपरपज हॉल, महाआरती स्थल प्लेटफार्म, सजावटी स्तम्भ, कोबल स्टोन पाथवे, प्लम्बिंग, म्यूरल वॉल निर्माण एवं सौन्दर्यीकरण, तथा बाह्य विद्युतीकरण जैसे विभिन्न विकास कार्य शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि स्थल पर लगाई जा रही वॉल पेंटिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, जिसके लिए उन्होंने इसे व्यवस्थित ढंग से स्थापित करने के निर्देश दिए। रेड स्टोन और अन्य पत्थरों की बिछाई में भी कोई निर्धारित पैटर्न विकसित नहीं किया गया था, जिस पर जिलाधिकारी ने गलत लगे पत्थरों को हटाकर स्वीकृत डिज़ाइन के अनुरूप आकर्षक पैटर्न विकसित करने को कहा। इसके अतिरिक्त, ग्रेनाइट कार्य के निरीक्षण में पता चला कि नीचे का बेस ठीक से तैयार नहीं था, जिससे कई जगहों पर ग्रेनाइट में दरारें आ रही थीं। जिलाधिकारी ने इसे 'अत्यंत गंभीर लापरवाही' बताते हुए संबंधित संस्था और ठेकेदार पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने म्यूरल वॉल सहित अन्य निर्माण कार्यों में पाई गई कमियों को दूर करने तथा परियोजना को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के लिए संबंधित संस्था को 15 दिवस का अंतिम अवसर प्रदान किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कमियों का निस्तारण कर कार्य को अगले 10 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जून 2026 की निर्धारित समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए, साथ ही लगाए जा रहे पौधों के चारों ओर उचित घेराबंदी की जाए ताकि उन्हें बंदरों एवं अन्य जानवरों से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी दोहराया कि निर्धारित अवधि के बाद पुनः निरीक्षण किया जाएगा और संतोषजनक प्रगति न पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि कामदगिरि महाआरती स्थल जनपद का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है और इसके विकास कार्यों में गुणवत्ता, सौन्दर्य एवं समयबद्धता से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।
आज चित्रकूट जिलाधिकारी ने कामदगिरि महाआरती स्थल पर चल रहे पर्यटन विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया, जहाँ उन्हें कार्य की गुणवत्ता और प्रगति में कई गंभीर कमियाँ मिलीं। इन अनियमितताओं पर उन्होंने संबंधित कार्यदायी संस्था और ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई। यह परियोजना राज्य सेक्टर के तहत पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत है और इसका निर्माण यू०पी० प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, परियोजना को 20 फरवरी 2025 को शासनादेश संख्या 65/2025/आई०एफ०-887225/001-41-2002-002-4-2025-सीजन-1890451 के माध्यम से प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिली है, जिसकी कुल स्वीकृत लागत ₹260.68 लाख है। कार्य जुलाई 2025 में शुरू हुआ था और इसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस परियोजना में मल्टीपरपज हॉल, महाआरती स्थल प्लेटफार्म, सजावटी स्तम्भ, कोबल स्टोन पाथवे, प्लम्बिंग, म्यूरल वॉल निर्माण एवं सौन्दर्यीकरण, तथा बाह्य विद्युतीकरण जैसे विभिन्न विकास कार्य शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि स्थल पर लगाई जा रही वॉल पेंटिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, जिसके लिए उन्होंने इसे व्यवस्थित ढंग से स्थापित करने के निर्देश दिए। रेड स्टोन और अन्य पत्थरों की बिछाई में भी कोई निर्धारित पैटर्न विकसित नहीं किया गया था, जिस पर जिलाधिकारी ने गलत लगे पत्थरों को हटाकर स्वीकृत डिज़ाइन के अनुरूप आकर्षक पैटर्न विकसित करने को कहा। इसके अतिरिक्त, ग्रेनाइट कार्य के निरीक्षण में पता चला कि नीचे का बेस ठीक से तैयार नहीं था, जिससे कई जगहों पर ग्रेनाइट में दरारें आ रही थीं। जिलाधिकारी ने इसे 'अत्यंत गंभीर लापरवाही' बताते हुए संबंधित संस्था और ठेकेदार पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने म्यूरल वॉल सहित अन्य निर्माण कार्यों में पाई गई कमियों को दूर करने तथा परियोजना को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के लिए संबंधित संस्था को 15 दिवस का अंतिम अवसर प्रदान किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कमियों का निस्तारण कर कार्य को अगले 10 