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एक दुखद सड़क हादसे में थाना प्रभारी का निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर जैसे ही लाया गया, उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान, पुलिस अधिकारियों ने भी उन्हें भावभीनी सलामी दी।
गांव से शहर न्यूज( krishna kumar keshari)
एक दुखद सड़क हादसे में थाना प्रभारी का निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर जैसे ही लाया गया, उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान, पुलिस अधिकारियों ने भी उन्हें भावभीनी सलामी दी।
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- एक दुखद सड़क हादसे में थाना प्रभारी का निधन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर जैसे ही लाया गया, उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान, पुलिस अधिकारियों ने भी उन्हें भावभीनी सलामी दी।1
- शनिवार को कैमूर जिले के मोहनियां थाना क्षेत्र के भोपतपुर गांव का माहौल उस समय बेहद गमगीन हो गया, जब बेगूसराय में हुए एक भीषण सड़क हादसे में दिवंगत हुए मधेपुरा के रतवारा थाना प्रभारी साजन पासवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। जैसे ही तिरंगे में लिपटा उनका शव गांव में आया, पूरा इलाका 'साजन पासवान अमर रहें' के नारों से गूंज उठा और उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। परिजनों की चीख-पुकार से पूरा माहौल स्तब्ध रह गया, क्योंकि एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को अंतिम विदाई दी जा रही थी। गौरतलब है कि बीते गुरुवार को बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे में थाना प्रभारी साजन पासवान का असामयिक निधन हो गया था। उनकी मृत्यु की खबर मिलते ही कैमूर जिले सहित पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई थी। अंतिम संस्कार से पहले हुई श्रद्धांजलि सभा में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दिवंगत अधिकारी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पुलिस अधीक्षक कैमूर हरिमोहन शुक्ला ने दिवंगत थाना प्रभारी के पिता को ससम्मान राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) सौंपा और उन्हें ढांढस बंधाया। बिहार पुलिस की ओर से साजन पासवान को पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, जिसमें उपस्थित अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इसके बाद पुलिस के जवानों ने 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर अपने साथी अधिकारी को अंतिम सलामी दी और सम्मान स्वरूप हवाई फायरिंग भी की। इस भावुक दृश्य को देखकर वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं। ग्रामीणों और उनके सहयोगियों ने साजन पासवान को एक बेहद कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार और संवेदनशील पुलिस अधिकारी के रूप में याद किया, जिन्होंने अपने सेवाकाल में हमेशा जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दी और निष्ठापूर्वक देश-समाज की सेवा की। लोगों ने उनके निधन को पुलिस विभाग और कैमूर क्षेत्र के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति बताया, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। हजारों नम आँखों और भारी मन के साथ, कैमूर की माटी के इस जांबाज बेटे और कर्मठ पुलिस अधिकारी को पंचतत्व में विलीन कर अंतिम विदाई दी गई।4
- संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाई जा रही 'अन्नपूर्णा मुहिम' के तहत गरीब परिवारों को राशन सामग्री पहुँचाकर उन्हें बड़ी राहत प्रदान की जा रही है। इस मुहिम को एक वरदान के रूप में देखा जा रहा है, जो ज़रूरतमंदों की मदद कर रही है। इस पहल के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए, दर्शक Annapurna Muhim YouTube Channel देख सकते हैं।1
- दिल्ली में निशा खातून की मौत का मामला सोशल मीडिया पर एक प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है। इस घटना को लेकर उनके परिवार ने न्याय की पुरजोर मांग की है, जिसके साथ ही मामले की जांच की निष्पक्षता और कानून के सभी के लिए समान रूप से लागू होने को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए जा रहे हैं।1
- आज एक बार फिर कैमूर भभुआ स्थित माँ मुंडेश्वरी के पास मौसम का मिजाज बदल गया है।1