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जून 2026 की निर्धारित समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए, साथ ही लगाए जा रहे पौधों के चारों ओर उचित घेराबंदी की जाए ताकि उन्हें बंदरों एवं अन्य जानवरों से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी दोहराया कि निर्धारित अवधि के बाद पुनः निरीक्षण किया जाएगा और संतोषजनक प्रगति न पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि कामदगिरि महाआरती स्थल जनपद का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है और इसके विकास कार्यों में गुणवत्ता, सौन्दर्य एवं समयबद्धता से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।
- आज चित्रकूट जिलाधिकारी ने कामदगिरि महाआरती स्थल पर चल रहे पर्यटन विकास कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया, जहाँ उन्हें कार्य की गुणवत्ता और प्रगति में कई गंभीर कमियाँ मिलीं। इन अनियमितताओं पर उन्होंने संबंधित कार्यदायी संस्था और ठेकेदार को कड़ी फटकार लगाई। यह परियोजना राज्य सेक्टर के तहत पर्यटन विभाग द्वारा स्वीकृत है और इसका निर्माण यू०पी० प्रोजेक्ट्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, परियोजना को 20 फरवरी 2025 को शासनादेश संख्या 65/2025/आई०एफ०-887225/001-41-2002-002-4-2025-सीजन-1890451 के माध्यम से प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिली है, जिसकी कुल स्वीकृत लागत ₹260.68 लाख है। कार्य जुलाई 2025 में शुरू हुआ था और इसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस परियोजना में मल्टीपरपज हॉल, महाआरती स्थल प्लेटफार्म, सजावटी स्तम्भ, कोबल स्टोन पाथवे, प्लम्बिंग, म्यूरल वॉल निर्माण एवं सौन्दर्यीकरण, तथा बाह्य विद्युतीकरण जैसे विभिन्न विकास कार्य शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि स्थल पर लगाई जा रही वॉल पेंटिंग निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, जिसके लिए उन्होंने इसे व्यवस्थित ढंग से स्थापित करने के निर्देश दिए। रेड स्टोन और अन्य पत्थरों की बिछाई में भी कोई निर्धारित पैटर्न विकसित नहीं किया गया था, जिस पर जिलाधिकारी ने गलत लगे पत्थरों को हटाकर स्वीकृत डिज़ाइन के अनुरूप आकर्षक पैटर्न विकसित करने को कहा। इसके अतिरिक्त, ग्रेनाइट कार्य के निरीक्षण में पता चला कि नीचे का बेस ठीक से तैयार नहीं था, जिससे कई जगहों पर ग्रेनाइट में दरारें आ रही थीं। जिलाधिकारी ने इसे 'अत्यंत गंभीर लापरवाही' बताते हुए संबंधित संस्था और ठेकेदार पर नियमानुसार पेनाल्टी लगाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने म्यूरल वॉल सहित अन्य निर्माण कार्यों में पाई गई कमियों को दूर करने तथा परियोजना को गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के लिए संबंधित संस्था को 15 दिवस का अंतिम अवसर प्रदान किया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कमियों का निस्तारण कर कार्य को अगले 10 दिनों के भीतर पूरा किया जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जून 2026 की निर्धारित समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए शेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए, साथ ही लगाए जा रहे पौधों के चारों ओर उचित घेराबंदी की जाए ताकि उन्हें बंदरों एवं अन्य जानवरों से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी दोहराया कि निर्धारित अवधि के बाद पुनः निरीक्षण किया जाएगा और संतोषजनक प्रगति न पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि कामदगिरि महाआरती स्थल जनपद का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है और इसके विकास कार्यों में गुणवत्ता, सौन्दर्य एवं समयबद्धता से कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा।1
- देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित 'होटल फ्लोरिश' में हुए भीषण अग्निकांड के मद्देनज़र, उत्तर प्रदेश शासन तथा पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० अग्निशमन एवं आपात सेवा, लखनऊ के निर्देशों के पालन में जनपद चित्रकूट में एक विशेष सतर्कता अभियान शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में स्थापित अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता, आपातकालीन निकास की उपलब्धता सुनिश्चित करना और आग से जुड़े जोखिमों को कम करना है। इसी कड़ी में, दिनांक 4 जून 2026 को मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) श्री यदुनाथ सिंह के नेतृत्व में जनपद मुख्यालय स्तर पर विभिन्न होटलों और रेस्टोरेंटों का सघन निरीक्षण किया गया। इस अभियान के तहत रामकृपा इन होटल कर्वी, होटल कान्हा भवन रामघाट सीतापुर, होटल बिन्दीराम रामघाट सीतापुर, सागर भवन यू०पी०टी० तिराहा, कान्हा होटल एण्ड फैमिली रेस्टोरेन्ट बेडीपुलिया, मदन ऊषा होटल रामघाट सीतापुर और ऊषा मदन होटल रामघाट सीतापुर जैसे प्रमुख प्रतिष्ठानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की गई। निरीक्षण के साथ-साथ आपदा प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से इन प्रतिष्ठानों में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण और मॉकड्रिल का भी आयोजन किया गया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्री यदुनाथ सिंह ने इस दौरान ज़ोर दिया कि आपातकालीन स्थितियों में जान-माल की हानि रोकने के लिए केवल अग्निशमन उपकरणों का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कर्मचारियों का मानसिक और व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को अग्निशमन उपकरणों के त्वरित संचालन, आपातकालीन पलायन की प्रक्रियाओं और प्राथमिक नियंत्रण के तौर-तरीकों से अवगत कराया गया है। अग्निशमन विभाग ने प्रतिष्ठान स्वामियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अग्नि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से अनुपालन सुनिश्चित करें, अन्यथा किसी भी स्तर पर पाई गई शिथिलता या लापरवाही के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह जागरूकता एवं निरीक्षण अभियान निरंतर जारी रहेगा।1
- चित्रकूट जिले के पहाड़ी थाना क्षेत्र के रमयापुर गांव में एक भाई ने अपने ही भाई की जमीन पर कथित तौर पर कब्जा कर लिया है, जिसके चलते पीड़ित पिछले चार सालों से न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। पीड़ित गौरीशंकर, जो परमहंश द्विवेदी के पुत्र हैं और रमयापुर के निवासी हैं, बाहर रहकर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनका आरोप है कि उनके सगे भाई पुष्पराज द्विवेदी ने कुछ अज्ञात मददगारों की सहायता से मौजा रमयापुर स्थित गाटा संख्या 3158 मि० के 0.088 हेक्टेयर रकबे में से उनके 1/4 हिस्से को अपने मकान में मिलाकर उस पर कब्जा कर लिया है। इस संबंध में गौरीशंकर की पत्नी सुधा देवी ने पहाड़ी थाने, 112 नंबर पुलिस हेल्पलाइन और उप जिलाधिकारी महोदय, कर्वी को लिखित शिकायत भी दी थी। इसके बावजूद, पिछले चार सालों से इस मामले में कोई कार्रवाई या सुनवाई नहीं हुई है, जिसके कारण गौरीशंकर और उनकी पत्नी कई सालों से मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि उनके हक और कब्जे पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है, लेकिन उन्हें कानून या शासन-प्रशासन से कोई मदद या न्याय नहीं मिल रहा है। उन्होंने पुलिस पर भी आरोप लगाया है कि उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। गौरीशंकर ने यह भी आशंका जताई है कि उनके परिवार पर किसी भी समय कोई अप्रिय घटना घटित हो सकती है, हालांकि वे स्वयं कोई लड़ाई-झगड़ा नहीं चाहते। न्याय की गुहार लगाते-लगाते थक चुके गौरीशंकर ने अब अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उन्हें शासन-प्रशासन से न्याय नहीं मिला, तो वे अपने परिवार सहित आत्महत्या करने को मजबूर हो जाएंगे।4
- चित्रकूट से मिली जानकारी के अनुसार, संत रामपाल जी महाराज की पहल के तहत एक विद्यालय को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया है। इसी संदर्भ में, बाबूलाल यादव हत्याकांड का भी उल्लेख किया गया है।2
- चित्रकूट जिले के पहाड़ी कस्बे में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने नमामि गंगे योजना के तहत चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने पहाड़ी टंकी का जायजा लिया और पेयजल समस्या से संबंधित गांवों का भी दौरा किया। इस दौरान, जिलाधिकारी ने कार्यदाई संस्था एलएनटी को अविलंब पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से चालू करने का निर्देश दिया। इस अवसर पर एसपी अरुण कुमार सिंह, जल निगम के अधिशासी अभियंता अनिल, और एलएनटी के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रोविंस कटियार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।1