- चंदौली जिले की चकिया तहसील के धनावल गाँव में शनिवार (13 जून) दोपहर बाद अचानक मौसम बदलने से गिरी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से एक भीषण हादसा हो गया। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में धनावल गाँव निवासी रूबी (35 वर्ष) पत्नी राजकुमार और पड़ोसी बालिका लक्ष्मी (12 वर्ष) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। यह हृदयविदारक घटना शनिवार को प्रकृति के भयंकर कहर के रूप में सामने आई। घटना की सूचना मिलते ही चकिया थाना पुलिस और राजस्व विभाग की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने दोनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। उप जिलाधिकारी चकिया ने इस घटना को 'बेहद दुखद' बताते हुए कहा कि प्रशासन पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है और शासन के निर्देशानुसार उन्हें जल्द से जल्द हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी। आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए, मौके पर पहुंचे उप जिलाधिकारी और संबंधित राजस्व अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि तात्कालिक दैवीय आपदा सहायता राशि 24 घंटे के भीतर प्रदान की जाएगी।1
- चंदौली जिले के बरहनी ब्लॉक स्थित पौनी गांव में, काली माता मंदिर के पास सड़क पर कूड़े का अंबार लगा हुआ है।1
- कैमूर जिले में शुक्रवार को 'अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस' के अवसर पर बाल श्रम जैसी सामाजिक कुप्रथा को जड़ से मिटाने के उद्देश्य से विभिन्न जागरूकता और संकल्प कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग, कैमूर के तत्वावधान में आयोजित इन कार्यक्रमों के माध्यम से आम जनता को बाल श्रम के खिलाफ जागरूक रहने का संदेश दिया गया। इन आयोजनों की शुरुआत इटाधी स्थित संयुक्त श्रम भवन में हुई, जहाँ श्रम अधीक्षक, सभी श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी और कार्यालय कर्मियों सहित उपस्थित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने बाल श्रम के विरुद्ध खड़े होने की सामूहिक शपथ ली। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद, जिले के सुदूर क्षेत्रों में बाल श्रम के खिलाफ व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एक जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया, जो पूरे कैमूर जिले में घूम-घूम कर लोगों को बाल श्रम न कराने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रेरित करेगा। जागरूकता अभियान के तहत भेकास स्थित महिला आई.टी.आई. में एक चित्रकारी प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसकी मूल थीम इस वर्ष की अंतर्राष्ट्रीय थीम 'बाल श्रम को लाल कार्ड' रखी गई थी। छात्राओं ने अपनी कला के माध्यम से बाल श्रम के दर्द और बच्चों के सुनहरे भविष्य की आवश्यकता को बेहद खूबसूरती से दर्शाया। केवल आयोजनों तक सीमित न रहकर, विभाग ने धरातल पर भी सक्रियता दिखाई; श्रम प्रवर्तन पदाधिकारियों की टीमों ने नवरंगराय एग्रो, यश लक्ष्मी इकोपैक और पतंजलि बिस्किट फैक्ट्री जैसे जिले के प्रमुख प्रतिष्ठानों और कारखानों का औचक दौरा किया। अधिकारियों ने नियोक्ताओं और श्रमिकों को बाल श्रम कानून की कड़ाई से जानकारी दी और परिसरों में बाल मजदूरों को न रखने की सख्त हिदायत दी। दिन का मुख्य और समापन कार्यक्रम लिच्छवी भवन में आयोजित हुआ, जहाँ श्रम अधीक्षक श्री चंदन कुमार ने उपस्थित सभी पदाधिकारियों, प्रबुद्ध नागरिकों और सहभागियों को बाल श्रम के उन्मूलन के लिए एकजुट होने की अपील की। उन्होंने सभी को सामूहिक रूप से फिर से शपथ दिलाई कि वे न तो बाल श्रम करेंगे और न ही अपने आस-पास ऐसा होने देंगे। श्रम विभाग ने आम जनता को सचेत करते हुए यह भी बताया है कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी तरह का कार्य करवाना पूर्णतः प्रतिबंधित है, और 14 से 18 वर्ष के किशोरों से जोखिम भरा कार्य करवाना एक संज्ञेय अपराध है। कानून का उल्लंघन करने वाले को 2 वर्ष तक का कारावास और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों भुगतना पड़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि कहीं भी बाल श्रम दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना श्रम विभाग को दें।1