- रीवा ग्रामीण में 7 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सिरमौर ने पडरी मंडलम के ग्राम पंचायत मरैला को 'हरा-भरा' बनाने का संकल्प दोहराया। इस संकल्प के तहत, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर तथा जिला अध्यक्ष इंजी. राजेंद्र शर्मा व संगठन महासचिव रवि तिवारी के मार्गदर्शन में, ब्लॉक अध्यक्ष विष्णु शुक्ला के नेतृत्व में एक वृहद वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, श्री शुक्ला ने कहा कि 'एक पेड़, सौ बेटों के बराबर है' और वृक्षारोपण ही जलवायु परिवर्तन से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने हर मंडलम में पौधारोपण अभियान चलाने की बात भी कही। इस कार्यक्रम के बाद, ग्राम पंचायत मरैला और डोल की पंचायत कमेटियों का सत्यापन भी किया गया। इस अवसर पर मंडलम अध्यक्ष दिलीप सिंह, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष सिद्धनाथ पांडे, चरण सिंह, स्वर्णकार प्रकोष्ठ प्रदेश महासचिव रामप्रकाश नंदू सोनी, पंचायत अध्यक्ष महेश तिवारी, जय सिंह, यूथ कांग्रेस महासचिव अनूप सिंह, महिला कांग्रेस अध्यक्ष पूर्णिमा सिंह, और नेता अनिल द्विवेदी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- मध्य प्रदेश के सतना केंद्रीय जेल में गांजे और शराब की सप्लाई के साथ-साथ रिश्वत की डील से जुड़ा एक ऑडियो वायरल होने के बाद जेल में हड़कंप मच गया है। इस वायरल ऑडियो के सामने आते ही तत्काल कार्रवाई की गई, जिसके तहत जेल प्रहरी बनवारी लाल जाटव को निलंबित कर दिया गया। उन पर जेल के भीतर तंबाकू ले जाने का आरोप है। इस गंभीर प्रकरण के सामने आने से यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस पूरे मामले में कहीं बड़े अधिकारी भी शामिल तो नहीं हैं, जिसकी गहन जांच की जानी चाहिए।1
- विश्व पर्यावरण दिवस के पावन अवसर पर चित्रकूट के कलेक्ट्रेट परिसर में ‘एक पेड़ माँ के नाम 2.0’ अभियान के अंतर्गत एक वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी श्री पुलकित गर्ग, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री महेंद्र कोटार्य, अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट को ऑपरेटिव बैंक चित्रकूट बांदा श्री पंकज अग्रवाल, प्रभागीय वनाधिकारी श्री प्रत्यूष कटियार, अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व श्री चंद्रशेखर और अपर जिलाधिकारी न्यायिक श्री अरुण यादव सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति में पौधरोपण करके किया गया। जिलाधिकारी श्री पुलकित गर्ग ने विशेष रूप से कलेक्ट्रेट परिसर में सघन एवं फलदार प्रजातियों के पौधों को रोपने पर बल दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि रोपे गए सभी पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य रूप से लोहे के ट्री-गार्ड्स लगाए जाएं। इसके साथ ही, पौधों के समुचित विकास और संवर्धन हेतु समय-समय पर निराई-गुड़ाई एवं नियमित सिंचाई सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने यह भी रेखांकित किया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधरोपण करना नहीं, बल्कि उन्हें पूर्ण वृक्ष के रूप में विकसित करना है ताकि पर्यावरण संरक्षण की यह मुहिम वास्तव में सार्थक हो सके। इस विशेष अवसर पर, जिलाधिकारी, प्रशासनिक अधिकारियों और जनपदों के जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रेरणादायक नारों व स्लोगन के माध्यम से जनमानस को जागरूक किया। उपस्थित सभी लोगों ने "प्लास्टिक की नहीं है कोई शान, मिटा देंगे इसका नामो-निशान" और "वृक्षों की रक्षा और सम्मान, पर्यावरण व हरियाली से बढ़ेगा देश का मान" जैसे संकल्पों के साथ संपूर्ण जिले एवं प्रदेश को पर्यावरण संरक्षण, हरियाली संवर्धन और सिंगल-यूज प्लास्टिक के पूर्ण बहिष्कार का एक सशक्त संदेश दिया। इस अवसर पर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी श्री मनोहर लाल धर्मन, उप जिलाधिकारी श्री सौरभ यादव, वरिष्ठ कोषाधिकारी श्री रमेश सिंह, उप प्रभागीय वनाधिकारी श्री राजीव रंजन सिंह, क्षेत्रीय वनाधिकारी कर्वी श्री नफीस और वन्यजीव प्रतिपालक श्री गोविंद उत्तम प्रसाद सहित कलेक्ट्रेट परिसर के कर्मचारी अधिकारी और वन विभाग के कर्मचारी भी उपस्थित रहे।2